icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
Become a News Creator

Your local stories, Your voice

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back
Pinewz
151505
Kuldip SinghKuldip SinghFollow29 Jul 2024, 10:02 am
0
0
Report

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

हिमाचल सरकार इंटरनेट दुष्प्रचार रोकने के लिए नियम बनाने की तैयारी

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंटरनेट मीडिया पर राज्य सरकार और मंत्रियों के खिलाफ कथित दुष्प्रचार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को शिमला में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक हुई, जिसमें उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी शामिल रहे। जानकारी के मुताबिक, बैठक में इंटरनेट मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक और गलत प्रचार को कानूनी दायरे में लाने पर विस्तृत चर्चा की गई। हालांकि बैठक को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जानकारी के मुताबिक, बैठक में चर्चा हुई है कि कुछ लोग एजेंडे के तहत सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट मंचों पर सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मंचों पर न तो कोई प्रभावी पंजीकरण व्यवस्था है और न ही पर्याप्त नियंत्रण, जिसके कारण सरकार की नीतियों और गतिविधियों को लेकर भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रिंट मीडिया और उसके डिजिटल मंच कानूनी दायित्वों का पालन करते हैं, लेकिन कुछ इंटरनेट मीडिया मंचों पर एजेंडा आधारित गतिविधियां संचालित हो रही हैं। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मौजूदा कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा की जानकारी है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार अगले 15 दिनों में प्रस्तावित नियमों का प्रारूप तैयार करेगी। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement

मानसून की दस्तक से हिमाचल में शिमला-मनाली मार्ग पर यातायात बाधित

Shimla, Himachal Pradesh:हimachal प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही आम जनजीवन पर इसका असर दिखना शुरू हो गया है। राजधानी शिमला के ओल्ड बैरियर पर मंगलवार शाम हुई बारिश के चलते पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे शिमला-मनाली मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया। सड़क पर मलबा आने से कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही बाधित रही और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मशीनरी की मदद से सड़क पर जमा मलबा हटाने का अभियान चलाया गया। मशक्कत के बाद मार्ग को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। प्रशासन ने प्रदेश में मानसून की शुरुआत को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करते समय मौसम की जानकारी लेकर ही निकलें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
0
0
Report
Advertisement

Mohali: Violent clash between BJP and AAP during SIR duty, both sides injured

Sahibzada Ajit Singh Nagar, Punjab:SIR ਡਿਊਟੀ ਦੌਰਾਨ BJP-AAP ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ, ਖੂਨੀ ਝੜਪ 'ਚ ਦੋਵੇਂ ਧਿਰਾਂ ਦੇ ਆਗੂ ਜ਼ਖਮੀ ਖ਼ਬਰ: ਮੋਹਾਲੀ ਵਿੱਚ ਐਸਆਈਆਰ (SIR) ਡਿਊਟੀ ਦੌਰਾਨ ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਬੀਐਲਓ ਅਤੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਉਪ ਪ੍ਰਧਾਨ ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਵੈਦਵਾਨ, ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਕੌਂਸਲਰ ਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਿੰਦਰਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਮਰਥਕਾਂ ਵਿਚਾਲੇ ਹੋਈ ਝੜਪ ਵਿੱਚ ਦੋਵੇਂ ਧਿਰਾਂ ਦੇ ਆਗੂ ਬੁਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜ਼ਖਮੀ ਹੋ ਗਏ。 ਘਟਨਾ ਦੀ ਸੂਚਨਾ ਮਿਲਦੇ ਹੀ ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਕੇਵਲ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ ਆਪਣੇ ਸਮਰਥਕਾਂ ਸਮੇਤ ਮੋਹਾਲੀ ਦੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਹਸਪਤਾਲ ਪਹੁੰਚੇ ਅਤੇ ਜ਼ਖਮੀ ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਵੈਦਵਾਨ ਦਾ ਹਾਲ-ਚਾਲ ਪੁੱਛਿਆ。 ਮੀਡੀਆ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਦੌਰਾਨ ਕੇਵਲ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋ ਨੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ 'ਤੇ ਗੁੰਡਾਗਰਦੀ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਇਆ ਕਿ ਜੇਕਰ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਦੋਸ਼ੀਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ ਨਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤਾਂ ਭਾਜਪਾ ਵੱਲੋਂ ਵੀ ਸਖ਼ਤ ਕਦਮ ਚੁੱਕੇ ਜਾਣਗੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵੀ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਇਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਮੌਜੂਦਾ ਸਰਕਾਰ ਐਸਆਈਆਰ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਅਜਿਹੇ ਹਥਕੰਡੇ ਅਪਣਾ ਰਹੀ ਹੈ。 ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ, ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਕੌਂਸਲਰ ਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਿੰਦਰਾ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ 'ਤੇ ਮਾਰਕੁੱਟ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਲੱਗੇ ਹਨ, ਨੇ ਆਪਣੀ ਸਫ਼ਾਈ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਘਟਨਾ ਸਮੇਂ ਉਹ ਆਪਣੇ ਘਰ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ sਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੀ-ਮੋਟੀ ਲੜਾਈ ਹੈ, ਜੋ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਕਈ ਵਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਆਪਸੀ ਸਹਿਮਤੀ ਨਾਲ ਸੁਲਝਾ ਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ。
0
0
Report

घग्गर बांध का स्थायी समाधान, किसानों ने CM मान से मदद मांगी

Patran, Punjab:पातड़ां से सतपाल गर्ग सटोरी। मुख्यमंत्री की पातड़ां फेरी से पहले घग्गर के स्थायी समाधान की उठी मांग, 25 से अधिक गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित एंकर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की 1 जुलाई को प्रस्तावित पातड़ां फेरी को लेकर जहां प्रशासन की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं हलका शुतराना के बाढ़ प्रभावित किसानों ने भी अपनी वर्षों पुरानी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम बनाया है। किसानों ने घग्गर नदी के स्थायी समाधान की मांग उठाई है। किसान नेता फतेह सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में घग्गर नदी के उफान के कारण हर वर्ष इलाके को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब भी नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो बांध टूटने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे हलका शुतराना के करीब 25 गांव इसकी चपेट में आ जाते हैं। हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि केवल फसल ही नहीं, बल्कि पशुधन और लोगों को भी नुकसान झेलना पड़ता है। लगातार हो रहे इस नुकसान के चलते इलाके के किसानों और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। किसान नेता के अनुसार गांव हरचंदपुरा से लेकर खनौरी हेड तक घग्गर नदी के बांध की स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण बार-बार टूटने की घटनाएं होती हैं। इस कारण 70 से 80 गांवों के रकबे को नुकसान पहुंचता है। जबकि खनौरी हेड से मकोरड़ साहिब तक बांध को पहले ही सरकारी स्तर पर मजबूत किया जा चुका है। किसानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हरचंदपुरा से खनौरी हेड तक बांध को भी मजबूत किया जाए, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके और भविष्य में फसलों व जान-माल के नुकसान से बचाव किया जा सके। किसानों ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए जल्द ठोस कदम उठाएंगे। बाइट – किसान नेता “हर साल घग्गर के कारण हमें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। हमारी सरकार से मांग है कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।”
0
0
Report
Advertisement

हिमाचल में स्वदेशी बायोचार प्लांट से रोजगार और कार्बन क्रेडिट बढ़ेंगे

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हमीरपुर जिले के नेरी में स्थापित किए जा रहे देश के पहले स्वदेशी बायोचार संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करेगी तथा राज्य को कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में भी मददगार होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए एकत्रित बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है तथा गुणवत्ता बनाए रखने पर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के तहत चीड़ की पत्तियां (पाइन नीडल्स), लैंटाना, बांस और अन्य वृक्ष एवं पौध-आधारित बायोमास का उपयोग कर बायोचार का उत्पादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना की 10 वर्ष की परिचालन अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने का अनुमान है, जिससे हिमाचल प्रदेश की हरित पहलों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के तहत कृषि प्रणालियों में वृक्षों का समावेश किया जाएगा। यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर पात्र कृषि क्षेत्र में लागू होगा और 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान देगा। कार्यक्रम के अंतर्गत जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार मानकों के अनुरूप किया जाएगा। प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम ने जलवायु संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार के कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों की सराहना की। बैठक में पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केविन कुमार कंदासेमी भी उपस्थित रहे।
0
0
Report

कुल्लू अस्पताल में डॉक्टर अनु सस्पेंड, विरोध के बीच कार्रवाई

Kullu, Himachal Pradesh:जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर के क्षेत्रीय अस्पताल में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनु को सस्पेंड कर दिया गया है। फिलहाल डॉक्टर अनु को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग शिमला में तैनात किया गया है। डॉ अनु पर मृतक महिला मंजू शर्मा के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक जांच कमेटी का भी गठन किया गया था। जांच कमेटी के द्वारा अपनी रिपोर्ट शिमला विभाग की उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनू को सस्पेंड कर दिया है। गौर रहे कि बीते दो दिनों से मृतक महिला मंजू शर्मा को न्याय देने के लिए युवाओं के द्वारा धरना प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को भी ढालपुर में युवाओं का प्रदर्शन जारी रहा और भाजपा के नेता भी उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे। ऐसे में शाम के समय कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने भी प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ मुलाकात की और डॉक्टर अनु के सस्पेंड होने के बारे में भी जानकारी दी। वही स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जो रिपोर्ट तैयार की गई है। उस पर भी आंदोलन कर रहे युवाओं ने सवाल उठाए हैं। युवाओं का कहना है कि जो जो बातें उन्होंने जांच कमेटी के समक्ष रखी थी। उन पर बिल्कुल भी गौर नहीं किया गया है। ऐसे में प्रदर्शन कर रहे युवाओं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच अभी भी बातचीत हो रही है। मृतक महिला के भाई दिनेश शर्मा ने बताया कि उनकी बहन को न्याय दिलाने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतरे। जिसके लिए वह सभी का आभार व्यक्त करते हैं। आगामी समय में इस तरह की कोई घटना पेश न आए। इस और भी स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
0
0
Report

हाई कोर्ट ने पांगी और केलांग में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल पर रोक लगाई

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव संपन्न होने के बाद नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभाल लिया था। इसी बीच हिमाचل प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जिला चंबा के पांगी और जिला लाहौल-स्पीति के केलांग सब-डिवीजन में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर रोक लगा दी है。 मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनय शर्मा ने अदालत को बताया कि पांगी और केलांग में पिछला पंचायत चुनाव अक्टूबर 2021 में हुआ था और उस आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 6 जून 2026 को जारी अधिसूचना में दोनों सब-डिवीजनों के पंचायत प्रधान, उपप्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 24 जून 2026 को सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर कहा कि वर्ष 2021 में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 27 जून 2026 को समाप्त होगा और नवनिर्वाचित प्रतिनिधि कार्यभार संभालेंगे。 इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए पांगी के पंचायत प्रधानों ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की। अधिवक्ता विनय शर्मा ने दलील दी कि संविधान के अनुसार पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और कानून में किया गया कोई भी संशोधन अगले कार्यकाल से ही लागू किया जा सकता है。 उनका तर्क था कि पांगी और केलांग के प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक है, इसलिए 24 जून की अधिसूचना असंवैधानिक है। दलीलों पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पांगी और केलांग सब-डिवीजन में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज पर फिलहाल रोक लगा दी है।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top