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विधानसभा में पशुधन बीमा योजना पर हंगामा, विपक्ष-सरकार भिड़े; राज्यसभा सीटों पर घमासान
BDBabulal Dhayal
Feb 26, 2026 11:16:49
Jaipur, Rajasthan
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विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पशुधन बीमा योजना से जुड़े सवाल पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी के सवाल पर पशुपालन मंत्री के जवाब पर विपक्ष ने नाराजगी जताई। हरीश चौधरी ने मंत्री जोराराम कुमावत पर तंज कसे तो सत्तापक्ष के विधायकों ने भी जवाबी हमले बोले। इससे सदन में देर तक हंगामे के हालात बन गए
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पशुधन बीमा योजना से जूड़े सवाल पर आज पक्ष विपक्ष में जमकर शब्दबाण चले। सदन में हंगामा होता रहा। पक्ष प्रतिपक्ष ने एक दूसरे पर वार पलटवार किया। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने पशुपालन मंत्री पर कटाक्ष किए तो बीजेपी विधायकों और मंत्रियों ने गहरी आपत्ति जताई, इससे हंगामे के हालात बन गए।
हरीश चौधरी ने मंत्री के जवाब से असहमति जताई वहीं नेता प्रतिपक्ष ने भी सरकार को जमकर घेरा
बाइट। हरीश चौधरी। कांग्रेस विधायक
बाइट। टीकाराम जूली। नेता प्रतिपक्ष
बाइट। जोराराम कुमावत। पशुपालन मंत्री
VO हरीश चौधरी ने सरकार पर हमले बोले तो सत्तापक्ष ने हरीश को आड़े हाथ लेने में कोई कमी नहीं छोड़ी। हरीश बोले, मंत्री जोराराम कुमावत सीधे-साधे और सज्जन आदमी हैं बाडमेर के प्रभारी मंत्री भी हैं। बाडमेर में जाते हैं तो गैर संवैधानिक पावर सेंटर इनको काम नहीं करने देते है । पाली में जाते हैं तो वहां मदन राठौड रहते हैं, तो इन सीधे-साधे मंत्री को संरक्षण दीजिए । मंत्री जोराराम कुमावत ने इस पर आर्पात्ति जताते हुए कहा कि यह गलत कह रहे है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इस पर हरीश पर निशाना साधते हुए कहा,
आप यह बता दो आपको मंत्री पद से क्यों हटाया गया था? इस बीच जोराराम बोले,, जिनके घर कांच के बने होते है. वे दूसरों पर पत्थर नहीं मारा करते। मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा- पूर्ववर्ती सरकार ने 2023-24 में मुख्यमंत्री कामधेन बीमा योजना शूरू की, जिसमें दो दुधारू गाय भैंस का बीमा करने की घोषणा की थी। योजना के लिए करोडों रुपए खर्च किये। महंगाई राहत शिविर लगाए जिसमें एक करोड 10 लाख पशुपालकों के बीमा आवेदन लिए। इस साल 42 लाख में से 31.10 लाख पशूआ का बीमा किय हरीश चौधरी के पूरक सवाल का जवाब देते हुए पशुपालन मंत्री जोराराम कूमावत ने कहा कि इस साल 42 लाख पशुओं का बीमा करने का टारगेट रखा है. 42 लाख में से हमने 31 लाख 10 हजार 735 का रजिस्ट्रेशन कर दिया। 16 लाख से ज्यादा पशु पालकों को पॉलिसी भी दे दी है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष जूली ने तेज आवाज में कहा- मार्च तक टारगेट कैसे पूरा करंगे, बताओ ? जवाब नहीं है. जवाब नहीं दे पाओगे।
Byte। हरीश चौधरी। कांग्रेस विधायक
बाइट। टीकाराम जूली। नेता प्रतिपक्ष
Byte जोराराम कुमावत। पशुपालन मंत्री
बाइट। जोगाराम पटेल संसदीय कार्यमंत्री
Vo
नेता प्रतिपक्ष के जोर से बोलने पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा- बदतमीजी का कांग्रेस ने ठेका ले रखा है। प्रश्न पूछो, विनम्रता रखो। तमीज से बात करनी चाहिए। यह सदन है, मंत्री हैं, आपके गुलाम नहीं हैं। तमीज से बात करो। इस पर हंगामे की स्थिति बन गई। स्पीकर ने इसी बीच अगला सवाल पूकार लिया。
बाइट।
बाइट
Vo। पशुधन लाखों पशुपालकों की आजीविका का स्रोत है,,इसलिए विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा कर विशाल वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है,वहीं सत्तापक्ष की मजबूत वोट बैंक पर अपनी पकड़ कायम रखना चाहता है। इसलिए पक्ष विपक्ष के बीच असली लड़ाई वोट की है,,पशुपालकों की समस्या के समाधान से भला राजनीति कितना सरोकार रखती है। फिर भी मंत्री जोराराम कुमावत ने विपक्ष के हर हमले का करारा जवाब देकर भजनलाल सरकार की पशुपालकों के कल्याण के प्रति वचनबद्धता दोहराई
बाबूलाल धायल जी मीडिया जयपुर
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के बीच मानी जा रही रेस
जून में राज्यसभा की तीन सीटें होंगी खाली
राज्यसभा की तीन सीटें जून में खाली हो रही हैं राज्यसभा पहुंचने के लिए नेताओं की दिल्ली दौड़ खूब हो रही है अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए नेता बडे नेताओं से संपर्क साध रहे हैं
राजेंद्र राठौड़ की पहले सीएम का सलाहकार बनाये जाने की चर्चायें चलीं फिर उन्हें बीसूका का जिम्मा सौंपने की अटकलें लगीं पर राठौड़ ने कभी भी ऐसे कयासों पर गंभीरता नहीं दिखाई न ही सरकार में कोई जिम्मेदारी लेने में अब तक उन्होंने कोई दिलचस्पी दिखाई
अब सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही है कि बीजेपी के कोटे से खाली हो रही दो सीटों में से एक पर राजेंद्र राठौड़ को उम्मीदवार बनाया जा सकता का है हरियाणा प्रभारी सतीश पूनियां भी दावेदारों में शुमार हैं। रवनीत सिंह बिट्टू को राजस्थान से भाजपा फिर रिपीट कर सकती है।
इसी जून में राज्यसभा की 3 सीटें खाली होंगी। इनमें कांग्रेस की 1 और बीजेपी की 2 सीटें खाली होंगी।
कांग्रेस की एक सीट के लिए कई दावेदार रेस में है।
पवन खेड़ा की दावेदारी पिछली बार भी मजबूत मानी जा रही थी। पर ऐन वक़्त परखेड़ा दावेदारी में पिछड़ गए सोशल मीडिया पर खेड़ा ने उस समय नाराजगी भी जताई थी।
भाजपा-कांग्रेस ने इन सीटों पर जातीय. क्षेत्रीय और राजनीतिक जरूरतों के समीकरणों को ध्यान मे रखते हुए उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू कर दिया है।
कांग्रेस से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल जून में पूरा होने वाला है。
बीजेपी के रवनीत सिंह पंजाब के रहने वाले हैं। मोदी सरकार में बिट्टू रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं。
कांग्रेस के नीरज डांगी और बीजेपी के राजेंद्र गहलोत 6 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। दोनों 2020 में राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए थे। वहीं रवनीत सिंह बिट्ट्रका कार्यकाल जून 2026 तक ही है। वे लगभग दो साल ही इस सीट पर रह सकेंगे। अगस्त 2024 में राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री वेण्गोपाल केरल के अलाप्पझा से लोकसभा सांसद चुने गए थे。
इससे बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी के विधायकों का संख्याबल ज्यादा था। इसलिए रवनीत आसानी से चुनाव जीत गए। पवन खेडा राजस्थान में खाली होने जा रही राज्यसभा सीट की उम्मीदवारी जताने के लिए सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने बाकायदा लॉबिंग भी शुरू कर दी है。
सीट की दावेदारी के लिए राजस्थान कनेक्शन को भी भुनाने का प्रयास कर रहे हैं。
कौन हाँ पवन खेड़ा
जन्म उदयपुर में
पवन खेड़ा की शिक्षा दिल्ली में हुई
राजनीति में भी दिल्ली में ही सक्रिय रहे हैं
राजस्थान की राजनीति में खेड़ा कभी सक्रिय नहीं रहे।
पिछली बार खेड़ा हुए थे नाराज
सोशल मीडिया पर उनका ट्वीट रहा था चर्चा में
जुलाई, 2022 में हुए चुनाव में पवन खेडा को उम्मीद थी कि उन्हे मौका दिया जाएगा
कांग्रेस ने जब उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी की.उसमें पवन खेडा का नाम नहीं था। बाद में डैमेज कंट्रोल करते हुए खेड़ा को पार्टी ने AICC की मीडिया और पब्लिसिटी सेल का चेयरमैन बनाया। उस समय राजस्थान में 4 में से 3 सीटों पर कांग्रेंस ने रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवाड़ी को मौका दिया संख्याबल के आधार पर तीनों नेताओं ने जीत दर्ज की।
एक सीट पर बीजेपी ने घनश्याम तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाया था। तिवाड़ी भी आसानी से चुनाव जीत गए。
Babulal Dhayal
कांग्रेस में सीपी जोशी की बड़ी दावेदारी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। जोशी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। साथ ही उनकी गिनती पार्टी के कद्दावर ब्राह्मण नेताओं में शुमार होती है। प्रदेश के ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए कांग्रेस सीपी पर दांव लगा सकती है।
मेवाड़ में कांग्रेस की मजबूती के लिए सीपी को मजबूत बनाए रखना पार्टी की जरूरत
मेवाड़ में एक तरफ गुलाब चंद कटारिया जैसे कद्दावर नेता तो दूसरी ओर आदिवासी समुदाय से दो कैबिनेट मंत्री भाजपा सामान्य और आदिवासी दोनों ही बड़े वर्गों को साधकर अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है। ऐसे में पार्टी ब्राह्मण कार्ड खेल सकती है।
स्थानीय चेहरे को बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, तो वहां के कार्यकर्ताओं की क्षेत्रीय आकांक्षाओं के साथ समर्थकों का भी उत्साह बढेगा।
बीजेपी का रवनीत रिपीट प्लान?
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपनी एक सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को रिपीट करने का मन बना चुकी है। इसके दो मजबूत कारण भी है।
बिट्टू मोदी सरकार में प्रमुख सिक्ख चेहरा हैं। दूसरा, हाल ही लोकसभा परिसर में राहुल गांधी ने रवनीत को गद्दार दोस्त कहकर पुकारा। बीजेपी ने इसे सिख राजनीति से भी जोड़ा है। इसे सिखों के अपमान से जोड़कर भाजपा सिखों का अपने प्रति नजरिया बदलने में जुटी है।
बिट्टू का कद जिस तरह भाजपा में बढ़ रहा है,उससे कयास लगाये जा रहे हैं कि भविष्य में पंजाब में होने वाले चुनाव में भाजपा उन्हें CM का चेहरा बना सकती है।
रवनीत सिंह बिट्ट्र पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। मार्च. 2024 में रवनीत सिंह बीजेपी में शामिल हुए। बीजेपी ने उन्हे लोकसभा चुनाव में लुधियाना से टिकट दिया. लेकिन वह कांग्रेस के अमरिंदर राजा बरार से हार गए थे। रवनीत सिंह को 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य होना जरूरी था। ऐसे में 2024 में बीजेपी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा था
राठौड़ को राज्यसभा की उम्मीद
कई बार बड़े नेताओं से की मुलाकात
पार्टी आलाकमान राजेंद्र राठौड़ की काबिलियत से बखूब वाकिफ है। सार्वजनिक मंचों पर पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ उनकी गुप्तगू की तस्वीरें उनके समर्थकों के मन में उत्साह पैदा करने के लिए काफी है।
अमित शाह भी उन्हें खूब तवज्जो देते हैं। वहीं वरिष्ठ भाजपा नेताओं में राठौड़ का खूब सम्मान हैं।
राठौड़ 7 बार लगातार विधायक रह चुके हैं। राजस्थान सरकार में 4 बार मंत्री रहे हैं। पिछली बार नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाल चुके हैं।
सतीश पूनियां भी दावेदारों में
सतीश पूनिया को भी राज्यसभा टिकट का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पूनिया की संघ-संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ मानी जाती है।
हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद और बीजेपी सरकार बनने के बाद पार्टी ने उन्हें राजस्थान से बाहर ही राजनीतिक कार्यों में व्यस्त रखा।
उनके समर्थकों का मानना है कि यदि राज्यसभा के लिए राजस्थान से उन्हें मौका मिलता है तो इससे प्रदेश में भाजपा मजबूत होगी।
पूनियां को राज्यसभा भेज कार्यकर्ताओं के साथ जाटों को साधने की कोशिश
भले ही हरियाणा में सतीश पूनिया के प्रयास कामयाब रहे,पर अभी भी वहां का जाट समुदाय भाजपा को मन से स्वीकार नहीं कर पाया है। पूनियां बहुसंख्यक जाट समुदाय को राजी रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। अगर पूनियां राज्यसभा जाते हैं तो राजस्थान में भी इसका फायदा होगा। फिलहाल राठौड़ और पूनियां के प्रयास जारी हैं。
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