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बजवा ने पंजाब भर्ती पेपर लीक पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगे

Chandigarh, Chandigarh:पेपर लीक पर पंजाब के युवाओं को जवाब दें मुख्यमंत्री मान: बाजवा चंडीगढ़, 29 जुलाई: पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आज पंजाब में भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने राज्य के युवाओं का भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर विश्वास बुरी तरह से डगमगा दिया है। उन्होंने कहा कि लाखों योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य से प्रशासनिक विफलताओं और सरकार की जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति के कारण खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उसके कार्यकाल में एक भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। लेकिन पिछले साढ़े चार वर्षों में भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर एक के बाद एक विवाद सामने आए हैं। नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET), प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि के बाद 12वीं कक्षा की अंग्रेज़ी बोर्ड परीक्षा रद्द किए जाने, ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा विवाद और अब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा से जुड़े आरोपों और अनियमितताओं ने सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं。 बाजवा ने कहा, “सरकार फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को पेपर लीक मानने से इनकार कर सकती है, लेकिन शब्दावली बदल देने से सच्चाई नहीं बदल जाती। यदि परीक्षा की पवित्रता से समझौता हुआ है, यदि संगठित तरीके से कथित तौर पर नकल करवाई गई है और यदि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या हजारों युवाओं के साथ हुआ अन्याय केवल इसलिए समाप्त हो जाएगा क्योंकि सरकार उसे किसी और नाम से पुकार रही है?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देशभर में ऐसी घटनाओं को लेकर अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब देश के अन्य राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं तो आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही इस्तीफे और जवाबदेही की मांग करती हैं। फिर पंजाब में अलग पैमाना क्यों? जवाबदेही के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कसौटियाँ नहीं हो सकतीं।” शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए बाजवा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे युवाओं के साथ संवाद करने के बजाय उन पर कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व युवाओं की आवाज़ सुनना होता है, उसे दबाना नहीं। न्याय की मांग करने वाले छात्रों को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।” बाजवा ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “भाजपा देश के अन्य हिस्सों में परीक्षा संबंधी विवादों पर तुरंत मुखर हो जाती है। लेकिन जब पंजाब के युवाओं के भविष्य का सवाल है तो उसकी आवाज़ क्यों खामोश है? क्या पंजाब के युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं का महत्व कम है?” पूर्ण पारदर्शिता की मांग करते हुए बाजवा ने पंजाब सरकार से पूरे मामले का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कितने विवाद सामने आए, कितनी जांचें कराई गईं, कितने लोगों की जिम्मेदारी तय की गई और उनमें से कितनों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास केवल दावों या राजनीतिक बयानों से बहाल नहीं होगा, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही से ही लौटेगा। बाजवा ने कहा कि पिछले वर्षों की घटनाओं का क्रम स्वयं बहुत कुछ बयान करता है। वर्ष 2022 में नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और नकल के आरोप लगे। वर्ष 2023 में प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि के बाद 12वीं कक्षा की अंग्रेज़ी बोर्ड परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी। उसी वर्ष पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) में अनियमितताओं के कारण पुनः परीक्षा करानी पड़ी। वर्ष 2025-26 में ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। हाल ही में वर्ष 2026 में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नकल कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। विपक्ष इसे पेपर लीक बता रहा है, जबकि पंजाब सरकार का कहना है कि प्रश्नपत्र पहले से लीक नहीं हुआ था और मामला परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नकल कराने का था। बाजवा ने कहा, “मुद्दा केवल शब्दों का नहीं है। चाहे उसे पेपर लीक कहा जाए, परीक्षा सुरक्षा में सेंध, संगठित इलेक्ट्रॉनिक नकल या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए, परिणाम एक ही होता है—ईमानदार अभ्यर्थियों का विश्वास टूटता है। पंजाब का हर युवा एक ऐसी भर्ती प्रणाली का हकदार है जो पारदर्शी, सुरक्षित और पूरी तरह योग्यता आधारित हो। हमारे युवाओं का भविष्य प्रशासनिक विफलताओं और राजनीतिक बचाव का शिकार नहीं बन सकता। पंजाब के युवाओं को सच जानने का अधिकार है, उन्हें जवाबदेही चाहिए और सबसे बढ़कर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।”
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देहरा पंचायत समिति चुनाव: भाजपा ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद जीते

Dehra Gopipur, Himachal Pradesh:लोकेशन देहरा देहरा। पंचायत समिति देहरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज कर ली है। हार वार्ड से निर्वाचित सदस्य विनोद पंचायत समिति के अध्यक्ष चुने गए, जबकि मयोल वार्ड की सदस्य रूबीना चौधरी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुईं। बुधवार को हुए चुनाव में 23 सदस्यीय पंचायत समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों के लिए मतदान कराया गया। दोनों विजयी उम्मीदवारों को 15-15 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। परिणाम घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का फूल-मालाओं से स्वागत किया तथा मिठाइयां बांटकर जीत का जश्न मनाया। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री विक्रम ठाकुर ने कहा कि देहरा पंचायत समिति के परिणाम प्रदेश की राजनीतिक दिशा का स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने दावा किया कि यह जीत प्रदेश सरकार की नीतियों के प्रति जनता के बढ़ते असंतोष का परिणाम है और इससे यह साबित हो गया है कि राज्य सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनादेश का सम्मान करते हुए पंचायत समिति के माध्यम से विकास कार्यों को गति देगी और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेगी।
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गुरदासपुर व्यापार मंडल ने सफाई कर्मचारियों का समर्थन किया; 30 जुलाई को बंद

Gurdaspur, Punjab:Gurdaspur ਵਪਾਰ ਮੰਡਲ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਨੇ ਸਫਾਈ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਦਾ ਕੀਤਾ ਸਮਰਥਨ,,ਕੱਲ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਨੂੰ ਸਫਲ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਵਪਾਰ ਮੰਡਲ ਵੀ ਦੁਕਾਨਾਂ ਰੱਖੇਗਾ ਬੰਦ ਸਫਾਈ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਵਲੋਂ 30 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦੇ ਸੱਦੇ ਦੀ ਵਪਾਰ ਮੰਡਲ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਨੇ ਵੀ ਹਿਮਾਇਤ ਕਰਨ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਦੱਸ ਦਈਏ ਕਿ ਆਪਣੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸਫਾਈ ਕਰਮਚਾਰੀ ਪਿਛਲੇ ਕਈ ਦਿਨਾਂ ਤੋਂ ਹਟਦਾ ਤੇ ਬੈਠੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਮੰਗਾਂ ਦੇ ਹੱਕ ਵਿੱਚ 30 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦਾ ਸੱਦਾ ਵੀ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਹਾਲਾਂਕਿ ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਸਫਾਈ ਕਰਮਚਾਰੀ ਯੂਨੀਅਨ ਵੱਲੋਂ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ ਸੀਵਰੇਜ ਬਲੋਕ ਕਰਨ ਦੀ ਚੇਤਾਵਨੀ ਵੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ ਪਰ ਵਪਾ ਮੰਡਲ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਦਰਸ਼ਨ ਮਹਾਜਨ ਨੇ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕੀਤੀ ਕਿ ਸੀਵਰੇਜ ਬਲੋਕ ਕਰਨ ਨਾਲ ਸ਼ਹਿਰ ਨਿਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਹੋਵੇਗੀ ਜਿਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਹਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਇਹ ਫੈਸਲਾ ਵਾਪਸ ਲੈ ਲਿਆ ਗਿਆ। ਵਪาร์ ਮੰਡਲ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਦਰਸ਼ਨ ਮਹਾਜਨ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਸਫਾਈ ਸੇਵਕਾਂ ਦੀਆਂ ਜਾਇਜ਼ ਮੰਗਾਂ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਮੰਨ ਲੈਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ。
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डेरा-बासी सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों का नियमितीकरण न मिलने पर धरना तेज

Dera Bassi, Punjab:ਡੇਰਾਬੱਸੀ ਡੇਰਾਬੱਸੀ ਦੇ ਸਰਕਾਰੀ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਪਿਛਲੇ 10 ਤੋਂ 15 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਠੇਕਾ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਤਹਿਤ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀਆਂ ਸੇਵਾਵਾਂ ਰੈਗੂਲਰ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਕੰਮ ਛੱਡ ਕੇ ਹਸਪਤਾਲ ਦੇ ਮੁਖ ਗੇਟ ਦੇ ਬਾਹਰ ਧਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੇ ਹਸਪਤਾਲ ਦੇ ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫ਼ਸਰ (ਐੱਸ.ਐੱਮ.ਓ.) ਨੂੰ ਮੰਗ ਪੱਤਰ ਸੌਂਪਦਿਆਂ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਨੀਤੀ ਤਹਿਤ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਰੈਗੂਲਰ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ। ਧਰਨੇ ’ਤੇ ਬੈਠੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਪਿੱਛਲੇ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਪੂਰੀ ਇਮਾਨਦਾਰੀ ਅਤੇ ਨਿਸ਼ਠਾ ਨਾਲ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀਆਂ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨਿਭਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਹੈ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਹੋਰ ਵਿਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਠੇਕਾ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਰੈਗੂਲਰ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ, ਪਰ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਨੂੰ ਅਣਗੌਲਿਆ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ۔ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਕਾਰੀ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ, ਉਦੋਂ ਤੱਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਧਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰਹੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸੰਘਰਸ਼ ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਕਰਨ ਲਈ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਜਲਦ ਤੋਂ ਜਲਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ’ਤੇ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਫ਼ੈਸਲਾ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਧਰਨੇ ਦੌਰਾਨ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੇ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਨਾਅਰੇਬਾਜ਼ੀ ਵੀ ਕੀਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਜੇਕਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ’ਤੇ ਜਲਦ ਕੋਈ ਫ਼ੈਸਲਾ ਨਾ ਲਿਆ ਗਿਆ ਤਾਂ ਸੰਘਰਸ਼ ਨੂੰ ਹੋਰ ਤੇਜ਼ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ。
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के भर्ती-सेवा शर्तों के कानून की याचिका खारिज की

Shimla, Himachal Pradesh:भारत के हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. राज्य के सरकारी कर्मचारियों के सेवा लाभ और वरिष्ठता से जुड़े कानून को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. देश की शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्टेट ऑफ़ हिमाचल बनाम देवेंद्र कुमार और अन्य के मामले में यह फैसला सुनाया है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश भर्ती और सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 को रद्द करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी. इसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज़ कर दिया है. इसी साल 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया था. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों की सीनियोरिटी व सेवा शर्तों से जुड़े एक्ट को खारिज कर दिया था. दरअसल, हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने दिसंबर 2024 के विधानसभा शीतकालीन सेशन में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक- 2024 लाया गया था, जिसे राज्य सरकार ने पारित कर कानून बनाया. इस कानून को उच्च अदालत में चुनौती दी गई. इस पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सरकार की तरफ से बनाए एक्ट को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने देवेंद्र कुमार वर्सेस स्टेट ऑफ हिमाचल मामले में ये अहम फैसला सुनाया था. गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य कर्मचारियों से जुड़े मामले में कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नियुक्ति की तिथि से देने का फैसला सुनाया था. लेकिन, इसके बाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसके उलट नया विधेयक सुबह से पारित कर दिया. बिल पारित हुआ, तो कर्मचारी वर्ग फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया और हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए एक्ट को रद्द कर दिया. इससे पहले प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के अनुबंध की समय अवधि अलग-अलग होने के बाद वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर सरकारी कर्मचारी अदालत पहुंचे थे. शुरुआत में एग्रीमेंट पॉलिसी के तहत कमीशन पास कर्मचारियों को 8 साल बाद रेगुलर किया गया. इसके बाद अनुबंध अवधि को घटाकर 6 साल कर दिया गया. बाद में इस अवधि को 5 साल किया गया था. अब 3 साल का कंट्रैक्ट पीरियड काटने के बाद कर्मियों को रेगुलर करने का प्रावधान है. भिन्न अनुबंध अवधि के खिलाफ कुछ कर्मचारी कोर्ट पहुंचे थे. इस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियुक्ति की तारीख से भी वित्तीय लाभ देने का फैसला सुनाया था.
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शिमला में मानसून से जलापूर्ति प्रभावित, तीन-चार दिन में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मानसून की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो गई है, जिससे शहरवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य सतलुज जल आपूर्ति योजना में आई तकनीकी खराबी और बरसाती मौसम के कारण नदियों में बढ़ी गाद (सिल्ट) से जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। SJPNL के प्रबंध निदेशक राजेश कश्यप ने बताया कि शहर को प्रतिदिन लगभग 42 एमएलडी पानी उपलब्ध कराने वाली मुख्य सतलुज जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण के तहत ड्वाडा स्थित बिजली बोर्ड के ट्रांसफार्मर में तीन दिन पहले अचानक तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके कारण सतलुज योजना से पानी की लिफ्टिंग पूरी तरह बंद हो गई है। सामान्य दिनों में शिमला में प्रतिदिन 48 से 50 एमएलडी पानी की जरूरत होती है, लेकिन इस तकनीकी खराबी के कारण उपलब्धता घटकर 35 से 40 एमएलडी रह गई है। इसी कमी को देखते हुए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर, यानी तीसरे दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि जल प्रबंधन निगम और बिजली बोर्ड की संयुक्त टीमें समस्या के समाधान में जुटी हैं। ड्वाडा में बैकअप ट्रांसफार्मर स्थापित करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, जिसे चालू होने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। राजेश कश्यप ने कहा कि मानसून की शुरुआती बारिश के कारण जल स्रोतों में गाद की मात्रा भी काफी बढ़ गई है, जिससे वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन क्षमता प्रभावित हुई है। इसके बावजूद अन्य पांच जल योजनाओं के माध्यम से पानी का शोधन जारी है। गाद से निपटने के लिए ‘ट्यूब सैटलर्स’ और गिरिनदी में प्री-सैटलिंग टैंक जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। राजेश कश्यप ने भरोसा दिलाया कि अगले तीन से चार दिनों में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। तब तक तीसरे दिन होने वाली जलापूर्ति की समयावधि बढ़ाई जाएगी ताकि लोगों को अधिक राहत मिल सके। साथ ही बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए SJPNL ने लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी एडवाइसरी भी जारी की है।
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छात्र संघ चुनावों के पुनः बहाल के संकेत, फीस वृद्धि के विरोध का आह्वान

Chanwal, Himachal Pradesh:पिछले कई सालों से प्रदेश में बंद पड़े छात्र संघ चुनावों को जल्द बहाल किया जाए ताकि स्टूडेंट्स प्रतिनिधि छात्रों की समस्याओं को बेहतर ढंग से हल करवा सके। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला मीडिया संयोजक जतिन धीमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय में रिवैल्युएशन की फीस को वेद भाषा बढ़ाकर आम स्टूडेंट के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी कर दी है 300 की फीस को 1000 कर दिया गया है जो कि गरीब स्टूडेंट के लिए भारी वृद्धि है। पिछले 12 सालों में यह सबसे बड़ी वृद्धि की गई है। सरकार इस फीस वृद्धि के काले कानून को जल्द स्टूडेंट हित में वापस ले। जतिन ने बताया कि संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है जिसमें 31 August को कॉलेज में प्रिंसिपल के माध्यम से हिमाचल विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को ज्ञापन भेजा जाएगा, 5 August को जिलाधीश और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा, 6 और 7 August को कॉलेज स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, 12 और 13 August को सांकेतिक भूख हड़ताल होगी, 14 से 17 August तक जिला केदो पर धरना प्रदर्शन किए जाएंगे।
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मंडी में 143.180 ग्राम चिट्टा बरामद, दो गिरफ्तार

Mandi, Himachal Pradesh:मंडी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 143.180 ग्राम चिट्टा बरामद, युवक-युवती गिरफ्तार। मंडी में अब तक की सबसे बड़ी चिट्टे की खेप बरामद, 143.180 ग्राम हेरोइन के साथ दो गिरफ्तार। मंडी पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सुंदरनगर के पुंघ फोरलेन क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान बिलासपुर से मंडी आ रही एक वोल्वो बस से 143.180 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया है। पुलिस ने इस मामले में हनीश ठाकुर और अंशिता नेगी को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाना सुंदरनगर में एफआईआर संख्या 172/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस मादक पदार्थ के स्रोत और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक मंडी ने कहा कि जिले में नशा तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी
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पेपर लीक मामले के बाद सरकार 2026 सार्वजनिक परीक्षा बिल पेश करेगी

Mansa, Punjab:ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਪਬਲਿਕ ਐਗਜ਼ਾਮੀਨੇਸ਼ਨ ਬਿਲ 2026 ਲਿਆਂਦੇ ਜਾਣ ਨਾਲ ਕੀ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਮਾਮਲੇ ਦੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਵਾਪਰ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ ਇਸਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਜੀ ਮੀਡੀਆ ਵੱਲੋਂ ਮਾਨਸਾ ਵਿਖੇ ਪਿੰਡ ਦੀ ਸੱਥ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦੇ ਤਹਿਤ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਗੱਲਬਾਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਸਰਕਾਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਕਈ ਸਖਤ ਕਾਨੂੰਨ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਪਰ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਮਲੀ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਲਾਗੂ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਅੱਜ ਵੀ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਵਾਪਰ ਰਹੀਆਂ ਨੇ ਉਹਨਾਂ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਿਆਂਦੇ ਜਾ ਰਹੇ ਪਬਲਿਕ ਐਗਜਾਮੀਨੇਸ਼ਨ ਬਿਲ 26 ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬੇਸ਼ੱਕ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਚੰਗੀ ਪਹਿਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਆਉਣ ਵਾਲੀ ਸਮੇਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਖਤ ਮਿਹਨਤ ਕਰ ਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਧੁੰਦਲਾ ਨਾ ਹੋਵੇ ਇਸ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸਰਕਾਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਸਖਤ ਕਦਮ ਉਠਾਉਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਤੇ ਅਜਿਹੇ ਲੋਕ ਹਿਤ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇ ਹਿੱਤ ਵਿੱਚ ਲਿਆਂਦੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਬਿਲਾਂ ਨੂੰ ਸਖਤੀ ਦੇ ਨਾਲ ਲਾਗੂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ।
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आम आदमी पार्टी के छात्र जत्थेबंदी: विश्वविद्यालय हादसे में छात्र की मौत

Chandigarh, Chandigarh:ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੀ ਸਟੂਡੈਂਟ ਜਥੇਬੰਦੀ ਦੀ ਪ੍ਰੈਸ ਕਾਨਫਰੰਸਕੱਲ੍ਹ ਏਕ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੀ ਸਟੂਡੈਂਟ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋਈ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੀ ਗਲਤੀ ਦੇ ਕਰਨ ਇੱਕ ਕੁੜੀ ਤਡਪਟਦੀ ਰਹੀ ਕਰੰਟ ਲਗਣਾ ਦੇ ਕਰਨ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਇਕ ਲੜਕੇ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਰਹੀ ਕੋਈ ਉਸਦੇ ਚਾਕੂ ਮਾਰ ਗਿਆ ਤੇ ਉਸਨੂੰ ਖੂਨ ਦੀ ਕਮੀ ਸੀ ਹਰ ਵਾਰ ਅਜਿਹਾ ਹੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਕ ਘਟਨਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਸਮਝੌਤਾ ਕਰਕੇ ਗੱਲ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਰ ਬੱਚੇ ਦੀ ਮੌਤ ਦਾ ਸੌਦਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ University ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਸਹਿਮਤੀ ਤਾਂ ਲਏ ਸਕਦੇ ਨੇ ਪਰ ਬਾਕੀ ਬਚਿਆ ਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੀ ਰਾਖੀ ਕੌਣ ਕਰੇਗਾ ਦਰ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਸਮਝ ਲੈਣਾ ਚਿਆਦਾ ਹੈ ਕਿ ਬੀਜੇਪੀ ਦੀ ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਦਬਾ ਨਹੀਂ ਸਕਦੀ ਅਸੀ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਦਾ ਇਨਸਾਫ ਲੈਕੇ ਰਹੇਗਾ
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राजेंद्र राणा का सुक्खू पर कर्ज़ा और पेइंग गेस्ट हाउस विवाद, हल्लाबोल

Una, Himachal Pradesh: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा कर्ज़ा लेने का रिकॉर्ड बनाने का दावा किया है । उन्होंने ऊना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश और जनता का हाल बदतर किए जाने का आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि सुक्खू ने महज साढ़े तीन वर्ष में 41 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लेने का रिकॉर्ड बनाया है , जबकि प्रदेश की अन्य सरकारों ने अभी तक पचास वर्षों में केवल 65 हजार करोड़ कर्ज लिया था । राणा ने हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज के साथ एक पेइंग गेस्ट हाउस के मालिक का नाम सार्वजानिक किए जाने की मांग की है । उन्होंने इसके पीछे ऐसे नाम होने की आशंका जताई जिन्हें सरकार लाभ दे रही है । उन्होंने मेडिकल कॉलेज का श्रेय लेने के लिए सुक्खू सरकार को कटघरे में खड़ा किया और केंद्र की मोदी सरकार का प्रोजेक्ट बताया और केंद्र द्वारा इसके लिए पैसा दिए जाने की बात कही।
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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने बरनाला लाठीचार्ज मामले में किया कड़ा एक्शन: दोषियों पर कार्रवाई

Barnala, Bathinda, Punjab:- बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज मामले में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अब एक्शन मोड में है। - आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल और आयोग के सदस्य बरनाला पहुँचे, घायल सफाई कर्मचारियों से मुलाकात की, जिला प्रशासन के साथ बैठक की और घटनास्थल से जुड़े पहलुओं की गहन जांच शुरू की। - आयोग ने कहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। - आयोग ने 22 जुलाई की घटना को स्वतः संज्ञान लिया था और पंजाब सरकार से सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। पंजाब सरकार की रिपोर्ट और आयोग की ग्राउंड रिपोर्ट को मिलाकर विस्तृत जांच की जाएगी। - उपाध्यक्ष गिल ने कहा कि 22 जुलाई की घटना इतिहास के काले दिन के रूप में दर्ज होगी; निहत्थे सफाई कर्मचारियों, महिलाओं और बुजुर्गों पर लाठीचार्ज के खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई होगी। - डीएसपी को निलंबित किया गया, विभागीय जांच शुरू हुई और SHओ का तबादला किया गया है; यह भी जांच होगी कि लाठीचार্জ का आदेश किसने दिया और किन परिस्थितियों में यह कार्रवाई हुई। - डीजीपी की लगभग 20-25 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तय समय पर सौंपी गई। बरनाला पुलिस ने कहा कि मामले में DD आर दर्ज है जिसे आगे FIR में बदला जा सकता है। 13 घायल सफाई कर्मचारियों की मेडिकल-लीगल रिपोर्ट (MLR) भी तलब की गई है। - आयोग ने अधिकारियों से पूछा कि अगर पहले से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी तो सफाई कर्मचारी यूनियन को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया था; घटना दो अलग-अलग स्थानों पर हुई, हर पहलू की जाँच होगी। - आयोग की मंशा सफाई कर्मचारियों को न्याय दिलाना है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा; जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी है। - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई कर्मचारियों और वाल्मीकि समाज के सम्मान की बात करते हैं, इसलिए दोषी को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। - जांच के दौरान बरनाला के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया गया; एक्स-रे मशीन बंद पाई गई, जिसे स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही माना गया और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई।
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