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HPU फीस वृद्धि के खिलाफ ABVP का आंदोलन तेज, आमरण अनशन की चेतावनी

Shimla, Himachal Pradesh:HPU में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ ABVP का आंदोलन तेज, चौथे दिन भी क्रमिक अनशन जारी फीस वृद्धि वापस नहीं हुई, तो आमरण अनशन की चेतावनी! प्रदेशभर में भी आंदोलन की तैयारी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। फीस वृद्धि के विरोध में शुरू किया गया एबीवीपी का अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन चौथे दिन में प्रवेश कर गया है। परिषद ने चेतावनी दी है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार ने समय रहते फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ABVP की HPU इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर का कहना है कि विश्वविद्यालय में अलग-अलग फीस में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि छात्रों को मिलने वाली बेसिक सुविधाएं अब भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एकमुश्त इतनी बड़ी फीस बढ़ोतरी को छात्र हित में नहीं माना जा सकता। यहां बच्चों को घर जाने तक के लिए बस नहीं मिलती। इतना हो नहीं, हॉस्टल के हालत बेहद खराब हैं। ABVP का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रदेश के दूर-दराज के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्र पढ़ाई करते हैं। फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर इन छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। एबीवीपी ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस बढ़ोतरी के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि अगर फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में बदला जा सकता है। परिषद का कहना है कि छात्रों की मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को हिमाचल प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों तक भी ले जाया जाएगा। एबीवीपी ने दो टूक कहा है कि फीस वृद्धि वापस नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाइट—1- अक्षय ठाकुर, HPU इकाई अध्यक्ष, ABVP बाइट—-2- भवानी ठाकुर, प्रांत सह मंत्री, ABVP बाइट—3- अदिति अमन टैगोर, HPU इकाई उपाध्यक्ष, ABVP
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भूगोल क्लास के दौरान हंगामा, सुरक्षा कर्मी मौके पर

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में क्लास के बीच अचानक हंगामे से माहौल गरमा गया। भूगोल विभाग में क्लास चल रही थी, तभी एसएफआई से जुड़े कुछ छात्र नेता कक्षा में आए और संबोधित करना चाहा। कुछ वक्त तक कक्षा को संबधित करने के बाद क्लास ले रहे शिक्षक ने छात्र नेताओं को क्लास से बाहर जाने को कहा, लेकिन वे नहीं माने। क्लास में मौजूद भूगोल के छात्र-छात्राओं ने इस तरह जबरन दखल देने का विरोध किया, क्योंकि वे वहां शांति से पढ़ाई करना चाह रहे थे। इसी बीच माहौल बिगड़ने लगा, जिसके बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मी और डीएसपी गौरी दत्त मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल, कैंपस में माहौल तनावपूर्ण है। आम छात्रों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में क्लासरूम की गरिमा और पढ़ाई के माहौल को सुनिश्चित किया जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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चंडीगढ़ कोर्ट ने सलमान खान समेत अन्य को नोटिस जारी, 5 अक्टूबर को जवाब दें

Chandigarh, Chandigarh:चंडीगढ़ कोर्ट ने अरुण گुप्ता द्वारा दायर मामले में अभिनेता सलमान खान और अन्य के खिलाफ नोटिस जारी किया है। 5 अक्टूबर कोcourt में दायर आरोपों पर उनका जवाब देने के लिए कहा गया है। मामले में स्टाइल क्वोटेंट jewellery private limited, प्रसाद बिंदु माधव, संतोष शृवास्तव, बीइंग हूमन फाउंडेशन, सलमान खान और अलवीरा खान अग्निहोत्री को नोटिस भेजा गया है। इन्हें 5 अक्टूबर को कोर्ट में दायर दुष्कर्म आरोपों पर अपना जवाब देना होगा। 2018 में सलमान खान के साथ जुड़े होने की बात पर/arun gupta ने दावा किया कि बड़ी रकम निवेश कर उन्होंने शो-रूम खोलने के लिए प्रेरित किया था, पर बाद में कंपनी ने माल भेजना रोक दिया। इसके बाद कंपनी और सलमान खान के खिलाफ Chandigarh police को शिकायत दी गई थी।
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पंजाब की पल्लवी मुखिजा बनीं मिसेज कनाडा वर्ल्ड 2026

Noida, Uttar Pradesh:पंजाब में जन्मीं पल्लवी मुखिजा बनीं मिसेज कनाडा वर्ल्ड 2026 पंजाब के जालंधर ज़िले के गोराया की रहने वालीं और अब कनाडा में बसीं पल्लवी मुखिजा को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में स्थित बेल परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर में आयोजित नेशनल पेजेंट में 'मिसेज कनाडा वर्ल्ड 2026' का ताज पहनाया गया। पल्लवी ने इस प्रतियोगिता में जीत हासिल की, जिसमें पूरे कनाडा से लगभग 60 महिलाओं ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कई राउंड में हिस्सा लिया, जिनमें आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, शालीनता और मंच पर मौजूदगी जैसे गुणों को परखा गया। उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय खिताब दिलाया, जिससे उनके hometown गोराया और पंजाबी समुदाय का मान बढ़ा है।
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हिमाचल को पंजाब परिसीमन और जल ऊर्जा अधिकारों में बड़ी जीत मिली

Noida, Uttar Pradesh:Sukhvinder Singh Sukhu x post -\nप्रदेश हितों से जुड़े वर्षों पुराने कानूनी एवं प्रशासनिक मामलों में राज्य सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति की है।\n\n- बीबीएमबी से हिमाचल प्रदेश के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के वित्तीय बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली पर राज्य के अधिकार के लिए विभिन्न मंचों पर प्रभावी पैरवी की जा रही है।\n- सर्वोच्च न्यायालय के लगभग 15 वर्ष पुराने निर्णय के बावजूद प्रदेश को अब तक उसका पूरा अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है।\n- पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि एवं परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से पर वैध अधिकार की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है। इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय भी राज्य के दावे को उचित ठहरा चुका है।\n- शानन जलविद्युत परियोजना की लीज समाप्त होने के बावजूद पंजाब ने यह परियोजना अभी तक हिमाचल प्रदेश को वापस नहीं सौंपी है।\n- वर्ष 2002 से लंबित वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में प्रदेश सरकार ने प्रभावी पैरवी कर राज्य के पक्ष में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है।\n- 1,045 मेगावाट क्षमता वाली कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना की रॉयल्टी के मामले में भी राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।\n- लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में हिमाचल प्रदेश के हितों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की गई है।\n\nप्रदेश सरकार प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी。
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सुक्खू की पैरवी से हिमाचल को वित्तीय बकाया और शानन परियोजना में बड़ा लाभ

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और लंबित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अगुवाई में प्रदेश सरकार लगातार कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर पैरवी कर रही है। बीबीएमबी के वित्तीय बकाया, बिजली के हिस्से, चंडीगढ़ की भूमि एवं परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी और शानन जलविद्युत परियोजना जैसे महत्वपूर्ण मामलों को सरकार ने प्रमुखता से उठाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू विभिन्न मंचों पर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल के करीब 4,200 करोड़ रुपये के वित्तीय बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के राज्य के अधिकार की मजबूती से पैरवी कर रहे हैं। करीब 15 वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बावजूद राज्य को अब तक पूरा हक नहीं मिल पाया है। इसके अलावा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के अधिकार का मामला भी सरकार लगातार उठा रही है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय राज्य के दावे को उचित ठहरा चुका है। मुख्यमंत्राी की प्राथमिकताओं में शानन जलविद्युत परियोजना का मामला भी शामिल है। परियोजना की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन पंजाब सरकार ने अभी तक इसे हिमाचल प्रदेश को वापस नहीं सौंपा है। प्रदेश सरकार इस मामले को विभिन्न स्तरों पर उठा रही है और फिलहाल मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 2002 से कानूनी विवाद में फंसे वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में भी प्रदेश सरकार ने प्रभावी पैरवी करते हुए हिमाचल के पक्ष में महत्वपूर्ण जीत हासिल की। न्यायालय के समक्ष मजबूत तथ्यों और साक्ष्यों के साथ पक्ष रखने के बाद यह ऐतिहासिक फैसला प्रदेश के पक्ष में आया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद संपत्ति दोबारा राज्य सरकार के नियंत्रण में आ गई। फैसले के अनुसार राज्य सरकार ने 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अब इस संपत्ति से प्रदेश को हर साल 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो रहा है। 1,045 मेगावाट क्षमता की कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना की रॉयल्टी के मामले में भी राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हिमाचल को परियोजना से मिलने वाली मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। इससे राज्य को हर साल करीब 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में भी हिमाचल के हितों की प्रभावी पैरवी की गई है। पूर्व भाजपा सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये स्वीकार करने पर सहमति दी थी, जिसे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद प्रदेश सरकार के लगातार प्रयासों से भारत सरकार ने जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्यों दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा हिमाचल प्रदेश के हिस्से की करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की। टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के पूरा होने पर हिमाचल को विद्युत घटक के रूप में करीब 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इसकी अनुमानित वार्षिक कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। प्रदेश के अधिकारों से जुड़े इन मामलों में सरकार की सक्रिय पैरवी को हिमाचल के दीर्घकालिक हितों और राज्य के संसाधनों पर वैध अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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