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हिमाचल के डिजिटल गवर्नेंस ने तीन साल में पारदर्शिता और नागरिक सेवाएं मजबूत की
ADAnkush Dhobal
Feb 13, 2026 12:18:43
Shimla, Himachal Pradesh
हिमाचल सरकार के डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग के तीन साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री के डिजिटल टेक्नोलॉजी गवर्नेंस के प्रधान सलाहकार गोकुल बुटेल ने पिछले तीन साल में प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत आधार दिया गया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को प्राथमिकता दी गई है। बुटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन-1100 को एक सिंगल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसमें नागरिक शिकायत, सुझाव और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी मिल रही है। इस हेल्पलाइन ने 71 फीसदी संतोषजनक निस्तारण दर हासिल की है। इसके साथ ही व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा शुरू की गई और इसे AI तकनीक को जोड़ा गया है। बुटेल ने बताया कि तकनीक के माध्यम से आम लोगों का जीवन आसान हुआ है। गोकुल बुटेल ने बताया कि प्रदेश में 79 लाख से ज्यादा आधार कार्ड बनाए गए और 0-5 वर्ष आयु वर्ग में नामांकन के मामले में हिमाचल देश में प्रथम स्थान पर रहा। राशन वितरण प्रणाली में फेस ऑथेंटिकेशन लागू करने वाला हिमाचल पहला राज्य बना, जिससे पारदर्शिता बढ़ी। इसके साथ ही हिम परिवार स्टेट सोशल रजिस्ट्री के तहत शहरी और ग्रामीण परिवारों का एकीकृत व सत्यापित डाटाबेस तैयार किया गया। इससे पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हुई और योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से हर महीने लगभग 5 करोड़ रुपये की बचत राज्य को होने लगी। हिम एक्सेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सिंगल साइन-ऑन सुविधा दी गई, जिससे नागरिक और अधिकारी एक ही लॉगिन से कई विभागीय सेवाओं का लाभ ले सके। हिम सेवा पोर्टल (ई-डिस्ट्रिक्ट) पर 500 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करवाई गईं। एआई आधारित डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से आवेदन के दौरान त्रुटियों की पहचान पहले ही हो सकी और अस्वीकृति के मामलों में कमी आई। गोकुल बुटेल ने बताया कि ‘हिम उपस्थिति’ स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम के तहत जियो-फेंस्ड और आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई। इससे पारदर्शिता बढ़ी और प्रॉक्सी उपस्थिति पर रोक लगी। उन्होंने कहा कि स्टेट डाटा सेंटर की क्षमता बढ़ाई गई और हिमस्वान नेटवर्क को मजबूत किया गया। नई नीतियों के तहत बैंडविड्थ लागत में उल्लेखनीय कमी आई और सरकारी विभागों को मुफ्त होस्टिंग सुविधा दी गई। ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए भूमि अभिलेखों को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया गया। एआई डेटा सेंटर और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। कांगड़ा और मेहली में एसटीपीआई केंद्रों का निर्माण पूरा किया गया, जबकि वकनाघाट में IT पार्क विकसित करने की दिशा में कार्य आगे बढ़ाया गया। डिजिटल पहलों के लिए विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले, जिनमें गवर्नेंस नाउ अवॉर्ड, पीपुल फर्स्ट इंटीग्रेशन अवॉर्ड और आधार एक्सीलेंस अवॉर्ड शामिल रहे। गोकुल बुटेल ने कहा कि सरकार डिजिटल हिमाचल के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में और अधिक तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक हितैषी सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
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