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90 साल पुरानी उम्मेद उद्यान की बदहाली: ट्रैक टूटे, पानी-सफाई संकट के बीच जोधपुर का दिल रो रहा

Jodhpur, Rajasthan:नोट- दो वॉक्र थ्रू और सात आठ लोगो की बाइट 90 साल का उम्मेद उद्यान,कभी फूलों की खुशबू से महकता था जोधपुर का दिल, अब कचरे और बदहाली से बेहाल 1935 में महाराजा उम्मेद सिंह ने शहर के हृदय स्थल में करवाया था निर्माण, आज टूटे ट्रैक, सूखे हिस्से, गंदगी और आवारा कुत्तों ने बिगाड़ी सूरत जोधपुर। शहर के बीचोंबीच स्थित उम्मेद उद्यान यानी पब्लिक पार्क कभी जोधपुर की खूबसूरती और शान का प्रतीक हुआ करता था। वर्ष 1935 में तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने शहर के हृदय स्थल में इस उद्यान का निर्माण करवाया था। पार्क के साथ लाइब्रेरी और संग्रहालय की स्थापना भी की गई थी। कभी गुलाब और मोगरे के फूलों की खुशबू से महकने वाला यह परिसर दशकों तक शहरवासियों के साथ आसपास के जिलों से आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। लेकिन करीब 90 साल बाद यही ऐतिहासिक उद्यान अब अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। कभी चिड़ियाघर देखने उमड़ती थी भीड़ उम्मेद उद्यान की पहचान केवल हरियाली और खूबसूरत फूलों तक सीमित नहीं थी। यहां चिड़ियाघर भी हुआ करता था, जिसमें विभिन्न प्रजातियों के जानवर मौजूद थे। यही वजह थी कि जोधपुर के अलावा आसपास के जिलों से आने वाले लोग भी पब्लिक पार्क और चिड़ियाघर का भ्रमण करने पहुंचते थे। परिवारों के लिए यह पूरा परिसर मनोरंजन और पर्यटन का प्रमुख केंद्र था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद चिड़ियाघर को माचिया सफारी पार्क में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद उम्मेद उद्यान की रौनक धीरे-धीरे कम होती चली गई। आज यहां उम्मेद संग्रहालय और लाइब्रेरी तो हैं, लेकिन कभी हजारों लोगों को आकर्षित करने वाले इस उद्यान की हरियाली और व्यवस्थाएं लगातार कमजोर होती गईं। सुबह की सैर में अब हरियाली से ज्यादा दिखते हैं कचरे के ढेर आज भी सुबह के समय बड़ी संख्या में शहरवासी यहां मॉर्निंग वॉक, व्यायाम और जॉगिंग के लिए पहुंचते हैं। बुजुर्गों से लेकर महिलाओं तक की रोजाना की दिनचर्या का यह पार्क हिस्सा है। लेकिन लोगों का कहना है कि पार्क में कदम रखते ही उन्हें हरियाली और साफ-सफाई के बजाय कई जगह कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। कहीं सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है तो कहीं कचरा पड़ा हुआ है। पार्क के अलग-अलग हिस्सों में गंदगी के कारण वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस उद्यान को जोधपुर की ऐतिहासिक पहचान और शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में गिना जाता है, उसकी ऐसी हालत आखिर क्यों है? कहीं ट्रैक टूटा, कहीं जमीन बनी बंजर उम्मेद उद्यान की बदहाली का सबसे बड़ा उदाहरण यहां का वॉकिंग ट्रैक है। जगह-जगह से ट्रैक उखड़ा हुआ है। कई स्थानों पर रास्ता इतना खराब है कि लोगों को संभलकर चलना पड़ता है। सुबह सैर करने आने वाले बुजुर्गों के लिए टूटा हुआ ट्रैक परेशानी का कारण बन रहा है। पार्क के कई हिस्सों में पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से जमीन बंजर नजर आती है। जहां कभी हरी घास और फूलों की क्यारियां आकर्षण का केंद्र हुआ करती थीं, वहां आज सूखी और खाली जमीन दिखाई देती है। हरियाली के अभाव में उद्यान की खूबसूरती भी प्रभावित हुई है। महिलाएं कहा- पानी, सफाई और सुरक्षा तीनों बड़ी समस्या उद्यान में मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाली महिलाओं ने व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि पार्क में सबसे बड़ी समस्या पानी की है। पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण गार्डन हरा-भरा नहीं रह पा रहा है। महिलाओं ने यह भी बताया कि कई जगह आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं। कहीं कीचड़ और गंदगी है तो कहीं गुटखे की पीक से दीवारें और रास्ते खराब हैं। महिलाओं के मुताबिक पार्क में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड होने से वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती हैं, लेकिन गार्ड की संख्या कम होने से कई बार असहज स्थिति बनती है। उनका कहना है कि पार्क को केवल साफ करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसे व्यवस्थित तरीके से विकसित कर हरियाली बढ़ाने, पर्याप्त प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। महिलाओं का वॉक थ्रू बुजुर्गों की चिंता- रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा उम्मेद उद्यान में नियमित रूप से सैर करने वाले बुजुर्गों का कहना है कि पार्क के संरक्षण और रखरखाव के लिए समिति भी सक्रिय है, लेकिन इसके बावजूद कई समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो जाता है। ऐसे लोगों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। उनका कहना है कि यदि पार्क में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाई जाए और नियमित निगरानी हो तो लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। बावड़ियां भी बदहाल, संरक्षण के अभाव में ऐतिहासिक धरोहर पर संकट उम्मेद उद्यान केवल एक गार्डन नहीं है, बल्कि अपने भीतर ऐतिहासिक महत्व की कई चीजें समेटे हुए है। यहां मौजूद बावड़ियां भी इस परिसर की विरासत का हिस्सा हैं। लेकिन रखरखाव के अभाव में इनका भी स्वरूप खराब होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐतिहासिक धरोहरों का समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इनके महत्व और मूल स्वरूप से वंचित हो सकती हैं। नगर निगम को उद्यान की हरियाली के साथ-साथ यहां मौजूद ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। निर्माण सामग्री पड़ी, हटाने की भी नहीं हुई व्यवस्था पार्क के कुछ हिस्सों में निर्माण सामग्री भी पड़ी दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर सामग्री तो पहुंचा दी जाती है, लेकिन काम पूरा होने के बाद उसे हटाने और क्षेत्र को व्यवस्थित करने में लापरवाही बरती जाती है। ऐसी सामग्री से न केवल पार्क का सौंदर्य प्रभावित होता है, बल्कि सुबह घूमने आने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है। आवारा कुत्तों ने बढ़ाई परेशानी, मॉर्निंग वॉक करने वालों में डर उद्यान में आवारा कुत्तों की मौजूदगी भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। मॉर्निंग वॉक करने वालों का कहना है कि कई बार कुत्ते अचानक पीछे दौड़ पड़ते हैं। इससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों में डर बना रहता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम को पार्क के भीतर आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। सिर्फ सफाई और हरियाली ही नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी पार्क प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए। जहरिले पौधों को हटाने की मांग उद्यान में लगाए गए कुछ ऐसे पौधों को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने इन पौधों की पहचान कर आवश्यक होने पर उन्हें हटाने और उनकी जगह उपयोगी एवं सुरक्षित पौधे लगाने की मांग की है। लोग चाहते हैं कि पार्क में स्थानीय जलवायु के अनुकूल ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएं, जो कम पानी में भी पनप सकें और पूरे परिसर को हरा-भरा बना सकें। करोड़ों का बजट, फिर भी सवालों के घेरे में रखरखाव स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब इस ऐतिहासिक उद्यान के विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए या बजट निर्धारित किया गया, तो उसका असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता? लोग बताते हैं कि पार्क की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर विकास के लिए जारी धनराशि का कितना हिस्सा वास्तविक रूप से उद्यान की हरियाली, ट्रैक, पानी, सफाई और सुरक्षा पर खर्च हुआ। कर्मचारियों की कमी से रखरखाव प्रभावित उद्यान में काम करने वाले नगर निगम कर्मचारियों का भी कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्थाओं को संभालना मुश्किल हो रहा है। एक कर्मचारी ने बताया कि वह करीब दो महीने पहले यहां आया है और अपनी ओर से व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास कर रहा है। उसका कहना है कि पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण हर हिस्से का नियमित रखरखाव संभव नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में नगर निगम को पत्र लिखकर पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। 90 साल पुरानी विरासत को फिर चाहिए वही रौनक उम्मेद उद्यान ने जोधपुर के करीब नौ दशक के बदलाव को अपनी आंखों से देखा है। महाराजा उम्मेद सिंह के दौर में स्थापित यह उद्यान कभी शहर के बीचोंबीच खूबसूरती, हरियाली और मनोरंजन का बड़ा केंद्र था। यहां गुलाब और मोगरे की खुशबू थी, हरियाली थी, चिड़ियाघर था और परिवारों की चहल-पहल थी। आज चिड़ियाघर माचिया सफारी पार्क पहुंच चुका है और उद्यान के पास लाइब्रेरी व संग्रहालय जैसी महत्वपूर्ण धरोहरें तो हैं, लेकिन गार्डन की मूल पहचान कमजोर पड़ती जा रही है। शहरवासियों की मांग साफ है कि उम्मेद उद्यान को सिर्फ एक सामान्य पार्क के तौर पर नहीं देखा जाए। यह जोधपुर के इतिहास का हिस्सा है। इसकी हरियाली लौटाई जाए, टूटे वॉकिंग ट्रैक दुरुस्त किए जाएं, पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो, सफाई नियमित हो, कचरा हटाया जाए, सुरक्षा गार्ड बढ़ाए जाएं और असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखी जाए। अगर इन व्यवस्थाओं पर गंभीरता से काम हो तो शहर के हृदय स्थल में मौजूद उम्मेद उद्यान एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है। जिस जगह ने कभी जोधपुर आने वाले लोगों को खूबसूरत यादें दी थीं, वह आने वाली पीढ़ियों को भी वही अनुभव दे सके—इसके लिए अब केवल बजट नहीं, बल्कि प्रभावी निगरानी और ईमानदार रखरखाव की जरूरत है।
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एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव ने गंगाघाट कोतवाली का किया औचक निरीक्षण

Umesh TrivediUmesh TrivediFollow11m ago
Unnao, Uttar Pradesh:उन्नाव। मंगलवार को एसपी सिटी उन्नाव आयुष श्रीवास्तव ने कोतवाली गंगाघाट का औचक निरीक्षण कर पुलिस व्यवस्था और कार्यालयीन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसपी सिटी के अचानक कोतवाली पहुंचने से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में सक्रियता देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान एसपी सिटी ने सबसे पहले कोतवाली परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रसोईघर, कंप्यूटर रूम, शस्त्रागार, आरक्षी बैरक और कार्यालय का निरीक्षण किया। शस्त्रागार में रखे हथियारों एवं संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली, जबकि कंप्यूटर रूम और कार्यालय में अभिलेखों व कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। इसके साथ ही एसपी सिटी ने आरक्षी बैरक और रसोईघर की साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं को भी देखा। उन्होंने पुलिसकर्मियों के रहने और दैनिक उपयोग से जुड़ी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद एसपी सिटी ने पुलिसकर्मियों के साथ अर्दली रूम किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों की समस्याओं, ड्यूटी व्यवस्था और कार्य संबंधी जानकारी ली। अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने तथा फरियादियों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए। एसपी सिटी के निरीक्षण के दौरान कोतवाली प्रभारी समेत पुलिसकर्मी मौजूद रहे। निरीक्षण के जरिए उन्होंने कोतवाली की व्यवस्थाओं, पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली और जनता से जुड़े मामलों के निस्तारण की स्थिति का जायजा लिया।
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अलवर में हाईटेंशन लाइन शिफ्टिंग पर महिलाओं का विरोध, पुलिस जुटी स्थिति संभालने

Alwar, Rajasthan:घर के आगे 33 हजार वोल्ट की लाइन शिफ्टिंग का विरोध, तनाव के बीच पुलिस तैनात अलवर के अरावली विहार थाना क्षेत्र में रूपबास रोड पर बिजली की हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने को लेकर विवाद गहरा गया। विद्युत विभाग की ओर से घरों के आगे पोल लगाकर बिजली लाइन बिछाने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। बड़ी संख्या में महिलाएं और लोग मौके पर पहुंच गए और काम रुकवाने की मांग करने लगे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कई थानों का पुलिस जाप्ता मौके पर तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों और बिजली विभाग के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद महिलाओं से समझाइश का प्रयास किया। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को मौके से दूर किया, जिसके बाद विद्युत पोल लगाने के लिए गड्ढा खोदने का काम शुरू किया गया। स्थानीय निवासी मीना सैनी, रितु सैनी सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र में तीन घरों के ऊपर से पहले से 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन गुजर रही है। अब विद्युत विभाग इन लाइनों को हटाकर लोगों के घरों के सामने पोल लगाकर लाइन शिफ्ट कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों के सामने से हाईटेंशन लाइन गुजरने से बारिश के दौरान करंट और हादसे का खतरा बना रहेगा। लोगों का कहना है कि यह मुख्य मार्ग है, जहां से रोजाना स्कूल बसों के अलावा बड़े वाहन और ट्रोले गुजरते हैं। ऐसे में हाईटेंशन लाइन के कारण खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले वर्ष बिजली लाइन टूटने से एक व्यक्ति की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई थी। इसी हादसे को देखते हुए लोग दोबारा ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते, जिससे भविष्य में बड़ा हादसा हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें बिजली लाइन शिफ्ट करने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन आबादी और स्कूलों के बीच से हाईटेंशन लाइन निकालने के बजाय इसे अंडरग्राउंड किया जाए। लोगों का आरोप है कि उन्होंने बिजली लाइन बिछाने के लिए किसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मामले को लेकर अधीक्षण अभियंता यानी SE को शिकायत दी गई थी, जिसके बाद जांच के आदेश भी दिए गए। इसके बावजूद आरोप है कि हर 8 से 10 दिन में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी काम शुरू करने पहुंच जाते हैं। स्थानीय लोगों को विरोध कर बार-बार काम रुकवाना पड़ता है। विरोध बढ़ने और मौके पर तनाव की स्थिति बनने के बाद पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारी हालात पर नजर रखते हुए स्थानीय लोगों और बिजली विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल मौके पर पुलिस जाप्ता मौजूद है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और विद्युत विभाग से मांग की है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक लाइन शिफ्टिंग का काम रोका जाए। साथ ही आबादी, स्कूलों और मुख्य मार्ग की सुरक्षा को देखते हुए हाईटेंशन लाइन को अंडरग्राउंड करने का विकल्प अपनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
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सरिस्का के बाला किला में ST-2302 बाघिन और शावक दिखे, पर्यटक रोमांचित

Alwar, Rajasthan:सरिस्का के बाला किला क्षेत्र में दिखी बाघिन ST-2302, शावकों संग नजर आई तो रोमांचित हुए पर्यटक अलवर। सरिस्का के बफर जोन में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए रोमांचित कर देने वाला नजारा सामने आया। अलवर बफर रेंज के चोड़ की होड़ी-अंधेरी वन क्षेत्र में बाघिन ST-2302 अपने शावकों के साथ नजर आई। प्राकृतिक माहौल में बाघिन और शावकों को विचरण करते देख मौके पर मौजूद पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिला। बाला किला क्षेत्र में अचानक बाघिन के दीदार ने पर्यटकों की नजरें थाम दीं। जंगल के बीच बाघिन और उसके शावकों की स्वाभाविक गतिविधियां कैमरों में कैद हो गईं। बाघिन के साथ शावकों की मौजूदगी ने इस वन्यजीव दृश्य को और खास बना दिया। जंगल की खामोशी के बीच सामने आए इस नजारे को पर्यटकों ने यादगार अनुभव बताया। सरिस्का के जंगलों में बाघों की लगातार बढ़ती मौजूदगी के बीच बाघिनों और शावकों का दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाघिनों द्वारा प्राकृतिक रूप से प्रजनन कर शावकों को जन्म देना सरिस्का में बाघों के बढ़ते कुनबे और अनुकूल वन्यजीव वातावरण का संकेत माना जा रहा है। बाला किला क्षेत्र में ST-2302 और उसके शावकों का नजर आना वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी खुशी और उम्मीद का विषय बना हुआ है। सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच इस तरह के दृश्य जंगल में वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवन और सुरक्षित वातावरण की खूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं।
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12 लाख की कार की गुणवत्ता विवाद पर अधिकारी ने शोरूम में धरना दिया

Alwar, Rajasthan:12 लाख की कार की गुणवत्ता को लेकर विवाद, प्रशासनिक अधिकारी परिवार सहित टाटा मोटर्स शोरूम में धरने पर बैठे अलवर में करीब 12 लाख रुपये की कार की गुणवत्ता को लेकर टाटा मोटर्स और ग्राहक के बीच विवाद अब धरने तक पहुंच गया है। प्रशासनिक अधिकारी दीपक शर्मा ने अपने परिवार के साथ टाटा मोटर्स के शोरूम के अंदर चटाई बिछाकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कंपनी से कार में सामने आ रही कथित खामियों का उचित समाधान करने की मांग की है। दीपक शर्मा का आरोप है कि उन्होंने टाटा मोटर्स से करीब 12 लाख रुपये की कार खरीदी थी, लेकिन गाड़ी की गुणवत्ता को लेकर उन्हें गंभीर शिकायतें हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित गुणवत्ता की कार नहीं मिली। इस संबंध में उन्होंने कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत कर समाधान की मांग की, लेकिन उनका आरोप है कि उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया。 इसी के विरोध में दीपक शर्मा अपनी कार लेकर परिवार सहित टाटा मोटर्स के शोरूम पहुंचे। उन्होंने कार को शोरूम के बाहर खड़ा किया, जिस पर शिकायत से संबंधित पोस्टर लगाए गए हैं। इसके बाद वह परिवार के साथ शोरूम के अंदर चटाई बिछाकर धरने पर बैठ गए और कंपनी से अपनी समस्या का समाधान करने की मांग करने लगे। दीपक शर्मा का कहना है कि जब तक उनकी शिकायत का उचित समाधान नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने अन्य लोगों से भी टाटा मोटर्स की गाड़ी खरीदने से पहले गुणवत्ता और शिकायतों से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देने की अपील की है। फिलहाल दीपक शर्मा के धरने के बाद टाटा मोटर्स के अधिकारी क्या कदम उठाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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अलवर में SIR विरोध: कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, नेताओं के साथ मार्च

Alwar, Rajasthan:संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग और चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में कांग्रेस अब अलवर में बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन करने जा रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने ऐलान किया है कि पार्टी की ओर से बुधवार को विरोध मार्च निकाला जाएगा। कांग्रेस ने इसे केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जनविरोध प्रदर्शन बताया कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है। कांग्रेस का विरोध मार्च अलवर के शहीद स्थल से शुरू होकर नगर निगम परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचेगा। मार्च में पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सह-प्रभारी चिरंजीव राव, सांसद संजना जाटव समेत स्थानीय विधायक, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है。
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भर्तृहरि तिराहे पर ई-रिक्शा गिरा, सुरक्षा इंतजाम पर सवाल

Alwar, Rajasthan:भर्तृहरि तिराहे पर बेकाबू ई-रिक्शा पुलिया के नीचे गिरा; ग्रामीणों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए. अलवर के माधोगढ़ गांव के भर्तृहरि तिराहे के पास मंगलवार को एक ई-रिक्शा तेजी से बिना नियंत्रण के पुलिया के नीचे गिर गया. घटना के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई और गनीमत रही कि बड़ा नुकसान नहीं हुआ. ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया काफी समय से जर्जर हालत में है और बेरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं हैं. शिलान्यास हुए सड़क निर्माण कार्यों के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ है, जिससे लोग परेशान हैं. प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने और निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग है ताकि भविष्य में बड़े हादसे से बचा जा सके.
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सरिस्का से आया बाघ थानागाजी कस्बे के पास, लोगों में दहशत

Thanagazi, Rajasthan:सरिस्का से बाहर निकला बाघ, थानागाजी कस्बे में सड़क पार करते दिखा; वाहन चालक रुके, पुलिस ने संभाला मोर्चा थानागाजी, अलवर। सरिस्का अभ्यारण्य से निकला एक बाघ मंगलवार रात थानागाजी कस्बे के नजदीक पहुंच गया। बाघ राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय थानागाजी के मार्ग से होते हुए पुलिस थाने के समीप करीब रात 9 बजे पहुंचा। इस दौरान बाघ सड़क पार करता दिखाई दिया तो वाहन चालकों ने अपने वाहन रोक दिए और बाघ का वीडियो बनाने लगे। कस्बे के नजदीक बाघ के पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को बाघ के मूवमेंट वाले क्षेत्र की ओर जाने से रोकते नजर आए। बाघ के कस्बे के आसपास होने से लोगों में भी उत्सुकता के साथ-साथ दहशत का माहौल बन गया। थानाधिकारी महावीर ने कस्बेवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जंगली जानवर का मूवमेंट है, ऐसे में मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक पर जाने वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें। सुबह भ्रमण के लिए दिन निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें और बाघ के मूवमेंट वाले क्षेत्र में जाने से बचें।
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181 हेल्पलाइन पर जल-समस्या और बिलिंग शिकायतों का तेज निस्तारण

Jaipur, Rajasthan:Anchor-प्रदेश में कहीं नल से पानी नहीं आ रहा तो कहीं प्रदूषित पानी की शिकायत है। किसी उपभोक्ता को गलत जल बिल मिला तो किसी को एक ही कनेक्शन के दो अलग-अलग खाता नंबर से बिल मिल रहे हैं। ऐसी शिकायतें सीधे जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव हेमंत कुमार गेरा के सामने पहुंचीं। गेरा ने सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 के कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने 17 शिकायतकर्ताओं से ई-जनसुनवाई के जरिए सीधे संवाद किया। इनमें 8 परिवादियों को विभाग की ओर से आंशिक राहत दी गई, जबकि शेष समाधान के लिए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जनसुनवाई में बाड़मेर के प्रताप सिंह ने पेयजल सप्लाई नहीं होने की समस्या बताई। भीलवाड़ा के राजेंद्र ने दोषपूर्ण जल बिल की शिकायत की। सवाई माधोपुर के रुपेश ने घर में प्रदूषित पानी आने का मामला उठाया। दौसा के विजय सिंह ने हैंडपंप की मरम्मत और सीकर के कमलेश कुमावत ने दो अलग-अलग खाता नंबर से बिल मिलने की शिकायत रखी। प्रमुख सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन मामलों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने अधिकारियों से कहा कि संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में लगने वाला समय कम किया जाए। लंबित मामलों की लगातार मॉनिटरिंग हो और शिकायतों का समाधान केवल तेजी से ही नहीं, गुणवत्तापूर्ण तरीके से भी किया जाए। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा कर जवाबदेही के साथ समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर विभिन्न विभागों के सचिव निर्धारित तारीखों पर 181 कंट्रोल रूम पहुंचकर शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि शिकायतकर्ता को विभागों के चक्कर लगाने के बजाय घर बैठे अपनी समस्या उच्च स्तर तक पहुंचाने और उसका समाधान पाने का अवसर मिले।
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राजस्थान में 2027 के जनगणना के दूसरे चरण में डिजिटल डाटा एंट्री शुरू

Jaipur, Rajasthan:जनगणना-2027 के दूसरे चरण में राजस्थान की आबादी की गिनती पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी। पहली बार लोगों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 10 से 24 जनवरी 2027 तक 15 दिन का सेल्फ एन्यूमेरेशन विंडो प्रस्तावित किया गया है। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी तक फील्ड कार्मिक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना करेंगे। प्रदेश में इस पूरी कवायद के लिए करीब 1.80 लाख फील्ड कार्मिकों की जरूरत होगी। जनगणना के दौरान कार्मिकों की कमी न हो, इसके लिए रिजर्व व्यवस्था भी रखी जाएगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक में दूसरे चरण की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय पर तैयारियां पूरी करने और जनगणना में लगाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनगणना कार्य निदेशक बिष्णु चरण मलिक ने बताया कि पहले चरण में राजस्थान के 1,34,091 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स में हाउस लिस्टिंग का काम पूरा किया जा चुका है। यह पूरी प्रक्रिया HLO App के जरिए की गई। इसमें भवन, मकान और परिवारों की सूची के साथ आवास की स्थिति, छत की सामग्री, पेयजल स्रोत, शौचालय और परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की गणना के साथ सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और प्रवासन से संबंधित जानकारी ली जाएगी। फील्ड कार्मिक PE Mobile App के जरिए स्मार्टफोन पर ही डेटा दर्ज करेंगे। CMMS से फील्ड वर्क की रियल टाइम मॉनिटरिंग और डेटा की गुणवत्ता की निगरानी होगी। पहले चरण में दिए गए मोबाइल नंबर के जरिए भी नागरिक सेल्फ एन्यूमेरेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। ऑनलाइन दर्ज जानकारी का बाद में सत्यापन किया जाएगा। बैठक में जनगणना के लिए आवश्यक पद समय पर भरने, करीब 1.80 लाख फील्ड कार्मिक उपलब्ध कराने और पर्याप्त रिजर्व स्टाफ रखने पर जोर दिया गया।
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पूर्णिया पुलिस ने मुसहरी में 546 लीटर विदेशी शराब बरामद, 2 तस्कर गिरफ्तार

Purnia, Bihar:पूर्णिया पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है इस क्रम में मरंगा थाने की पुलिस ने भारी मात्रा में मारंगा के मुसहरी टोला से विदेशी शराब बरामद किया। एसडीपीओ वन अभिनव पराशर ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर मरंगा थाने की पुलिस और डी आई यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुसहरी में छापेमारी कर 546 लीटर विदेशी शराब बरामद किया इस दौरान दो तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया जिसके पास से दो मोबाइल फोन एक बुलेट बाइक के अलावा एक ब्रेजा कार और पिकअप वाहन जप्त किया गया। पूर्णिया पुलिस शराबबंदी को लेकर काफी सतर्क है और लगातार छापेमारी कर रही है
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UP में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोड़े गए? आयोग ने किया स्पष्ट

Lucknow, Uttar Pradesh:कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश (प्रेस विज्ञप्ति) यूपी की वोटर लिस्ट में रहस्यमयी वोटर जोड़े जाने की सोशल मीडिया पर प्रसारित खबर भ्रामक एवं तथ्यहीन लखनऊ, 06 अक्टूबर, 2026 | प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने बताया कि कतिपय सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर यह खबर प्रसारित कर भ्रांति फैलायी गयी है कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR)-2026 के दौरान "उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोडे गये हैं." इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 का कार्य लोक प्रतिनिधित्य अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया। प्रसारित खबर में लगाए गए आरोप तथ्यहीन तथा मिथ्या धारणाओं पर आधारित होने के कारण खारिज किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के दिनांक 06-01-2026 से पूर्व गणना चरण (दिनांक 27.10.2025 से 06-01-2026 तक) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण में गणना प्रपत्रों के साथ ही 16.18 लाख फॉर्म-6 (मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए) एकत्रित किए गए थे। यह आवेदन उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण आयोजित कराने हेतु भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिये गये निर्देश दिनांक 27.10.2025 के क्रम में एकत्रित किए गए थे। आयोग के निर्देशानुसार ऐसे पात्र नागरिक जिनके नाम दिनांक 27.10.2025 अर्थात प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 प्रारम्भ होने की तिथि को विद्यमान मतदाता सूची में सम्मिलित न होने के कारण उनके गणना प्रपत्र मुद्रित नहीं हो सके थे, ऐसे लगभग 16.18 लाख पात्र नागरिकों से बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा गणना चरण के दौरान घर-घर भ्रमण के समय फार्म 6 वितरित करते हुए एकत्रित किये गये। ऐसे नागरिकों के नाम छिपाने या प्रकाशित न करने के आरोप के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और आयोग के निर्देशों के अनुसार केवल वही नाम (फार्म-6) जो दिनांक 06-01-2026 को आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के पश्चात दावा एवं आपत्ति अवधि में प्राप्त हुए थे, उनकी सूची (अर्थात फॉर्म 9) को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया गया था। इस प्रक्रिया में विधि, नियमों तथा आयोग के निर्देशों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष होने वाले संक्षिप्त पुनरीक्षण में भी आलेख्य मतदाता सूची प्रकाशन से पूर्व निर्धारित समय-सारणी के आधार पर निर्वाचक नामावली को ईआरओ नेट पर फ्रीज कर दिया जाता है, जिससे आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के पूर्व प्राप्त कतिपय फार्म 6 अनिस्तारित रह जाने अथवा ई-रोल अपडेट न होने के कारण आलेख्य मतदाता सूची में सम्मिलित होने से छूट जाते हैं, जिनका निस्तारण दावे एवं आपत्ति अवधि में करते हुए अन्तिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। उन्होंने बताया कि फॉर्म 6 स्वीकार किए जाने के प्रतिशत के संबंध में प्रसारित यह खबर बिना किसी तार्किक आधार के मात्र मनमानी कल्पना पर आधारित है। फॉर्म को स्वीकार करने के लिए किसी खास प्रतिशत का पालन करने का कोई निश्चित फॉर्मूला अथवा तर्क नहीं है। नियमानुसार विहित प्रक्रिया का पालन करने के पश्चात ही फॉर्म 6 स्वीकार किया जाता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 का कार्य विधि के अनुसार, पारदर्शी और सहभागी रूप से सभी राजनैतिक दलों की सक्रिय भागीदारी के साथ सम्पन्न कराया गया। उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण के संबंध में अभी तक किसी भी राजनैतिक दल अथवा व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया गया है。
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अयोध्या की श्रीराम बारात मिथिला में जनक महल के साथ धूमधाम से निकली

Agra, Uttar Pradesh:06 oct आगरा आगरा उत्तर भारत की ऐतिहासिक श्रीराम बारात में एक तरफ जहां अयोध्या की भव्यता दिखी तो वही दुसरी ओर प्रभु श्री राम अपने तीनों भाइयों के साथ भव्य बारात लेकर माता जानकी को ब्याहने मिथिला नगरी बने भावना स्टेट में सजे भव्य जनक महल पहुंचे श्रीराम लीला कमेटी की ओर से हर बार प्रभु श्रीराम की बारात को भव्यता देते हुए पिछले 149 सालों से आयोजन किया जा रहा है,इस नर भी प्र हु श्रीराम की बारात की शुरुआत मनकामेश्वर नाथ मंदिर से प्रभु श्रीराम और उनके तीनों भाइयों की कमेटी पदाधिकारियों और अध्यक्ष एवं भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ,केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल,कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय,राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान सहित पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार,डीएम आगरा मनीष बंसल ने सामूहिक रूप से आरती उतारकर बारात की शुरुआत की,प्रभु श्रीराम की बारात में 150 से ज्यादा झांकिया शामिल रही जिसमें समाज को संदेश देती झांकियां जिसमें महिला को मेहंदी सिर्फ महिलाओं से लगवाने,विद्युत शवदाह गृह का प्रयोग करने,भारत माता की झांकी सहित,उज्जैन के महाकाल,करौली माता,श्रीनाथ जी और राधा कृष्ण की झांकियां प्रमुख रही,इस दौरान 15 किलो मीटर क्षेत्र में भ्रमण के लिए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए वही दूसरी ओर सिकंदरा क्षेत्र में बनी मिथिला नगरी में जनक महल को भी नेपाल के जनक महल की तर्ज पर तैयार किया गया,प्रभु श्रीराम की बारात के आगमन से पहले माता जानकी डोले में सवार होकर क्षेत्र भ्रमण पर निकली और भक्तों को दर्शन दिए, प्रभु श्रीराम बारात और जनकपुरी देखने लाखों की संख्या में भक्त मौजूद रहे जो इस उत्तर भारत की ऐतिहासिक राम बारात और जनकपुरी के साक्षी बने बाइट प्रो एसपी सिंह बघेल/केंद्रीय राज्यमंत्री बाइट बबीता चौहान/अध्यक्ष राज्य महिला आयोग बाइट पुरुषोतम खंडेलवाल/अध्यक्ष रामलीला कमेटी/भाजपा विधायक
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