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Mount Abu का नाम बदकर आबू राज, आस्था बनाम पर्यटन पर बहस तेज
STSharad Tak
Mar 06, 2026 11:01:39
Sirohi, Rajasthan
राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन का नाम बदलने की घोषणा से प्रदेश में चर्चा तेज, आस्था बनाम पर्यटन पर उठे सवाल
सिरोही। राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबू राज’ करने की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में नई बहस छिड़ गई है। एक ओर इसे धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर इसके असर को लेकर चिंता भी जताई जा रही है।
दरअसल, 27 फरवरी को विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ प्रदेश की धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबू राज’ करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही जहाजपुर का नाम ‘यज्ञपुर’ और कामन का नाम ‘कामवन’ रखने की भी घोषणा हुई。
क्यों शुरू हुई पहचान बदलने की चर्चा
माउंट आबू पश्चिमी राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है और हर साल हजारों देश-विदेशी पर्यटक यहां घूमने आते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से भाजपा के कई नेताओं और धार्मिक संगठनों की ओर से मांग उठ रही थी कि आबू को एक धार्मिक तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया जाए, क्योंकि प्राचीन काल से यहां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि मानी जाती रही है。
राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुंबाराम चौधरी, विधायक समाराम और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि आबू राज पहले एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता था, जहां कई संत-महात्माओं ने तपस्या की। उनका तर्क है कि यहां खुले में शराब पीने और मीट की दुकानों से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, इसलिए इस स्थान की धार्मिक पहचान को मजबूत किया जाना चाहिए。
पर्यटन कारोबारियों की चिंता
दूसरी ओर, स्थानीय होटल और व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अगर माउंट आबू को पूरी तरह धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया गया और शराब या मीट पर सख्ती बढ़ी, तो इससे पर्यटन संस्कृति और स्थानीय कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका मानना है कि माउंट आबू की पहचान एक लाइवली टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में रही है, जिसे बनाए रखना जरूरी है。
पुराना इतिहास भी जुड़ा है इस बहस से
माउंट आबू को लेकर धार्मिक भावनाओं की चर्चा नई नहीं है। 1959 में भी राजस्थान विधानसभा में यहां शराब पर प्रतिबंध को लेकर सवाल उठ चुके हैं। उस समय सरकार ने इसे हटाने से इनकार कर दिया था。
अब क्या होगा आगे
नाम बदलने की घोषणा के बाद अब प्रदेश में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इससे माउंट आबू की पर्यटन पहचान बदलेगी या फिर यह धार्मिक और पर्यटन दोनों रूपों में नया संतुलन बना पाएगा。
फिलहाल इतना तय है कि ‘माउंट आबू से आबू राज’ का यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि पहचान और भविष्य की दिशा तय करने वाली बड़ी बहस बन गया है。
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