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Ranchi834002
झारखंड क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर
KCKumar Chandan
Jan 22, 2026 13:08:22
Ranchi, Jharkhand
दावोस/रांची झारखण्ड वैश्विक साझेदारी, समावेशन और सतत विकास के साथ ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ के लिए एक जिम्मेदार वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा दावोस/रांची मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सुगम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच युवा झारखंड ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इंडिया पवेलियन में आयोजित एक उच्चस्तरीय वैश्विक राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल्स के लिए अपनी दीर्घकालिक और दूरदर्शी रणनीति प्रस्तुत की। “झारखंड की क्रिटिकल मिनरल्स अवसर: भूविज्ञान से मूल्य सृजन तक” Jharkhand’s Critical Minerals Opportunity: From Geology to Value Creation विषय पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में नीति-निर्माताओं, शोध संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र रहा कि खनिज-संपन्न क्षेत्र किस प्रकार पारंपरिक खनन आधारित अर्थव्यवस्थाओं से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित औद्योगिक विकास के वैश्विक केंद्र बन सकते हैं। क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र को दिशा देने की विशिष्ट स्थिति में झारखण्ड झारखंड के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि ऊर्जा असुरक्षा और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की बढ़ती वैश्विक मांग के वर्तमान दौर में क्रिटिकल मिनरल्स अब केवल औद्योगिक संसाधन नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के खनिज भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण झारखंड देश के क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र को दिशा देने की विशिष्ठ स्थिति में है। झारखंड की रणनीतिक भूमिका इस तथ्य से और अधिक सुदृढ़ होती है कि भारत सरकार द्वारा चिन्हित 24 में से 20 क्रिटिकल मिनरल्स राज्य में उपलब्ध हैं। यह स्थिति झारखंड को भारत के ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत सामग्री (एडवांस्ड मैटीरियल्स) और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से जुड़े दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के केंद्र में स्थापित करती है। उत्खनन से मूल्य सृजन की ओर बदलाव अध्‍यक्ष एवरसोर्स कैपिटल एवं भारत सरकार के पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि खनिज-समृद्ध राज्यों को कच्चे संसाधनों के निर्यात तक सीमित न रहकर स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और औद्योगिक उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे राज्य में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अगली पीढ़ी की अर्थव्यवस्था के लिए औद्योगिक पारिस्थितिक तंत्र श्री वरुण रंजन, प्रबंध निदेशक, जियाडा (JIIDCO) ने उद्योग जगत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए ने मुख्यमंत्री के विजन 2050 के अंतर्गत झारखंड की दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि झारखंड किस प्रकार उत्खनन-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर मूल्य-आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर है, जिसमें विशेष रूप से खनिज प्रसंस्करण और परिष्करण, इलेक्ट्रिक वाहन घटक, मैग्नेट और उन्नत सामग्री, तथा बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे एकीकृत औद्योगिक क्लस्टर राज्य में ही मूल्य सृजन को बनाए रखने, विनिर्माण निवेश आकर्षित करने और भारत की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सशक्त बनाने में सहायक होंगे। साझेदारी करने का आह्वान झारखंड सरकार के खनन निदेशक राहुल सिन्हा ने राज्य के क्रिटिकल मिनरल परिदृश्य का परिचय देते हुए उनके अन्वेषण और खनन को बढ़ावा देने हेतु वर्तमान सरकारी नीतियों एवं पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में एक पारदर्शी और निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया तथा देश-विदेश के निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सभी हितधारकों से इस रणनीतिक प्रयास में झारखंड के साथ साझेदारी करने का आह्वान किया। ज्ञान, कौशल और संस्थागत क्षमता कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्ज़र्वेटरी के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि केवल संसाधनों की उपलब्धता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विशेष कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और मजबूत संस्थागत क्षमताओं की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे झारखंड वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से प्रभावी रूप से जुड़ सके और खनिज संपदा को सतत आर्थिक परिणामों में परिवर्तित कर सके। वक्ताओं ने क्या कहा… बैठक में श्री डेनिस ने सतत खनिज विकास के लिए संस्थागत क्षमता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इन हाउस विश्वविद्यालय और शोध पारिस्थितिकी तंत्र, सरकारी अधिकारियों के लिए कौशल विकास और खनन व प्रसंस्करण क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले छात्रों के प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता दीर्घकालिक सफलता की नींव हैं। इंजीनियरिंग, ESG और निवेश का भरोसा DMT Group के प्रतिनिधि श्री लुकास ने खनन और क्रिटिकल मिनरल परियोजनाओं पर एक तकनीकी और इंजीनियरिंग-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने डीएमटी ग्रुप का परिचय दिया, जो 200 वर्षों से अधिक पुराने जर्मन खनन नवाचार अनुभव वाला तकनीकी और इंजीनियरिंग संगठन है। उन्होंने कहा कि निवेश निर्णय मुख्य रूप से नियामकीय स्पष्टता, घरेलू बनाम विदेशी निवेश से जुड़े रणनीतिक विकल्पों और मजबूत जोखिम-न्यूनकरण तंत्र पर निर्भर करते हैं। भूविज्ञान, प्रसंस्करण और भू-तकनीक के साथ-साथ ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अब निवेशकों के विश्वास का केंद्रीय आधार बन चुका है। वैश्विक आपूर्ति जोखिम और रणनीतिक खनिज Sain Resources Group के प्रतिनिधि श्री BEN ने वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति में अत्यधिक भौगोलिक एकाग्रता से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व के लगभग 80 प्रतिशत पोलुसाइट (सीज़ियम अयस्क) का उत्पादन सिर्फ एक खदान से होता है, जिससे global supply chains असुरक्षित बनती हैं। भारत–जर्मनी–यूरोपीय संघ: साझा चुनौतियां, साझा समाधान श्री मार्टिन ने जर्मन कंपनियों और निवेशकों के दृष्टिकोण से कहा कि भारत जर्मनी और यूरोपीय संघ एक ही नाव में सवार हैं, तीनों ही क्रिटिकल कच्चे माल के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने इसे दीर्घकाल में अस्थिर बताते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हाल ही में लागू यूरोपीय संघ के क्रिटिकल रॉ मैटीरियल्स एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन और प्रसंस्करण दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। सैटेलाइट आधारित अन्वेषण और ड्रिलिंग डेटा के लिए AI के उपयोग जैसी तकनीकों को Zukunft के लिए महत्वपूर्ण बताया। श्री मार्टिन ने भारत जर्मनी सहयोग को और गहराने की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्य-स्तरीय साझेदारियों का सुझाव दिया और कहा कि जर्मनी की संघीय संरचना और भारत की राज्य-आधारित खनन व्यवस्था के बीच मजबूत समानताएं हैं। इस संदर्भ में झारखंड को एक प्रमुख साझेदार के रूप में देखा गया। वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने बैठक के समापन में कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, खनन और प्रसंस्करण को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के लिए एक उपयुक्त और सक्षम नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियां ऐसी हों जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करें, ताकि भारत और झारखंड क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मूल्य शृंखला में प्रभावी और टिकाऊ रूप से अपनी स्थिति मजबूत कर सकें। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में शीघ्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ब्राउनफील्ड खनन परियोजनाओं की संभावनाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपयोग में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश क्रिटिकल मिनरल्स अन्य खनिजों के साथ सह-अस्तित्व (conjunction) में पाए जाते हैं, ऐसे में मौजूदा खनन क्षेत्रों का रणनीतिक विस्तार प्रारंभिक गति (early kick-start) प्रदान कर सकता है। इस अवसर पर झारखंड सरकार द्वारा “झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स: परिदृश्य और अवसर” विषय पर एक विशेष फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें राज्य की भूवैज्ञानिक क्षमता, उभरते अवसरों और निवेश संभावनाओं को रेखाक्षित किया गया। साथ ही, झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जो राज्य की खनिज संपदा, नीतिगत दृष्टि और भविष्य की रणनीति को प्रस्तुत करती है। बैठक में यह संदेश उभरकर आया कि झारखंड अपने संसाधनों, नीतिगत दृष्टि, मानव पूंजी और वैश्विक साझेदारियों के बल पर क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक दीर्घकालिक, जिम्मेदार और सतत वैश्विक केंद्र के रूप में स्वयं को स्थापित कर सकता है。
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MMMAYANK MAYANK
Mar 11, 2026 23:16:26
Balotra, Rajasthan:जिला बालोतरा लोकगीतों की धुन पर झूमे मंत्री: बालोतरा के गैर महोत्सव में केके विश्नोई और विधायक अरुण चौधरी ने लगाए ठुमके बालोतरा में डेजर्ट ट्रेडिशनल आर्ट एंड यूथ सेंटर माली-सैनी समाज द्वारा हर साल की भांति इस वर्ष भी भव्य गैर महोत्सव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित समापन समारोह में लोक संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। पिछले 22 वर्षों से आयोजित हो रहे लोक विरासत होली फाग महोत्सव के माध्यम से मारवाड़ की लोक कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस आयोजन के जरिए समाज की नई प्रतिभाओं को लोककला और परंपराओं से जोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम अब धीरे-धीरे बड़े स्तर पर आयोजित होने लगा है और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं。 लोकगीतों की धुन पर मंत्री ने लगाए ठुमके समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य मंत्री केके विश्नोई पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान जब गैर नृत्य और लोकगीतों की धुन गूंजने लगी तो मंत्री विश्नोई खुद को रोक नहीं पाए और कलाकारों के साथ मंच के सामने ठुमके लगाने लगे। इस दौरान एक नन्हे बच्चे के साथ भी उन्होंने जमकर डांस किया, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया। वहीं पचपदरा विधायक डॉ. अरुण चौधरी ने भी कलाकारों के साथ जमकर नृत्य किया। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन गैर महोत्सव के दौरान आंगी गैर, तलवार गैर, छतरी गैर, मटकी नृत्य और कालबेलिया नृत्य जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं राजस्थान के सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रकाश माली सहित लोक कलाकार जबराराम माली, राजेश माली, भंवर गायणा, खुशाल माली और नरेश माली ने पारंपरिक लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया。 बाईट:-केके विश्नोई राज्य मंत्री बाईट:-डॉ अरूण चौधरी पचपदरा विधायक बाईट:-डूंगरराम माली अध्यक्ष
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NCNITIN CHAWRE
Mar 11, 2026 23:15:57
Katni, Madhya Pradesh:कटनी के रंगनाथ नगर थाना क्षेत्र के बारगवां इलाके में चाकूबाजी की घटना को अंजाम देने वाले 6 आरोपियों में से 3 आरोपियों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है जिसमें से दो आरोपी नाबालिक हैं। रंगनाथ नगर थाना प्रभारी अरुण पाल सिंह ने बताया कि 6 युवक, जिनमें से दो नाबालिक, इलाके में युवतियों से छेड़छाड़ कर रहे थे; उनका विरोध करने पर बदमाशों ने इलाके के चार युवकों पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में चार युवक घायल हुए थे; घायलों ने बताया कि बारगवां इलाके में कुछ युवक युवतियों से छेड़छाड़ कर रहे थे। जिसका विरोध वहां मौजूद युवकों करण, सोनू, कुडिप विश्वकर्मा, गुलाम मुईन और हेमंत ने किया। नाराज होकर 6 बदमाशों ने चाकू से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और चार युवक घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां हेमंत की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जबलपुर रेफर कर दिया है; अन्य घायलों का उपचार कटनी में जारी है। घटना की सूचना मिलते ही रंगनाथ नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। इस घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को अरेस्ट किया है जिनमें से 2 नाबालिक हैं और अन्य 3 आरोपियों की तलाश जारी है; उन्हें भी जल्दी अरेस्ट किया जाएगा।
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MGMohd Gufran
Mar 11, 2026 23:15:33
Prayagraj, Uttar Pradesh:स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के खिलाफ खोला मोर्चा, धंधेबाज और ब्लैकमेलर कहे जाने पर नाराज आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी को दी चेतावनी, कहा मेरा मुंह खुल गया तो सबको पता चल जाएगा महंत नरेंद्र गिरी की कैसे मौत हुई, निर्देश युवा संत आनंद गिरी को कैसे जेल भेजवाया गया और किसे अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनना था, इतना ही नहीं आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी के तीन आश्रमों की गतिविधियों को लेकर भी गम्भीर आरोप लगाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग बटुकों का यौन शोषण करने का आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी द्वारा दिए गए बयान के बाद विवाद गहरा गया है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी को चेतावनी दी है कि वह हमारा मुंह न खुलवाए। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा है कि महंत नरेंद्र गिरी की कैसे मौत हुई और किसने कराई, एक युवा निर्दोष संत आनंद गिरी को किसने जेल भेजवाया है, किसको अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनना था, यह हमको अच्छी तरह से पता है। इतना ही नहीं आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी को लेकर कहा है कि उनके आश्रम में क्या कुछ होता है, उन्हें अच्छे से सब पता है, मेरा मुंह खुल गया तो सबको पता चल जाएगा। आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी को चेतावनी देते हुए कहा कि मेरा मुंह मत खुलवाएं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाबालिगों से दुष्कर्म किया है, सारे साक्ष्य हैं। रवींद्र पुरी को लेकर आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि आप ज्यादा नेतागिरी मत कीजिए, वरना बरेली, हरिद्वार और कनखल आश्रम में क्या होता है एक एक पोल खोल दूंगा। महिलाओं का कैसे उत्पीड़न किया जाता है और फिर पैसे के दम पर उन्हें शांत करा दिया जाता है। दरअसल उज्जैन में मीडिया से बातचीत करते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने आशुतोष ब्रह्मचारी पर ही बच्चों के उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वह निर्दोष हैं, मेडिकल जांच में कोई भी पुष्टि नहीं हुई है वह नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। इतना ही नहीं महंत रवींद्र पुरी ने आशुतोष ब्रह्मचारी को धंधेबाज और ब्लैकमेलर करार दिया। जिसके बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने महंत रवींद्र पुरी को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कई गंभीर आरोप भी महंत रवींद्र पुरी पर लगाए हैं।
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GYGAUKARAN YADU
Mar 11, 2026 19:00:36
Bemetara, Chhattisgarh:बेमेतरा जिले में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में घर-घर नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का जारी है, जिले के चार ब्लॉकों में बेमेतरा, बेरला ,साजा, नवागढ़ के हर घर में नल कनेक्शन के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। बेमेतरा में 187, बेरला में 131, साजा में 185 और नवागढ़ में 185 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत घरों की डेहरी तक पानी पहुंचाने हेतु योजनाएं बनाई गई हैं जिनमें लगभग 75 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल कर लिया गया है। योजनाओं के पूर्ण होने से ग्रामीणों की जिंदगियां खुशहाल होगी इसमें कार्य प्रगति में है लेकिन शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल करना अभी शेष है । बाइट 1 स्थानीय हितग्राही बाइट 2 स्थानीय हितग्राही बाइट 3 स्थानीय हितग्राही bाइट 4 स्थानीय हितग्राही bाइट 5 स्थानीय हितग्राही bाइट 6 प्रतिष्ठा ममगाई कलेक्टर बेमेतरा।
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KKKamal Kumar
Mar 11, 2026 19:00:23
Pakhanjur, Chhattisgarh:देश भर में सरकारें “हर घर जल” का दावा कर रही हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के पखांजूर जिले से जो तस्वीर सामने आई है, वो इन दावों की परतें उधेड़ देती है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल आपूर्ति योजना जल जीवन मिशन कोयलीबेड़ा ब्लॉक में दम तोड़ती नजर आ रही है। दावे बड़े हैं लेकिन हकीकत बेहद चौंकाने वाली। देखिए ये खास रिपोर्ट… कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक में जल आपूर्ति योजना की हकीकत सवालों के घेरे में है। बड़गाँव ग्राम पंचायत में बनी पानी टंकी से पंद्रह साल पुरानी पानी टंकी आज भी बेकार खड़ी है। जी हाँ...पंद्रह साल से। न टंकी से पानी आया…n न नलों से जल बहा…इसके बावजूद घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, नल लगाए गए,सीमेंटेड स्ट्रक्चर बनाए गए…लेकिन पानी की एक बूंद तक नहीं पहुँची। यानी पैसा बह गया, पानी नहीं। हैरानी की बात ये है कि बिना ज़मीनी निरीक्षण किए ही करीब 45 लाख रुपये पाइपलाइन विस्तार में खर्च कर दिए गए। सरकारी कागजों में योजना पूरी… लेकिन धरातल पर स्थिति शून्य। सरकारी दावे सूखे पड़े हैं और ग्रामीणों के गले भी। हालात इतने बदतर हो गए कि ग्रामीणों को खुद अपनी जेब ढीली करनी पड़ी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि योजना सही तरीके से लागू होती तो उन्हें निजी संसाधनों से पानी की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। सरकार का नारा हर घर जल लेकिन कांकेर जिले के पखांजूर में ज़मीनी सच्चाई हर घर छल बनती जा रही है। कोयलीबेड़ा ब्लॉक के कई गांवों में सरकारी जल योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। बड़गाँव हो… पाकुँलकाल हो… या हीदम, हर जगह तस्वीर लगभग एक जैसी है। पानी टंकियां बनीं, पाइपलाइन बिछाई…घर-घर नल लगाए गए…लेकिन नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं सरकारी योजना के बोर्ड जरूर लगे हैं पर नलों में पानी नहीं। कोयलीबेड़ा ब्लॉक में जल जीवन मिशन के तहत क्रेड़ा विभाग से 526 सोलर सिस्टम टंकी बनी और phe से 128 टंकी का निर्माण हुआ। अधिकांश गांवों में पानी टंकियां बनाई गईं। घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई। नल कनेक्शन भी लगाए गए। लेकिन नलों से पानी नहीं पहुँच रहा। इसका सीधा मतलब — “हर घर नल” की योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है। घर के नल बेकार पड़े हैं। मजबूरन लोग पानी टंकी के पास जाकर बर्तन और बाल्टियों में पानी भरकर ला रहे हैं। यानि सरकार ने सुविधा घर तक देने का दावा किया, लेकिन ग्रामीणों को फिर उसी पुराने तरीके से ढो-ढोकर पानी लाना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि नल तो शोपीस बन गए हैं, पानी आज भी दूर है। एंकर आउट्रो—ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन ईन सवालों का जवाब कब देता है.
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DKDebojyoti Kahali
Mar 11, 2026 18:49:39
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PSPIYUSH SHUKLA
Mar 11, 2026 18:49:26
Panna, Madhya Pradesh:केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों का बड़ा प्रदर्शन। रात 11 बजे तक कलेक्ट्रेट में 1500 किसान से अधिक धरने पर बैठे। पुरुष, महिलाएं और बच्चे भी रात में कलेक्ट्रेट परिसर में डटे। पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय डैम और रुंझ डैम से प्रभावित किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे बड़ी संख्या में किसान पन्ना कलेक्ट्रेट पहुँचना शुरू हुआ और धरने पर बैठ गए। अभी रात तक लगभग 1500 किसान परिवार कलेक्ट्रेट परिसर में डटे हुए हैं। प्रदर्शन में पुरुषों के साथ महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी खेती और मकान की जमीन अधिग्रहित कर ली गई है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और प्रति वोटर के हिसाब से पैकेज नहीं मिला। किसान पन्ना कलेक्टर से मुलाकात और आश्वासन की मांग पर अड़े हुए हैं।
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RKRupesh Kumar
Mar 11, 2026 18:48:47
Betul, Madhya Pradesh:मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से आदिवासी अधिकारों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत मिलने वाले अधिकारों के पालन की मांग को लेकर आदिवासी समाज अब खुलकर सामने आ गया है। समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि पिछले 76 वर्षों में राज्यपाल कार्यालय की ओर से आदिवासियों के हित में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। इसी को लेकर आज बैतूल में आदिवासी संगठनों ने कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। दरअसल आदिवासी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के कई वनग्रामों को जनवरी 2008 के बाद भी राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं दिया गया है। जबकि वर्ष 1980-81 में तैयार किए गए पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी, निस्तार पत्रक और अतिक्रमण पंजी के आधार पर ग्रामीणों को अधिकार मिलना चाहिए था, लेकिन आज तक उन्हें इन अधिकारों से वंचित रखा गया है। आदिवासी समाज का आरोप है कि वनग्रामों में सीमांकन और सत्यापन करने के बजाय गांव के रकबे को कम करके कार्रवाई की जा रही है। वहीं पटवारी मानचित्र और अधिकार अभिलेखों में दर्ज जंगल, पहाड़, चट्टान और घास मद की जमीनों का नियंत्रण भी अब तक ग्रामसभा और ग्राम पंचायत को नहीं सौंपा गया है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्रों में आदिवासियों के देवस्थल, धार्मिक परंपराओं और आजीविका से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थान मौजूद हैं, लेकिन इन पर सामुदायिक वन अधिकार अब तक ग्रामवासियों को नहीं दिए गए हैं। आदिवासी संगठनों की मांग है कि वनग्रामों को जल्द से जल्द राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए और ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन अधिकार सौंपे जाएं। अब देखना होगा कि प्रशासन और राज्यपाल कार्यालय इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।
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DKDeepesh Kumar
Mar 11, 2026 18:47:55
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