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राजस्थान में AI फेस सिमिलैरिटी से डमी अभ्यर्थी और अपराधियों की पहचान मिनटों में
DGDeepak Goyal
Feb 23, 2026 04:50:12
Jaipur, Rajasthan
राजस्थान में अब अपराधी या परीक्षा में बैठा डमी कैंडिडेट सिर्फ नाम या दस्तावेज़ बदलकर नहीं बच पाएगा क्योंकि पहचान चेहरे से और वो भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए होगी। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने एडवांस्ड फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम लागू किया है, ऐसी तकनीक जो प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थियों से लेकर आदतन अपराधियों तक की पहचान मिनटों में कर सकती है। 50 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड हों या लाखों आपराधिक तस्वीरों का डेटाबेस अब संदिग्ध चेहरे सीधे एआई की नजर में होंगे। इतना ही नहीं ये तकनीक लावारिस शवों की पहचान कर परिजनों तक पहुंचाने में भी मददगार साबित हो रही है। VO-1 के अनुसार भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट की बढ़ती घटनाओं से लेकर आदतन अपराधियों की पहचान और लावारिस शवों की शिनाख्त जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम लागू किया है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा विकसित यह कंप्यूटर विजन आधारित तकनीक शासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक प्रभावी टूल साबित हो रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों की पहचान के लिए विकसित इस एआई एप्लिकेशन के जरिए संदिग्ध परीक्षार्थियों के फोटो का पंजीकृत अभ्यर्थियों के करीब 50 लाख रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। उच्च-सटीकता वाले फेस मैचिंग के माध्यम से संभावित डमी कैंडिडेट्स के मामलों की पहचान में एजेंसियों को सफलता मिली है जिससे भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत हो रही है। VO-2 के अनुसार डीओआईटी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग के लिए एक अलग फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम भी तैनात किया है, जिसके जरिए संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरों का करीब 10 लाख फोटो वाले आपराधिक डेटाबेस से मिलान संभव है। इससे बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों की पहचान और निगरानी तेज हो रही है। साथ ही इस तकनीक को लावारिस शवों की पहचान के लिए भी उपयोग किया जा रहा है, अज्ञात शवों के फोटो को गुमशुदा व्यक्तियों एवं अन्य डेटाबेस से मिलान कर पहचान आसान बन रही है ताकि परिजनों तक सूचना पहुंच सके। विभाग के अनुसार सभी एआई एप्लिकेशन राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर में एयर-गैप्ड वातावरण में संचालित हो रहे हैं और ऑडिट लॉगिंग, ट्रेसबिलिटी और डेटा गोपनीयता के सुरक्षा उपाय सुनिश्चित हैं ताकि तकनीक जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ हो। राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के AI आधारित नवाचार सुशासन को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अंततः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से राजस्थान में पहचान ही जांच की नई कुंजी बनती जा रही है, जिससे डमी अभ्यर्थियों पर शिकंजा कस रहा है, अपराधियों की तलाश तेज हो रही है और लावारिस शवों की पहचान भी हो रही है। दीपक गोयल जी मीडिया जयपुर
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