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JAVED KHANJAVED KHANFollow9 Jan 2025, 06:40 am

Varanasi - नमामि गंगे ने दशाश्वमेध घाट पर फैलाई स्वच्छता की जागृति "घाटों पर जन जागरण के साथ की सफाई"

Varanasi, Uttar Pradesh:

गुरुवार को भारत की पहचान गंगा के तट की स्वच्छता के लिए नमामि गंगे ने दशाश्वमेध से राजेंद्र प्रसाद घाट तक जन जागरण किया । लाउडस्पीकर से स्वच्छता जागृति फैलाई गई । स्वच्छता के बाद श्रद्धालुओं द्वारा गंगा में विसर्जित सामग्रियों को समेटकर नगर निगम को सुपुर्द किया गया । नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने गंगा स्नान और घाटों पर भ्रमण कर रहे लोगों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। दशाश्वमेध, प्रयाग और राजेंद्र प्रसाद घाट तक सभी को स्वच्छता का संकल्प दिलवाया गया। 

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Noida, Uttar Pradesh:
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झारखंड के अंशकालीन शिक्षकों ने मानदेय बढ़ाने और आदेश पालन की मांग पर धरना शुरू

Ranchi, Jharkhand:कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालय में कार्यरत अंशकालीन शिक्षको ने लोक भवन के समीप धरना स्थल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, यह प्रदर्शन झारखंड के अलग-अलग जिलों से अंशकालिक शिक्षक अपनी मांग को लेकर आए हैं। उनकी मांग है कि अन्य विद्यालयों के तर्ज पर उनकी मानदेय में वृद्धि की जाए और कोर्ट का जो आदेश हुआ है अंशकालिक शिक्षक के विषय में उसे पालन किया जाए। उन्होंने बताया कि उन्हें घंटा के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं जबकि अन्य विद्यालयों में मासिक रूप से पैसे दिए जाते हैं, गर्मी छुट्टी होता है या फिर कोई भी अन्य सरकारी छुट्टी होती है फिर भी उन्हें पैसे नहीं दी जाती है, हर 11 महीना पर एक्सटेंशन होता है और हमारा खत्म हो चुका है मार्च महीने में और उसके बाद अभी तक एक्सटेंशन नहीं मिला है, और उन्हें समय से ज्यादा काम लिया जाता है, उन्होंने बताया कि 2016 में जो पैसे दी जाते थी वही पैसा आज ही मिल रहा है जबकि सारे सामानों की कीमत बढ़ चुके हैं जिससे उनका गुजारा अब नहीं हो पा रहा है।
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टोंक में गड्ढे के कारण बस फंसने से बाल-बच्चों पर खतरा, प्रशासन पर नाराज़गी

Tonk, Rajasthan:TONK,RAJASTHAN बच्चो को स्कूल ले जा रही बस गड्ढे में फंसी हादसा टला.... नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 22 के तारण गांव का मामला... टोंक शहर के वार्ड नंबर 22 के तारण गांव में शुक्रवार की सुबह उस समय बच्चो के जान आफत में पड़ गई जब सड़क किनारे मौजूद एक गड्ढे में बच्चो को स्कूल ले जा रही स्कूल बस फंस गई और बस पलटने की हालत बन गई जैसे तैसे कीचड़ में से होकर बच्चे बस से बाहर आये यह घटना नगर परिषद की सफाई व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है जंहा सड़क पर भरा हुआ पानी ओर सड़क किनारे गड्ढे में रोज कोई न कोई बाइक सवार गिरता है तो कई बार चौपहिया वाहन भी फंसते है शुक्रवार को एक हादसा बच गया गनीमत यह रही कि निजी स्कूल की यह बस पलटी नही वर्ना बडा हादसा हो सकता था इस मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि वह कई बार प्रशासन् से गुहार लगा चुके है लेकिन नगर परिषद कोई ध्यान नही देती है ऐसी सूरत में उन्हें मंदिर से लेकर स्कूल तक कीचड़ से होकर जाना पड़ता है,घटना के बाद बच्चो के चेहरों पर भय देखने को मिला तो ग्रामीणों में नाराजगी ।
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टोंक: औषधि नियंत्रण विभाग के संविदा कर्मी 13 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार

Tonk, Rajasthan:टोंक, राजस्थान टोंक में 13 हजार की रिश्वत लेते संविदाकर्मी हुआ गिरिफ्तार। औषधि नियंत्रण कार्यालय में तैनात था संविदाकर्मी। मेडिकल दुकान के लाइसेंस जारी करने की एवज में रिश्वत की राशि। एंकर :- टोंक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गुरुवार शाम कार्यवाही करते हुए मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी करवाने के एवज में औषधि नियंत्रण कार्यालय में कार्यरत संविदाकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर सोनू पंवार को 13 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। संविदाकर्मी सोनू पंवार ने ऑनलाइन मेडिकल दुकान के आवेदन पर परिवादी से मांगे 15 हजार और सौदा हुआ था; 13 हजार में गुरुवार को परिवादी ने एसीबी टोंक कार्यालय में शिकायत की। कुछ ही घंटों में एसीबी टीम ने शिकायत सत्यापन करवाते हुए ट्रेप की कार्यवाही कर दी। पेलेसमेन्ट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत संविदाकर्मी सोनू पंवार ने जैसे ही परिवादी से रिश्वत की राशि ली, एसीबी टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर ली। अब जांच जारी है कि रिश्वत का यह खेल किसके इशारे पर चल रहा था, क्योंकि बिना ड्रोग इंस्पेक्टर के संविदाकर्मी लाइसेंस कैसे जारी कर सकता है। एसीबी के एएसपी झाबरमल ने कहा कि आरोपी संविदाकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर तैनात है और ऑनलाइन आवेदन पर रिश्वत की मांग थी।
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झुंझुनूं के संस्कृत स्कूल भयावह हालत, भवन गिरने के खतरे से विद्यार्थी चिंतित

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं राजस्थान के संस्कृत स्कूलों पर मंडरा रहा हादसे का खतरा प्रदेश के 44 संस्कृत भवन जर्जर, तत्काल ढहाने की जरूरत झुंझुनूं में 28 संस्कृत विद्यालय बदहाल, 25 कमरे कंडम स्थिति में सरिए बाहर निकले, सीलन से कमजोर हुई स्कूलों की छतें बजट घोषणा के बाद भी मरम्मत शुरू नहीं, बच्चों की जान खतरे में एंकर : राजस्थान में संस्कृत शिक्षा भगवान भरोसे चल रही है। जहां वेद और श्लोकों की गूंज होनी चाहिए। वहां अब डर और खतरे का साया मंडरा रहा है। प्रदेश के संस्कृत स्कूलों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि कई भवन कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। सरिए बाहर निकल चुके हैं। छतों से सीलन टपक रही है और बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर झुंझुनूं जिले से सामने आई है। जहां 28 संस्कृत विद्यालय जर्जर हालत में हैं और 25 कमरे ऐसे हैं जिन्हें कभी भी गिराया जा सकता है। देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट... वीओ 01 :राजस्थान में संस्कृत शिक्षा विभाग के स्कूल अब शिक्षा से ज्यादा संभावित हादसों का डर रहता है। संस्कृत शिक्षा निदेशालय की हालिया रिपोर्ट ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 44 संस्कृत स्कूल भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कि उन्हें तत्काल ढहाना जरूरी माना गया है। इतना ही नहीं, 245 स्कूलों के 776 कमरे बैठने लायक तक नहीं बचे हैं। जबकि 3239 कमरों में भारी मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है। सबसे खराब हालात झुंझुनूं जिले में सामने आए हैं। जिले के 28 संस्कृत विद्यालयों के भवन जर्जर स्थिति में हैं और 144 कक्षा-कक्षों को तत्काल सुधार की जरूरत है। इनमें से चार विद्यालयों के 25 कमरे इतने खतरनाक हो चुके हैं कि उन्हें कंडम घोषित कर कभी भी जमींदोज किया जा सकता है। संस्कृत शिक्षा विभाग के पूर्व संभागीय शिक्षा अधिकारी कैलाश चतुर्वेदी कहते हैं कि विभाग की स्थापना 1956 में हुई थी और ज्यादातर भवन 40 से 50 साल पुराने हैं। निर्माण कार्यों में पहले हुई लापरवाही का खामियाजा अब विद्यार्थी भुगत रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को अब तत्काल सर्वे कराकर मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम शुरू करना चाहिए, ताकि बच्चे बिना डर के पढ़ाई कर सकें。 बाइट 01 : कैलाश चतुर्वेदी, पूर्व संभागीय शिक्षा अधिकारी, संस्कृत शिक्षा (भूरे कलर के बाल, सफेद सफारी शर्ट, जेब में काला पेन, पीछे दुकान के सामान का बैकग्राउंड है, 2 मिनट 22 सैकंड) वीओ 02 : ये तस्वीरें झुंझुनूं जिले के पदमपूरा स्थित राजकीय संस्कृत प्रवेशिका स्कूल की हैं। जहां स्कूल भवन खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। छतों से प्लास्टर झड़ रहा है सरिए बाहर निकल चुके हैं और सीलन ने पूरी बिल्डिंग को कमजोर बना दिया है। स्कूल के शिक्षक रोहिताश्व कुमावत बताते हैं कि भवन की हालत को देखते हुए पिछले साल ही सरकार को मेजर रिपेयर का प्रस्ताव भेज दिया गया था। विभागीय सर्वे में भी छह कमरों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त माना गया। लेकिन हैरानी की बात ये है कि सर्वे के महीनों बाद भी ना बजट जारी हुआ और ना ही किसी एजेंसी को काम सौंपा गया। ऐसे में बच्चे और शिक्षक रोज खतरे के बीच पढ़ाई और अध्यापन करने को मजबूर हैं। आगामी दिनों मानसून दस्तक देगा और हर बारिश के साथ हादसे का डर भी बढ़ता जा रहा है。 बाइट 02 : रोहिताश्व कुमावत, शिक्षक, संस्कृत स्कूल पदमपुरा (सफेद श Shirt, जेब में चश्मा डला हुआ है, बैकग्राउंड में दीवार पर पीले कलर का चार्ट चिपका हुआ है, 21 सैकंड) वीओ 03 : झुंझुनूं जिले के चिराना में 1966 से संचालित राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। स्कूल का नया भवन तो सुरक्षित है। लेकिन पुरानी बिल्डिंग अब जवाब देने लगी है। कई जगह दीवारों में दरारें हैं। प्लास्टर टूट चुका है और चार कमरे पूरी तरह कंडम हो चुके हैं। संस्था प्रधान शंभूदयाल शर्मा बताते हैं कि नीचे की पुरानी बिल्डिंग काफी जर्जर हो चुकी है। जिसके मरम्मत का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। वहीं चार कमरों की हालत ऐसी है कि अब उन्हें गिराकर नए सिरे से निर्माण करना ही एकमात्र विकल्प बचा है। सबसे बड़ी बात ये है कि चिराना की यही संस्कृत स्कूल जिले में संस्कृत विभाग के नोडल स्कूल के रूप में काम करती है। बावजूद इसके यहां भी हालात बदहाल हैं। सवाल ये है कि जब नोडल स्कूल सुरक्षित नहीं है। तो बाकी स्कूलों की हालत कैसी होगी। इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है。 बाइट 03 : शंभूदयाल शर्मा, नोडल अधिकारी, संस्कृत शिक्षा विभाग, झुंझुनूं (चश्मा लगाया हुआ है, हलकी सफेद दाढ़ी, ब्लू लाइनदार शर्ट, 1 मिनट 39 सैकंड) फाइनल वीओ : राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में जर्जर स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत की घोषणाएं जरूर की थीं। संस्कृत शिक्षा निदेशालय ने 24 मार्च 2026 को प्रस्ताव भी शासन तक भेज दिए थे। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते मानसून से पहले अब तक काम शुरू नहीं हो पाया। नतीजा ये है कि आज भी हजारों विद्यार्थी ऐसे स्कूल भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। फिलहाल हाल ही में निदेशालय की नींद खुली है। इस मामले में निदेशालय ने संभागीय अधिकारियों को जर्जर भवनों को डिस्मेंटल करने और जल्द से जल्द तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं संस्कृत शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि जर्जर स्कूल भवन विद्यार्थियों और शिक्षकों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ हैं। उनका कहना है कि बजट घोषणाओं का फायदा तभी है। जब मानसून से पहले जमीन पर काम दिखाई दे और तुरंत फंड जारी किया जाए。 विजुअल लॉग शीट— — 1 मिनट 58 सैकंड का वीडियो, संस्कृत स्कूल का फाइल विजुअल है..... जो वीओ 01 के साथ यूज किया जा सकता है — 1 मिनट 46 सैकंड का वीडियो, पदमपुरा सरकारी स्कूल का विजुअल है... जो वीओ 02 के साथ ही यूज करें — 1 मिनट 37 सैकंड का वीडियो, चिराना सरकारी स्कूल के विजुअल है.... जो वीओ 03 के साथ ही यूज करें
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दरभंगा के VIP रोड पर हल्की बारिश में जलजमाव, नाले खतरों बन गए

Darbhanga, Bihar:दरभंगा का VIP रोड बना मौत का रास्ता,हल्की बारिश में डूबी सड़क, खुले नालेसे जान को खतरा। दरभंगा में विकास और स्मार्ट सिटी के दावों की सच्चाई एक बार फिर सामने आ गई है। शहर का चर्चित VIP रोड इन दिनों लोगों के लिए ‘मौत का रास्ता’ बनता जा रहा है। हल्की सी बारिश ने ही नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी, जिससे पूरे इलाके में जलजमाव की भयावह स्थिति पैदा हो गई। लहेरियासराय स्थित प्लस टू एमएल एकेडमी स्कूल से लेकर आरएन मिश्र राजकीय बालिका प्लस टू विद्यालय तक की मुख्य सड़क पूरी तरह पानी में डूब गई। हालात ऐसे हो गए कि सड़क और नाले के बीच का फर्क करना भी मुश्किल हो गया। इसी दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, लोगो को पानी से भरे इलाके में उन्हें अंदाजा ही नहीं होता कि नीचे खतरनाक नाला है। बड़ी घटना की इंतजार नगर निगम कर रहा है। नगर निगम की लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में VIP रोड की यही स्थिति हो जाती है। कई दिनों तक जलजमाव बना रहता है, जबकि खुले नाले राहगीरों के लिए जानलेवा खतरा बने रहते हैं। नालों पर ढक्कन नहीं होने से स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि VIP रोड सच में ‘VIP’ बन सके, न कि ‘मौत का रास्ता’। बाइट 1,पूजा कुमारी ,छात्रा 2,सोनम कुमारी ,छात्रा 3,सुनीता कुमारी ,छात्रा
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झारखंड के आवासीय विद्यालयों में अंशकालीन शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना, मानदेय और कोर्ट आदेश का पालन की मांग

Ranchi, Jharkhand:कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालय में कार्यरत अंशकालीन शिक्षकों ने लोक भवन के समीप धरना स्थल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, यह प्रदर्शन में झारखंड के अलग-अलग जिलों से अंशकालिक शिक्षक अपनी मांग को लेकर आए हैं, उनकी मांग है कि अन्य विद्यालयों के तर्ज पर उनकी मानदेय में वृद्धि की जाए और कोर्ट का जो आदेश हुआ है अंशकालिक शिक्षक के विषय में उसे पालन किया जाए, इस प्रदर्शन में झारखंड के गुमला से आई इंग्लिश की शिक्षिका शबनम सुल्तान ने बताया कि अब घर चलाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, जरूरत के समान भी नहीं खरीद पा रहे हैं, उन्होंने कहा कि हम लोग कोई सामान्य जगह पर पढ़ने नहीं करते हैं, हम लोगों नेतरहाट पहाड़ के टॉप में स्कूल है, वहां हम लोग 6 महिला जाते हैं हर दिन और जाने का एक ही माध्यम बॉक्साइट ट्रक जो माल ढोने की काम करती है, जिससे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है; हम लोग का शनिवार और रविवार का भी पैसा नहीं दिया जाता है, जितना भी सरकारी छुट्टी होती है जैसे दशहरा का छुट्टी, ईद का छुट्टी, बकरीद का छुट्टी, क्रिसमस का छुट्टी या गर्मी का छुट्टी उसका भी पैसा काट लिया जाता है, उन्होंने कहा कि हम लोग जंगल के बीच में महिला इंतजार करते रहते हैं कि कब बॉक्साइट ट्रक आएगा और उसे पर बैठकर जाएंगे; गर्मी हो बरसात हो कोई भी साधन सर छुपाने का नहीं रहती है, सर पर कफन बांधकर बच्चों को पढ़ने जाते हैं, गलती से ट्रक का कोई एक्सीडेंट हो गया तो उसके बाद हमारे बच्चों का क्या होगा, 4 घंटे बच्चों को पढ़ने के लिए 24 घंटे का परेशानी चलना पड़ती है, हम लोग असुर जनजाति लोगों को पढ़ते हैं, और बच्चों को मां के जैसा प्यार देकर पढ़ते हैं क्योंकि उनके मां पिता ने कभी पढ़ाई नहीं किया होता है इसलिए बहुत सारे चीज उन्हें नहीं पता होता है उन्हें हम सीखते हैं और ऐसा हम लोग 10 सालों से कर रहे हैं, झारखंड सरकार कहती है कि हम लोग जनजातीय लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं सबसे निचले पायदान पर असुर जनजाति आती है हम उनके बच्चे को पढ़ाकर आगे बढ़ा रहे हैं उन्हें शिक्षित कर रहे हैं, लेकिन आज हम बेवश होकर पढ़ाना छोड़कर धरना पर बैठना पड़ रहा है। वही इस प्रदर्शन में विनय कुमार वर्मा जो चतरा के आवासीय विद्यालय में शिक्षक है, उन्होंने कहा कि उन्हें घंटे के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं जबकि अन्य विद्यालयों में मासिक रूप से पैसे दिए जाते हैं, हर 11 महीना पर एक्सटेंशन होता है और हमारा एक्सटेंशन मार्च महीने में खत्म हो गया है लेकिन उसके बाद अभी तक कोई एक्सटेंशन नहीं मिला है, उन्हें काम के घंटे से ज्यादा काम करवाया जाता है, और जो पैसे 2016 में उन्हें मिलते थे आज भी उतना ही पैसा मिल रहा है जबकि अब सारे सामानों की कीमत बढ़ चुके हैं जिससे उनका गुजर बसर नहीं हो पा रहा है। वही बिरसा मुंडा की जन्म स्थल से आए शिक्षक विकास कुमार जायसवाल ने कहा कि हम लोग कल्याण विभाग में कई बार बात कर चुके हैं और कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा से भी बात कर चुके हैं लेकिन उन्हें सिर्फ अभी तक आश्वासन मिला है, इसके बाद हम लोग हाई कोर्ट के शरण में गए थे, जिसके बाद 13 जनवरी 2026 में जजमेंट आया, कि पहाड़ियां विद्यालय के तर्ज पर इन्हें मानदेय दिया जाए और हाई कोर्ट 12 सप्ताह का समय दिया था लेकिन अब 12 सप्ताह से भी ज्यादा हो गए लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं हुआ है, कल्याण विभाग हाईकोर्ट के आदेश का अवहेलना कर रही है।
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डूंगरपुर के सरकारी स्कूल में 17 पद खाली, छात्र ही बन रहे शिक्षक, पढ़ाई खतरे में

Dungarpur, Rajasthan:यहाँ शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि छोटी कक्षाओं के नौनिहालों को पढ़ाने के लिए अब बड़ी कक्षाओं के छात्रों को ही ''गुरुजी'' बनना पड़ रहा है। यह स्थिति पिछले डेढ़ साल से बनी हुई है। स्कूल में 33 शिक्षकों में से 17 पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में केवल 16 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जिससे विषयवार पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। विषयोवार पढ़ाई ठप, कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं। हिंदी विषय के 3 पद, राजनीतिक विज्ञान के 2 पद, भौतिकी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत के 1-1 पद लंबे समय से खाली हैं। स्कूल में लाइब्रेरियन, उप-प्रधानाचार्य, अतिरिक्त एवं सहायक प्रशासनिक अधिकारी, जमादार और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद भी रिक्त पड़े हैं। इधर स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते छात्र-छात्राएं खुद ही शिक्षक बनकर छोटी कक्षाओं में पढ़ाई करवा रहे हैं। प्रमोशन लेकर चले गए शिक्षक, नए की जॉइनिंग नहीं। बोखलापाल पंचायत के प्रशासक राजकुमार डोडा व ग्रामीण मिथुन डोडा ने बताया कि डेढ़ साल पहले यहाँ सभी 33 पद भरे हुए थे; लेकिन शिक्षकों के प्रमोशन और अन्य जगहों पर पदस्थापन के बाद एक-एक कर 17 पद खाली हो गए। विभाग ने स्थिति संभालने के लिए 5 नए व्याख्याताओं की नियुक्ति की, पर उनमें से अधिकांश ने अब तक स्कूल में जॉइनिंग नहीं दी है। इन रिक्त पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग से लेकर जिला कलेक्टर तक को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। परिणामस्वरूप, छात्र खुद ही ब्लैकबोर्ड पर चौक थामने को मजबूर हैं ताकि उनकी पढ़ाई पूरी तरह बंद न हो जाए। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ सरकार 'पढ़ेगा इंडिया, तो बढ़ेगा इंडिया' का नारा देती है, वहीं इस अंचल में बुनियादी शिक्षकों की कमी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। यदि समय रहते इन रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम और बच्चों की नींव दोनों ही प्रभावित होना तय है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और इन विद्यार्थियों को उनके वास्तविक ''गुरुजी'' मिलते हैं।
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डॉ दिलीप जायसवाल बिहार भूमि और राजस्व सुधार विभाग के मंत्री: पारदर्शी सेवा का संकल्प

Patna, Bihar:शिवम् राज पटना, बिहार सरकार में नए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद डॉ. दिलीप जायसवाल को भूमि एवं राजस्व सुधार विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज वह विभाग का पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं। जी मीडिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि भूमि एवं राजस्व सुधार विभाग सीधे तौर पर बिहार के करीब 70 प्रतिशत लोगों से जुड़ा हुआ है और गांव-घर के लगभग हर व्यक्ति को किसी न किसी काम के लिए इस विभाग की जरूरत पड़ती है。 डॉ. जायसवाल ने कहा कि वह पहले भी इस विभाग की जिम्मेदारी निभा चुके हैं, ऐसे में पुराने अनुभव का लाभ उन्हें जरूर मिलेगा। उन्होंने माना कि विभाग में भ्रष्टाचार और आम लोगों के काम समय पर नहीं होने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में यह विभाग उनके लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी है और वह इस चुनौती को स्वीकार करते हुए विभाग को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे。 उन्होंने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी प्राथमिकता होगी कि आम जनता के काम समय पर हों और विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए। वहीं, मंत्रिमंडल में महिलाओं और युवाओं को मिली बड़ी भागीदारी पर उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार लगातार महिला सशक्तिकरण और युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी के सहयोग से बिहार को और विकसित बनाने की दिशा में सरकार मजबूती से आगे बढ़ेगी。
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देवघर समाहरणालय में डीलर की शिकायत: खराब चावल-गेंहू वितरण पर उच्चस्तरीय जांच मांग

Deoghar, Jharkhand:देवघर समाहरणालय में प्रशासनिक लापरवाही का अनोखा मामला सामने आया। देवीपुर प्रखंड के डेढ़मुक्का गांव के पीडीएस डीलर मोती यादव निजी टोटो से करीब 35 kiloमीटर दूर जिला मुख्यालय पहुंचे। टोटो पर साढ़े पांच बोरा खराब चावल और चार बोरा सड़ा गेहूं लदा था, जिसे वे प्रमाण के तौर पर उपायुक्त को दिखाने लाए थे। मोती यादव ने बताया कि फरवरी 2026 में डीएसडी के माध्यम से मिले 25 बोरा अनाज में अधिकांश खराब था। शिकायत के बाद बदलने का आश्वासन मिला, लेकिन तीन महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। डीलर के अनुसार उनके केंद्र से 368 कार्डधारी जुड़े हैं, लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण लाभुक अब अनाज लेने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, खराब स्टॉक बदलने और पारदर्शी वितरण व्यवस्था की मांग की है।
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समस्तीपुर गैस एजेंसी पर बुजुर्ग के साथ मारपीट, अस्पताल में भर्ती

Samastipur, Bihar:समस्तीपुर जिले के नगर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर स्थित बुद्ध गैस एजेंसी पर गैस सिलेंडर लेने पहुंचे एक बुजुर्ग के साथ एजेंसी संचालक और कर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है. घटना में जख्मी बुजुर्ग को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सूचना मिलने के बाद नगर थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. जख्मी बुजुर्ग की पहचान बहादुरपुर मोहल्ला निवासी विमल प्रसाद गुप्ता के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार गैस सिलेंडर का डीसी नंबर आने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जा रहा था. इसी को लेकर शुक्रवार को विमल प्रसाद गुप्ता गैस गोदाम पहुंचे थे, जहां एजेंसी संचालक अजय मंडल और कर्मियों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की. आरोप है कि उन्हें कार्यालय कक्ष में बंद भी कर दिया गया. घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग को वहां से निकालकर इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचाया. परिजनों ने घटना की सूचना नगर थाना पुलिस को दी. मामाले को लेकर मौके पर पहुंची डायल 112 पुलिस ने बताया कि बुद्ध गैस एजेंसी कार्यालय में बुजुर्ग के साथ मारपीट की सूचना मिली थी. पुलिस ने घायल बुजुर्ग को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है. फिलहाल उनकी स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बयान दर्ज नहीं किया जा सका है. पुलिस का कहना है कि बयान मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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तोरपा गैस एजेंसी गोलीबारी: नक्सली सुनील स्वांसी गिरफ्तार, मास्टर राजेंद्र महतो की भूमिका उजागर

Khunti, Jharkhand:खूंटी जिले के तोरपा में विगत 23 मार्च की रात गोलीबारी की घटना को अंजाम देनेवालों में एक नक्सली सुनील स्वांसी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ये गोलीबारी की घटना को अंजाम देनेवाले हार्डकोर नक्सली राजेंद्र महतो उर्फ मास्टर का सहयोगी है। सुनील स्वांसी रनिया थाना क्षेत्र के निचितपुर का रहनेवाला है। जिसने पुलिस को बताया कि गैस एजेंसी का मालिक द्वारा फोन नहीं उठाने के कारण इस घटना को अंजाम दिया गया था। जो राजेन्द्र महतो उर्फ मास्टर के अगुवाई में गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया गया था। वहीं पुलिस अब हार्डकोर नक्सली राजेंद्र महतो उर्फ मास्टर और अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है.
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झारखंड ने आयकर राजस्व में बिहार को पीछे छोड़ दिया, धोनी सबसे बड़ा टैक्सपेयर

Ranchi, Jharkhand:प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डी. सुधाकर राव ने रांची के रेडिशन ब्लू में प्रेस वार्ता कर आयकर से संबंधित मामलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष में झारखंड ने लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का राजस्व दिया। जबकि बिहार का योगदान करीब 8 हजार करोड़ रुपये रहा। कुल 20 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य में झारखंड का योगदान सबसे अधिक रहा, जिससे वह इस क्षेत्र में बिहार से आगे निकल गया है। विभाग के अनुसार राज्य का औद्योगिक और व्यापारिक ढांचा इस बढ़त का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग ने टैक्स चोरी पर सख्त कार्रवाई करते हुए 12 बड़े व्यापारिक समूहों पर छापेमारी की और 90 से अधिक मामलों में कार्रवाई दर्ज की है। साथ ही लगभग 5 करोड़ पैन कार्ड धारकों में से सिर्फ 40 लाख लोग ही आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड–बिहार संयुक्त आयकर क्षेत्र में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सबसे बड़ा व्यक्तिगत टैक्सपेयर बताया गया है। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डी. सुधाकर राव के अनुसार धोनी समय पर और बड़े पैमाने पर टैक्स चुकाने वालों में शीर्ष पर हैं।
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झारखंड में दलित-आदिवासी वोटबैंक के मुद्दे पर बीजेपी-कांग्रेस भिड़ंत

Ranchi, Jharkhand:झारखंड बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना सड़ते हुए आरोप लगाए है, कि कांग्रेस पार्टी दलित और आदिवासी का सिर्फ वोट बैंक के रुप में इस्तेमाल करती है। कांग्रेस को आदिवासी और दलित विरोधी बताया तो कांग्रेस और झामुमो ने भी पलटवार किया। झारखंड में फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप का दौर खूब चल रहा है। झारखंड कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बीजेपी प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा, कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से तुष्टिकरण की राजनीति में चली गई है। सिर्फ एक समुदाय विशेष को लेकर ही पूरी तरह काम कर रही है। दलित और आदिवासी इनके लिए मायने नहीं रखते हैं सिर्फ वोट बैंक के रुप में ही इस्तेमाल किया जाता था। कांग्रेस के झारखंड में बड़े नेता प्रदीप बालमुचू हाशिए पर हैं ,उनको दरकिनार किया गया, राधाकृष्ण किशोर को भी अभी हाशिए पर रख दिया है। पूरी तरह से कांग्रेस चरित्र दिखाता है उनके लिए आदिवासी दलित सिर्फ वोट बैंक ।कभी उनको सम्मान और पहचान नहीं देना है।
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