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राजस्थान रोडवेज Buson ke beema se claim bhar ghatega, peediton ko jald muawza

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी लोकेशन- जयपुर फीड- 2सी हैडर- - अब रोडवेज बसों का होगा बीमा! - सड़क दुर्घटना के मामलों से परेशान रोडवेज - रोडवेज प्रशासन ने की बीमा कराने की तैयारी - हालांकि स्टेट ट्रांसपोर्ट को रहती है बीमा से छूट - लेकिन इन दिनों फर्जी केसेज की बढ़ी संख्या - बढ़ते क्लेम के बोझ के चलते होगा निर्णय एंकर राजस्थान रोडवेज की बसें जल्द ही बीमा के दायरे में आ सकती हैं। राजस्थान रोडवेज प्रशासन अब अपनी बसों का बीमा कराने को लेकर निर्णय लेने जा रहा है। इससे फायदा यह होगा कि रोडवेज बसों के दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा मिल सकेगा। वहीं रोडवेज प्रशासन को भी अनाधिकृत केसेज से राहत मिल सकेगी। यह रिपोर्ट देखिए- वीओ- 1 राजस्थान रोडवेज प्रशासन को इन दिनों अनाधिकृत सड़क दुर्घटनाओं के मामलों से रूबरू होना पड़ रहा है। रोडवेज के चालक-परिचालक किसी भी तरह की दुर्घटना से इनकार करते हैं, लेकिन अन्य व्यक्ति रोडवेज बस से दुर्घटना होना बताते हैं। ऐसे में बसों से दुर्घटना नहीं होने के बावजूद भी रोडवेज के खाते में दुर्घटना के केस जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए रोडवेज प्रशासन पर दुर्घटनाओं में दिए जाने वाले क्लेम का भार बढ़ रहा है। दरअसल अभी तक रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा नहीं करवाता है। केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1988 और केन्द्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में स्टेट ट्रांसपोर्ट्स को बीमा कराने में छूट मिली हुई है। नियम 146 के बिन्दु संख्या 3 और 4 में स्टेट ट्रांसपोर्ट के वाहनों को बीमा करवाने से छूट मिली हुई है। ऐसे में केवल राजस्थान रोडवेज ही नहीं, देश के लगभग सभी राज्यों की रोडवेज को बीमा मुक्त किया हुआ है। ऐसे में जब भी कोई दुर्घटना पीड़ित एमएसीट कोर्ट में रोडवेज के विरुद्ध मुकदमा दायर करते हैं। फैसले में क्लेम की राशि राजस्थान रोडवेज प्रशासन को ही चुकानी पड़ती है। इससे राजस्थान रोडवेज की विधि शाखा, डिपो प्रबंधन का केसेज को लेकर श्रम व्यय होता है, साथ ही आर्थिक रूप से बोझ भी बढ़ रहा है। Gfx In दुर्घटना केसेज को लेकर क्या स्थिति ? - राजस्थान रोडवेज के विरुद्ध करीब 10500 न्यायिक केस लंबित - इनमें से करीब 3700 केस विभिन्न दुर्घटनाओं के क्लेम से जुड़े हुए - सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ रही है रोडवेज दुर्घटना केसेज की संख्या - इन दिनों मिलीभगत से भी दर्ज कराए जा रहे हैं इस तरह के केसेज - रोडवेज प्रशासन को करना पड़ता है इन मामलों में भुगतान - प्रति केस औसतन 15 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ रहा - हर माह औसतन ढाई करोड़ रुपए का क्लेम देना पड़ रहा - इस तरह सालाना करीब 30 करोड़ तक हो सकता है आर्थिक भार - जबकि बसों का बीमा कराने पर आर्थिक भार हो सकता है कम Gfx Out वीओ- 2 रोडवेज प्रशासन के विरुद्ध बढ़ते केसेज के चलते रोडवेज प्रशासन को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। रोडवेज प्रशासन को डिपो स्तर पर वकील हायर करने पड़ते हैं। हैड ऑफिस से डिपो तक जवाबदेही होती है। वहीं लीगल सेक्शन का खर्च भी बढ़ जाता है। रोडवेज सूत्रों की मानें तो बहुत सारे फर्जी केस बनाकर रोडवेज के नाम से डाल दिए जाते हैं। जिनमें मिलीभगत से क्लेम पास करवाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में अब रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा करवाने को लेकर तैयारी कर रहा है। इसके तहत रोडवेज की प्रत्येक बस का बीमा होने पर क्लेम से जुड़ी सभी जिम्मेदारी बीमा कम्पनी की होंगी। रोडवेज प्रशासन को उम्मीद है कि इससे न केवल उनके क्लेम खर्च में कमी आएगी, साथ ही दुर्घटना पीड़ितों को भी समयबद्ध तरीके से क्लेम राशि मिल सकेगी।
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पानीपत में NIA रेड: फंडिंग एंगल पर पूछताछ

Panipat, Haryana:पानीपत में NIA की रेड चंडीगढ़ से पहुंची NIA टीम ने खंगाले दस्तावेज और मोबाइल फंडिंग एंगल की चर्चा संदिग्ध लेनदेन की जांच में जुटी एजेंसी साढ़े तीन घंटे चली पूछताछ पानीपत। शहर की किशनपुरा चौकी क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब चंडीगढ़ से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मंजीत सैनी के घर पहुंची। टीम ने सुबह करीब 5 बजे कार्रवाई शुरू की और लगभग साढ़े तीन घंटे तक घर में पूछताछ एवं जांच की। जानकारी के अनुसार NIA अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से विभिन्न पहलुओं पर सवाल-जवाब किए और मोबाइल फोन व कुछ जरूरी दस्तावेजों की जांच की। जांच के बाद टीम कुछ दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने साथ ले गई। डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने बताया कि NIA की टीम जांच के सिलसिले में आई थी, लेकिन मामले के संबंध में एजेंसी की ओर से कोई विशेष जानकारी साझा नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार जांच किसी संदिग्ध फंडिंग या वित्तीय लेनदेन से जुड़ी हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूछताछ के दौरान एक हजार रुपये की मोबाइल ट्रांजैक्शन को लेकर भी जानकारी ली गई। परिवार के सदस्य ने बताया कि यह लेनदेन उनके भाई के मेडिकल स्टोर पर हुआ था और इसी संबंध में अधिकारियों ने पूछताछ की। परिवार के अनुसार जांच के दौरान करीब चार-पांच अधिकारी मौजूद थे और उनके साथ स्थानीय पुलिस भी थी। पूछताछ करीब दो से ढाई घंटे चली। परिवार का कहना है कि जांच में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली और न ही किसी व्यक्ति को अपने साथ ले जाया गया। फिलहाल NIA की कार्रवाई को लेकर इलाके में चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि एजेंसी की ओर से मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बताया जा रहा है आरोपी दवा कारोबार से जुड़ा है
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दयारा ट्रेक से लापता बबीता पांडे: खोज 11वें दिन भी जारी, अभी सुराग नहीं

barahat, Uttarkashi, Uttarakhand:स्लग -दयारा ट्रेक से लापता बबीता पांडे की खोजबीन 11 वें दिन भी जारी,नहीं मिला कोई सुराग रिपोर्ट- हेमकांत नौटियाल उत्तरकाशी एंकर-उत्तरकाशी जनपद के प्रसिद्ध दयारा ट्रेक से लापता उत्तराखंड रामनगर निवासी बबिता पांडे की खोजबीन 11 वें दिन भी जारी है।सर्च टीमों के द्वारा लापता युवती की तलाश युद्धस्तर पर की जा रही है।पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय के निर्देश पर में लापता युवती की खोजबीन के लिए पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार एवं पुलिस उपाधीक्षक बडकोट चंचल शर्मा के नेतृत्व में पुलिस, NDRF, SDRF, ITBP, वन विभाग, नेहरु पर्वतारोहण संस्थान,आपदा प्रबन्ध की क्यूआरटी, डॉग स्क्वाड, एसओजी, स्थानीय लोग एवं गाइड की संयुक्त रूप से 3 टीमों का गठन कर तीन अलग-अलग रास्तों से सर्च ऑपरेशन प्रारंभ किया गया। 03 ड्रोन टीम को भी सर्चिंग में लगाया गया है। सर्च टीमों मे विभिन्न एजेन्सियों के 120 से अधिक सदस्य शामिल है। जिनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों एवं अलग-अलग दिशाओं, ट्रैक मार्गों, जंगलों, खाइयों, गदेरों, झाड़ियों तथा अन्य संभावित स्थानों पर सघन कॉम्बिंग व तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। वही मामले में पूर्व ब्लाक प्रमुख भटवाड़ी विनीता रावत ने कहा है कि सोशल मीडिया पर दयारा ट्रैक के बारे में विभिन्न अफवाएं फैलाई जा रही है जो कि गलत है क्षेत्र में यह पहली घटना हुई हम सभी लोग लापता युवती की सकुशल होने की कामना करते हैं। बाइट - विनीता रावत पूर्व ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी उत्तरकाशी
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सीवान महाराजगंज में अतिक्रमण हटाओ; बुलडोजर से कब्जे हटे, जाम- जलजमाव में राहत

Siwan, Bihar:एंकर सीवान के महाराजगंज में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया है।इस कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया।शहर में जलजमाव और लगातार लग रहे ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यह बड़ी कार्रवाई की गई।महाराजगंज नगर पंचायत क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बुलडोजर चलाया गया।प्रशासनिक अधिकारियों और नगर पंचायत की टीम ने विभिन्न इलाकों में पहुंचकर नालों और सड़क किनारे पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया।बुलडोजर कार्रवाई से पहले नगर पंचायत की ओर से पूरे शहर में माइकिंग कर अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी गई थी। लोगों से स्वयं अतिक्रमण हटाने की अपील की गई थी, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की।फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई से शहरवासियों को जाम और जलजमाव की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बाइट: डॉ. विपिन कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत महाराजगंज
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