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फिरोजपुर में सात घंटे में दो भाइयों की दिल का दौरे से मौत, गांव में शोक
RKRAJESH KATARIA
Feb 16, 2026 11:49:42
Firozpur, Punjab
फिरोजपुर के गांव कुलगढ़ी एक ऐसे दर्दनाक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। महज सात घंटों के अंतराल में दो सगे भाइयों की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। परिवार ही नहीं, गांव का हर व्यक्ति इस असहनीय सदमे से स्तब्ध है।
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी 71 वर्षीय रजवंत सिंह संधू को सुबह करीब 8 बजे अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें संभाल पाते, उससे पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली। घर में मातम छा गया। बड़े भाई की अचानक हुई मौत से छोटे भाई 69 वर्षीय भगवंत सिंह संधू गहरे सदमे में थे। परिवार और रिश्तेदार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए।
दोपहर में गांव के श्मशान घाट पर रजवंत सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों से परिजनों ने उन्हें विदाई दी। किसी को क्या पता था कि यह दुख यहीं थमने वाला नहीं है। अंतिम संस्कार के बाद जब परिवारजन घर लौटे, तो भगवंत सिंह अपने बड़े भाई के कमरे में गए। वे उसी बिस्तर पर लेट गए, जहां सुबह रजवंत सिंह ने अंतिम सांस ली थी।
बताया जाता है कि बड़े भाई के बिछोह का गम वह सहन नहीं कर पा रहे थे। करीब तीन बजे के आसपास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उन्हें भी दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में संभालने की कोशिश की गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। भगवंत सिंह ने भी उसी घर में, उसी बिस्तर पर दम तोड़ दिया।
सुबह 8 बजे बड़े भाई की मौत और दोपहर करीब 3 बजे छोटे भाई की मौत—सिर्फ सात घंटों में संधू परिवार के दो स्तंभ ढह गए। घर का आंगन, जहां सुबह से ही शोक की लहर थी, शाम तक पूरी तरह चीख-पुकार और आंसुओं से भर गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गांव कुलगढ़ी में इस हृदयविदारक घटना की खबर फैलते ही सन्नाटा पसर गया। लोग इसे भाइयों के अटूट प्रेम का उदाहरण बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों भाइयों में गहरा लगाव था। वे हर सुख-दुख में साथ रहते थे। शायद यही वजह रही कि बड़े भाई के जाने का सदमा छोटे भाई का दिल सहन नहीं कर सका।
गांव के बुजुर्गों की आंखें नम थीं। एक ही दिन में दो भाइयों की अर्थियां उठना पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व और पीड़ादायक घटना है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें छलक उठीं।
रजवंत सिंह संधू और भगवंत सिंह संधू अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनका आपसी प्रेम और साथ निभाने की मिसाल गांव वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रिश्तों की डोर कितनी गहरी और भावनात्मक होती है—कभी-कभी इतनी गहरी कि एक का जाना दूसरे के लिए भी असहनीय हो जाता है।
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