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BTM मिल से दूषित पानी, नदी में मछलियों की मौत; ग्रामीण बोले प्रदूषण रोकें

AOAjay OjhaJust now
Banswara, Rajasthan:जिला - बांसवाड़ा विधानसभा- बांसवाड़ा लोकेशन - बांसवाड़ा एंकर - बांसवाड़ा शहर के दाहोद मार्ग पर स्थित BTM मिल से प्राकृतिक नाले में छोड़े जा रहे कथित दूषित पानी के कारण दाहोद मार्ग पर स्थित नदी ( प्राकृतिक नाले )में सैकड़ों मछलियों की मौत का मामला सामने आया है। जी हा यह हम नहीं स्थानीय ग्रामीणों ने यह आरोप लगाया है, ग्रामीणों ने बताया की इस गंदे पानी के कारण नदी किनारे बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां दिखाई देने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मिल से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे नाले के माध्यम से नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ा और मछलियां मरने लगीं। घटना की सूचना ग्रामीणों ने मत्स्य पालन विभाग को दी। वहीं कई लोग मरी हुई मछलियों को कट्टों में भरकर ले जाते नजर आए। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और लोगों ने BTM मिल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रदूषण पर रोक नहीं लगी तो नदी का जल और जलीय जीव पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। वीओ - मछली मरी हुई बाइट - कृष्णपाल सिसोदिया - स्थानीय निवासी
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जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की गुंडागर्दी, मरीज के साथ व तीमारदारों से मारपीट

AdityaAdityaFollow5m ago
Orai, Uttar Pradesh:स्लग: राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की गुंडागर्दी, मरीज के साथ व तीमारदारों से मारपीट एंकर: जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कथित गुंडागर्दी का मामला सामने आया है। इलाज कराने पहुंचे मरीज और उसके परिजनों के साथ मामूली कहासुनी पर डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ द्वारा जमकर मारपीट किए जाने का आरोप लगा है। पूरी घटना कैमरे में कैद बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बीजेपी सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा द्वारा त्वरित उपचार के लिए किए गए फोन कॉल के बाद मेडिकल कॉलेज का स्टाफ भड़क गया। आरोप है कि विधायक से बात करवाने को लेकर विवाद हुआ और तीमारदार का फोन डॉक्टरों ने फेंक दिया मौके पर मौजूद मरीज के तीमारदारों के साथ पुलिस के सामने ही मारपीट की गई। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला डाल दिया गया, जिससे देर रात तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। जांच के लिए पहुंची पुलिस के सामने जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी गेट पर भी ताला जड़ दिया। साथ ही इस घटनाक्रम का वीडियो बना रहे स्थनीय पत्रकार से भी जूनियर डॉक्टरों ने बदसलूकी की और उसका मोबाइल छीनने की भी कोशिश की। मारपीट में घायल तीमारदार को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित परिजनों ने पुलिस को पूरे मामले की लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। यह पूरा मामला उरई कोतवाली क्षेत्र स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज का बताया जा रहा है और फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बाइट: बृजकिशोर गुप्ता, पीड़ित के पिता
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धन सिंह रावत के निर्देश: कुमाऊं के सभी जिलों में शिक्षा सुधार तेज

Almora, Uttarakhand:कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कुमाऊं मंडल के सभी जनपदों के अधिकारियों के साथ सहकारिता, उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए गए। बैठक में मंत्री ने प्रत्येक विकासखंड में एक आवासीय विद्यालय स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण होगी। साथ ही सभी स्कूलों में प्रतिवर्ष प्रवेशोत्सव आयोजित करने और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को एक-एक विद्यालय गोद देने की बात भी कही, ताकि विद्यालयों के प्रदर्शन में सुधार हो सके। सहकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री ने प्रत्येक विकासखंड में एक आदर्श सहकारिता गांव विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव स्तर तक बैंकिंग सेवाओं को मजबूत किया जाए और कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से लोगों तक अधिक सुविधाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने सहकारिता समितियों को सक्रिय बनाने और किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि विभाग को शत प्रतिशत कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा और किसानों को समृद्धि कार्ड दिए जाएंगे। शिक्षा विभाग की समीक्षा में जर्जर और मरम्मत योग्य विद्यालय भवनों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में जरूरी संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल दिया जाए।
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गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान पर विवाद: पंजाब सरकार का बिल समुदाय में विरोध

Amritsar, Punjab:ਬੇਅਦਬੀ ਬਿੱਲ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸਿੱਖ ਪੰਥ ਵਿੱਚ ਵਧੀ ਚਿੰਤਾ : ਗਿਆਨੀ ਗੁਰਬਚਨ ਸਿੰਘ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਤਖਤ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਵਿਚਾਰ ਕਰਕੇ ਬਿੱਲ ਦੀਆਂ ਤਰੁਟੀਆਂ ਦੂਰ ਕਰਨ ਦੀ ਅਪੀਲ ਧਾਰਮਿਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰੀ ਦਖਲਅੰਦਾਜ਼ੀ ‘ਤੇ ਸਾਬਕਾ ਜਥੇਦਾਰ ਨੇ ਜਤਾਈ ਨਾਰਾਜ਼ਗੀ ਪੰਥਕ ਏਕਤਾ ਅਤੇ ਸਤਿਕਾਰ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸਾਂਝੇ ਫੈਸਲੇ ਦੀ ਲੋੜ ‘ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਤਖਤ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਜਥੇਦਾਰ ਗਿਆਨੀ ਗੁਰਬਚਨ ਸਿੰਘ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਬੇਅਦਬੀ ਬਿੱਲ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਆਪਣੀ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨੇ ਸਿੱਖ ਪੰਥ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡਾ ਵਿਵਾਦ ਖੜ੍ਹਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਮੀਡੀਆ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਧੰਨ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰੱਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬੇਅਦਬੀ ਦੇ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਦੋਸ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਸਖ਼ਤ ਸਜ਼ਾਵਾਂ ਮਿਲਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਕਈ ਉਪਰਾਲੇ ਕੀਤੇ ਗਏ s, ਪਰ ਉਸ ਸਮੇਂ ਬਿੱਲ ਪਾਸ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਿਆ ਸੀ。 ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹੁਣ ਭਗਵੰਤ ਮਾਨ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਾਲੀ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਇਹ ਬਿੱਲ ਪਾਸ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਤਰੁਟੀਆਂ ਅਤੇ ਅਸਪਸ਼ਟਤਾਵਾਂ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਨ ਸਿੱਖ ਸੰਗਤਾਂ ਅਤੇ ਪੰਥਕ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਰੋਸ ਪਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਗਿਆਨੀ ਗੁਰਬਚਨ ਸਿੰਘ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬਿੱਲ ਦਾ ਮਕਸਦ ਚੰਗਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਸ ‘ਤੇ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਤਖਤ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਸਿੰਘ ਸਾਹਿਬਾਨ, ਜਥੇਦਾਰਾਂ ਅਤੇ ਪੰਥਕ ਆਗੂਆਂ ਨਾਲ ਬੈਠ ਕੇ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਬਿੱਲ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਖਾਮੀਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਕੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇਕਰ ਸਾਰੇ ਪੱਖ ਇਕੱਠੇ ਬੈਠ ਕੇ ਫੈਸਲਾ ਲੈਣਗੇ ਤਾਂ ਪੂਰੀ ਕੌਮ ਵਿੱਚ ਸਤਿਕਾਰ ਅਤੇ ਏਕਤਾ ਬਣੀ ਰਹੇਗੀ ਅਤੇ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਵੀ ਘਟਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਧਾਰਮਿਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਵੱਧ ਰਹੀ ਦਖਲਅੰਦਾਜ਼ੀ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸਰਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਧਾਰਮਿਕ ਮਸਲਿਆਂ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਅਤੇ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਤਖਤ ਸਾਹਿਬ ਵਰਗੀਆਂ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਗਿਆਨੀ ਗੁਰਬਚਨ ਸਿੰਘ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇ ਦੋਵੇਂ ਧਿਰਾਂ ਆਪਣੇ-ਆਪਣੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਰਹਿ ਕੇ ਕੰਮ ਕਰਨਗੀਆਂ ਤਾਂ ਸਮਾਜ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੀ ਭਲਾਈ ਵਧੇਰੇ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਹੋ ਸਕੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਜਥੇਦਾਰ ਗਿਆਨੀ ਰਘਬੀਰ ਸਿੰਘ ਦੇ ਬਿਆਨ ਬਾਰੇ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹਰ ਵਿਅਕਤੀ ਆਪਣੀ ਸੋਚ ਅਤੇ ਸਮਝ ਅਨੁਸਾਰ ਵਿਚਾਰ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ‘ਤੇ ਬਿਨਾਂ ਵਿਵਾਦ ਵਧਾਏ ਸਾਂਝੀ ਸਹਿਮਤੀ ਨਾਲ ਹੱਲ ਕੱਢਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।
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SC ने आवारा कुत्तों के शेल्टरिंग आदेश को वापस लेने से इनकार किया

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने के आदेश को वापस लेने से इनकार किया। अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा, "आवारा कुत्तों के मामले पर बहुत महत्वपूर्ण फैसला आया है। एक अच्छा कदम है... आर्टिकल 21 में यह बहुत जरूरी माना गया है कि बुजुर्गों और बच्चों का बिना किसी के डर के कहीं भी जाना महत्वपूर्ण है... यह बताया गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में डॉग बाइट के केस हुए हैं... समाज में लोग बिना किसी डर के रह सकें इसलिए हम इन चीज़ों को सुनिश्चित कर रहे हैं। यह सही दिशा में लिया गया कदम है। ABC प्रोग्राम को लागू करने की बात की गई है..."
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अमेठी में राहुल गांधी का एकदिवसीय दौरा: कांग्रेस की तैयारी जोरों पर

Amethi, Uttar Pradesh:अमेठी - विपक्ष के नेता राहुल गांधी का एकदिवसीय अमेठी दौरा कल। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस पार्टी की तैयारियां जोरों पर। 20 मई को एकदिवसीय दौरे पर जनपद मुख्यालय गौरीगंज पहुंच रहे हैं विपक्ष के नेता राहुल गांधी। सबसे पहले राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे स्वर्गीय योगेंद्र मिश्रा के घर पहुंच कर परिजनों से करेंगे मुलाकात। उसके उपरांत वह कांग्रेस पार्टी के मुख्य संगठन से लेकर सभी फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को करेंगे संबोधित। अमेठी संसदीय क्षेत्र के 2000 से अधिक कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं से करेंगे संवाद। कल दोपहर 12 बजे गौरीगंज स्थित बाईपास के बगल पहुंचेंगे राहुल गांधी। अंतिम कार्यक्रम को संपादित करने के लिए राहुल गांधी मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल पहुंचेंगे। जहां पर अस्पताल में आई कुछ अत्यधिक मशीनों सहित नवनिर्मित भवन का करेंगे शुभारंभ। यहीं से कार्यक्रम समाप्त कर वह लखनऊ के लिए हो जाएंगे रवाना।
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रीको प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025: दसवें चरण में 465 भूखण्डों के लिए 800 आवेदन

Jaipur, Rajasthan:प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025, योजना को निवेशकों का लगातार समर्थन मिल रहा, रीको प्रत्यक्ष आवंटन योजना बनी गेमचेजिंग स्कीम, राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होंगे, योजना के दसवें चरण में 465 औद्योगिक भूखण्डों हेतु करीब 800 आवेदन प्राप्त हुए हैं, राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रीको लगातार निवेश-अनुकूल नीतियों पर कार्य कर रहा है, राजस्थान में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हेतु उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रीको द्वारा प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 को निवेशकों का लगातार समर्थन मिल रहा है, योजना के दसवें चरण में 465 औद्योगिक भूखण्डों के लिए करीब 800 आवेदन प्राप्त हुए हैं, इन भूखण्डों का कुल क्षेत्रफल लगभग 294 एकड़ और अनुमानित मूल्य करीब 550 करोड़ रुपये है, इस चरण में जोधपुर के औद्योगिक क्षेत्र कांकाणी के लिए सर्वाधिक 267 आवेदन प्राप्त हुए हैं, इसके अतिरिक्त अजमेर स्थित IGPP अजयमेरू पालड़ा विस्तार के लिए 48, अलवर के IGPP रूंध सोखरी के लिए 43, पचपदरा रिपफाइनरी के पास विकसित किए गए, औद्योगिक क्षेत्र बोरावास कलावा प्रथम के लिए 31 और बोरणाडा के औद्योगिक क्षेत्र बोरणाडा विस्तार औद्योगिक क्षेत्र के लिए 58 आवेदन प्राप्त हुए हैं, 1. प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025, दसवें चरण में 465 औद्योगिक भूखण्डों के लिए करीब 800 आवेदन प्राप्त हुए, 2. नौवें चरण में 60 प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराए गए 22 भूखण्डों के लिए 25 आवेदन प्राप्त हुए, 3. दसवें चरण में ऐसे असंतृप्त औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पहले से कहीं अधिक 113 आवेदन प्राप्त हुए, 4. रीको ने असंतृप्त औद्योगिक क्षेत्रों में भूखण्ड आवंटन के लिए फ्लेक्सिबल लैंड लीज और किराया नीति में आंशिक संशोधन, रीको ने असंतृप्त औद्योगिक क्षेत्रों में भूखण्ड आवंटन के लिए फ्लेक्सिबल लैंड लीज और किराया नीति में आंशिक संशोधन कर यह प्रावधान किया है, जिन औद्योगिक क्षेत्रों में दो प्रयासों के बाद भी 25 प्रतिशत से अधिक भूखण्डों का आवंटन नहीं हो पाया है, वहां भूखण्डों का आवंटन प्रचलित दर के 60 प्रतिशत अथवा आरक्षित दर, जो भी अधिक हो, पर किया जाएगा, नौवें चरण में 60 प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराए गए 22 भूखण्डों के लिए 25 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें सर्वाधिक आवेदन अजमेर के अजयमेरू पालड़ा विस्तार क्षेत्र के लिए आये थे, वहीं दसवें चरण में ऐसे असंतृप्त औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पहले से कहीं अधिक 113 आवेदन प्राप्त हुए हैं, अजयमेरू पालड़ा विस्तार (अजमेर), सरदारशहर विस्तार (चूरू), कचारिया (किशनगढ़), लोहावट एवं सियामाली (मंडौर) सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इसी संबंध में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं
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RERC के आदेश से राजस्थान में 24 घंटे बिजली की उम्मीद बढ़ी

Jaipur, Rajasthan:क्या अब राजस्थान में मिलेगी 24 घंटे बिजली ? RERC के नए आदेश ने दी बड़ी उम्मीद राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के हालिया आदेश ने राज्य की ऊर्जा नीति और भविष्य की बिजली व्यवस्था को लेकर एक बड़ा रास्ता साफ कर दिया है। आयोग ने 15 मई 2026 को दिए गए अपने आदेश में राजस्थान की डिस्कॉम्स और आरयूवीआईटीएल को टैरिफ बेस्ड कम्पेटिटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए दीर्घकालिक थर्मल पावर खरीद की अनुमति देकर यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्य सिर्फ सौर और पवन ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि स्थायी और लगातार उपलब्ध रहने वाली बिजली के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन भी जरूरी माना जा रहा है। दरअसल राजस्थान देश में सबसे तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने वाले राज्यों में शामिल है। प्रदेश में बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं। लेकिन इन दोनों स्रोतों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इनसे बिजली उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। रात में सोलर बिजली उपलब्ध नहीं रहती और कई बार हवा की कमी से विंड एनर्जी उत्पादन भी प्रभावित होता है। ऐसे में ग्रिड को स्थिर बनाए रखने और चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए “बेसलोड पावर” की जरूरत पड़ती है, जिसे थर्मल पावर प्लांट लगातार उपलब्ध कराते हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2035-36 तक राजस्थान के लिए 4440 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की आवश्यकता बताई है। RERC ने इस आकलन को स्वीकार करते हुए कहा है कि राज्य की डिस्कॉम्स इस क्षमता की खरीद पारदर्शी प्रक्रिया और न्यूनतम लागत के आधार पर करेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली खरीद के लिए राज्य सरकार और कंपनियां MoU, जॉइंट वेंचर या फिर प्रतिस्पर्धी बोली यानी TBCB जैसे किसी भी मॉडल का इस्तेमाल कर सकती हैं。 TBCB मॉडल का सबसे बड़ा मतलब यह है कि अब बिजली खरीद सीधे नामांकन या समझौते के बजाय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से ہوگی। इसमें अलग-अलग कंपनियां बिजली सप्लाई के लिए बोली लगाएंगी और जो कंपनी सबसे कम दर और बेहतर शर्तों पर बिजली उपलब्ध कराएगी, उसे अनुबंध मिलने की संभावना होगी। इससे बिजली खरीद की लागत कम रखने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी。 ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी। औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, शहरीकरण और कृषि क्षेत्र में बढ़ती बिजली जरूरतों के कारण राज्य को स्थायी बिजली स्रोतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह आदेश सिर्फ थर्मल पावर खरीद की मंजूरी नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत जैसे देश में रिन्यूएबल और थर्मल दोनों के संतुलन से ही विश्वसनीय बिजली व्यवस्था संभव है। RERC का यह आदेश साफ संकेत देता है कि राजस्थान आने वाले दशक में ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और चौबीस घंटे बिजली उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए “हाइब्रिड पावर मॉडल” की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें हरित ऊर्जा के साथ थर्मल पावर भी अहम भूमिका निभाएगी।
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