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बीजेपी के मोर्चों में नई टीम गठन में देरी, संगठन में सुस्ती से चिंता
VSVishnu Sharma
Mar 21, 2026 14:01:47
Jaipur, Rajasthan
बीजेपी संगठन मोर्चों के मोर्चे पर फेल साबित हो रहा है ! पार्टी के हरावल दस्ते समझे जाने वाले मोर्चों में नई टीमों का गठन नहीं हो पा रहा है, इससे सवाल उठने लगे हैं। पार्टी नेतृत्व ने मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिए हैं, लेकिन उनकी प्रदेश और जिलों से लेकर बूथ स्तर पर तीन महीने बाद भी टीमों का गठन नहीं किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में मायूसी दिखाई दे रही है। इधर मोर्चों की टीम का गठन नहीं होने से संगठन के कामकाज, पार्टी के अभियान और कार्यक्रमों की तेज क्रियान्विति पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व जल्द ही टीम के गठित करने का दावा कर रहा है।
राजस्थान बीजेपी के संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने की रफ्तार धीमी चल रही है. बीजेपी संगठन में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जुलाई 2024 में नियुक्ति किए गए थे। हालांकि 22 फरवरी 2025 को इनकी विधिवत नियुक्ति हुई। इसके बाद राठौड़ को अपनी नई प्रदेश टीम घोषित करने में 16 महीने लग गए। वहीं पार्टी के मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने में भी काफी लंबा वक्त लगा। मोर्चों के अध्यक्ष घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही जिला और प्रदेश स्तर पर नई टीमों की घोषणा होगी, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी आएगी। लेकिन पुरानी टीम के सहारे ही संगठन की नैया को पार लगाया जा रहा है. लेकिन हालात यह है. कि वर्तमान में न तो पुरानी टीम पूरी तरह सक्रिय है और न ही नई टीम बन पाई है. इस देरी का सीधा असर पार्टी के अभियान और जमीनी कार्यक्रमों पर पड़ रहा है. कई कार्यक्रम धीमी गति से चल रहे हैं, जिससे संगठन की सक्रियता प्रभावित हो रही है. इतना ही नहीं पार्टी पंचायत और निकाय चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है. लेकिन पार्टी मुख्य मोर्चे की टीम नही बनने से कार्यकर्ताओं में मयूसी झलक रही है.
इधर पार्टी में प्रदेश टीम, कार्यसमिति तथा मौर्चों के अध्यक्ष घोषित करने को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि
पार्टी ने संगठनात्मक ढांचा तो खड़ा कर लिया है. लेकिन उसमें सक्रियता और ऊर्जा की कमी साफ नजर आ रही है. यह “तोप-बंदूक तो तैयार करने, लेकिन उसमें गोला-बारूद नहीं भरने जैसी स्थिति है. पुरानी टीम ने काम लगभग बंद कर दिया है. जबकि नई टीम पूरी तरह से स्थापित और संगठित नहीं हो पाई है. इस कारण पार्टी के कामकाज में ठहराव आ गया है और अपेक्षित गति नहीं मिल रही.इससे राजनीतिक अभियानों की धार कमजोर पड़ रही है. तथा आगामी पंचायत और निकाय चुनाव में परिणाम प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी.
इधर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ मोर्चों के गठन में समन्वय और आपसी गुटबाजी की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहते है. पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद या सामंजस्य की कमी नहीं है. मोर्चों के टीम गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही सभी मोर्चों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी. संगठन को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए सोच-समझकर चयन किया जा रहा है. इसलिए थोड़ा समय लग रहा है.
पार्टी का संगठनात्मक ढांचा ये
- प्रदेश बीजेपी में 7 प्रमुख मोर्चे हैं
- युवा मोर्चा
- महिला मोर्चा
- किसान मोर्चा
- अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा
- अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्च
- ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) मोर्चा
- अल्पसंख्यक मोर्चा
- इनमें मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है. लेकिन कई मोर्चों की प्रदेश व जिला कार्यकारिणीअभी घोषित नहीं हुई है.
- राजस्थान बीजेपी में 19 से 20 प्रकोष्ठ- विभाग सक्रिय हैं,
- विधि प्रकोष्ठ
- आर्थिक प्रकोष्ठ
- व्यापार प्रकोष्ठ
- चिकित्सा प्रकोष्ठ
- शिक्षा प्रकोष्ठ
- उद्योग प्रकोष्ठ
- बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ
- सहित अन्य शामिल है
- इनमें से किसी भी प्रकोष्ठों के संयोजक की घोषणा नहीं हुई.
-पार्टी संगठन में
- संगठन विभाग
- प्रचार-प्रसार विभाग
- मीडिया विभाग
- प्रशिक्षण विभाग
- चुनाव प्रबंधन विभाग
- 20 विभाग में से मात्र तीन विभागों के संयोजक की घोषणा हुई है. बाकी का इंताजर है.
ग्राफ़िक्स आउट -
दूसरी ओर ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ महेंद्र कुमावत का कहन है कि यह सही है कि टीम के गठन में देरी हो रही है, लेकिन इससे संगठन के कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। पुरानी टीम के साथ सामंजस्य कर हम जिला और मंडल स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम और अभियान चला रहे हैं। जिलों में श्रमिक सम्मेलन किए उनमें सभी ने उत्साह से काम किया। जिला अध्यक्षों के साथ ही मंडल अध्यक्ष भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोर्चों का गठन तो हो चुका है, अब जल्द ही टीम का गठन किया जाएगा।
हालांकि बीजेपी मोर्चों की कार्यकारिणी का गठन लंबित होने से पार्टी के कई प्रमुख अभियान प्रभावित हो रहे हैं. युवा, महिला और किसान मोर्चा की टीम पूरी तरह सक्रिय नहीं होने से संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है. पार्टी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान, बूथ सशक्तिकरण अभियान, गांव-ढाणी संपर्क कार्यक्रम और सोशल मीडिया विस्तार अभियान की रफ्तार पर इसका सीधा असर पड़ा है. युवा मोर्चा की निष्क्रियता से नए मतदाताओं तक पहुंच सीमित हुई है. वहीं महिला मोर्चा की सुस्ती से महिला संपर्क और जागरूकता कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं. किसान मोर्चा की अधूरी टीम के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से जुड़ाव कमजोर पड़ा है.
बाइट - मदन राठौड़ , प्रदेश अध्यक्ष , बीजेपी
बाइट - डॉ महेंद्र कुमावत,बीजेपी ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष
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