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हरियाणा पुलिस ने गुमशुदा लोगों के परिवारों से मिलाने में बड़ी सफलता हासिल की
VRVIJAY RANA
Jan 23, 2026 04:21:13
Chandigarh, Chandigarh
स्टेट क्राइम ब्रांच में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए गठित विशेष सेल को और प्रभावी बनाया जाएगा, डीजीपी ने दिए निर्देश
चंडीगढ़, 22 जनवरी। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने गुमशुदा लोगों की तलाश को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हरियाणा पुलिस स्टेट क्राइम ब्रांच के विशेष सेल को आवश्यक दिशा निर्देश दिए है। यह सेल प्रदेशभर में गुमशुदा बच्चों और अन्य व्यक्तियों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार करेगी और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनकी त्वरित तलाश सुनिश्चित करेगी। पुलिस महानिदेशक द्वारा यह भी निर्देश दिए गए है कि गुमशुदा व्यक्तियों की तस्वीरें उच्च गुणवत्ता की हों, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को और अधिक सक्रिय किया जाए तथा इस अभियान में अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने दोहराया कि हरियाणा सरकार इस मुद्दे को लेकर बेहद गंभीर है और यह उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। हरियाणा पुलिस ने पिछले एक वर्ष में 17,000 से अधिक बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया और हजारों घरों में फिर से खुशियाँ लौटाईं।
जिला पुलिस का मानवीय चेहरा, 17 हजार से अधिक परिवारों को मिला उनका खोया हुआ अपना
गौरतलब है कि हरियाणा पुलिस ने पिछले एक वर्ष में संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय देते हुए 13,529 वयस्कों को उनके परिवारों से मिलवाया। इनमें 4,130 पुरुष और 9,399 महिलाएं शामिल हैं, जो विभिन्न कारणों से अपने घरों से बिछड़ गए थे। इसी मानवीय अभियान के तहत पुलिस ने मासूम बचपन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 3,122 नाबालिगों को सुरक्षित उनके माता-पिता तक पहुँचाया, जिनमें 1,113 लड़के और 2,009 लड़कियां शामिल रहीं। इसके साथ ही समाज के वंचित वर्ग का सहारा बनते हुए पुलिस ने 184 बच्चों का पुनर्वास कराया, जो भीख मांगने की मजबूरी में फंसे थे, तथा 191 बाल मजदूरों को रेस्क्यू कर उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाई।
स्टेट क्राइम ब्रांच की मुहिम, बच्चों को भीख और मजदूरी की मजबूरी से निकाला
प्रदेशभर में स्टेट क्राइम ब्रांच के अंतर्गत कार्यरत 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने मानव तस्करी और गुमशुदगी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की। बीते एक वर्ष में इन यूनिट्स ने 700 वयस्कों—277 पुरुष और 423 महिलाों—तथा 538 नाबालिगों—345 लड़के और 193 लड़कियों—को उनके परिवारों से मिलवाया। स्टेट क्राइम ब्रांच की इस मुहिम की बड़ी उपलब्धि बच्चों को भीख मांगने की मजबूरी और बाल श्रम से बाहर निकालना रही, जिसके तहत 1,473 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, जबकि 2,313 बाल मजदूरों को मजदूरी की बेड़ियों से आजाद कर बेहतर भविष्य की राह दिखाई गई,
ऑपरेशन मुस्कान’ से 1798 परिवारों में लौटी खुशियाँ
पिछले वर्ष मार्च माह में चलाए गए ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने मानवीय पुलिसिंग की सशक्त मिसाल पेश की। इस अभियान के तहत पुलिस ने गुमशुदा लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के साथ-साथ बाल श्रम और भीख मांगने की मजबूरी में फँसे सैकड़ों बच्चों को भी सुरक्षित जीवन की ओर लौटाया| अभियान के दौरान जिला पुलिस ने 1079 वयस्कों और 511 नाबालिगों को उनके परिवारों से मिलवाया। वहीं, एंटी ह्यूमन ट्रैफिंग यूनिट (AHTU) ने भी 117 वयस्कों और 91 नाबालिगों को सुरक्षित घर पहुँचाया। इस तरह कुल 1798 लोग अपने अपनों से फिर मिल सके। पुलिस ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से 437 शेल्टर होम्स की जांच की और सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर 563 बच्चों को रेस्क्यू किया। इसके अलावा, 890 बाल मजदूरों को शोषण से मुक्त कराया गया।
सफलता की कहानियां : महाराष्ट्र से लौटी उम्मीद, 25 साल बाद दुर्गा की घर वापसी
यमुनानगर एएचटीयू की संवेदनशीलता, सूझबूझ और निरंतर प्रयासों ने वर्षों से अधूरी पड़ी एक कहानी को आखिरकार हकीकत का रूप दे दिया। 25 वर्ष पहले मात्र आठ साल की उम्र में महाराष्ट्र से बिछड़ी दुर्गा देवी, जो करनाल के बाल भवन में पली-बढ़ीं और वहीं उनका जीवन आगे बढ़ा, आखिरकार अपने परिजनों से मिल सकीं। बचपन की एक धुंधली-सी याद—दो रेलवे फाटकों के बीच स्थित एक मंदिर—को आधार बनाकर पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से सुराग जोड़े और भंडारा जिले में उनके परिवार तक पहुँच बनाई। वीडियो कॉल पर जैसे ही दुर्गा ने उस मंदिर को पहचाना, 25 वर्षों का लंबा इंतजार समाप्त हो गया और अपनों से मिलने की खुशी उनकी आँखों में छलक उठी।
“सबको मिलवाते हो, मेरा परिवार भी ढूंढ दो”—22 साल बाद बेटे की आस हुई पूरी
पंचकूला एएचटीयू की पहल से गाजियाबाद के चिल्ड्रन होम में पली एक उम्मीद को आखिरकार मंज़िल मिल गई। सात साल की उम्र में गुम हुए अमित के पास अपने परिवार की बस कुछ ही यादें थीं—पिता का नाम जग्गू, माता का नाम नीता और ‘बाला चौक’। इन्हीं सीमित संकेतों को जोड़ते हुए पुलिस ने धैर्य और निरंतर प्रयासों के साथ 22 साल बाद उस बेटे को उसकी माँ से मिलवाया। यह मिलन केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि विश्वास, प्रतीक्षा और पुलिस की मानवीय संवेदना की एक सशक्त जीत बनकर सामने आया। हरियाणा पुलिस की यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब संवेदना के साथ संकल्प जुड़ता है, तो वर्षों की दूरी भी सिमट जाती है और टूटे रिश्तों में फिर से जीवन लौट आता है
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