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जनगणना 2027: घर-रसोई से लेकर डिजिटल जीवन तक सभी विवरण जुटेंगे
DGDeepak Goyal
Feb 07, 2026 09:30:45
Jaipur, Rajasthan
देश का हर घर...हर रसोई...हर कमरे और हर मोबाइल अब सरकार की नजर में होगा…क्योंकि भारत में शुरू हो रही है नई जनगणना और इस बार सवाल सिर्फ गिनती के नहीं…बल्कि ज़िंदगी की पूरी तस्वीर बनाने वाले हैं। आप चावल ज्यादा खाते हैं या गेहूं..आपके घर में गैस सिलेंडर है या चूल्हा...आपके फर्श पर टाइलें हैं या मिट्टी...घर में शौचालय है या नहीं...मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप सबकी होगी एंट्री। यह जनगणना सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आरक्षण से लेकर आवास और राशन तक की नीति तय करने वाली सबसे बड़ी कवायद है। 2011 के पुराने आंकड़ों से देश चल रहा था। अब होने वाली जनगणना से असली तस्वीर सामने आएगी।
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VO-1- पंद्रह साल बाद जनगणना-2027 की तैयारियों शुरू हो गई है। जिसमें प्रगणक कागज-कलम की जगह हाथों में टेबलेट लेकर फील्ड में उतरेंगे। दो चरणों में होने वाली जनगणना डिजिटलाइज्ड होगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण का काम 16 मई से 14 जून 2026 के बीच में होगा। स्व-गणना के लिए विकल्प भी 1 मई 2026 से 15 मई 2026 की समयावधि के लिए रहेगा। इस बार की जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती भर नहीं होगी। बल्कि सरकार आपके घर की रसोई से लेकर छत तक की पूरी कहानी जानना चाहती है। मई से राजस्थान में शुरू होने जा रही इस प्रक्रिया में जनगणना कर्मचारी जब दरवाजा खटखटाएगा, तो वह यह नहीं पूछेगा कि घर में कितने लोग रहते हैं, बल्कि यह भी जानना चाहेगा कि आपके घर में चावल ज्यादा पकता है या गेहूं, फर्श पर टाइलें हैं या मिट्टी, और मोबाइल-इंटरनेट आपकी जिंदगी का कितना हिस्सा बन चुका है। इस बार सरकार ने जनगणना के लिए 33 सवाल तय किए हैं। जिनका मकसद देश की असली तस्वीर को ज्यादा बारीकी से समझना है। सवालों के जरिए यह जाना जाएगा कि लोग किस तरह के घरों में रहते हैं, उनके पास कौन-कौन सी सुविधाएं हैं और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होती हैं। जनगणना कर्मचारी यह पूछेगा कि आपका मकान आपका अपना है या किराए का, उसकी छत पक्की है या कच्ची, फर्श पर सीमेंट और टाइलें हैं या अब भी कच्चा फर्श है, घर में शौचालय है या नहीं और कुल कितने कमरे हैं। सरकार दरअसल यह देखना चाहती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का असर जमीन पर कितना दिख रहा है और अभी भी कितने परिवार ऐसे हैं जिनके पास सुरक्षित पक्का घर नहीं है। इस बार रसोई भी जनगणना के दायरे में होगी। परिवार से यह पूछा जाएगा कि खाने में सबसे ज्यादा किस अनाज का उपयोग होता है। गेहूं, चावल, बाजरा या कुछ और। इसके पीछे सरकार की मंशा यह समझना है कि देश में किस खाद्यान्न की मांग ज्यादा है, ताकि भविष्य की खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति की योजनाएं उसी हिसाब से बनाई जा सकें। सिर्फ घर और भोजन ही नहीं, डिजिटल दुनिया भी अब जनगणना का हिस्सा बन गई है। यह जानकारी ली जाएगी कि घर में कितने मोबाइल फोन हैं, इंटरनेट का इस्तेमाल होता है या नहीं, और क्या लैपटॉप या कंप्यूटर मौजूद है। इससे सरकार को यह अंदाजा लगेगा कि देश का कितना हिस्सा डिजिटल सुविधाओं से जुड़ चुका है और कहां अभी भी खाई बनी हुई है।
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ये 33 सवाल पूछे जाएंगे।
-भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकारी अथवा जनगणना नंबर),मकान नंबर, मकान के फर्श में प्रमुख सामग्री, मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री, मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री,
मकान के उपयोग,मकान की हालत, मकान की हालत, परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, परिवार के मुखिया का लिंग,अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति -अन्य, मकान के स्वामित्व की स्थिति, मकान में कमरों की संख्या, परिवार में विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल का मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता, लाइट का मुख्य स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी, स्नानघर की उपलब्धता, रसोईघर, एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन, रेडियो-ट्रांजिस्टर, टेलीविजन,
इंटरनेट सुविधा, लैपटॉप-कम्प्यूटर, टेलीफोन-मोबाइल फोन-स्मार्ट फोन,साइकिल-स्कूटर-मोटरसाइकिल-मोपेड, कार-जीप-वैन,मुख्य अनाज,मोबाइल नंबर।
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VO-2- उधर ईंधन और सुविधाओं की तस्वीर भी इसी से साफ होगी। जनगणना में यह पूछा जाएगा कि परिवार के पास एलपीजी या पीएनजी गैस कनेक्शन है या नहीं। यानी चूल्हे पर अब भी लकड़ी-कोयला जल रहा है या साफ ईंधन पहुंच चुका है, यह भी सरकार के सामने आ जाएगा।
इस बार एक अहम पहलू आरक्षित वर्गों से जुड़ा डेटा भी है। परिवार के मुखिया से यह पूछा जाएगा कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या किसी अन्य वर्ग से संबंधित है या नहीं। सरकार इस जानकारी से यह आकलन करेगी कि अलग-अलग इलाकों में SC और ST की वास्तविक स्थिति क्या है, क्योंकि फिलहाल जो आंकड़े इस्तेमाल हो रहे हैं, वे 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।
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बहरहाल, आने वाली जनगणना एक तरह से हर घर की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी तस्वीर खींचेगी। यह सिर्फ यह नहीं बताएगी कि देश में कितने लोग हैं, बल्कि यह भी दिखाएगी कि वे कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और आधुनिक सुविधाओं से कितने जुड़े हैं। यही आंकड़े आगे चलकर सरकार की नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करेंगे।
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