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उत्तर प्रदेश बना ड्रीम डेस्टिनेशन: 9 साल में ₹50 लाख करोड़ निवेश
RRRakesh Ranjan
Mar 21, 2026 12:02:45
Noida, Uttar Pradesh
नव निर्माण के 9 वर्ष: निवेश
₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ जीबीसी 5.0 की तैयारी में योगी सरकार
9 वर्षों में ₹50 लाख करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव, 1.10 करोड़ से अधिक मिलेंगे रोजगार
निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बना उत्तर प्रदेश, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की ओर तेज कदम बढ़ा रहा यूपी
चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के माध्यम से ₹15 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतरीं, करीब 60 लाख रोजगार के अवसर सृजित
हाईटेक उद्योगों के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स भी तैयार कर रहा यूपी, उद्योग और रोजगार का नया हब बन रहा नया उत्तर प्रदेश
लखनऊ, 20 मार्च। उत्तर प्रदेश ने बीते नौ वर्षों में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन दर्ज करते हुए खुद को देश के सबसे बड़े निवेश गंतव्यों में स्थापित कर लिया है। योगी सरकार के प्रयासों, सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशक-समर्थित सुधारों के बल पर प्रदेश को लगभग 30 हजार से अधिक एमओयू के माध्यम से ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे करीब 1.10 करोड़ रोजगार सृजित होने का अनुमान है। डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे उभरते सेक्टर्स में तेजी से बढ़ते निवेश ने प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान दी है। इसी क्रम में अब योगी सरकार ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) 5.0 की तैयारी में जुटी है, जिससे लाखों नए रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है और प्रदेश के ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने की दिशा को और मजबूती मिलेगी।
2017 से पहले की स्थिति
2017 से पहले उत्तर प्रदेश निवेश के लिहाज से देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। उद्योगों की संख्या सीमित थी और निवेशकों के सामने कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और नीतिगत अस्थिरता जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पष्ट औद्योगिक नीति और आसान प्रक्रियाओं के अभाव में बड़े निवेशक राज्य में आने से कतराते थे। रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण प्रदेश के युवाओं को अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता था। उद्योगों का विस्तार न होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं और प्रदेश अपनी अपार संभावनाओं के बावजूद अपेक्षित विकास हासिल नहीं कर पा रहा था。
9 वर्षों में बदली तस्वीर, नीति, निवेश और रोजगार का शुरू हुआ नया युग
पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व छलांग लगाई है। 34 सेक्टोरल पॉलिसीज लागू की गईं और सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में ‘निवेश मित्र’ व ‘निवेश सारथी’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए, जिससे निवेश प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनी।
प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निजी निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 1.10 करोड़ रोजगार सृजित होने का अनुमान है। चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से ₹15 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं, जिससे करीब 60 लाख रोजगार के अवसर पैदा झाले हैं। वहीं ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है। हजारों नई परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावनाएं हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है, जहां ₹20 हजार करोड़ का लक्ष्य मात्र 3 वर्षों में ही हासिल कर लिया गया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में उत्तर प्रदेश ने ₹2.94 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए, जिनमें एआई, डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और रक्षा निर्माण जैसे सेक्टर शामिल हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश आमंत्रित नहीं कर रहा, बल्कि इनके माध्यम से स्थापित होने वाले आधुनिक उद्योगों के अनुसार स्किल्ड वर्कफोर्स भी तैयार कर रहा है और इन्हीं उद्योगों के लिए स्थानीय युवाओं को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसका सीधा असर यह होगा कि अब युवाओं को उन्नत क्षेत्रों में रोजगार पाने के लिए बाहरी राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर प्रदेश न सिर्फ उद्योगों की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि अपने युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर भविष्य दे रहा है।
फार्मा क्षेत्र में भी ₹10,000 करोड़ के निवेश समझौते प्रमुख कंपनियों के साथ हुए हैं। साथ ही, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत 197 एमओयू साइन किए जा चुके हैं, जिनसे ₹34,844 करोड़ निवेश और 52,658 प्रत्यक्ष रोजगार की संभावना है। एफडीआई के मोर्चे पर भी प्रदेश ने बड़ी प्रगति की है। 2017 से पहले जहां ₹3,303 करोड़ निवेश प्राप्त हुआ था, वहीं 2017 से 2025 के बीच यह बढ़कर ₹17,004 करोड़ हो गया।
भविष्य का रोडमैप: ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की ओर उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्थायी औद्योगिक विकास में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डेटा सेंटर पार्क, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक हब जैसे प्रोजेक्ट्स राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाना है, जिसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट, एमएसएमई व टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम, डि-रेगुलेशन सुधारों और निवेशक-हितैषी नीतियों ने उत्तर प्रदेश को “ड्रीम डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित किया है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाएगा, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाएगा।
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शाहिद नज़र की ओर से आप सभी को ईद उल फितर की तहे दिल से ढेर सारी मुबारकबाद यह पवित्र हर आपके जीवन में खुशियां अमन और बरकत लेकर आए
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