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SPSatya Prakash PandeyFollow16 Apr 2025, 03:00 pm
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छोटी सी चिंगारी ने 300 बीघा फसलों को जला कर किया राख

VIVEK DUBEYVIVEK DUBEYFollowJust now
Etawah, Uttar Pradesh:इटावा-भरथना क्षेत्र के ग्राम रपटपुरा के पास उस समय हड़कंप मच गया, जब घूरे में डाली गई चूल्हे की राख से निकली एक चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवा के चलते आग ने देखते ही देखते आसपास के खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण आग में चार गांवों के तीन दर्जन से अधिक किसानों की 300 बीघा से ज्यादा गेहूं की खड़ी फसल, कटे गट्ठे और अवशेष जलकर पूरी तरह राख हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि मौजा कुर्रा, नगला भोज, सालिमपुर, नगला मुकुट, सरस्वती और नगला अंते तक पहुंच गई। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी काव्या सी, पुलिस क्षेत्राधिकारी रामदवन मौर्या, तहसीलदार दिलीप कुमार और थाना प्रभारी विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए। शुरुआत में तीन दमकल गाड़ियां आग बुझाने में लगी थीं, लेकिन स्थिति को गंभीर देखते हुए तीन और गाड़ियां मौके पर बुलाई गईं। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कुल छह दमकल गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। प्रशासन ने नुकसान का आकलन करने के लिए दो कानूनगो और 15 लेखपालों की टीम गठित कर दी है। आग के कारणों की जांच जारी है। फिलहाल किसानों को हुए भारी नुकसान ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल बना दिया है।
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ग्वालियर में ऑटो पर तेज कार से टक्कर, चालक फरार; छात्राएं सुरक्षित

Morena, Madhya Pradesh:ग्वालियर शहर के चेंबर ऑफ कॉमर्स के सामने उस समय हड़कंप मच गया, जब ट्यूशन छोड़ने जा रहे एक ऑटो को तेज रफ्तार कार ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो चालक के सिर में गंभीर चोट आ गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त ऑटो में दो छात्राएं भी सवार थीं, जो ट्यूशन के लिए जा रही थीं। राहत की बात ये रही कि दोनों बच्चियां इस हादसे में पूरी तरह सुरक्षित हैं। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिससे इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल ऑटो चालक को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और फरार कार चालक की तलाश की जा रही है。
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रतलाम में पटवारी ने फंदे से लटककर आत्महत्या, कारणों की जांच जारी

Ratlam, Madhya Pradesh:रतलाम शहर में एक दुखद घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। खुशियों से भरे एक घर में अचानक मातम पसर गया, जब एक पटवारी ने अपने ही कमरे में साफे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक का नाम रविशंकर खराड़ी बताया जा रहा है, जो आलोट नगर के खजुरी सोलंकी गांव में पटवारी पद पर पदस्थ थे। जानकारी के अनुसार, घटना से एक दिन पहले ही उनके छोटे भाई की शादी हुई थी और सोमवार को रिसेप्शन भी आयोजित किया गया था। हालांकि, रविशंकर इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और देर रात अपने कमरे में सोने चले गए। मंगलवार सुबह जब उनका कमरा नहीं खुला, तो परिजनों ने दरवाजा तोड़कर देखा, जहाँ वे फंदे पर लटके मिले। उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि रविशंकर पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थे और एक महिला अधिकारी द्वारा काम का दबाव डाला जा रहा था। पुलिस को मौके से एक पत्र भी मिला है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह सुसाइड नोट है या नहीं। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश भी देखा गया। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की बात कह रही है।
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जोधपुर में छात्रा के साथ छेड़छाड़ की कोशिश, CCTV में कैद आरोपी की तलाश

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में कुड़ी क्षेत्र में लड़कियों से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद शहर में ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला शहर के भीतरी क्षेत्र में नाईयो की बड़ से व्यास पार्क जाने वाले मार्ग का है, जहां एक स्कूली छात्रा के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई। जानकारी के अनुसार, एक युवक छात्रा का पीछा कर रहा था, जिससे वह घबरा गई। मौके पर मौजूद मंजूर अली ने साहस दिखाते हुए युवक को पकड़ लिया। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। हालांकि, थाना अधिकारी से संपर्क करने पर इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक केस दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी युवक की तलाश में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे आरोपियों के हौसले बढ़ते नजर आ रहे हैं।
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बरेली में सैन्यकर्मी पति पर हत्या के शक के बीच महिला का शव मिला

Bareilly, Uttar Pradesh:बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र में सैन्यकर्मी की पत्नी का शव घर में पड़ा मिला। पुलिस की प्राथमिक जांच में हत्या की बात सामने आई है। पुलिस को वारदात का शक सैन्यकर्मी पति पर ही है, जो घटना के बाद से लापता है. बरेली के सुभाषनगर में एक महिला की उसके घर में हत्या कर दी गई। मंगलवार को हुई इस घटना में सैन्यकर्मी पति पर हत्या का शक है, जो छुट्टी से दोपहर में घर आते और घंटे भर बाद जाते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिखा है। एसपी सिटी ने मुआयना कर खुलासे के निर्देश दिए हैं। महिला के शव का बुधवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक गला दबाकर हत्या के संकेत मिले हैं. 40 वर्षीय गीता यादव के साथ मंगलवार दोपहर में यह घटना हुई है। वह अपने दो बच्चों व भतीजी के साथ वैष्णो धाम कॉलोनी में रहती थीं। उनके पति भरत सिंह यादव फिरोजपुर, पंजाब में सेना में तैनात हैं। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि भरत सिंह मंगलवार पूर्वाह्न सवा ग्यारह बजे छुट्टी पर घर आया था। वह करीब एक घंटे बाद घर से जाता हुआ दिखाई दिया। फुटेज में दिख रहे भरत सिंह के हाथ में बैग और छाता दिख रहा था. मौके पर फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि शव की हालत देखकर आशंका जताई है कि गीता की गला दबाकर हत्या की गई है, हालांकि पूरी पुष्टि बुधवार को ही हो सकेगी। हत्या की वजह क्या रही? इसे लेकर संशय बना हुआ है। पुलिस सैन्यकर्मी पति का पता लगाने में जुटी है। उसके मिलने के बाद ही सही वजह का खुलासा हो सकेगा, क्योंकि घटना के वक्त गीता और भरत ही घर में थे।
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नारी शक्ति विधेयक पर सियासत तेज: मुंबई में भाजपा का जन आक्रोश मोर्चा

Mumbai, Maharashtra:नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासत तेज, मुंबई में भाजपा का ‘जन आक्रोश मोर्चा’ महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने से जुड़े बहुचर्चित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसके बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के खिलाफ देशभर में विपक्ष के ख़िलाफ़ मुहिम तेज कर दी है। इस कानून का उद्देश्य पार्लियामेंट और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को लगभग 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना था । यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होती। समर्थकों का कहना है कि इससे राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मजबूत होता और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ती। विधेयक को समर्थन न मिलने के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को मुंबई में भाजपा की ओर से “जन आक्रोश मोर्चा” निकलाला गया। इस मोर्चे में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं और उन्होंने विपक्षी दलों के खिलाफ नारेबाजी की। मोर्चे में शामिल कई महिलाओं ने ज़ी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने वाले इस अहम विधेयक को समर्थन न मिलना दुर्भागपूर्ण है। उनका आरोप था कि काँग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में वे इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएंगी और विरोध करने वाले दलों को सबक सिखाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। पहली बार यह प्रस्ताव 1990 के दशक में गंभीरता से सामने आया था और तब से इसे कई बार संसद में लाने की कोशिश की गई। समर्थकों का तर्क है कि स्थानीय निकायों में आरक्षण के बाद महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, इसलिए संसद और विधानसभाओं में भी इसी तरह की व्यवस्था की मांग लगातार उठती रही है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है।
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100 और 150 दिन के कार्य के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को सम्मान

Mumbai, Maharashtra:150 दिनों के कामकाज’ के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान राज्य सरकार के ‘100 दिनों के कार्य कार्यक्रम’ के बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने प्रशासनिक कार्यों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। इस दौरान विभिन्न विभागों में प्रशासनिक सुधार के लिए कई अधिकारियों को पुरस्कृत किया गया। यह सम्मान समारोह नागरी सेवा दिवस 2026 और ‘राजीव गांधी प्रशासकीय गतिमानता अभियान 2025-26’ के तहत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘ज़ीरो ब्यूरोक्रेसी’ की अवधारणा को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि नागरिकों को सरकारी सेवाएं सरल और सीधे तौर पर उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन को ‘स्टार्टअप’ की तरह काम करना चाहिए, जहां प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय लेने में अनावश्यक देरी न हो और नागरिकों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पात्रता के आधार पर सेवाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 100 और 150 दिनों के कार्यक्रमों के तहत प्रशासनिक कार्यकुशमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं और इनमें से लगभग 85 प्रतिशत लक्ष्यों को हासिल किया जा चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक विभागों, महानगरपालिकाओं और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा किए गए नवाचारों की सराहना की। महेंद्र कल्याणकर को झोपड़पट्टी निवासियों के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीक के उपयोग से जुड़े प्रस्ताव के लिए द्वितीय पुरस्कार दिया गया। यह लगातार दूसरी बार है जब उन्हें इस तरह के नवाचार के लिए सम्मानित किया गया है।इसके पहले 100 दिनों के कामकाज पर उन्हें प्रथम स्थान मिला था . इसी तरह राधाविनोद शर्मा को भी ई-गवर्नेंस से जुड़े अभिनव प्रयासों के लिए पुरष्कृत किया गया। मीरा-भायंदर महानगरपालिका में डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए किए गए कार्यों को विशेष रूप से सराहा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में नवाचार और नई सोच ही भविष्य के विकास की दिशा तय करेगी। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने विभाग को एक स्वतंत्र ‘स्टार्टअप’ की तरह देखें और नागरिकों को तेज, पारदर्शी और प्रभावी सेवाएं देने के लिए नई तकनीकों और विचारों को अपनाएं। सरकार का कहना है कि ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और तेज सेवा वितरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऐसे पुरस्कारों की शुरुआत की है, ताकि अधिकारियों को बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके。
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बैसरन घाटी खुलवाने की मांग से पहलगाम पर्यटन सुधार की उम्मीद

Chaka, बैसरन घाटी के बंद होने से भारी नुकसान हो रहा है; कमाई अब घटकर 30% रह गई है। पहलगाम के पोनी-ऑपरेटर अपनी मुश्किलों को खत्म करने के लिए बैसरन घाटी को खोलने की मांग कर रहे हैं। aprile 2026 तक बैसरन घाटी का लगातार बंद रहना, 2025 के हमले के बाद पैदा हुई सुरक्षा चुनौतियों के हल न हो पाने का नतीजा है। इसका पहलगाम के 7,000 से ज़्यादा रजिस्टर्ड पोनी सर्विस देने वालों पर गंभीर आर्थिक असर पड़ा है। हमले से पहले, पोनी वाले पीक सीज़न में अच्छी कमाई करते थे। वे रोज़ाना 1500-2000 रुपये कमाते थे, जब वे सैलानियों को बैसरन के घास के मैदान तक ले जाते थे, जिसे अब 'मिनी-स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है। अब उनकी रोज़ाना की कमाई घटकर लगभग 400–500 रुपये रह गई है—यानी लगभग 80% की गिरावट। ऐसा इसलिए है क्योंकि पोनी ऑपरेटर अब सिर्फ़ छोटे, कम मुनाफ़े वाले रास्तों या स्थानीय बाज़ार के चक्कर लगाने तक ही सीमित रह गए हैं, क्योंकि बैसरन तक जाने वाला 6 किलोमीटर का मुनाफ़े वाला रास्ता अभी भी बंद है। कई पोनी ऑपरेटर अपनी रोज़ाना की कमाई से अपने घोड़ों को खिलाने और 2024 के टूरिज़्म बूम के दौरान लिए गए कर्ज़ चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पोनी ऑपरेटर बैसरन के घास के मैदान को जल्द से जल्द खोलने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी मुश्किलें खत्म हो सकें। उनका कहना है कि इस साल पहलगाम में टूरिज़्म में तेज़ी आने के बावजूद, वे अपने घोड़ों को भी ठीक से खिला नहीं पा रहे हैं। यहाँ तक कि कई सैलानी भी निराश हो जाते हैं जब वे बैसरन नहीं जा पाते, जिसे कश्मीर का 'मिनी-स्विट्जरलैंड' माना जाता है। सुरक्षा बलों के सूत्रों का कहना है कि इंटेलिजेंस अधिकारियों ने पाया है कि पाकिस्तान समर्थित तत्व अभी भी सक्रिय हैं और और ज़्यादा हिंसा फैला सकते हैं। जहाँ 44 अन्य पर्यटन स्थल फिर से खुल गए हैं, वहीं बैसरन अभी भी बंद है, क्योंकि इसकी ऊँची-ऊँची पहाड़ियों और घने जंगलों वाले इलाके में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के बिना प्रभावी ढंग से गश्त करना मुश्किल है। अधिकारी अभी भी बैसरन के लिए एक "पूरी तरह सुरक्षित" (foolproof) सुरक्षा योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में इस बात को दोहराया कि वे बैसरन सहित उन सभी पर्यटन स्थलों को खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिन पर पहले पाबंदी लगी हुई थी और जो पहलगाम हमले की बरसी के बाद अंतिम सुरक्षा मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे हैं।
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SC के सवाल पर जन्म पहचान से मूर्ति छूने पर रोक, क्या संविधान दखल देगा?

Noida, Uttar Pradesh:जन्म के आधार पर भक्त को मूर्ति छूने से रोकेंगे तो क्या संविधान दखल नहीं देगा? SC का सवाल सबरीमाला विवाद से उपजे सवैंधानिक सवालों पर विचार कर रही संविधान पीठ ने सवाल किया कि अगर किसी श्रद्धालु को उसके जन्म के साथ मिली पहचान के आधार भगवान की मूर्ति को छूने से रोका जाता है तो क्या ऐसी सूरत में संविधान दखल नहीं देगा। 9 जजों की संविधान पीठ के सदस्य जस्टिस अमानुल्लाह ने यह सवाल सबरीमाला अयप्पा Temple के मुख्य पुजारी की ओर से पेश वकील वी गिरी से पूछा। दरअसल वी गिरी का कहना था कि संविधान के आर्टिकल 25 के तहत पूजा करने का अधिकार हर किसी को तभी मिल सकता है जब उस व्यक्ति की उस देवता में सच्ची आस्था हो और वह उस देवता को उसके खास स्वरूप और गुणों के साथ स्वीकार करता हो। वी गिरी ने दलील दी कि जो व्यक्ति मंदिर की मूर्ति या देवता को अपना भगवान मानता है, वह कभी भी ऐसी हरकत नहीं करेगा जो उस मंदिर की मूल परंपरा और देवता के मूल गुणों के खिलाफ हो। अय्यापा मंदिर के पुजारी की दलील वी गिरी ने साथ मे यह भी कहा कि जब मैं किसी मंदिर में पूजा करने जाता हूँ, तो यह जरूरी है कि मेरी देवता के प्रति आस्था पूरी हो। अगर मेरे अंदर उस देवता के प्रति सच्चा विश्वास ही नहीं है, तो मैं केवल पूजा करने के लिए वहां जाने का अधिकार नहीं ले सकता। भगवान अयप्पा शाश्वत ब्रह्मचारी हैं, और मंदिर की परंपराएँ इसी विश्वास और विशेषता पर आधारित हैं। हर व्यक्ति मंदिर में जाकर हर परंपरा को चुनौती नहीं दे सकता। जो श्रद्धालु नहीं, उन्हें क्यों सुने? जस्टिस बी वी नागरत्ना ने एक बार फिर दोहराया कि जो व्यक्ति वाकई श्रद्धालु है , वो धार्मिक स्थल की परंपराओं की तर्कसंगतता पर सवाल नहीं उठाएगा और जो व्यक्ति आस्थावान ही नहीं है, उसे उस धर्म की परंपराओं पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। समय के साथ बदलती है परंपराएं जस्टिस प्रशांत बी. वराले ने कहा कि मौजूदा दौर में आज का पढ़ा-लिखा और आधुनिक सोच वाला श्रद्धालु भी पुरानी धार्मिक परंपराओं पर सवाल भी उठा सकता है ।आस्था का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति बिना सोच-विचार के हर पुरानी परंपरा मान ले? समय के साथ परंपराएँ और सोच बदल सकती हैं। धार्मिक परंपराओं की समीक्षा पर पूरी तरह रोक नहीं सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि धार्मिक परंपाओं में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट धार्मिक परंपराओं की वैधता पर सुनवाई नहीं कर सकता।इसलिए बार बार बहस के दौरान इस दलील को दोहराने की ज़रूरत नहीं है कि कोर्ट को धार्मिक परंपराओं की न्यायिक समीक्षा का अधिकार नहीं है ।अगर कोई धार्मिक परंपरा समाज के लिए हानिकारक हो और उसे रोकने के लिए सरकार कानून लाती है तो उस क़ानून की वैधता की समीक्षा क्या कोर्ट नहीं करेगा।
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तुलाडीह गांव में आग ने घर जलाए, राहत और मुआवजे की मांग

Giridih, Jharkhand:एभीबी : बिरनी प्रखंड के भरकट्टा ओपी क्षेत्र अंतर्गत तुलाडीह गांव में मंगलवार की रात अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई. बताया जाता है कि आग एक घर से शुरू हुई और देखते ही देखते तेज हवा के कारण विकराल रूप धारण कर आस-पास के कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया. इस भीषण आगजनी में बासुदेव ठाकुर, शक्ति ठाकुर, मुरली ठाकुर, नागो ठाकुर, बंगाली ठाकुर, सुदामा ठाकुर और अर्जुन ठाकुर के घर पूरी तरह जलकर राख हो गए. घरों में रखे अनाज, कपड़े, फर्नीचर सहित दैनिक उपयोग की सभी सामग्री जलकर नष्ट हो गई. पीड़ित परिवारों के सामने अब रहने और खाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. घटना के समय बासुदेव ठाकुर के घर में किराये पर रह रहे विनय राम भी इस आगजनी की चपेट में आ गए. उनके घर में रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. आग लगते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई. ग्रामीणों ने बाल्टी, मोटर और अन्य संसाधनों की मदद से आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग इतनी तेज थी कि उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया. इस दौरान लोगों ने अपने-अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की. घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया. खबर लिखे जाने तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी रास्ते में थी, जिससे आग पर काबू पाने में देर हुई और नुकसान बढ़ता चला गया. स्थानीय लोगों के अनुसार आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. घटना के बाद पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत और मुआवजा देने की मांग की है, ताकि प्रभावित परिवारों को इस संकट की घड़ी में सहारा मिल सके.
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