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GI टैग से नागौर की नागौरी अश्वगंधा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली
DIDamodar Inaniya
Jan 08, 2026 06:26:45
Nagaur, Rajasthan
नागौर राजस्थान के नागौर मे विश्व प्रसिद्ध अश्वगंधा किस्म नागौरी अश्वगंधा को भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्रदान कर दिया है. यह विशिष्ट पंजीकरण नागौरी वेलफेयर सोसाइटी, नागौर के नाम से हुआ है. सोजत की मेहंदी के बाद नागौरी अश्वगंधा राजस्थान का दूसरा ऐसा कृषि उत्पाद बना है जिसे यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. इस उपलब्धि के बाद अब नागौर के किसानो मे काफी उत्साह देखने को मिल रहा है.
साझा प्रयासों और वैज्ञानिक अनुसंधान से मिली बड़ी सफलता
जीआई पंजीकरण की इस लंबी और महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाने में कई संस्थानों ने मिलकर काम किया है। आईसीएआर-औषधीय और सुगंधित पादप अनुसंधान निदेशालय (डीएमएपीआर), आनंद, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, नई दिल्ली और राजस्थान के कृषि विभाग के तकनीकी सहयोग से इस पहल को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया गया। विशेषज्ञों और नागौरी वेलफेयर सोसाइटी के साझा प्रयासों के चलते ही इस दुर्लभ औषधीय फसल को उसकी मूल पहचान वापस मिली है। और अब किसानो को इससे काफी फायदा मिलेगा.
समूह-33बी किस्म की विशिष्टता ने किया कमाल
नागौरी अश्वगंधा को यह दर्जा इसकी अद्वितीय शारीरिक संरचना और औषधीय गुणों के कारण दिया गया है। राजस्थान की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों में विकसित होने वाली इस अश्वगंधा (समूह-33बी) की फलियां आकार में काफी बड़ी होती हैं, जिनका व्यास 8 से 9 मिलीमीटर तक पाया जाता है। पकने पर इनका रंग गहरा नारंगी-लाल हो जाता है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग और प्रभावशाली बनाता है। इसकी जड़ों में मौजूद एल्कलॉइड्स की उच्च मात्रा इसे दवा उद्योग के लिए बेहद बेशकीमती बनाती है।
किसानों के लिए खुलेंगे सुनहरे अवसर और आर्थिक समृद्धि के द्वार
इस अंतरराष्ट्रीय पहचान के बाद अब नागौरी अश्वगंधा के नाम का कोई भी अन्य संस्थान या व्यक्ति दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। जीआई टैग की मुहर लगते ही इस उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग मजबूत होगी और किसानों को उनकी फसल का वास्तविक मूल्य मिल सकेगा। इससे न केवल मिलावट पर प्रभावी रोक लगेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नागौर के किसानों की सीधी पहुंच सुनिश्चित होगी।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों ने जताई खुशी और जताया आभार
नागौर कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विकास पावड़िया, मिर्धा महाविद्यालय के प्रोपेसर जगदीश झींझा सहित कई कृषि विशेषज्ञों ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग नागौरी अश्वगंधा की शुद्धता की आधिकारिक मुहर है, जो स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी। इस गौरवशाली क्षण के पीछे नागौरी वेलफेयर सोसाइटी की निदेशक पार्वती चौधरी और आईसीएआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. परमेश्वर लाल सारण की महत्वपूर्ण भूमिका को भी विशेष रूप से सराहा जा रहा है।
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