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ATAkashdeep Thind16 Sept 2025, 03:30 pm

पंजाब के बाढ़ से खेत डूबे; केंद्र से 151 करोड़ RKVY राहत की मांग

Noida, Uttar Pradesh:Khudian urges centre to provide 151 crore under RKVY to desilt agriculture land in border districts of Punjab. Demands Rs 80cr to provide 2 Lakh quintal certified wheat seed to farmers for rabi season Participates in national conference on agriculture-rabi campaign 2025 New Delhi, September 16, Referring to the recent floods that damaged 5 Lakh acres under various crops in 2185 villages of the state, the Punjab Agriculture Minister S. Gurmeet Singh Khudian today urged the Central government to provide additional financial assistance of Rs. 151 crore to the State under the Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY) for restoration of land silted-up due to floods in border districts of Punjab. While addressing the national conference on agriculture Rabi campaign 2025 held under the chairmanship of union agriculture minister Mr. Shivraj Singh Chauhan at PUSA Bhawan here today, Punjab Cabinet minister S.Kudian said that recent unprecedented floods have adversely affected large areas of cultivable land and caused heavy losses to the standing crops. Border districts of Punjab (Amritsar, Tarn Taran, Gurdaspur, Pathankot, Kapurthala, Fazilka and Ferozepur) are the worst affected and up to 5 feet of silt/sand has been deposited in the flood affected agricultural fields. He said “The people of Punjab have always come forward with open hearts during the tough times in any part of the country, now the centre should extend its helping hand to pull out the state out of this critical situation.” He emphasised that given the gravity of the situation, timely release of additional funds under DPR component of RKVY will not only help in compensating farmers for their losses but also ensure revival of the agricultural economy of the State. He demanded that the centre should release Rs 80 crore to the state to provide 2Lakh quintal of certified wheat seed to the affected farmers under the seed village programme. He also demanded 25 Lakh for the wheat seed separately under national food security mission. S. Kudian also appealed the union agriculture minister to provide 637 quintals of certified mustard seeds and 375 quintal seeds of black gram to help the farmers. Punjab agriculture minister S. Kudian urged the centre to ensure timely supply of DAP and Urea as per the requirement of the state so that the sowing of crops do not face further delay. He also sought the union agriculture ministers intervention to release Rs. 8,000 cr of RDF and other funds withheld by the centre. union agriculture minister assured S. Khudian that the centre will take all the necessary steps to help the state facing tough times due to floods.
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इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना ने सुंदरनगर के 435 बच्चों को पंख दिए

Sundar Nagar, Himachal Pradesh:आर्थिक मुश्किलों के बीच बच्चों के सपनों को पंख दे रही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना सुंदरनगर में 435 बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ, वर्ष 2026-27 के लिए 53.53 लाख रुपये स्वीकृत एकल माता भावना देवी के लिए बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण का मजबूत सहारा बनी योजना आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने वर्ष 2024 में योजना के लिए आवेदन किया और उसी वर्ष से उन्हें इसका लाभ मिलना शुरू हो गया। योजना के तहत भावना देवी को दोनों बच्चों की शिक्षा एवं जरूरतों के लिए एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिल रही है। उनका कहना है कि नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है और उन्हें अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने का भरोसा मिला है। योजना से 435 बच्चे लाभान्वित हैं: 18 वर्ष तक मिलती है प्रतिमाह आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। नियमित आर्थिक सहयोग से जरूरतमंद परिवारों को बच्चों की शिक्षा जारी रखने में मदद मिल रही है। उच्च शिक्षा के लिए सरकार का सहयोग: योजना के अंतर्गत 18 से 27 वर्ष की आयु के पात्र युवाओं को सरकारी संस्थानों में निःशुल्क उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास और भोजन शुल्क जैसी सुविधाएं शामिल हैं। छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में पात्र विद्यार्थियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रम अथवा उच्च शिक्षा के दौरान रहने के लिए 3000 रुपये प्रतिमाह तक किराया सहायता देने का प्रावधान भी है। इन परिवारों के बच्चों को मिल सकता है लाभ: पात्र परिवार अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आय प्रमाण पत्र, स्थायी निवासी प्रमाण पत्र, बच्चे का आयु प्रमाण पत्र तथा माता या अभिभावक की स्थिति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। हर बच्चे को मिले आगे बढ़ने का अवसर: एसडीएम अमर नेगी शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह: इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से बेटियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के अवसर मिलने से उनके आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। भावना देवी जैसे परिवारों के लिए यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद भी बन रही है।
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हमीरपुर जिला लाइब्रेरी में मॉडर्न किताबी कॉर्नर से पढ़ाई का नया दौर शुरू

Chanwal, Himachal Pradesh:हमीरपुर हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने जिला लाइब्रेरी में एक मॉडर्न किताबी कॉर्नर का उद्घाटन किया था। इस कॉर्नर को मिले रिस्पांस के बाद अब जिला प्रशासन ने एक योजना तैयार की है जिसके तहत सब डिवीजन और ग्रामीण स्तर पर जो भी लाइब्रेरी है वहां पर भी इस तरह के मॉडर्न किताबी कॉर्नर डेवलप किए जाएंगे ताकि यहां आने वाले स्टूडेंट्स अपनी कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की तैयारी और बेहतर ढंग से और एक नए माहौल में कर सकें। आप को बता दें कि प्रतिदिन हमीरपुर ज़िला मुख्यालय स्थित लाइब्रेरी में सैकड़ो छात्र छात्राएं प्रतिदिन प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियों के लिए पहुंचते हैं ऐसे में  जिला प्रशासन के ब्लॉक स्तर पर  लाइब्रेरी खुलने से उनके समय व पैसे की बचत होगी । अब इस ट्रायल की कामयाबी के बाद इस तरह के किताबी कॉर्नर शब्द विजन स्तर पर भी लाइब्रेरी में बनाए जाएंगे ताकि वहां के स्टूडेंट्स को भी इस तरह की बेहतर सुविधा मिल सके।
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FIR विवाद पर भाजपा का क्रमिक अनशन, बिंदल ने आपातकाल हालात का दावा किया

Bilaspur, Chhattisgarh:घुमारवीं थाने के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं का क्रमिक अनशन छठे दिन प्रवेश कर चुका है। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग के नेतृत्व में घुमारवीं थाने के बाहर बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं के क्रमिक अनशन को भाजपा नेताओं का पूर्ण समर्थन मिल रहा है। पहले राज्यसभा सांसद डॉक्टर सिकंदर कुमार, फिर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा और अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर राजीव बिंदल भी क्रमिक अनशन के समर्थन पर अनशन स्थल पर पहुंचे और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान डॉक्टर राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक तरीके से उठने वाली आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है व एक तरफा कार्यवाही को अंजाम दे रही है, जिसे भाजपा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि घुमारवीं थाने में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की शिकायत पर भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई मगर जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दी तो एफआईआर दर्ज करने से क्यों गुरेज किया जा रहा है और इतने लंबे संघर्ष के बावजूद भी पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज ना करना लोकतंत्र की हत्या है। वहीं उन्होंने कहा कि प्रदेश में माफियाराज सक्रिय है और गैंगवार जैसे मामलों पर उचित कार्यवाही के बजाए भाजपा कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिससे साफ हो चला है कि प्रदेश में आपातकाल जैसे हालात पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबतक भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर घुमारवीं थाने में एफआईआर दर्ज नहीं होती तबतक यह आंदोलन जारी रहेगा और प्रदेश भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।
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त्योहारों में मिलावटखोरी पर सख्त सज़ा की मांग, चाक-चौबंद चेकिंग जरूरी

Kapurthala, Punjab:ਕਪੂਰਥਲਾ : ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਜੁਰਮਾਨਾ ਨਹੀਂ, ਸਖ਼ਤ ਸਜ਼ਾ ਮਿਲੇ : ਸਰਾਏ ਜੱਟਾਂ ਦੇ ਲੋਕ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੇ ਸੀਜ਼ਨ ’ਚ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ’ਤੇ ਨਕੇਲ ਕੱਸਣ ਦੀ ਮੰਗ, ਸਾਲ ਭਰ ਚੈਕਿੰਗ ਅਤੇ ਸੈਂਪਲਿੰਗ ਦੀ ਲੋੜ ’ਤੇ ਦਿੱਤਾ ਜ਼ੋਰ ਕਪੂਰਥਲਾ : ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦਾ ਸੀਜ਼ਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੇ ਹੀ ਬਾਜ਼ਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਮੰਗ ਵਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸੇ ਦੌਰਾਨ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਵੀ ਵਧਣ ਦੀ ਚਿੰਤਾ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਸੇ ਗੰਭੀਰ ਲੋਕ-ਮੁੱਦੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ Zee Media ਦੇ ਖਾਸ ਸ਼ੋਅ **‘PIND DI SATH’** ਤਹਿਤ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਕਪੂਰਥਲਾ ਦੇ ਹਲਕਾ ਸੁਲਤਾਨਪੁਰ ਲੋਧੀ ਅਧੀਨ ਪੈਂਦੇ ਪਿੰਡ ਸਰਾਏ ਜੱਟਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਆਵਾਜ਼ ਬੁਲੰਦ ਕੀਤੀ。 ਪਿੰਡ ਵਾਸੀਆਂ ਨੇ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਖਪਤਕਾਰ ਨਾਲ ਧੋਖਾਧੜੀ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਨਾਲ ਸਿੱਧਾ ਖਿਲਵਾੜ ਕਰਾਰ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੁੱਪੜ, ਮਠਿਆਈਆਂ, ਘਿਓ, ਮਸਾਲਿਆਂ ਸਮੇਤ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਕਈ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਚਿੰਤਾ ਬਣੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਜਦੋਂ ਮਠਿਆਈਆਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਵਿਕਰੀ ਕਈ ਗੁਣਾ ਵਧ ਜਾਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰਾਂ ਨੂੰ ਮੋਟਾ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਕਮਾਉਣ ਦਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ。 ### **‘ਮੁਨਾਫ਼ੇ ਲਈ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਨਾਲ ਖਿਲਵਾੜ ਕਿਉਂ?’** ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਸਵਾਲ ਉਠਾਇਆ ਕਿ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਵਿਅਕਤੀ ਵੱਧ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਕਮਾਉਣ ਦੀ ਲਾਲਚ ਵਿੱਚ ਜਾਣ-ਬੁੱਝ ਕੇ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀ ਵਸਤੂ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਵਟ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨਾਲ ਨਰਮੀ ਕਿਉਂ ਵਰਤੀ ਜਾਵੇ? ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੰਗ ਹੈ ਕਿ ਮਿਲਾਵਟ ਸਾਬਤ ਹੋਣ ’ਤੇ ਸਿਰਫ਼ ਕਾਗਜ਼ੀ ਕਾਰਵਾਈ ਜਾਂ ਮਾਮੂਲੀ ਜੁਰਮਾਨੇ ਦੀ_bਜਾਏ ਸਖ਼ਤ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਅਤੇ ਸਜ਼ਾ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਈ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਹੋਰ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਬਕ ਮਿਲ ਸਕੇ。 ### **ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਵੇਲੇ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਸਾਲ ਭਰ ਹੋਵੇ ਚੈਕਿੰਗ** ਸਰਾਏ ਜੱਟਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਸਿਰਫ਼ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੇ ਸੀਜ਼ਨ ਵਿੱਚ ਛਾਪੇਮਾਰੀ ਕਰਨਾ ਕਾਫੀ ਨਹੀਂ। ਫੂਡ ਸੇਫਟੀ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਸਾਲ ਭਰ ਲਗਾਤਾਰ ਚੈਕਿੰਗ, ਅਚਨਚੇਤ ਜਾਂਚ ਅਤੇ ਸੈਂਪਲਿੰਗ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਿੰਡਾਂ ਅਤੇ ਕਸਬਿਆਂ ਦੀਆਂ ਮਠਿਆਈ, ਦੁੱਧ, ਕਰਿਆਨਾ ਅਤੇ ਹੋਰ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਾਲੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ。 ### **‘ਸਸਤੇ ਦੇ ਚੱਕਰ ’ਚ ਸਿਹਤ ਨਾਲ ਸਮਝੌਤਾ ਨਾ ਹੋਵੇ’** ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਮੰਨਿਆ ਕਿ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਸਿਰਫ਼ ਸਰਕਾਰ ਜਾਂ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਖਪਤਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਜਾਗਰੂਕ ਹੋਣਾ ਪਵੇਗਾ ਅਤੇ ਸਿਰਫ਼ ਸਸਤਾ ਮਿਲਣ ਦੇ ਚੱਕਰ ਵਿੱਚ ਸ਼ੱਕੀ ਜਾਂ ਘਟੀਆ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਾਲਾ ਸਮਾਨ ਨਹੀਂ ਖਰੀਦਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿੰਡ ਪੱਧਰ ’ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਕਿ ਮਿਲਾਵਟੀ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਪਛਾਣਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਕਿੱਥੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ。 ### **‘ਕੌਣ ਪੰਗਾ ਲਵੇ’ ਵਾਲੀ ਸੋਚ ਬਦਲਣ ਦੀ ਲੋੜ** ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਈ ਵਾਰ ਕਿਸੇ ਵਸਤੂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ’ਤੇ ਸ਼ੱਕ ਹੋਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਖਪਤਕਾਰ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਿੱਛੇ ਹਟ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ‘ਕੌਣ ਪੰਗਾ ਲਵੇ’ ਵਾਲੀ ਸੋਚ ਕਾਰਨ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰਾਂ ਦੇ ਹੌਸਲੇ ਵਧਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਲਈ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਹੱਕਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਜਾਗਰੂਕ ਕਰਕੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਕਰਨ ਲਈ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ。 ### **ਸਰਕਾਰ, ਦੁਕਾਨਦਾਰ ਤੇ ਲੋਕ—ਤਿੰਨਾਂ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ** ਸਰਾਏ ਜੱਟਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਫੂਡ ਸੇਫਟੀ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਚੈਕਿੰਗ ਕਰਕੇ ਮਿਲਾਵਟਖੋਰਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਨ। ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਇਮਾਨਦਾਰੀ ਨਾਲ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰੀ ਅਤੇ ਮਿਆਰੀ ਵਸਤੂਆਂ ਵੇਚਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ, ਜਦਕਿ ਖਪਤਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਜਾਗਰੂਕ ਹੋ ਕੇ ਸ਼ੱਕੀ ਸਮਾਨ ਦੀ ਖਰੀਦ ਤੋਂ ਬਚਣਾ ਅਤੇ ਗਲਤ ਹੋਣ ’ਤੇ ਆਵਾਜ਼ ਉਠਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ‘PIND DI SATH’ ਰਾਹੀਂ ਸਰਾਏ ਜੱਟਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਸਾਫ਼ ਸੁਨੇਹਾ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਵਟ ਕਰਕੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਿਹਤ ਨਾਲ ਖਿਲਵਾੜ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕੀਮਤ ’ਤੇ ਬਖ਼ਸ਼ਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਮਿਲਾਵਟਖੋਰੀ ਸਾਬਤ ਹੋਣ ’ਤੇ ਸਖ਼ਤ ਸਜ਼ਾ ਹੀ ਅਜਿਹੇ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਸਬਕ ਬਣ ਸਕਦੀ ਹੈ。
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अमृतसर के भग्गूपुर छन्ना में रास्ते के विवाद पर गोलीबारी, 4 घायल; घर और वाहनों को नुकसान

Amritsar, Punjab:अमृतसर में रास्ते के विवाद को लेकर फायरिंग:50 से ज्यादा राउंड फायर, दोनों पक्षों के 4-लोग घायल; घर और वाहन को भी नुकसान पहुंचा अमृतसर के सीमावर्ती गांव भग्गूपुर छन्ना में रास्ते के विवाद को लेकर दो पक्षों में तकरार के बाद गोलियां चलने का मामला सामने आया है। इस दौरान दोनों पक्षों के 3 से 4 लोग घायल हुए हैं। फायरिंग में घरों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत करवाया。 पूर्व सरपंच ने 50 लोगों पर हमला करने का आरोप लगाया गांव के पूर्व सरपंच लखविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर उनकी पुश्तैनी जमीन है। इसी जमीन से रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के ही सुबेग सिंह, लखा सिंह, जिंदर सिंह, गोरू, कालू, घुल्लां सिंह और भट्टो सिंह करीब 40 से 50 अज्ञात हथियारबंद लोगों के साथ शनिवार शाम करीब 5 बजे उनके घर पर हमला करने पहुंचे। आरोप है कि हमलावरों ने 315 बोर की राइफलों से अंधाधुंध फायरिंग की। करीब 50 से ज्यादा राउंड फायरिंग की गई । फायरिंग में घर और वाहन क्षतिग्रस्त, युवक गंभीर लखविंदर सिंह के अनुसार, फायरिंग के दौरान घर में मौजूद महिलाओं ने छिपकर अपनी जान बचाई। गोलियों से घर को भारी नुकसान हुआ और ट्रैक्टरों के टायर भी पंक्चर कर दिए गए। उन्होंने बताया कि इस घटना में उनका भतीजा रविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसे पहले लोपोके के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां से हालत गंभीर होने के चलते अमृतसर रेफर कर दिया गया। वहीं, दूसरी तरफ सुबेग सिंह और लखा सिंह के पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया। उनका कहना है कि लखविंदर सिंह के पक्ष ने उनका पुराना रास्ता जोत दिया था। इसके बाद उनके घर पर गोलियों से हमला किया गया, जिसमें उनके परिवार के 3 से 4 लोग घायल हुए हैं। डीएसपी बोले- दोनों पक्षों में हुई फायरिंग, जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी जगबीर सिंह औलख पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। डीएसपी ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से गोलियां चली हैं। फिलहाल किसी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। शिकायत दर्ज कर ली गई है और मामले में बनती कार्रवाई की जाएगी।
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PGIMER चंडीगढ़ में 8वीं राष्ट्रीय पोषण कॉन्फ्रेंस: प्रीबायोटिक्स और गट-क्लिनिकल प्रभाव पर चर्चा

Chandigarh, Chandigarh:PGIMER ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿੱਚ 8ਵੀਂ ਸਾਲਾਨਾ ਨੈਸ਼ਨਲ ਨਿਊਟ੍ਰੀਸ਼ਨ ਕਾਨਫਰੰਸ ਕਰਵਾਈ ਗਈ PGIMER ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਡਿਪਾਰਟਮੈਂਟ ਆਫ ਡਾਇਟੈਟਿਕਸ ਵੱਲੋਂ ਨਿਊਟ੍ਰੀਸ਼ਨ ਸੋਸਾਇਟੀ ਆਫ ਇੰਡੀਆ (NSI), ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਚੈਪਟਰ ਦੇ ਸਹਿਯੋਗ ਨਾਲ 8ਵੀਂ ਸਾਲਾਨਾ ਨੈਸ਼ਨਲ ਨਿਊਟ੍ਰੀਸ਼ਨ ਕਾਂਫਰੰਸ ਕਰਵਾਈ ਗਈ। ਕਾਨਫਰੰਸ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ “ਮਾਈਕ੍ਰੋਬਾਇਓਮ ਤੋਂ ਮੈਟਾਬੋਲਿਜ਼ਮ: ਮਾਈਕ੍ਰੋਬਾਇਓਮ-ਟਾਰਗੇਟਿਡ ਨਿਊਟ੍ਰੀਸ਼ਨ ਦੇ ਕਲੀਨਿਕਲ ਪ੍ਰਭਾਵ” ਰਿਹਾ। ਕਾਨਫਰੰਸ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਤੋਂ ਡਾਇਟੀਸ਼ੀਅਨ, ਡਾਕਟਰਾਂ ਅਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਲਗਭਗ 250 ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੇ ਹਿੱਸਾ ਲਿਆ। ਵਿਗਿਆਨਕ ਸੈਸ਼ਨਾਂ ਦੌਰਾਨ ਪ੍ਰੀਬਾਇਓਟਿਕਸ ਅਤੇ ਗਟ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਪ੍ਰੀਬਾਇਓਟਿਕਸ ਪਿਆਜ਼, ਲਸਣ, ਚਿਕੋਰੀ ਰੂਟ ਪਾਊਡਰ, ਕੇਲੇ, ਬੱਕਰੀ ਅਤੇ ਗਾਂ ਦੇ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਕਈ ਫਲਾਂ-ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਫਾਈਬਰ ਆਦਿ ਤੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਇੱਕ ਸਬੂਤ-ਅਧਾਰਿਤ ਖੁਰਾਕ ਮਾਡਲ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਗੁਰਦੇ ਦੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਰਵਾਇਤੀ ਤੌਰ ’ਤੇ ਲਾਗੂ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਸਖ਼ਤ ਖੁਰਾਕੀ ਪਾਬੰਦੀਆਂ ਦੀ ਬਜਾਏ ਵਧੇਰੇ ਸੰਤੁਲਿਤ ਅਤੇ ਵਿਗਿਆਨਕ ਖੁਰਾਕੀ ਪਹੁੰਚ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਉਣਾ ਹੈ۔ ਸ਼ਾਕਾਹਾਰੀ, ਵੀਗਨ ਅਤੇ ਕੁਝ ਚੁਣੇ ਹੋਏ ਨਾਨ-ਵੈਜ ਖਾਣਿਆਂ ਦੀਆਂ ਵਿਧੀਆਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਪੋਟੈਸ਼ੀਅਮ, ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਊਰਜਾ ਦੀ ਲੋੜ ਵਰਗੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪੋਸ਼ਣ ਤੱਤਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਇਹ ਕ੍ਰੋਨਿਕ ਕਿਡਨੀ ਡਿਜ਼ੀਜ਼ (CKD) ਵਾਲੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੋਵੇ। ਮਾਹਿਰਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪ੍ਰੀਬਾਇਓਟਿਕਸ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਗਟ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ, ਸ਼ਾਰਟ-ਚੇਨ ਫੈਟੀ ਐਸਿਡ ਬਣਾਉਣ, ਆਂਤਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਵਾਲੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਗਟ-ਲਿਵਰ-ਬ੍ਰੇਨ ਐਕਸਿਸ ਨੂੰ ਨਿਯੰਤਰਿਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਫਾਇਦੇ ਸਿਰਫ਼ ਆਂਤਾਂ ਤੱਕ ਸੀਮਿਤ ਨਹੀਂ ਹਨ। ਇਹ ਸ਼ੂਗਰ ਦੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਬਲੱਡ ਗਲੂਕੋਜ਼ ਕੰਟਰੋਲ, ਨਾਨ-ਅਲਕੋਹਲਿਕ ਫੈਟੀ ਲਿਵਰ ਦੇ ਇਲਾਜ ਅਤੇ ਹੱਡੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਿਨਰਲਜ਼ ਦੀ ਅਬਜ਼ਾਰਪਸ਼ਨ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਬਿਹਤਰ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਵੀ मਦਦਗਾਰ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਹੱਡੀਆਂ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਨੂੰ ਸਹਿਯੋਗ ਮਿਲਦਾ ਹੈ। ਬਾਈਟ ਪੀਜੀਆਈ ਦੇ ਮਾਹਰ ਡਾਕਟਰ ਨੈਂਸੀ ਸਾਹਨੀ, ਚੀਫ ਡਾਇਟੀਸ਼ੀਅਨ ਸਨ。
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रामपुर खेल मैदान पर महिलाओं ने पारंपरिक अनाजों से रोजगार और स्वास्थ्य संदेश फैलाया

Dhar Chhiling Khola, Himachal Pradesh:रामपुर के पाट बांग्ला मैदान में जहां प्रदेशभर के वन विभाग के खिलाड़ी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं मैदान के एक हिस्से में हिमाचल की पारंपरिक फसलों और जैविक उत्पादों की खुशबू लोगों को आकर्षित कर रही है। जाइका परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने यहां विभिन्न उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉलों पर पारंपरिक विलुप्तप्राय अनाज, स्थानीय खाद्य पदार्थ और उनसे तैयार व्यंजन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं का कहना है कि वे जन-जन तक पारंपरिक और मोटे अनाजों को उगाने का संदेश दे रहे हैं, इसके साथ-साथ इन फसलों में क्या औषधीय गुण है कैसे निरोग एवं लंबा जीवन जी सकते हैं लोगों को जागरूक किया जा रहा है, उन्होंने बताया महिलाओं के लिए यह प्रदर्शनी सिर्फ उत्पाद बेचने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत को बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। जाइका वानिकी परियोजना के तहत प्रदेश के 22 वन मंडलों में करीब 920 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। परियोजना के माध्यम से महिलाएं स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। बाइट — उमादत्त भारद्वाज, खरीदार “हम यहां खेल प्रतियोगिता देखने आए थे। जाइका परियोजना से जुड़ी महिलाओं ने जैविक और पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। ये उत्पाद स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छे हैं। लोगों को रसायन मुक्त और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अपने खानपान में शामिल करना चाहिए।” बाइट — पवन रेखा, भगवती स्वयं सहायता समूह, तरंडा “हमारे समूह की महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों पर काम कर रही हैं। यहां प्रदर्शनी लगाने का उद्देश्य लोगों को विलुप्त होती पारंपरिक फसलों और उनसे तैयार व्यंजनों की जानकारी देना है। साथ ही महिलाएं इन उत्पादों को बेचकर अपनी आजीविका भी चला रही हैं।” बाइट — सत्या देवी, स्वयं सहायता समूह “हम जैविक विधि से उगाई गई पारंपरिक फसलें यहां बिक्री के लिए लाए हैं। ओगला, फाफरा जैसे मोटे अनाजों को संरक्षित करने के साथ-साथ इनके उपयोग और महत्व के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।” बाइट — संतोष कुमारी, स्वयं सहायता समूह “हम दूरदराज क्षेत्र से अपने पारंपरिक उत्पाद यहां बेचने के लिए लाए हैं। हमारा प्रयास है कि लोगों को इन पारंपरिक अनाजों की जानकारी मिले और महिलाएं भी अपने उत्पादों के माध्यम से रोजगार हासिल कर आत्मनिर्भर बनें।” बाइट — प्रतिभा, स्वयं सहायता समूह “हम अपनी पारंपरिक और विलुप्त हो रही फसलों से तैयार उत्पाद यहां लेकर आए हैं। लोगों को जागरूक करना चाहते हैं कि स्थानीय और जैविक उत्पादों को बढ़ावा दें और स्वस्थ जीवन की ओर आगे बढ़ें।” बाइट — नरेश कुमारी, स्वयं सहायता समूह “हम विलुप्तप्राय पारंपरिक फसलों को दोबारा उगाने का काम कर रहे हैं। इनका उत्पादन लोगों तक पहुंचाकर एक तरफ हमारी आमदनी बढ़ रही है, वहीं लोगों को भी पौष्टिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो रहे हैं。” समापन रामपुर की इस खेलकूद प्रतियोगिता में मैदान पर खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, तो स्टॉलों पर महिलाएं अपने हुनर, मेहनत और पारंपरिक उत्पादों से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। जैविक खेती और पारंपरिक फसलों को बाजार से जोड़ने की यह पहल महिला रोजगार के साथ स्वस्थ खान-पान को भी बढ़ावा दे रही है।
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सेहली गांव में सर्पदंश से दो मासूम भाई-बहन की मौत, क्षेत्र में गम की लहर

Sundar Nagar, Himachal Pradesh:सेहली गांव में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। सर्पदंश के कारण एक ही परिवार के दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 9 वर्षीय काव्या और उसके 6 वर्षीय छोटे भाई नक्ष के रूप में हुई है। दोनों की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शुक्रवार देर शाम दोनों घर लौटे और खाना खाकर खेलते रहे। रात करीब 9:30 बजे वे सोने चले गए। शनिवार तड़के करीब 2:30 बजे काव्या ने पेट दर्द की शिकायत की; कुछ देर बाद नक्ष ने भी दर्द बताया। शुरू में उसे सामान्य पेट दर्द समझा गया, पर दोनों की हालत खराब होने लगी। घर के पास एक बड़े काले सांप के दिखने से तनाव का माहौल बन गया। परिवार ने दोनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद नेरचौक के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रेफर किया। नेरचौक पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के अनुसार मौत सांप के विष के शरीर में तेजी से फैलने से हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। यह घटना पूरे क्षेत्र को गमगीन कर गई है।
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कपूरथला के टलवंडी पुरदाल में रात चুরি: 10 तोले सोना, नकदी और डॉलर्स लूट

Kapurthala, Punjab:ਕਪੂਰਥਲਾ : ਘਰ ਅੰਦਰ ਸੁੱਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਪਤਾ ਹੀ ਨਾ ਲੱਗਾ, ਚੋਰਾਂ ਨੇ ਉਡਾਇਆ 10 ਤੋਲੇ ਸੋਨਾ, ਡਾਲਰ ਤੇ ਨਕਦੀ ਪਿੰਡ ਤਲਵੰਡੀ ਪੁਰਦਲ ’ਚ ਰਾਤ ਸਮੇਂ ਵੱਡੀ ਚੋਰੀ ਦੀ ਵਾਰਦਾਤ, ਸਵੇਰੇ ਅਲਮਾਰੀਆਂ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਦੇਖ ਕੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਉੱਡੇ ਹੋਸ਼; ਭੁਲੱਥ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਪੂਰਥਲਾ : ਥਾਣਾ ਭੁਲੱਥ ਅਧੀਨ ਪੈਂਦੇ ਪਿੰਡ ਤਲਵੰਡੀ ਪੁਰਦਲ ਵਿਖੇ ਬੀਤੀ ਰਾਤ ਚੋਰਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਘਰ ਨੂੰ ਨਿਸ਼ਾਨਾ ਬਣਾਉਂਦਿਆਂ ਲੱਖਾਂ ਰੁਪਏ ਦੇ ਕੀਮਤੀ ਸਾਮਾਨ ’ਤੇ ਹੱਥ ਸਾਫ਼ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਸਭ ਤੋਂ ਹੈਰਾਨੀਜਨਕ ਗੱਲ ਇਹ ਰਹੀ ਕਿ ਜਿਸ ਸਮੇਂ ਚੋਰ ਘਰ ਅੰਦਰ ਚੋਰੀ ਦੀ ਵਾਰਦਾਤ ਨੂੰ ਅੰਜਾਮ ਦੇ ਰਹੇ ਸਨ, ਉਸ ਸਮੇਂ ਪਰਿਵਾਰਕ ਮੈਂਬਰ ਘਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਹੀ ਸੁੱਤੇ ਹੋਏ ਸਨ। ਪਰਿਵਾਰਕ ਮੈਂਬਰ ਗੁਰਬਚਨ ਸਿੰਘ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਵੇਰੇ ਉਸ ਦੀ ਮਾਤਾ ਅਮਰਜੀਤ ਕੌਰ ਨੇ ਜਦੋਂ ਘਰ ਦੀਆਂ ਅਲਮਾਰੀਆਂ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਦੇਖੀਆਂ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ੱਕ ਹੋਇਆ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਘਰ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤਾਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਮਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਮਾਨ ਦੀ ਫੋਲਾ-ਫਰਾਲੀਆਂ ਹੋਈ ਮਿਲੀ। ਪਰਿਵਾਰ ਮੁਤਾਬਕ ਚੋਰ ਘਰ ਵਿੱਚੋਂ 10 ਤੋਲੇ ਸੋਨਾ, 1500 ਅਮਰੀਕੀ ਡਾਲਰ ਅਤੇ 30 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦੀ ਨਕਦੀ ਚੋਰੀ ਕਰਕੇ ਲੈ ਗਏ। ਵਾਰਦਾਤ ਦਾ ਪਤਾ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਰਿਵਾਰ ਵਿੱਚ ਦਹਿਸ਼ਤ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਬਣ ਗਿਆ। ਘਟਨਾ ਦੀ ਸੂਚਨਾ ਮਿਲਦਿਆਂ ਹੀ ਥਾਣਾ ਭੁਲੱਥ ਦੀ ਪੁਲਿਸ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਪਹੁੰਚੀ ਅਤੇ ਜਾਂਚ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਘਰ ਵਿੱਚ ਲੱਗੇ ਸੀਸੀਟੀਵੀ ਕੈਮਰਿਆਂ ਦੀ ਫੁਟੇਜ ਖੰਗਾਲੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਚੋਰਾਂ ਸਬੰਧੀ ਕੋਈ ਅਹਿਮ ਸੁਰਾਗ ਹੱਥ ਲੱਗ ਸਕੇ। ਪਰਿਵਾਰਕ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਪੁਲਿਸ ਤੋਂ ਚੋਰਾਂ ਨੂੰ ਜਲਦ ਕਾਬੂ ਕਰਕੇ ਚੋਰੀ ਕੀਤਾ ਸਾਮਾਨ ਬਰਾਮਦ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਹੁਣ ਪੁਲਿਸ ਜਾਂਚ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੀ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਚੋਰ ਘਰ ਵਿੱਚ ਕਿਵੇਂ ਦਾਖ਼ਲ ਹੋਏ ਅਤੇ ਵਾਰਦਾਤ ਨੂੰ ਕਿੰਨੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਅੰਜਾਮ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ।
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पठानकोट में पर्यावरण-हित केमिकल-रहित गणेश मूर्तियाँ बनाकर उत्साह

Pathankot, Punjab:गणपति बप्पा महोत्सव की तैयारिया जोरो शोरों पर राजस्थान से आये मूर्तिकार पठानकोट में बना रहे मूर्तियां पर्यावरण को बचाने के लिए मूर्तिकार बना रहे केमिकल रहित मूर्तिया पंजाब के इलाबा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी गणेश जी की मूर्तियों की डिमांड 100 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की बना रहे मूर्तियां गणपति बप्पा स्वागत की तैयारिया शुरू हो चुकी है और 14 सितम्बर से गणेश चतुर्थी के दिन गणपति महोत्सव की शुरवात की जा रही है इसी के चलते पठानकोट में राजस्थान से आये हुए मूर्तिकारों द्वारा मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है जहाँ पहले केमिकल तथा पीओपी से मूर्तिया बनाई जाती थी वही अब पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए केमिकल रहित मूर्तिया बनाई जा रही है जिससे पर्यावरण दूषित होने से बचेगा वहीं इन मूर्तियों की डिमांड न सिर्फ पठानकोट में बल्कि पंजाब के अलग-अलग जिलों के इलाबा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी गणेश जी की मूर्तियां जा रही है वही इनके दाम 100 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक है 14 सितम्बर गणेश चतुर्थी के दिन से देश भर में गणेश महोत्सव शुरू होने जा रहा है जिसे देखते हुए पठानकोट में गणपति की मूर्तियाँ बनाने का कार्य पिछले 5 महीने से शुरू हो चुका है जिन्हें अब फाइनल टच दिया जा रहा है मूर्तियाँ बनाने वाले कारीगरों का कहना पहले कैमिकल व पीओपी से मूर्तियाँ तैयार की जाती थी परंतु इस वर्ष पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कैमिकल रहित गणपति बप्पा की मूर्तियाँ बनाई जा रही हैं हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग गणपति बप्पा की मूर्तियाँ तालाबों नदियों तथा दरियाओं में विसर्जित करते हैं प्लास्टिक के इस्तेमाल से बनी हुई मूर्तियों से पर्यावरण दूषित होता था वही पानी मे रहने वाले जीव जंतुओं भी कैमिकल के कारण मारे जाते थे इसलिए इस वर्ष लोग कैमिकल रहित बनी हुई गणपति बप्पा की मूर्तियाँ खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं ताकि पर्यावरण भी दूषित न हो इसलिए ही पठानकोट में कारीगर अधिकतर बिना कैमिकल से बनी मूर्तियाँ तैयार करने में जुटे हैं बप्पा के स्वागत की तैयारी शुरू हो चुकी है बप्पा को आकार और रंग देने का काम तेजी से चल रहा है मूर्ति कलाकार भी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं गणपती बप्पा को अपने घर ले जाने वाले श्रद्धालु भी इन मूर्तियों को पसंद कर रहे हैं महिलाये गणेश जी को घर ले जाने के लिए मूर्तिकारों से मूर्तियाँ खरीदते हुए काफी उत्साहित नजर आ रही हैं
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