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ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੇ ਚਾਲੂ ਹੋਇਆ ਨਵਾਂ ਟੋਲ ਪਲਾਜ਼ਾ ਘੇਰ ਕੀਤਾ ਪਰਚੀ ਮੁੱਕਤ
Barnala, Punjab:ਮੋਗਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮਾਛੀਕੇ ਵਿੱਚ ਫਲਾਈਓਵਰ ਨਾ ਬਣਨ ਤੋਂ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਮੇਟੀ ਭਦੌਦ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮੱਲੀਆਂ ਦਾ ਟੋਲ ਪਲਾਜ਼ਾ 2 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਬਰਨਾਲਾ-ਮੋਗਾ ਕੌਮੀ ਮਾਰਗ ’ਤੇ ਜਾਮ 2015. ਮੋਗਾ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮਾਛੀਕੇ ਵਿੱਚ ਪੁਲ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ, ਹੁਣ ਤੱਕ ਸੜਕ ਹਾਦਸਿਆਂ ਵਿੱਚ 20 ਦੇ ਕਰੀਬ ਮੌਤਾਂ ਹੋ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ। ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਅਧਿਕਾਰੀ ਵੱਲੋਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮੰਗਾਂ ਨਾ ਮੰਨੀਆਂ ਗਈਆਂ ਤਾਂ ਪਿੰਡ ਮਾਛੀਕਾ ਦੀ ਸੜਕ ’ਤੇ ਲੰਮਾ ਧਰਨਾ ਲਾਇਆ ਗਿਆ। ਕਿਸਾਨਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਸੜਕ ਨੇ ਪਿੰਡ ਨੂੰ ਵੰਡ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।
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नेपाल के रसुवा में चिलाइम हाइड्रोपावर टनल के दृश्य
Noida, Uttar Pradesh:RASUWA (NEPAL): CHILIME HYDROPOWER TUNNEL / VISUALS0
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हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू: विपक्ष का धरना-प्रदर्शन और विवादित दावा
Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू करने के सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा विधायकों ने बुधवार को विधानसभा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के इस फैसले को गलत बताते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार का लॉटरी शुरू करने का फैसला प्रदेश की नई पीढ़ी को बर्बाद करेगा। हिमाचल देवभूमि है और यहां के लोग ऐसी प्रवृत्तियों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक तंगी का हवाला देकर राजस्व जुटाने के लिए नए कर लगा रही है और अब लॉटरी भी शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के यह कहने पर कि लॉटरी से आदत नहीं लगेगी और यह केवल भाग्य का खेल है, जयराम ठाकुर ने कहा कि इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल पहले ही नशे की चपेट में है और चिट्टा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। ऐसे में लॉटरी एक और लत को बढ़ावा देगी। उनके मुताबिक, पहले भी प्रदेश में लॉटरी के कारण कई परिवार बर्बाद हुए हैं। लोगों की जमीन और घर तक बिक गए तथा कई लोग कर्ज के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि साल 1999 के बाद हिमाचल इस लत से बाहर निकला था। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को मेहनत का फल मिले, न कि हजारों लोगों का पैसा एक व्यक्ति के भाग्य के नाम पर डूब जाए।0
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राजेवाल की सरकार दिखाई नहीं दे रही, लोग अपने हक के लिए लड़ने को तैयार
Noida, Uttar Pradesh:ਰਾਜੇਵਾਲ ਸਰਕਰ ਨਜ਼ਰ ਨਹੀਂ ਆ ਰਹੀ ਲੋਕ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿਚ ਬੈਠੇ ਨੇ ਮੈਂ ਸਰਕਾਰ ਨੂ ਚੇਤਾਵਨੀ ਦਿੰਨਾ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਸਾਡੇ ਹੱਕ ਲਈ ਲੜਨਾ ਆਉਂਦਾ ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਹਕ ਹੁਣ ਲੇ ਕੇ ਹੀ ਜਾਣਾ ਹੈ ਸਾਨੂੰ ਹੁਣ ਤਕ ਕੋਈ ਵੀ ਮੌਲਿਕ ਸਹੂਲਤਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਪਖਾਨਿਆਂ ਦੀ ਸੁਵਿਧਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਉਪਲਬਧ ਕਰਾਈ ਗਈ ਹਨ0
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नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सोनू सूद का दौरा
Noida, Uttar Pradesh:They lost their homes, their families, their childhood..but together, we will help them find a new beginning. Nepal, you are not alone. Sonu Sood visits flood-affected area in Trishuli Bazar, Nepal.0
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हimachal में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, 259 मौत, 150 सड़कें बंद
Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बीती रात हुई तेज बारिश के बाद प्रदेश में 150 सड़कें बंद हो गई हैं। यह आंकड़ा बीते दिन के मुकाबले करीब दोगुना है। इसके अलावा 374 जगहों पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि 40 स्थानों पर जल आपूर्ति प्रभावित हुई है। बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में मंडी शामिल है। मंडी जिले में सबसे अधिक 78 सड़कें बंद हैं। लगातार बारिश के कारण सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं को बहाल करने में प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से अब तक प्रदेश में 259 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 106 लोगों की मौत प्राकृतिक आपदाओं, जबकि 153 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है। बारिश और प्राकृतिक आपदा से हिमाचल प्रदेश को अब तक 1,202 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस दौरान 34 पक्के और 71 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगातार जारी बारिश के बीच प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं को बहाल करने का काम जारी है।0
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ED की चिट्ठी पर पंजाब पुलिस का जवाब: ED अधिकारी नहीं पेश हुए
Noida, Uttar Pradesh:ED की चिट्ठी पर पंजाब पुलिस का जवाब ED की 30 जुलाई वाली चिट्ठी का जवाब कुछ चैट और स्क्रीनशॉट पढ़ने योग्य नहीं - पुलिस ED की तरफ से बताएं महत्वपूर्ण हिस्से पढ़ने योग्य नहीं - पुलिस कुछ मामलों में बातचीत का बड़ा सद्भाव समझना मुश्किल है रिकॉर्ड की सही और प्रमाणित कापी मुहैया करवाई जाए 1 सितंबर को ED के आधिकारिक अधिकारी को पेश होने के लिए कहा था ED का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा0
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हिमाचल: 26,724 आउटसोर्स कर्मचारी, अस्थाई चालकों के लिए 1,500 रुपये दैनिक मानदेय
Shimla, Himachal Pradesh:हimachal प्रदेश में इस समय 26,724 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर विभिन्न सरकारी संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। राज्य सरकार के पास इन कर्मचारियों के लिए नई आउटसोर्स नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह जानकारी विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सामने आई। भाजपा विधायक डॉ. हंसराज और इंद्र सिंह गांधी ने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर सरकार से सवाल पूछा था। विधायकों ने पूछा था कि प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों, बोर्डों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। साथ ही यह भी पूछा गया था कि क्या सरकार इनके लिए नई आउटसोर्स नीति बनाने पर विचार कर रही है। यह मामला वित्त विभाग से संबंधित था, इसलिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से लिखित जवाब दिया गया। सरकार ने बताया कि सभी विभागों, निगमों और बोर्डों आदि में कुल 26,724 आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। नई आउटसोर्स नीति के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई मामला उसके पास विचाराधीन नहीं है। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम में अस्थाई चालकों के पदों के लिए निगम प्रबंधन को 3,100 आवेदन प्राप्त हुए थे। फिलहाल सरकार का इन आवेदकों को नियुक्ति पत्र देने का कोई विचार नहीं है। हालांकि, निकट भविष्य में जरूरत पड़ने पर इनकी सेवाएं ली जा सकती हैं। इस संबंध में भाजपा विधायक विपिन परमार ने विधानसभा के मानसून सत्र में अतारांकित सवाल पूछा था। विभागीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री की ओर से इसका लिखित जवाब दिया गया。 सरकार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर अस्थाई चालकों को नियुक्ति दी जाएगी और उन्हें प्रतिदिन 1,500 रुपये मानदेय दिया जाएगा। यह व्यवस्था अस्थाई होगी और केवल आवश्यकता के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। ऐसे में इन चालकों को टीए-डीए देय नहीं होगा। 1,500 रुपये का दैनिक मानदेय केवल नियुक्ति होने की स्थिति में ही दिया जाएगा। सरकार ने यह भी बताया कि इस समय हिमाचल पथ परिवहन निगम के विभिन्न डिपुओं में चालकों के 831 पद रिक्त हैं। गौरतलब है कि निगम के चालकों की ओर से हड़ताल पर जाने का फैसला किए जाने के समय सरकार ने आपात परिस्थितियों में बस सेवाएं जारी रखने के लिए अस्थाई चालकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। इसके तहत सरकार को 3,100 आवेदन प्राप्त हुए थे। अब सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन आवेदकों की सेवाएं ली जाएंगी。0
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जालंधर: ट्रैवल एजेंट दफ्तर के बाहर ठगी के आरोप, पीड़ितों ने प्रदर्शन किया
Jalandhar, Punjab:जालंधर के बस स्टैंड के पास ट्रैवल एजेंट के दफ्तर और इंस्टीट्यूट के बाहर उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब लोग अपने पैसे लेने के लिए पहुंचे। बताया जा रहा है कि लोगों के साथ वीजा देने के नाम पर लाखों की ठगी की गई है। मौके से इंस्टीट्यूट मालिक मौजूद नहीं है। वहीं भड़के लोगों ने कंपनी के एचआर को पकड़ लिया है। एक युवक नवनीत कुमार का कहना है कि उसने 2026 में ऑस्ट्रेलिया के स्टडी वीजा के लिए आवेदन किया था। एजेंसी ने उससे लगभग 65 लाख रुपये ले लिए, लेकिन 8 महीने के लंबे इंतजार के बाद वीजा देने के अगले ही दिन उसे 'होल्ड' पर बता दिया गया। पिछले दो सालों से दफ्तर के चक्कर लगवाने के बावजूद एजेंसी का कोई प्रतिनिधि संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा। प्रदर्शन के दौरान एक बेबस मां का दर्द भी छलक पड़ा। इधर पुलिस ने इंस्टीट्यूट के एचआर को हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठा लिया है। लोगों ने पुलिस पर भी आरोप लगाए कि वह कार्रवाई नहीं कर रही है। पुलिस की गाड़ी को घेरा डाल लिया गया। अधिकारी ने बताया कि विभिन्न गांवों से परेशान लोग एकजुट होकर आए थे। पुलिस ने कुछ कागजात व शिकायतें ले ली हैं और जांच के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के बाद सभी पीड़ित परिवारों ने पुलिस और प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है।0
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फरीदकोट से पाकिस्तानी जुवेनाइल की वापसी, अटारी सीमा से भारत भेजे जाने की पुष्टि
Noida, Uttar Pradesh:ਦਫ਼ਤਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਲੋਕ ਸੰਪਰਕ ਅਫ਼ਸਰ ਫ਼ਰੀਦਕੋਟਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਕਾਨੂੰਨੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਅਥਾਰਟੀ ਫ਼ਰੀਦਕੋਟ ਨੇ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਜੁਵੈਨਾਇਲ ਨੂੰ ਭੇਜਿਆ ਵਾਪਸ ਅਟਾਰੀ ਸਹਿਮਤ ਭਰਪੂਰ ਸਰਹੱਦ ਰਾਹੀਂ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਰੈਂਜਰਾਂ ਨੂੰ ਸੌਂਪਿਆ - ਚੰਗੇ ਭਵਿੱਖ ਲਈ ਦਿੱਤੀਆਂ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਫਰੀਦਕੋਟ 1 ਸਤੰਬਰ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰਾਲੇ ਦੇ ਹੁਕਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਸ਼੍ਰੀ ਸੰਜੇ ਅਗਨੀਹੋਤਰੀ ਮਾਨਯੋਗ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਅਤੇ ਸ਼ੈਸ਼ਨ ਜੱਜ ਕਮ ਚੇਅਰਮੈਨ, ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਕਾਨੂੰਨੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਅਥਾਰਟੀ, ਫਰੀਦਕੋਟ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਸ੍ਰੀਮਤੀ ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਕੌਰ ਚੀਫ ਜੁਡੀਸ਼ੀਅਲ ਮੈਜਿਸਟ੍ਰੇਟ ਕਮ ਸਕੱਤਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਕਾਨੂੰਨੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਅਥਾਰਟੀ, ਫਰੀਦਕੋਟ ਵਲੋਂ ਅਬਜਰਵੇਸ਼ਨ ਹੋਮ ਫਰੀਦਕੋਟ ਤੋਂ ਇੱਕ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਵਾਪਸ ਉਸਦੇ ਦੇਸ਼ ਭੇਜਣ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ ਗਿਆ । ਇੱਕ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਜੁਵਿਨਾਇਲ (ਨਾਮ ਗੁਪਤ) ਜੋ ਕਿ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਦੀ ਸਰਹੱਦ ਤੋਂ ਗੈਰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸਰਹੱਦ ਅੰਦਰ ਦਾਖਲ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ । ਇਸ ਉਪਰੰਤ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਦੀ ਮਾਨਯੋਗ ਜੁਵਿਨਾਇਲ ਜਸਟਿਸ ਅਦਾਲਤ ਵੱਲੋਂ ਉਸਨੂੰ ਜੁਵਿਨਾਇਲ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿੱਚ ਲਿਆ ਗਿਆ ਸੀ ਅਤੇ ਸਾਲ 2025 ਵਿੱਚ ਉਸ ਦਾ ਕੇਸ ਖਤਮ ਕਰ ਦਿੱਤਾ । ਇਸ ਸ sbੰਧੀ ਵਿਦੇਸ਼ ਮੰਤਰਾਲੇ ਦੀ ਮਨਜ਼ੂਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੁਣ ਇਸ ਜੁਵਿਨਾਇਲ ਨੂੰ ਮਾਨਯੋਗ ਸੈਸ਼ਨਜ਼ ਜੱਜ , ਫਰੀਦਕੋਟ ਵੱਲੋਂ ਮਨਿਸਟਰੀ ਆਫ ਹੋਮ ਅਫੇਅਰ ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਹੁਕਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਭਾਰਤ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਸਰਹੱਦ ਅਟਾਰੀ ਤੋਂ ਉਸਦੇ ਦੇਸ਼ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਭੇਜਣ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਚੀਫ ਜੁਡੀਸ਼ੀਅਲ ਮੈਜਿਸਟ੍ਰੇਟ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਅਬਜਰਵੇਸ਼ਨ ਹੋਮ ਫਰੀਦਕੋਟ ਤੋਂ ਰਵਾਨਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਅਤੇ ਅਟਾਰੀ ਵਿਖੇ ਇਸ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਸੁਪਰਡੰਟ ਅਬਜਰਵੇਸ਼ਨ ਹੋਮ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਟਾਫ ਵੱਲੋਂ ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਰੇਂਜ਼ਰ ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਕੀਤਾ ਗਿਆ । ਰਵਾਨਗੀ ਮੌਕੇ ਜੱਜ ਸਾਹਿਬ ਵੱਲੋਂ ਉਕਤ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਮਠਿਆਈ, ਫਰੂਟ ਅਤੇ ਕੱਪੜੇ ਦੇ ਕੇ اپنے ਵਤਨ ਜਾਣ ਦੀ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ ਅਤੇ ਤਾਕੀਦ ਕੀਤੀ ਕਿ ਅੱਗੇ ਤੋਂ ਉਹ ਗੈਰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਗਤੀਵਿਧੀ ਨਾਲ sbੰਧ ਨਾ ਰੱਖੇ ਅਤੇ ਬਿਨਾਂ ਵੀਜ਼ੇ ਤੋਂ ਕਿਸੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸਰਹੱਦ ਕੋਲ ਨਾ ਜਾਵੇ।0
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DA मामले पर पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ
Noida, Uttar Pradesh:पंजाब सरकार DA मामले में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पंजाब सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर ‘टेक-होम सैलरी’ देने को तैयार पंजाब सरकार कर्मचारियों का कुल वेतन पहले ही केंद्रीय मुलजिमों से ज्यादा है पंजाब सरकार में वेतन और पेंशन पर खर्च राज्य की राजस्व प्राप्तियों का लगभग 51% है जबकि भारतीय औसत लगभग 38% है पंजाब सरकार चरणबद्ध तरीके से बकाया दे रही है और उसी को जारी रखी के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी0
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AAP विधायक राम सिंह पर कार्रवाई? tarun चugh के घर प्रदर्शन ड्रामा
Noida, Uttar Pradesh:The person in picture who is paying tributes to mass murderer Sajjan Kumar is a sitting MLA of #AAP Ram Singh Netaji. What action AAP has taken against him. Their holding protest at house of Tarun Chugh BJP is purely a drama. AAP joined hands with Cong outside Punjab.0
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पंजाब सरकार के DA Equal pay पर सुप्रीम Court दलील: टेक-होम वेतन में समानता की मांग
Chandigarh, Chandigarh:पंजाब सरकार महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के फैसले के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने कर्मचारियों को वास्तविक वेतन के मामले में समान केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन देने के लिए तैयार है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि महंगाई भत्ते का निर्धारण केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लागू प्रतिशत से आंख मूंदकर मिलान करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ 1 सितंबर 2 पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 3 अगस्त 2026 के फैसले के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने कर्मचारियों को वास्तविक वेतन के मामले में समान केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन देने के लिए तैयार है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि महंगाई भत्ते का निर्धारण केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लागू प्रतिशत से आंख मूंदकर मिलान करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। राज्य ने विशेष रूप से अपने कर्मचारियों को समान केंद्रीय श्रेणियों के साथ टेक-होम (हाथ में आने वाले) वेतन में पूर्ण समानता प्रदान करने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने की पेशकश की है। सरकार ने यह रुख बनाए रखा है कि यह दृष्टिकोण कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा, साथ ही उस स्थिति से भी बचाएगा जहां एक ही डीए प्रतिशत लागू करने से कुल वेतन काफी अधिक हो जाता है, क्योंकि पंजाब में कई श्रेणियों में मूल वेतन (बेसिक पे) पहले से ही अधिक है। क्लर्क के लिए, पंजाब का मूल वेतन ₹38,600 है और 42% डीए पर कुल परिलब्धियां ₹54,812 हैं, जबकि 60% डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹36,960 है। ड्राइवर के लिए, पंजाब का मूल वेतन ₹28,600 है और 42% डीए पर कुल परिलब्धियां ₹40,612 हैं, जबकि 60% डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹36,960 है। स्टेनोग्राफर के लिए, पंजाब का मूल वेतन ₹39,700 है और 42% डीए पर कुल परिलब्धियां ₹56,374 हैं, जबकि 60% डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹47,360 है। ईटीटी शिक्षकों के लिए, पंजाब का मूल वेतन ₹47,600 है और 42% डीए पर कुल परिलब्धियां ₹67,592 हैं, जबकि 60% डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹65,760 है। कांस्टेबल के लिए, पंजाब का मूल वेतन ₹38,600 है और 42% डीए पर कुल परिलब्धियां ₹54,812 हैं, जबकि 60% डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹36,960 है। एसएलपी में बताया गया है कि इन पांच प्रतिनिधि श्रेणियों में पंजाब की कुल परिलब्धियां संबंधित केंद्र सरकार की परिलभ्धियों से पहले से ही अधिक हैं, जिसमें प्रति माह ₹1,832 से ₹17,852 तक का अंतर है। क्लर्क और कांस्टेबल श्रेणियों में, पंजाब का ₹38,600 का मूल वेतन ही केंद्र सरकार के कुल ₹36,960 से अधिक है, जिसमें ₹23,100 मूल वेतन और 60% डीए शामिल है। यदि पंजाब यांत्रिक रूप से डीए बढ़ाकर 60% कर देता है, तो पंजाब के एक क्लर्क या कांस्टेबल की कुल परिलब्धियां बढ़कर ₹61,760 हो जाएंगी, जबकि संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह ₹36,960 है। पंजाब सरकार का मुख्य तर्क यह है कि डीए प्रतिशत को मूल वेतन से अलग करके नहीं देखा जा सकता। चूंकि डीए की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है, इसलिए पंजाब के उच्च मूल वेतन के आधार पर उच्च केंद्रीय प्रतिशत लागू करने से वास्तविक समानता के बजाय कुल वेतन काफी अधिक हो सकता है। इसलिए विशेष अनुमति याचिका में कहा गया है कि उचित तुलना कुल वेतन पैकेज की है, जिसमें मूल वेतन और डीए शामिल हैं, न कि केवल डीए प्रतिशत की। राज्य ने बताया है कि कई प्रमुख काडरों में पंजाब का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक है। छठे पंजाब वेतन आयोग ने 2.57 के गुणक (मल्टीप्लिकेशन फैक्टर) को अपनाने वाले सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की तुलना में 2.59 से 2.72 तक के गुणक का उपयोग करके राज्य के वेतन में संशोधन किया था। नतीजतन, पूरे पे मैट्रिक्स में पंजाब का मूल वेतन संबंधित केंद्रीय मूल वेतन से अधिक है। इसलिए राज्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसका उद्देश्य कर्मचारियों को समानता से वंचित करना नहीं है। बल्कि, यह यांत्रिक रूप से समान प्रतिशत लागू करने के बजाय, समान केंद्रीय श्रेणियों के साथ टेक-होम वेतन में समानता प्रदान करने के लिए जहां भी आवश्यक हो, डीए में पर्याप्त वृद्धि करने की पेशकश की है। पंजाब सरकार ने आगे बताया है कि पंजाब की वेतन और पेंशन प्रतिबद्धताएं उसके वित्त पर विशेष रूप से भारी बोझ डालती हैं। कैबिनेट उप-समिति द्वारा संकलित सामग्री के अनुसार, वेतन और पेंशन पर खर्च राज्य की राजस्व प्राप्तियों का लगभग 51% है, जबकि अखिल भारतीय औसत लगभग 38% है, जबकि ब्याज सहित प्रतिबद्ध देनदारियां राजस्व प्राप्तियों का लगभग 82% हैं। डीए को पूरी तरह से केंद्रीय दर के अनुरूप करने से हर साल लगभग ₹6,500 करोड़ का अतिरिक्त आवर्ती बोझ पड़ेगा। डीए में 18 प्रतिशत अंक की वृद्धि से वेतन और पेंशन पर खर्च राजस्व प्राप्तियों के लगभग 52% से बढ़कर 57.5% हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि राज्य के उपलब्ध राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा आबादी के अपेक्षाकृत छोटे हिस्से के वेतन और पेंशन के लिए पहले से ही प्रतिबद्ध है। आवर्ती वेतन, पेंशन और डीए पर खर्च किया जाने वाला हर अतिरिक्त रुपया ऐसा रुपया है जिसे स्कूलों, अस्पतालों, बुनियादी संरचना, विकास और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर एक साथ खर्च नहीं किया जा सकता है। इसलिए राज्य ने प्रस्तुत किया है कि राज्य के कर्मचारियों के मुआवजे का निर्धारण करने में वित्तीय क्षमता एक वैध और आवश्यक विचार है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी है जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पंजाब में सेवारत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू दरों पर लंबित डीए/डीआर किश्तों का भुगतान करने की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि लंबित राशियाँ एक पखवाड़े के भीतर जारी की जाएं, चूक के मामले में 6% साधारण ब्याज दिया जाए, और लिक्विडेशन प्लान को उस सीमा तक रद्द कर दिया था जहां तक उसने लगभग ₹14,191 करोड़ के स्वीकृत बकाये के भुगतान को स्थगित कर दिया था। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह कर्मचारियों को उस लाभ से वंचित करने की कोशिश नहीं कर रहा है जिसके वे कानूनी रूप से हकदार हैं। बल्कि, इसने तुलनात्मक केंद्रीय श्रेणियों के साथ वास्तविक वेतन में समानता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक डीए वृद्धि प्रदान करने की पेशकश की है। साथ ही, इसने मौजूदा लिक्विडेशन प्लान के तहत स्वीकार किए गए बकाये का भुगतान जारी रखने की अनुमति मांगी है, जब तक कि मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय नहीं किया जाता। पंजाब का वैधानिक ढांचा स्वचालित केंद्रीय डीए समानता का आदेश नहीं देता पंजाब सरकार ने बताया है कि प्रत्येक राज्य का अपने कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाला अपना वैधानिक ढांचा है। संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधान के तहत बनाए गए पंजाब के लागू पंजाब सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2021, में कोई निश्चित डीए प्रतिशत, केंद्रीय सूचकांक, स्वचालित फॉर्मूला या केंद्र सरकार দ্বারা घोषित डीए दर से स्वचालित जुड़ाव निर्धारित नहीं है। नियम डीए का निर्धारण राज्य सरकार पर छोड़ते हैं। इस बीच, केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों के लिए अपने वैधानिक ढांचे का पालन करती है। अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए डीए केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कानून के तहत निर्धारित किया जाता है, और पंजाब के पास उस दर को बदलने की कोई शक्ति नहीं है। राज्य सरकार के कर्मचारी राज्य सरकार के वैधानिक ढांचे द्वारा शासित होते हैं। इसलिए राज्य ने प्रस्तुत किया है कि प्रत्येक राज्य सरकार के लिए केंद्र सरकार के डीए प्रतिशत को अपनाने की कोई स्वचालित कानूनी आवश्यकता नहीं है। अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग वैधानिक ढांचे, वेतन संरचनाएं और वित्तीय क्षमताएं होती हैं, और डीए की दरें तदनुसार भिन्न हो सकती हैं। पंजाब का अपना रिकॉर्ड भी दर्शाता है कि उसने केंद्र के हर डीए संशोधन का यांत्रिक रूप से मिलान नहीं किया है। पंजाब ने नवंबर 2021 में डीए 17% से बढ़ाकर 28%, अक्टूबर 2022 में 28% से 34%, दिसंबर 2023 में 34% से 38% और नवंबर 2024 में 38% से 42% किया था। राज्य ने प्रस्तुत किया है कि यद्यपि पंजाब ने ऐतिहासिक रूप से केंद्रीय डीए दर को एक संदर्भ बिंदु के रूप में माना है, लेकिन उसी दर पर और उसी तारीख को प्रत्येक केंद्रीय संशोधन का मिलान करने का कोई स्वचालित वैधानिक दायित्व कभी नहीं रहा है। कैबिनेट के फैसले ने वैधानिक नियमों में संशोधन नहीं किया पंजाब सरकार ने छठे पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों और जून 2021 के कैबनेट के फैसले और संचार पर हाईकोर्ट की निर्भरता को भी संबोधित किया है। राज्य की स्थिति यह नहीं है कि कैबिनेट ने कभी इस मुद्दे पर विचार नहीं किया। इस मुद्दे पर विचार किया गया और सैद्धांतिक रूप से नीतिगत निर्णय लिया गया। हालांकि, बाद के पंजाब सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2021 में स्वचालित केंद्रीय डीए तंत्र को शामिल नहीं किया गया। नियमों में कोई केंद्रीय सूचकांक, निश्चित फॉर्मूला, निश्चित प्रतिशत या केंद्रीय डीए से स्वचालित भविष्य का जुड़ाव शामिल नहीं है। राज्य ने विशेष रूप से ध्यान दिलाया है कि प्रासंगिक निर्णय में प्रयुक्त भाषा यह थी कि सरकार केंद्रीय डीए दर को स्वीकार कर सकती है। इसी तरह, केंद्र के समान ही डीए लागू करने के संबंध में, सरकार ने कहा कि वह ऐसा करने का "प्रयास कर सकती है"। पंजाब ने प्रस्तुत किया है कि "स्वीकार कर सकती है" और "प्रयास कर सकती है" शब्दों को बिना शर्त वैधानिक आदेश के रूप में नहीं माना जा सकता है। "प्रयास" शब्द का अर्थ कुछ करने की कोशिश से है और यह अनिवार्य रूप से वित्तीय क्षमता और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों सहित विचारों के लिए गुंजाइश छोड़ता है। राज्य के अनुसार, हाईकोर्ट ने "प्रयास" का गलत अर्थ निकाला है कि यह एक बाध्यकारी दायित्व बनाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैबिनेट के फैसले को कभी भी वैधानिक नियमों में संशोधन में तब्दील नहीं किया गया। इसलिए राज्य ने तर्क दिया है कि किसी पूर्व नीतिगत निर्णय को स्थायी वैधानिक दायित्व में नहीं बदला जा सकता है, जब अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक नियमों में जानबूझकर ऐसा कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया। राज्य ने पंजाब के मामले को पश्चिम बंगाल से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से भी अलग बताया है। पश्चिम बंगाल के मामले में, संबंधित वैधानिक नियमों में ही एक विशिष्ट मुद्रास्फीति-सूचकांक तंत्र शामिल था। पंजाब के नियमों में केंद्रीय डीए दर से ऐसा कोई वैधानिक जुड़ाव शामिल नहीं है। आईएएस अधिकारियों के साथ तुलना कानूनी रूप से गलत है पंजाब सरकार ने पंजाब में सेवारत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू डीए पर हाईकोर्ट की निर्भरता को चुनौती दी है। केंद्र सरकार केंद्रीय कानून के तहत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों का डीए तय करती है। पंजाब के पास उस दर को बदलने की कोई शक्ति नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब के पास अपने कर्मचारियों की सेवा शर्तों को निर्धारित करने का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है। इसलिए राज्य ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 14 का उपयोग केंद्रीय कानून द्वारा पंजाब पर थोपी गई दर को राज्य कानून द्वारा शासित राज्य कर्मचारियों के एक बिल्कुल अलग वर्ग के लिए अनिवार्य दर में बदलने के लिए नहीं किया जा सकता है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के उन पहले के फैसलों पर भी भरोसा किया है, जिनमें एसएलपी के अनुसार यह माना गया है कि केंद्रीय कानून के तहत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू डीए की तुलना राज्य कानून द्वारा शासित कर्मचारियों को देय डीए से नहीं की जा सकती। पंजाब ने तर्क दिया है कि हाईकोर्ट द्वारा इस पहलू पर ठीक से विचार नहीं किया गया है। राज्य ने यह भी प्रस्तुत किया है कि यदि आईएएस अधिकारियों पर लागू डीए दर को अनुच्छेद 14 के तहत सभी राज्य कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मानदंड माना जाता है, तो यह प्रभावी रूप से संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के संवैधानिक विभाजन को कमजोर करेगा, क्योंकि केंद्र द्वारा अपनी सेवाओं के लिए निर्धारित दर राज्य सरकार के कर्मचारियों पर खर्च तय करेगी। लिक्विडेशन प्लान: पंजाब ने बकाये से इनकार नहीं किया है सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दिया गया दूसरा प्रमुख मुद्दा लगभग ₹14,191 करोड़ के स्वीकृत डीए/डीआर बकाये से संबंधित है, जो मुख्य रूप से 2016 से 2021 तक की अवधि से संबंधित है। राज्य ने बताया है कि यह बकाया पूर्व अवधि के दौरान लिए गए निर्णयों के कारण है और वित्तीय बोझ अब वर्तमान सरकार द्वारा उठाया जा रहा है। बकाये से इनकार करने के बजाय, राज्य ने स्वीकृत देनदारी को चरणों में चुकाने के लिए एक संरचित लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। लिक्विडेशन प्लान पांच वित्तीय वर्षों में भुगतान का प्रावधान करता है, जिसमें पेंशनभोगियों के लिए उम्र-आधारित किश्त अनुसूची है। आयु-आधारित क्रमबद्धता का उद्देश्य वृद्ध पेंशनभोगियों को उनकी कम शेष जीवन प्रत्याशा के कारण प्राथमिकता देना था, जबकि युवा पेंशनभोगियों को शेष अवधि में उनका पूरा बकाया प्राप्त होगा। मंत्रिपरिषद ने 13 फरवरी 2025 को लिक्विडेशन प्लान को मंजूरी दी और सरकार ने 18 फरवरी 2025 को इसे प्रभावी करने का आदेश जारी किया। हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बाद में 21 फरवरी 2025 को इस योजना को रिकॉर्ड पर लिया और अनुपालन का निर्देश दिया। PSPLC ने बाद में अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी लिक्विडेशन प्लान को अपनाया। राज्य पहले से ही योजना के तहत भुगतान कर रहा है। योजना के तहत कोई भी कर्मचारी या पेंशनभोगी स्वीकृत बकाये का कोई भी हिस्सा नहीं खोता है; मुद्दा केवल भुगतान के समय और तरीके का है। इसलिए राज्य ने तर्क दिया है कि चरणबद्ध तंत्र पुराने पेंशनभोगियों को प्राथमिकता देते हुए पूरे स्वीकृत दायित्व को चुकाने के लिए एक व्यवस्थित और वित्तीय रूप से प्रबंधनीय मार्ग प्रदान करता है। हालाँकि, हाईकोर्ट ने राज्य को एक पखवाड़े के भीतर पूरी लंबित राशि जारी करने का निर्देश दिया। एसएलपी में बताया गया है कि लगभग ₹14,191 करोड़ का स्वीकार किया गया बकाया राज्य के पूरे वार्षिक वेतन और पेंशन खर्च के लगभग तीन महीने के बराबर है, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार लगभग ₹58,064.05 करोड़ है। राज्य ने प्रस्तुत किया है कि चौदह दिनों के भीतर इस तरह के निर्देश का पालन करना न के बराबर है और राज्य की संचित निधि से निकासी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है। इस तरह के खर्च के लिए अनुपूरक व्यय, अनुदान, विधायी अनुमोदन और विनियोग शामिल संवैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन आवश्यक है। इसलिए राज्य ने एक पखवाड़े के भीतर लगभग ₹14,191 करोड़ के भुगतान की आवश्यकता वाले निर्देश को चुनौती दी है, और यह प्रस्तुत किया है कि कार्यपालिका संवैधानिक रूप से निर्धारित विधायी प्रक्रिया के बिना संचित निधि से ऐसी राशि कानूनी रूप से नहीं निकाल सकती है। डीए दर, समय और ब्याज पर हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती एसएलपी हाईकोर्ट के फैसले को कई आधारों पर चुनौती देती है, जिसमें डीए समानता निर्धारित करने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के साथ पंजाब सरकार के कर्मचारियों की तुलना, लंबित बकाये को तत्काल देय देनदारी के रूप में मानना, और एक पखवाड़े के भीतर पूरी राशि जारी करने का निर्देश शामिल है। राज्य ने इस पर भी सवाल उठाया है कि क्या कोई अदालत खुद डीए के भुगतान की दर, समय और तरीके का निर्धारण कर सकती है, जहां लागू वैधानिक नियम स्वचालित केंद्र सरकार से जुड़ी दर निर्धारित नहीं करते हैं। पंजाब ने प्रस्तुत किया है कि यदि डीए के लिए एक प्रवर्तनीय अधिकार मान भी लिया जाए, तो सटीक दर का निर्धारण, वह तिथि जिससे इसे लागू होना चाहिए और संशोधन का अंतराल, वास्तविक मजदूरी के क्षरण, मौजूदा परिलब्धियों और बोझ को सहन करने की नियोक्ता की क्षमता सहित कारकों के मूल्यांकन को शामिल करता है। इस तरह का वेतन-निर्धारण अभ्यास सक्षम कार्यकारी प्राधिकरण और विशेषज्ञ निकायों के दायरे में आता है। states ने डिफ़ॉल्ट के मामले में हाईकोर्ट द्वारा 6% साधारण ब्याज दिए जाने को भी चुनौती दी है, और यह प्रस्तुत किया है कि ब्याज निर्देश विवादित डीए अंतर को पहले से अर्जित देनदारी के रूप में मानता है, भले ही राज्य की स्थिति यह हो कि लागू वैधानिक नियमों के तहत उच्च डीए दर कभी तय ही नहीं की गई थी। राज्य ने हाईकोर्ट के उस निर्देश को भी चुनौती दी है जिसमें बकाये का भुगतान होने तक उसे "अनुत्पादक खर्च" करने से रोका गया है। पंजाब ने प्रस्तुत किया है कि यह अभिव्यक्ति अस्पष्ट है और यह निर्देश राज्य के बजट पर सामान्य कार्यकारी निर्णय लेने में हस्तक्षेप करता है। पंजाब सरकार ने यह भी बताया है कि उसका विस्तृत तुलनात्मक वेतन हलफनामा फैसला सुनाए जाने से पहले हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया था। वित्त विभाग की ओर से दायर हलफनामे में सात प्रतिनिधि श्रेणियों की तुलना और टेक-होम वेतन में समानता हासिल करने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने का राज्य का वचन शामिल था। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तर्क दिया है कि आक्षेपित फैसले में इस सामग्री और वचन पर ठीक से विचार नहीं किया गया था। एसएलपी मूल कार्यवाही से परे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों तक राहत के विस्तार को भी चुनौती देती है, जिसमें PSPLC कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से संबंधित मुद्दे और उन कार्यवाही में एक पक्ष के रूप में पीएसपीसीएल की अनुपस्थिति शामिल है जहां से व्यापक राहत का विस्तार किया गया था। राज्य ने राज्य के खर्च पर हाईकोर्ट के अंकुश को भी चुनौती दी है, और यह ध्यान दिलाया है कि यह निर्देश बिना किसी याचिका या साक्ष्य के जारी किया गया था और हाईकोर्ट द्वारा स्वयं यह स्वीकार करने के बावजूद जारी किया गया था कि अदालत कार्यपालिका की वित्तीय नीति पर सुपर-ऑडिटर के रूप में नहीं बैठती है या अपनी बुद्धिमत्ता को प्रतिस्थापित नहीं करती है। पंजाब सरकार ने तदनुसार सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के निर्देशों और डीए समानता कैसे निर्धारित की जानी चाहिए, इस व्यापक प्रश्न की जांच करने का आग्रह किया है, जबकि उसने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक निष्पक्ष और वित्तीय रूप से टिकाऊ वेतन ढांचा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। राज्य ने एसएलपी के लंबित रहने के दौरान 3 अगस्त के हाईकोर्ट के फैसले के संचालन और कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है। विकल्प के रूप में, इसने डीए/डीआर भुगतान, ब्याज, व्यय पर अंकुश और लिक्विडेशन प्लान को रद्द करने से संबंधित निर्देशों पर विशेष रूप से स्टे की मांग की है, जबकि मौजूदा योजना के अनुसार स्वीकार किए गए बकाये का वितरण जारी रखने की अनुमति मांगी है। पंजाब सरकार ने दोहराया है कि वह उसे रोकने की कोशिश नहीं कर रही है जो स्वीकार्य रूप से देय है। वह लिक्विडेशन प्लान के तहत बकाये का वितरण जारी रख रही है और उसने शपथ पत्र पर समान केंद्रीय श्रेणी के साथ टेक-होम वेतन में समानता प्रदान करने की पेशकश की है। इसके साथ ही, राज्य ने प्रस्तुत किया है कि डीए की दर और समय तथा बकाये के भुगतान का निर्धारण करते समय उसके वैधानिक ढांचे, संवैधानिक वित्तीय प्रक्रियाओं और वित्तीय क्षमता का सम्मान किया जाना चाहिए।0
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ED की चिट्ठी पर पंजाब पुलिस ने स्पष्टीकरण मांगा, आज अधिकारी नहीं पहुंचे
Noida, Uttar Pradesh:पंजाब पुलिस ने ED द्वारा भेजी गई चिट्ठी पर 28 अगस्त को पत्र लिख कर मांगा था स्पष्टीकरण पत्र में एक अधिकृत अधिकारी को 1 सितंबर को पंजाब पुलिस के हैडक्वाटर में पूरे रिकॉर्ड सहित हाजिर रहने की करी थी मांग आज ED की ओर से रिकॉर्ड सहित कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा पंजाब पुलिस ने ED की भेजी चैट और स्क्रीनशॉट सामग्री को बताया अस्पष्ट और अधूरा कई दस्तावेज पढ़ने योग्य नहीं, इसलिए आरोपों की सही जांच मुश्किल ED से चैट्स की साफ कॉपी, पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, मेटाडाटा और मूल स्रोत उपलब्ध कराने को कहा गया था0
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सुक्खू ने सहारा योजना का पारदर्शी क्रियान्वयन और 3000 रुपये की मदद की प्रगति जांच
Shimla, Himachal Pradesh:हimachal प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सहारा योजना सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सहारा योजना के प्रभावी, पारदर्शी और सुगम क्रियान्वयन के लिए विभाग ने एक समर्पित ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन विकसित की है। नई प्रणाली के तहत 4,050 सक्रिय एवं पात्र लाभार्थियों को सफलतापूर्वक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया गया है। पोर्टल के माध्यम से 3,958 लाभार्थियों का आधार आधारित ई-केवाईसी भी पूरा किया जा चुका है। जुलाई 2026 के लिए अब तक 3,723 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता जारी की जा चुकी है। वहीं, ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल 4,143 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों को योजना के प्रावधानों के अनुसार प्रक्रिया में लाकर स्वीकृत किया जा रहा है。 विभाग द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल लाइव है और आम जनता के लिए उपलब्ध है। पात्र एवं जरूरतमंद आवेदक मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारा योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन व्यक्तियों को प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जो कुछ चिन्हित घातक बीमारियों से पीड़ित हैं। योजना के तहत उनके परिचारकों को भी सहायता दी जाती है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले चिकित्सा उपचार के दौरान परिवारों पर आर्थिक बोझ और कठिनाइयों को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष के लिए योजना के तहत 20.01 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिसमें से अब तक 4.46 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिए कि योजना का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबे समय तक चलने वाले चिकित्सा उपचार के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे जरूरतमंद परिवारों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।0
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स suk hh wu? नहीं—सुक्खू ने सीबीएसई स्कूलों में दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया
Shimla, Himachal Pradesh:हimachal प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिक्षा विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेशभर के 150 सीबीएसई स्कूलों में दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। स्कूल दिवस के दौरान प्रातः स्कूल पहुंचने के समय, लंच ब्रेक के दौरान और स्कूल से छुट्टी के समय उपस्थिति दर्ज करवाना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड निर्धारित किए जाएंगे। शिक्षकों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड इस वर्ष 1 अक्तूबर से अनिवार्य किया जाएगा। निर्धारित ड्रेस की खरीद में सुविधा के लिए शिक्षकों को एकमुश्त 5,000 रुपये की विशेष वित्तीय सहायता दी जाएगी। विद्यार्थियों की स्कूल यूनिफार्म को लेकर निर्णय अगले एक सप्ताह के भीतर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में करीब 1,200 शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है और आने वाले समय में और शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। राजय सरकार इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को उनके घरों के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों के सुधार और विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार अतिरिक्त 80 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। इस पहल का उद्देश्य बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उनके घर-द्वार पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है। उन्होंने शिक्षा विभाग को इन उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा सीबीएसई स्कूलों के संचालन और सुविधाओं में निरंतर सुधार करने के निर्देश दिए।0
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