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PPINEWZ9 May 2025, 09:19 am

जहानाबाद में भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मृत्यु

Jehanabad, Bihar:

बिहार के जहानाबाद में भीषण सड़क हादसा हुआ. जहां बेकाबू हाइवे ने एनएच-33 पर बाइक सवार तीन युवकों को रौंद दिया। जिससे बाइक सवार दो युवक की घटना स्थल पर ही मौत हो गई. जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना परस बिगहा थाना क्षेत्र के कसमा गांव के समीप की है। घायल युवक को आनन - फानन में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच रेफर कर दिया है। मृतकों की पहचान टेहटा थाना अंतर्गत सुमेरा टोला बाला बीघा गांव निवासी रामाश्रय प्रसाद के पुत्र मिंटू कुमार और रामप्रवेश यादव के 18 वर्षीय पुत्र भोला कुमार के रूप में की गई है। 

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17 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि के बाद मुखेड गाँव डूबा, पाँच लोगों की मौत

Nanded-Waghala, Maharashtra:नांदेड जिलेतील मुखेड तालुक्यातील गाव लेन्डी धरणाशेजाऱ्याचं हे गाव बाराफक्त एक वर्षांपूर्वी पूर्णपणे बुडालं होतं. आता या गावातील घरांचे सांगाडे उरले आहेत. पूर्वीपासून राखडलेल्या धरणाची गतवर्षी पावसाळ्याअपूर्व झाली होती, पण धरणाशेजारी असलेल्या गावाचे पुनर्वसन झाले नव्हते. पहिल्याच वर्षी 17 ऑगस्ट 2025 च्या मध्यरात्री ढगफुटी आणि मुसळधार पावसामुळे धरण ओव्हरफ्लो झाले आणि संपूर्ण गाव पाण्याखाली गेले. पाच जणांचा पाण्यात बुडून मृत्यू झाला. सकाळी रेस्क्यू ऑपरेशन राबवून इतरांचा जीव वाचवण्यात आला. गावाजवळ पुनर्वसन करण्यात आले पण वर्ष उलटले तरी कुठल्याही मूलभूत सुविधांची区 पुरवठा झालेला नाहीसा आरोप गावकऱ्यांचा आहे. घरांचे अवशेष उरलेले या गावातील नागरिकांशी चर्चा केलीये
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शिव भक्ति पर शौहर ने दिया तीन तलाक, युवती ने सनातन धर्म अपनाकर प्रेमी संग रचाई शादी

Bareilly, Uttar Pradesh:बरेली:झारखंड के बोकारो की रहने वाली 18 वर्षीय युवती जमीला खातून ने सनातन धर्म अपनाकर अपने प्रेमी प्रकाश रविदास के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया है। बरेली स्थित प्रसिद्ध अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार और अग्नि को साक्षी मानकर दोनों परिणय सूत्र में बंधे। धर्म परिवर्तन और शुद्धिकरण के बाद युवती का नया नाम ज्योति देवी रखा गया है।आरोप है की शिव पूजा करने पर शौहर ने दिया था तीन तलाक झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत ग्राम लोधी नीच टोला (कुर्कनालो) निवासी आबिद अंसारी की पुत्री जमीला खातून ने बताया कि उसकी भगवान शिव में गहरी आस्था थी और वह पहले से ही उनकी पूजा-अर्चना करती थी। जब इस बात की जानकारी उसके पूर्व शौहर और ससुराल पक्ष को हुई, तो वे उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना करने लगे। जमीला के अनुसार, पूजा-पाठ छोड़ने से मना करने पर शौहर ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और अंततः तीन तलाक बोलकर उसे घर से निकाल दिया।तीन तलाक का दंश झेलने और बेसहारा होने के बाद प्रकाश रविदास ने जमीला का साथ दिया। इस दौरान दोनों के बीच बातचीत और प्रेम बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने हिंदू परंपरा के अनुसार विवाह करने का निर्णय लिया। स्थानीय स्तर पर विरोध और पारिवारिक अड़चनों की आशंका के चलते दोनों झारखंड से उत्तर प्रदेश के बरेली पहुंचे और अगस्त्य मुनि आश्रम के आचार्य पंडित के.के. शंखधार से संपर्क साधा।वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ विवाह अगस्त्य मुनि आश्रम में आचार्य के.के. शंखधार ने सनातन परंपरा के अनुसार सबसे पहले युवती का शुद्धिकरण कराया। पवित्र गंगाजल और गोमूत्र का आचमन कराकर संकल्प दिलाया गया। इसके बाद विधिवत गायत्री मंत्र का जाप कराकर सनातन धर्म की दीक्षा दी गई। शुद्धिकरण के पश्चात जमीला का नाम बदलकर ज्योति देवी रखा गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों के सात फेरे करवाकर विवाह संपन्न कराया गया।
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कुरुक्षेत्र में गोताखोर ने पांच फीट लंबे मगरमच्छ को काबू किया; मानवता की सेवा जारी

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र में गोताखोर प्रगट सिंह ने पांच फीट लंबे मगरमच्छ को काबू किया; डेरा सरदार चूहड़ सिंह के पास पहुंचा मगरमच्छ पशुओं व लोगो को पहुंचा सकता था नुकसान, प्रगट सिंह के मगरमच्छ पकड़ने की काउंटिंग हुई 29 उन्होंने कहा कि आगे भी करते रहेंगे इसी तरह मानवता की सेवा कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र में गोताखोर प्रगट सिंह ने पांच फीट लंबे मगरमच्छ को काबू कर लिया तो प्रगट सिंह के मगरमच्छ पकड़ने की काउंटिंग 29 हो गई हालांकि उनका जज्बा कम नहीं दिखता उन्होंने कहा कि आगे भी इसी तरह मानवता की सेवा करते रहेंगे गोताखोर प्रगट सिंह ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि डेरा सरदार चूहड़ सिंह के पशु बाड़े के समीप इसे देखा गया हालांकि इसपर पहले कई दिनों से नजर थी लेकिन आज तो यह काफी नजदीक तक पहुंच कर पशुओं व आमजन को नुकसान पहुंचा सकता था जिस कारण रेस्क्यू चलाया गया और इसे सफलतापूर्वक काबू किया गया अब वाइल्डलाइफ विभाग की टीम को इस हैंडओवर किया जा रहा है उन्होंने कहा कि यहाँ और भी मगरमच्छ है जोकि पशुओं पर हमलावर रहते हैं। बाईट: गोताखोर प्रगट सिंह
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उत्तराखंड 2027: भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए जोरदार तैयारी शुरू कर दी

Dehradun, Uttarakhand:एंकर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा ने जहां पहले मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के साथ कुमाऊं और गढ़वाल में बैठकर की वहीं अब विधायकों और सांसदों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो गया है। देखिए ये रिपोर्ट साल 2027 की शुरुआत में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में भाजपा जानती है कि अगर जीत की हैट्रिक लगानी है तो संगठन और कार्यकर्ताओं को एक्टिव रखने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार को गढ़वाल की तीनों लोकसभा क्षेत्र की बैठक आयोजित की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश संगठन के महामंत्रियों की मौजूदगी में तीनों लोकसभा के सांसद विधायक और जिला अध्यक्ष इस बैठक में अलग-अलग चरणों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि भाजपा एक ऐसा संगठन है जो साल भर अपने कार्यक्रमों के लिए तैयार रहता है पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी संगठन की नीतियों पर साल भर काम करते रहते हैं। इन बैठकों का लक्ष्य यही है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को आम व्यक्ति तक किस तरीके से पहुंचना है और संगठन के कार्यकर्ताओं के जो प्रश्न है और लक्ष्य हैं उन पर चर्चा की जाए। ब Bite पुष्कर धामी मुख्यमंत्री उत्तराखंड उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि संगठन सबसे बड़ा है। संगठन से जो लक्ष्य दिए जाते हैं उन्हें पूरा करने के लिए कार्यकर्ता और पदाधिकारी पूरी मेहनत करते हैं। पहले सभी मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के साथ बैठकों का दौरा पूरा हो चुका है अब लोकसभा स्तर पर विधायक को और सांसदों के साथ बैठक की जा रही है। ब Bite महेंद्र भट्ट प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उत्तराखंड संगठन की बैठकों को लेकर विधायकों का कहना है कि भाजपा संगठन और सरकार पूरी तरीके से चुनाव के लिए तैयार है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को आम व्यक्ति तक पहुंचाया गया है। संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 2027 में एक बार फिर से भाजपा सरकार प्रदेश में लाने का लक्ष्य है। ब Bite उमेश शर्मा काउ विधायक भाजपा फाइनल वीडियो विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा लगातार तैयार है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से लेकर राष्ट्रीय टीम की घोषणा और अब प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष लगातार बैठक कर रहे हैं। भाजपा संगठन और सरकार जानती है कि अगर प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगानी है तो कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत झोंकनी होगी。 वॉक थ्रू बैठक दिखाते हुए
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बदायूं सड़क हादसे में दो की मौत, पांच घायल; एंबुलेंस-टेंपो टक्कर से हड़कंप

Budaun, Uttar Pradesh:बदायूँ सड़क हादसे में दो लोगों की मौत, दो अन्य गंभीर रूप से घायल。 बदायूँ-मुरादाबाद हाईवे पर मंगलवार सुबह प्राइवेट एंबुलेंस और टेंपो की जोरदार टक्कर से मचा हड़कंप。 टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टेंपो में दो महिलाओं, दो पुरुषों और एक किशोर समेत कुल पांच लोग सवार बताए जा रहे हैं। सभी लोग वजीरगंज से टेंपो में सवार होकर बदायूँ की ओर जा रहे थे, तभी हुआ हादसा。 हादसे में गंभीर रूप से घायल दो लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया。 पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू की सिविल लाइन थाना क्षेत्र के देहमी गांव के पास के मामला
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कोटा के जवाहर नगर में मोटरसाइकिल टकराने के बाद युवक से मारपीट; फेफड़े डैमेज

Kota, Rajasthan:कोटा के जवाहर नगर थाना क्षेत्र में मोटरसाइकिल टकराने के बाद युवक से मारपीट का मामला सामने आया है। घटना नारकोटिक्स ऑफिस के पास की बताई जा रही है। घायल युवक मोहम्मद वसीम के पिता मोहम्मद सलीम के अनुसार, उनका बेटा मोटरसाइकिल से जा रहा था, इसी दौरान सामने से आ रही मोटरसाइकिल से टक्कर हो गई। आरोप है कि इसके बाद कुछ युवकों ने वसीम के साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर घायल हो गया। परिजनों के मुताबिक उसके फेफड़े डैमेज हुए हैं और एमबीएस अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया है। मामले में जवाहर नगर थाने में शिकायत दी गई है। पुलिस जांच कर रही है।
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नालंदा हत्या पर सियासत तेज, मुकेश सहनी ने कड़ी कार्रवाई की मांग की

Pariaunna, Bihar:नालंदा के एकंगरसराय प्रखंड के अमनार खास गांव में पंचायत समिति सदस्य श्याम प्रसाद बिंद की गोली मारकर हत्या के बाद सियासत भी तेज हो गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पूर्व मंत्री और वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढ़स बंधाया और इस दुख की घड़ी में मजबूती से साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। मुकेश सहनी ने प्रशासन से हत्याकांड में शामिल सभी अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। मुकेश सहनी ने कहा कि अपराधियों का कोई जाति और धर्म नहीं होता। बिहार में अगर कोई व्यक्ति किसी की जान से खिलवाड़ करता है तो ऐसे अपराधियों का पिंडदान होना जरूरी है। हालांकि, इससे पहले सरकार और पुलिस प्रशासन का ऐसा खौफ होना चाहिए कि अपराधी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत ही न कर सकें। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को पूरी तरह चौकन्ना रहना होगा। अगर पुलिस प्रशासन छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करेगा और शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाएगा, तो आगे बड़ी घटनाओं का होना कोई बड़ी बात नहीं होगी। सहनी ने आरोप लगाया कि बिहार में लगातार अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है और इसके लिए शासन एवं प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं।
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खराब सड़कों पर 10 वर्षीय बच्चे की मौत, नागरिकों में भारी आक्रोश

Pimpri-Chinchwad, Maharashtra:रस्त्याच्या दुरावस्थेमुळे दहा वर्षीय चिमूरड्याचा मृत्यू... नागरिकांमध्ये आक्रोश..! आय टी पार्क हिंजवडी जवळ असलेल्या म्हाळुंगे मध्ये काल रिषभ पाटोळे या १० वर्षीय मुलाचा ट्रकच्या चाक्या खाली येऊन मृत्यू झाला...या घटनेनंतर रस्त्याचा मुद्दा पुन्हा एकदा ऐरणीवर आलाय..! रिषभ आणि त्याच्या बहिणीला घेऊन संदीप पाटोळे गोदरेज ग्रीन कोव्ह वसाहतीच्या समोरून जात असताना खराब रस्त्यामुळे त्यांची गाडी स्लिप झाली आणि रिषभ पाटोळे या १० वर्षीय चिमुकल्याचा मृत्यू झाला. त्या नंतर मोठा आक्रोश व्यक्त केला जात आहे... अपघातानंतर नागरिकांशी चर्चा केलीय आमचे प्रतिनिधी कैलास पुरी यांनी..!
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आमाटोला हाई स्कूल के गेट पर ताला, ग्रामीण शिक्षक हटाने की मांग पर प्रदर्शन

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। अंबागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम आमाटोला स्थित हाई सेकेंडरी स्कूल में छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया है। ग्रामीण एक व्याख्याता की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं और उन्हें स्कूल से हटाने की मांग को लेकर लामबंद हैं। मौके पर पुलिस बल भी मौजूद है। मामला अंबागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम आमाटोला स्थित हाई सेकेंडरी स्कूल का है, जहां मंगलवार को छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ एक व्याख्याता की कार्यशैली को लेकर छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने एकजुट होकर व्याख्याता को हटाने की मांग उठाई है। सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल परिसर में पहुंचे और मुख्य द्वार पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और संबंधित व्याख्याता को हटाने की मांग की। वहीं, स्कूल में तालाबंदी और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी मौजूद है। पुलिस द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग और प्रशासन ग्रामीणों की इस मांग पर क्या कदम उठाता है और स्कूल में उत्पन्न विवाद का समाधान किस तरह किया जाता है。
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दिल्ली में जंतर मंतर विरोध: 30,000 भीड़ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली पुलिस का काउंटर-एफिडेविट (डीसीपी सचिन शर्मा, नई दिल्ली जिला द्वारा दायर) – रिट पिटीशन (क्रिमिनल) नंबर 280 ऑफ 2026 (एवं संबंधित याचिकाएँ) सर्वोच्च न्यायालय में पृष्ठभूमि और अनुमति की स्थिति • जंतर मंतर पर प्रदर्शन लगभग 6 जून 2026 से शुरू हुए। 17 जून 2026 को आयोजक सौरव दास ने 20 जून 2026 को एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरने (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, अनुमानित 500-600 लोग) की अनुमति मांगी, जिसमें दिल्ली पुलिस स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 48/2022 का पालन करने का वचन दिया गया। • अनुमति एक बार के अपवाद के रूप में दी गई (कम नोटिस और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों WP No. 1153/2017 का पूर्ण पालन न होने के बावजूद)। यह अनुमति 20 जून 2026 शाम 5 बजे के बाद समाप्त हो गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने स्थल खाली नहीं किया और तितर-बितर नहीं हुए। आंदोलन जारी रहा और छात्रों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के शामिल होने से फैल गया। • स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 48/2022 के अनुसार सेंट्रल विस्टा/जंतर मंतर/बोट क्लब क्षेत्र में अधिकतम 1,000 प्रदर्शनकारियों की अनुमति है। आयोजकों ने बार-बार अधिक लोगों को बुलाने और 20 जुलाई 2026 (मानसून सत्र के उद्घाटन दिवस) को “चलो संसद” मार्च का आह्वान किया। संसद की ओर किसी भी मार्च/जुलूस की अनुमति न तो मांगी गई और न ही दी गई। • नई दिल्ली जिले में 21 जून 2026 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधात्मक आदेश लागू थे, जो निर्धारित स्थल के बाहर बिना पूर्व अनुमति के विरोध मार्च, जुलूस, प्रदर्शन और सभाओं पर प्रतिबंध लगाते थे। 19 जुलाई 2026 को X (ट्विटर) सहित सार्वजनिक सलाह और द्विभाषी पोस्टर/बैनर जारी किए गए, जिसमें संसद मार्च के लिए कोई अनुमति न होने की जानकारी दी गई। पुलिस की तैयारी और तैनाती • संसद, राष्ट्रपति भवन और अन्य उच्च-संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों के पास सुरक्षा जोखिमों की आशंका को देखते हुए सेंट्रल आर्मड पुलिस फोर्स, दिल्ली पुलिस रिजर्व, CRPF और RAPID एक्शन फोर्स (RAF) के साथ 3,600 से अधिक बैरिकेड्स लगाए गए। • 20 जुलाई 2026 को लगभग 5,000 वर्दीधारी कर्मी (विशेष शाखा, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के सादे कपड़ों वाले “स्पॉटर्स” सहित) तैनात किए गए। स्पॉटर्स को बड़ी सभाओं में असामाजिक/अपराधी तत्वों की पहचान के लिए वैश्विक मानक अभ्यास बताया गया। • महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए व्यापक महिला पुलिस तैनाती: 20 जुलाई दिन में 292, 21 जुलाई दिन में 648 रात में 276, 22 जुलाई दिन में 560 रात में 296, 23 जुलाई दिन/रात में प्रत्येक 519, 24 जुलाई दिन में 520 रात में 260, और 25 जुलाई को कम से कम 520/260 — इस अवधि में कुल 4,600 से अधिक महिला कर्मी। • Other उपाय: एम्बुलेंस, शांतिपूर्ण तितर-बितर होने के लिए निरंतर लाउडस्पीकर घोषणाएँ/चेतावनियाँ, आयोजकों (सौरव दास और आशुतोष रांका) से संवाद, तथा पीसीआर कॉल पर प्रतिक्रियाएँ। 20 जुलाई 2026 की घटनाएँ और बल प्रयोग • भीड़ का आकार 30,000 से अधिक (कथित दंगाई/दुष्कृत्यकारी तत्वों सहित) हो गया, जो जंतर मंतर के आसपास लगभग 3 किमी के दायरे में फैली थी और लगभग 5,000 अधिकारियों द्वारा संभाली गई। • बार-बार अनुरोध, चेतावनी और समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने आक्रामक रुख अपनाया, कई परतों के बैरिकेड्स तोड़े और संसद भवन की ओर आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस का कहना है कि सभा गैरकानूनी हो गई। • हिंसा में शामिल था: पुलिस पर हमला (पुरुष और महिला अधिकारियों को खींचना/मनहैंडल करना), पथराव (विशেষ रूप से संसद मार्ग पर रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाइटीज ऑफिस के पास, जहाँ फर्नीचर और ईंटें फेंकी गईं), सरकारी/पुलिस वाहनों, बैरिकेड्स और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान। मुख्य संघर्ष बिंदु थे — जंतर मंतर, संसद मार्ग, पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन क्षेत्र, जनपथ-जंतर मंतर जंक्शन, टॉल्स्टॉय मार्ग, अशोका रोड, पटेल चौक मेट्रो पहुंच मार्ग, तथा कनॉट प्लेस, रीगल सिनेमा, गोल मार्केट और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आसपास के क्षेत्र। • पुलिस का दावा है कि प्रतिक्रिया क्रमिक थी: पहले मध्यस्थता/बातचीत, फिर न्यूनतम आवश्यक बल (अंतिम उपाय के रूप में टियर स्मोक शेल्स, तथा तितर-बितर करने और व्यवस्था बहाल करने के लिए सीमित/नियंत्रित लाठीचार्ज)। हमले झेल रहे अधिकारियों द्वारा रक्षात्मक रूप से फाइबर लाठियों का भी उपयोग किया गया। बल का प्रयोग केवल बैरिकेड तोड़ने और हिंसा शुरू होने के बाद ही किया गया। • 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए (कई गंभीर रूप से; सूची अनुलग्नक आर-7 के रूप में संलग्न). लगभग 200-218 आम नागरिक/प्रदर्शकारियों की भी मेडिको-लीगल जांच हुई। पुलिस का तर्क है कि प्रदर्शनकारियों की चोटें 30,000 की नियंत्रण से बाहर भीड़ की अफरातफरी में हुईं और ये अत्यधिक बल का संकेत नहीं हैं। • “कील वाली लाठियाँ” का आरोप: पुलिस का कहना है कि एकमात्र वीडियो में प्रदर्शनकारियों के हाथ में (राष्ट्रीय ध्वज के साथ) एक छड़ी दिखाई दे रही है, पुलिस की नहीं; किसी MLA/प्रकारण में कील की चोट का उल्लेख नहीं हैं फेस रेकग्निशन सिस्टम (FRS) और आपराधिक तत्व • एफआरएस वाहनों को मौजूदा आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए आनुपातिक उपाय के रूप में तैनात किया गया (शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अंधाधुंध निगरानी या प्रोफाइलिंग नहीं)। यह केवल गंभीर अपराधों के लिए पुलिस डेटाबेस में पहले से मौजूद चेहरों का मिलान करता है; किसी भी कार्रवाई से पहले फील्ड सत्यापन किया जाता है। आम लोगों के बायोमेट्रिक्स नहीं लिए जाते और किसी को आधार कार्ड लेकर नहीं बुलाया गया। • 20-26 जुलाई 2026 के बीच एफआरएस ने मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाने वाले 2,873 व्यक्तियों की पहचान की (2,402 क्राइम कुंडली डेटाबेस से; 471 डोजियर रिकॉर्ड से). इनमें से 92 10 से अधिक मामलों में शामिल थे; 47 इतिहास-शीटर थे। पूर्व अपराधों में हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती/लूट, बलात्कार, पॉक्सो, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, आयुध अधिनियम, अपहरण, छीनना, एनडीपीएस और अन्य गंभीर आईपीसी/BNSS/विशेष कानून के मामले शामिल थे। • इसी छह दिवसीय अवधि में क्षेत्र में 7 मोटर वाहन चोरी, 67 अन्य चोरियाँ और 123 “खोया” रिपोर्ट दर्ज हुईं — जिन्हें दुष्कृत्यकारियों/अपराधियों के घुसपैठ के प्रमाण के रूप में बताया गया। • दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा गठित SIT गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की संलिप्तता की जांच करेगी। इन 2,873 व्यक्तियों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई जांच नहीं की जाएगी। व्यापक रुख और चेतावनियाँ • शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार (छात्रों/युवाओं सहित) मौलिक और पवित्र है। समस्या तब पैदा होती है जब प्रदर्शन हिंसक हो जाते हैं, नागरिकों/पुलिस को चोट पहुँचाते हैं, सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करते हैं, या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले असामाजिक तत्वों द्वारा घुसपैठ किए जाते हैं। • याचिकाएँ कथित रूप से चयनित तस्वीरों, अधूरे वीडियो और असत्यापित मीडिया/सोशल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं, जो एकतरफा तस्वीर पेश करती हैं। पुलिस पूर्ण समकालिक रिकॉर्ड (खुफिया इनपुट, तैनाती आदेश, वायरलेस लॉग, डीडी एंट्री, CCTV, आधिकारिक वीडियोग्राफी, बॉडी-वॉर्न कैमरा, मेडिकल रिकॉर्ड, नुकसान आकलन) जांच के अधीन रखेगी। • एफिडेविट सीमित है (गुण-दोष पर पैरा-वार नहीं) क्योंकि पूर्ण जांच जारी है और सर्वोच्च न्यायालय बल प्रयोग की जांच के लिए समिति नियुक्त करने पर विचार कर रहा है। दिल्ली पुलिस ऐसी किसी भी समिति के साथ पूर्ण सहयोग करेगी और सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराएगी। अत्यधिक बल और अन्य उपकरणों के उपयोग के आरोप उसी जांच के लिए छोड़ दिए गए हैं। • पुलिस ने जन-व्यवस्था बनाए रखने, संसद और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों (राष्ट्रपति भवन, केंद्रीय सरकारी कार्यालय, मंत्रियों/वरिष्ठ अधिकारियों के आवास, कनॉट प्लेस) की सुरक्षा, लोक सेवकों और नागरिकों की रक्षा, तथा निषेधात्मक आदेशों को लागू करने के लिए सद्भावना से कार्य किया। तेजी से बदलती हिंसक स्थिति में परिचालन निर्णय को केवल अलग-अलग क्लिपों के आधार पर बाद में आंकना उचित नहीं है। एफिडेविट के साथ आयोजकों का आवेदन/वचन, स्टैंडिंग ऑर्डर 48/2022, अनुमति उत्तर, धारा 163 के आदेश, सार्वजनिक सलाह, धारा 163 के पोस्टर, घायल पुलिसकर्मियों की सूची और वीडियो संकलनों वाला पेनड्राइव संलग्न हैं.
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