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IIT बॉम्बे की बायोमास गैसीफिकेशन से LPG खपत 40% कम, कैंटीन की रसोई सस्ती

Mumbai, Maharashtra:इस वक़्त अगर कोई आपस कहे कि आपको खाना बनाने के लिए LPG गैस की ज़रूरत नहीं है बल्कि आपके आसपास बिखरे पेड़ पौधों के पत्तों से ही गई बनाई जा सकती है वो भी कीमत में LPG गैस की तुलना में आधी तो आपको लगेगा कि शायद कोई आपसे मजाक कर रहा है लेकिन इसी बात को सच कर दिखाया है IIT बॉम्बे ने। ऐसे समय में जब ईंधन की बढ़ती कीमतें और LPG की संभावित कमी चिंता का एक बढ़ता कारण बन रही हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के पास इसका समाधान मौजूद है, जिसकी मदद से गैस संकट के दौरान भी उसके कैंपस की रसोई बिना किसी रुकावट के चल रही है। अपनी खुद की पेटेंटेड बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, इस संस्थान ने अपने कैंपस में गिरे हुए पत्तों, शाखाओं, टहनियों को खाना पकाने के एक भरोसेमंद ईंधन में बदल दिया है। यह इनोवेशन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के 2014 में शुरू हुए दस साल के रिसर्च का नतीजा है। ग्रीन कैंपस में बड़ी मात्रा में सूखे पत्तों के कचरे को ठिकाने लगाने की चुनौती का सामना करते हुए, उनकी टीम ने इसे इस्तेमाल करने लायक एनर्जी में बदलने के तरीके खोजे। ये कैंपस करीब 500 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ गिरने वाले कचरे को ठिकाने लगाना एक चुनौती थी क्योंकि अंदाज़े के मुताबिक इस इलाके में हर दिन 2-3 टन पेड़ पौधों की सूखी पत्तियाँ और टहनियां गिरती है जिनका पहले कोई उपयोग नहीं था। उलटे इस सूखे कचरे को उठाने के लिए IIT बॉम्बे को पहले 50 लाख रूपये खर्च करने पड़ते थे; इसलिए इन्होने सूखे कचरे को बदलने पर काम करना शुरू किया और एक गैसीफायर बनाया गया। शुरुआती ट्रायल में बहुत ज़्यादा धुआँ और क्लिंकर जैसी समस्या सामने आयी, लेकिन टीम ने इसे बेहतर बनाने का काम जारी रखा। कई सालों की मेहनत के बाद पेटेंटेड गैसिफ़ायर तैयार हुआ जिससे क्लिंकर बनने की समस्या कम हो गई और सिस्टम ज़्यादा व्यावहारिक बन गया। आज IIT बॉम्बे की कैंटीन 30-40% कम LPG का इस्तेमाल करके चलती है, लगभग 60% थर्मल एफिशिएंसी हासिल करती है, तथा इससे उत्सर्जन कम होता है। इससे ईंधन की लागत कम होने के साथ LPG सप्लाई में कमी आने पर भी खाना बनाने का काम बिना रुकावट चलता रहे। इस सिस्टम से हर साल लगभग आठ टन CO2 का उत्सर्जन कम होता है और अब हॉस्टल के मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना है जो LPG की खपत को और घटाएगी और हर साल करीब 50 लाख रूपये तक बचत होगी, साथ ही सैकड़ों टन CO2 उत्सर्जन भी कम होगा। इसका मकसद LPG पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा की ज़रूरतों के लिए साफ़-सुथरा और किफ़ायती विकल्प देना है।
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जेसल पार्क-आरएनपी पार्क में पाइप गैस दो साल बाद भी शुरू नहीं

Mumbai, Maharashtra:मुंबई से सटे मीरा-भायंदर शहर के जेसल पार्क और आरएनपी पार्क समेत 200 से अधिक रिहायशी इमारतों में गैस पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन डेढ़ से दो साल बीत जाने के बाद भी घरों तक गैस की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। पाइपलाइन लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें पाइप गैस की सुविधा मिलेगी और सिलेंडर के झंझट से राहत मिलेगी, लेकिन लंबे समय से सप्लाई शुरू न होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराज़गी और परेशानी दोनों बढ़ती जा रही है।स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद उन्हें कई बार भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही गैस सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन समय बीतता गया और स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई परिवार अब भी एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि पाइप गैस मिलने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी। लगातार देरी के कारण लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. इलाके की महिलाओं का कहना है कि फ्लैट में लकड़ी या कोयले का चूल्हा जलाना संभव नहीं है। ऐसे में अगर घर का गैस सिलेंडर अचानक खत्म हो जाए तो बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है। उनका कहना है कि जब पाइपलाइन पहले से बिछी हुई है, तब भी गैस सप्लाई न मिलना समझ से परे है और इससे घर का कामकाज प्रभावित हो रहा है. जब ज़ी न्यूज़ की टीम महानगर गैस लिमिटेड के मीरा रोड स्थित कार्यालय पहुँची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर मौजूद थे। कुछ लोगों ने बताया कि वे कई वर्षों से अपनी सोसाइटी में गैस पाइपलाइन लाने के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन अलग-अलग कारण बताकर उन्हें कनेक्शन नहीं दिया गया। अब जब सरकार की ओर से पाइप गैस को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो कंपनी की तरफ से यह कहकर देरी बताई जा रही है कि पर्याप्त वर्कर उपलब्ध नहीं हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार गैस सप्लाई कंपनी से शिकायत की, लेकिन वहां से जवाब मिलता है कि देरी के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि मामला गैस कंपनी के स्तर पर लंबित है। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. इस मामले में महानगर गैस लिमिटेड का कहना है कि कंपनी अपने अधिकृत क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है और मार्च 2026 में घरेलू कनेक्शनों की संख्या में फरवरी की तुलना में 200 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। कंपनी के मुताबिक कई इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन शुरू करने में तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आती हैं, जैसे नालों की मौजूदगी, अन्य एजेंसियों के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य, संकरी गलियां, ट्रैफिक समस्या और जमीन के नीचे पहले से मौजूद केबल व अन्य यूटिलिटी लाइनों की वजह से काम में देरी होती है। कंपनी का दावा है कि इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है और आने वाले तीन महीनों में अधिकतम घरों तक पाइप गैस पहुंचाने का प्रयास किया गया है। تاہم इलाके के रहवासी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछे दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, इसलिए अब जल्द से जल्द गैस सप्लाई शुरू की जानी चाहिए। जेसल पार्क और आरएनपी पार्क के सैकड़ों परिवार फिलहाल इसी इंतजार में हैं कि आखिर कब उनके घरों तक पाइप गैस पहुंचेगी और उन्हें सिलेंडर के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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ईरान-यूएस-इज़राइल युद्ध का क Kashmir हस्तशिल्प उद्योग पर बड़ा असर, लाखों कारीगर प्रभावित

Chaka, कश्मीर घाटी भी ईरान पर US-इज़राइल युद्ध के असर से अछूती नहीं है। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ रद्द कर दी गई हैं। 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार, खाड़ी देशों में काम करने वाले लगभग 2 लाख कश्मीरी लोग प्रभावित हुए हैं; 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं और लगभग 400 करोड़ रुपये मध्य पूर्व में अटक गए हैं। ईरान पर US-इज़राइल युद्ध निर्यातकों, कारीगरों, शिल्पकारों और यहाँ तक कि मध्य पूर्व में काम करने वाले कश्मीरी सेल्समैनों को भी एक गंभीर और तत्काल झटका दे रहा है। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) और कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) ने कश्मीर की अर्थव्यवस्था में स्पष्ट गिरावट का संकेत दिया है; उन्होंने कहा कि हज़ारों करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया है और लगभग 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार प्रभावित होकर खाली बैठे हैं। हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र सीधे तौर पर 4.5 लाख कारीगरों और शिल्पकारों को सहारा देता है, जिनमें से कई आर्थिक रूप से कमज़ोर ग्रामीण परिवारों से आते हैं। वैश्विक ऑर्डर रुक जाने और प्रदर्शनियाँ रद्द होने के कारण, तैयार माल—जैसे पश्मीना शॉल, कालीन, पेपर-मेशे और अखरोट की लकड़ी का काम—पूरी घाटी में गोदामों और घरों में फँसा हुआ है। उत्पादन के कोई नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगर बिना काम के खाली बैठे हैं। कैश फ्लो पूरी तरह से रुक गया है, क्योंकि निर्यातक बुनकरों, रंगरेज़ों और कारीगरों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं; ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने मध्य पूर्व में जो माल निर्यात किया था, उसका भुगतान अभी तक नहीं मिला है और वह पैसा वहीं अटक गया है। हाल के वर्षों में, कश्मीर के कालीन और हस्तशिल्प का निर्यात आमतौर पर सालाना ₹600–700 करोड़ के बीच रहा है। इस साल, युद्ध शुरू होने से पहले रमज़ान और ईद के त्योहारों के दौरान ₹410 करोड़ का व्यापार हुआ था, लेकिन वह सारा पैसा वहीं अटक गया है। अब तक लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। खाड़ी देशों, यूरोप और पूर्वी एशिया के बाज़ारों से—जहाँ पारंपरिक रूप से कश्मीर के बेहतरीन हस्तनिर्मित उत्पादों की सबसे ज़्यादा खपत होती है—व्यापार के कोई भी नए अवसर (leads) नहीं मिल रहे हैं। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ भी रद्द कर दी गई हैं। डील/एक्सपोर्टर तारिक घोनी ने कहा, “पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। हमारी तीन प्रदर्शनियाँ रद्द हो गईं - एक डेनमार्क में, दूसरी UAE में और तीसरी बीजिंग में।” वसंत का यह समयकालीन-कालीनीन है, क्योंकि कारीगर सर्दियों के दौरान माल (स्टॉक) तैयार करते हैं और अब हम इसे अलग-अलग देशों में प्रदर्शित करते हैं। लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं, और अगर युद्ध नहीं रुका तो और भी ऑर्डर रद्द हो सकते हैं; इसके अलावा 50 हजार से ज़्यादा लोग जो वहां नौकरी कर रहे हैं, वे भी प्रभावित हुए हैं; अगर युद्ध और बढ़ा तो उनकी नौकरियां भी जा सकती हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया गया है कि वे पश्चिम एशिया के इस संघर्ष में हस्तक्षेप करें और इसे रुकवाएं। इस संकट का असर न केवल बड़े निर्यातकों पर पड़ा है, बल्कि मध्य-पूर्व में काम कर रहे 2 लाख से ज़्यादा कश्मीरी लोगों की नौकरियां भी खतरे में हैं। कश्मीर के खाड़ी देशों (Gulf) के साथ नौकरियों के मामले में गहरे संबंध हैं, खासकर UAE, सऊदी अरब और कतर में। इस समय, कश्मीर में 4.45 लाख कारीगरों, शिल्पकारों और उनके परिवारों के लिए यह सीधे तौर पर आजीविका का संकट बन गया है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो हजारों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं; व्यापारियों ने इस बारे में खुलकर चेतावनी दी है। कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा, सरकार ने स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की है और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है ताकि स्थिति के अनुसार कदम उठाए जा सकें। हस्तशिल्प क्षेत्र इस समय बहुत ज़्यादा दबाव में है; कारीगर खाली बैठे हैं, और उनके परिवार रोज़ाना की मज़दूरी पर निर्भर हैं। KCCI, FCIK और CEPC लगातार सरकार पर ज़ोर डाल रहे हैं कि वह तेज़ी से कार्रवाई करे—जैसे कि ब्याज़-मुक्त लोन देना, कारीगरों को सीधे मदद पहुंचाना और बाज़ार का विस्तार करना। यदि यह संघर्ष जल्द शांत हो जाता है, तो कुछ हफ़्तों या महीनों में हालात सामान्य हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि वे अमेरिका, इज़रायल और दूसरे देशों के साथ भारत के कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करें ताकि मानवीय और आर्थिक आधार पर इस संघर्ष को शांत किया जा सके और खत्म किया जा सके।
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मीरजापुर के निजी स्कूलों की किताबें महंगी, अभिभावक RTI से पारदर्शिता मांग रहे

Ukhdand, Uttar Pradesh:निजी स्कूलों की किताबों पर अभिभावकों की जेब पर बोझ, सूचना के अधिकार में भी टालमटोल मीरजापुर। शहर और आसपास के क्षेत्रों में निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित किताबों की ऊंची कीमतों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर वर्ष नई किताबों की सूची जारी कर अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही खरीदारी के लिए बाध्य करते हैं, ताकि किताबों के दाम बाजार की तुलना में कहीं अधिक वसूले जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि एक ही कक्षा की किताबें हर साल बदल दी जाती हैं, जिससे पुरानी किताबों का उपयोग संभव नहीं हो पाता। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूलों और कुछ बुक डिपो के बीच मिलीभगत है, जिसके चलते मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। पारदर्शिता की मांग को लेकर अभिभावकों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत संबंधित स्कूलों और शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी, लेकिन शिकायत है कि या तो समय पर सूचना नहीं दी जाती या फिर अधूरी जानकारी देकर मामले को टाल दिया जाता है। इससे अभिभावकों में असंतोष और बढ़ गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि किताबों की कीमतों पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर हो रही इस ‘लूट’ पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अभिभावकों ने सरकार से यह भी अपील की है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की व्यवस्था लागू की जाए, जिससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हो और आम जनता का भरोसा मजबूत हो सके। बाइट— राम बाबू पांडेय (स्थानीय): “हर साल नई किताबें खरीदने की मजबूरी बना दी जाती है। बाजार में सस्ती किताबें उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल एक ही दुकान से खरीदने का दबाव बनाते हैं, जो गलत है।” योगी एमपी सिंह: “सूचना के अधिकार के तहत भी सही जानकारी नहीं दी जा रही है। प्रशासन को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अभिभावकों का शोषण बंद हो।”
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बदायूं: दबंगों से परेशान पीड़ित महिला ने विष खाकर न्याय की भीख मांगी

Budaun, Uttar Pradesh:बदायूं जिले के मूसाझाग थाना पुलिस पर फिर उठे कई गम्भीर सवाल。 गांव के ही दबंग लोगों से परेशान पीड़ित परिवार लगभग दो साल से है परेशान。 आज भी दबंगों ने पीड़ित परिवार को धमकाया और जान से मारने की धमकी दी。 दबंगों से परेशान होकर महिला ने एसएसपी ऑफिस के पास खाया विषाक्त पदार्थ。 पीड़ित के परिजनों ने बताया कि गांव के ही दबंग लगातार दो सालों से करते आ रहे हैं परेशान。 पीड़ित परिवार में कई बार मुसजत थाना पुलिस से लेकर बदायूं एसपी तक से की थी शिकायत। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने डराया धमकाया और मामले में कार्रवाई नहीं की。 पीड़ित परिवार लगातार थाना पुलिस और एसएसपी से लग रहा था न्याय की गुहार。 जब न्याय नहीं मिला तो आहत होकर पीड़ित महिला ने एसपी ऑफिस के पास खाया अभिशाप पदार्थ। विषाक्त पदार्थ खाने वाली महिला सुनीता (40) पत्नी हरीश कुमार निवासी गुलड़िया थाना मूसाझाग की निवासी है。 विशाख पदार्थ खाने की सूचना मिलते ही पुलिस के हाथ-पांव फूल तत्काल इलाज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के गुलड़िया गांव का रहने बाला है पीड़ित परिवार。
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उमरिया में तेज बारिश-आंधी: किसानों की फसल भारी नुकसान, मुआवजे की मांग

Umaria, Madhya Pradesh:उमरिया जिले में मंगलवार बुधवार की देर रात तेज बारिश और आंधी तूफान ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया. तेज बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं पककर प्रभावित हुई. दलहन, तिलहन के साथ फल और सब्जियों में भी बारिश का असर देखा गया. खेतों में पकने की कगार पर टमाटर टूटकर गिर गए, लहसुन-प्याज के साथ खीरा और ककड़ी भी नष्ट हुए. असमय बारिश ने किसानों के ऊपर कहर बरसाने का काम किया है. प्रभावित किसानों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजे की मांग की. जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों को बारिश से प्रभावित फसलों के आकलन के निर्देश दिए.
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द्वारका के सीएनजी पंप पर सिलेंडर फटने से चार घायल

Delhi, Delhi:द्वारका जिले में नजफगढ़-मित्राऊं रोड स्थित सीएनजी पंप पर गैस भरते समय एक ट्रक के सिलेंडर में धमाका होने से चार लोग घायल हो गए. घायलों को तत्काल राव तुलाराम मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक नंबर HR 63C 4424 में सीएनजी भरी जा रही थी, तभी अचानक एक सिलेंडर फट गया. धमाके की चपेट में आकर मौके पर मौजूद चार लोग घायल हो गए. इनमें से तीन की पहचान पंप कर्मचारियों के रूप में हुई है, जिनमें दीपक, विकास कुमार और नीरज शामिल हैं. एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो पाई है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. घटना के बाद मौके को घेेरकर सुरक्षित कर दिया गया है. फॉरेंसिक साइंस लैबोरेरी और क्राइम टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है. वहीं, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के तकनीशियन और अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और तकनीकी जांच में जुटे हैं. पुलिस द्वारा मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. घटना के कारणों की जांच जारी है.
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हेमंत सोरेन असम चुनावी सभा में आदिवासी-दलित के अधिकारों की सुरक्षा का वादा

Ranchi, Jharkhand:रांची आसाम की चुनावी सभा में सीएम का बयान सीएम हेमंत सोरेन आसाम के सारुपथर विधानसभा में चुनाव प्रचार किया। अपनी सभा ने सीएम हेमन्त सोरेन ने कहा यहां का प्रत्याशी एक सिपाही बन कर आप लोगों के बीच रहेगें। आदिवासी ,पिछड़ा ,दलित और अल्पसंख्यक के हक अधिकार की रक्षा होगी। यहां डबल इंजन की सरकार में कैसे भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों और दलितों पर अत्याचार होता था , कैसे दलितों को पेशाब पिलाया जाता था, कैसे सड़को पर बांध कर घसीटा जाता था , कैसे अल्पसंख्यकों के साथ मॉब लांचिंग होता था, जब झारखंड में हमारी सरकार बनी न कोई मॉब लांचिंग होता है न किसी के ऊपर अन्याय होता है। हां बीजेपी बीच बीच में आग लगाने का काम करती है, अब देखिए इन लोगों ने रामनवमी में इतना बड़ा कांड कर दिया और राज्य सरकार को पानी पी पी कर कोस रहा है। उनका आह्वान था पूरा झारखंड बंद करेंगे , जब उनको उनका चेहरा दिखाया तो उनको भागते हुए रास्ता नहीं मिल रहा है। बीजेपी वाले व्यापारी हैं देंगें नहीं बल्कि आपके शरीर से सिरिंच लगा कर खून निकाल लेंगे। हम लोग ऐसे समूह के लोग हैं जो रास्ता भी देते हैं और मंजिल तक पहचाने का ताकत रखते हैं। आपको एक जुट होगें तो आपकी लड़ाई बड़ी जल्दी मंजिल तक पहुंचेगी
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संत कबीर नगर के दुधारा गांव में गेहूं की फसल में आग, 20 बीघा जलकर राख

Uska Khurd, Uttar Pradesh:एंकर- संतकबीरनगर जिले के सेमरियांवा ब्लॉक क्षेत्र के दुधारा गांव के पूर्वी सिवान में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अज्ञात कारणों से गेहूं की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 20 बीघा गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह राख हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास किया। ग्रामीणों की सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची जिसके बाद ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक किसानों को भारी नुकसान हो चुका था। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। जिले में फसल में आग लगने की दूसरी घटना देवरिया गंगा गांव में हुई। जहां करीब 5 बीघा गेंहू की फसल जलकर राख हो गई। राजस्व टीम आग से हुए फसल के नुकसान के आकलन में जुटी है।
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आमेर फोर्ट पर वीरेंद्र शर्मा को सम्मानित किया गया

Jaipur, Rajasthan:दामोदर प्रसाद जयपुर एंकर - आमेर थाना पुलिस के कांस्टेबल वीरेंद्र शर्मा को आमेर फोर्ट पर उत्कृष्ट सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सम्मानित किया गया,,,,, ऐतिहासिक एवं प्रमुख पर्यटन स्थल आमेर फोर्ट पर अपनी ड्यूटी के दौरान वीरेंद्र शर्मा ने कर्तव्यों का निर्वहन अत्यंत सतर्कता, दक्षता और जिम्मेदारी के साथ किया,,,,,आमेर फोर्ट पर प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों के आगमन को देखते हुए उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी,,,,, इसके साथ ही प्रवेश और निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखते हुए संदिग्ध व्यक्तियों और गतिविधियों पर विशेष सतर्कता बनाए रखी,,,,,,, ड्यूटी के दौरान वीरेंद्र शर्मा ने भीड़ प्रबंधन को भी व्यवस्थित और नियंत्रित रूप से संचालित किया, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित और सुचारू वातावरण मिल सके,,,,, उनकी कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया,,,,, इस अवसर पर डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने कांस्टेबल वीरेंद्र शर्मा को प्रशंसा पत्र और 1100 रुपये की नगद राशि देकर सम्मानित किया,,,,,,,
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AIMIM ने UP STF की गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया; बिहार में विरोध तेज

Patna, Bihar:एआइएमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान द्वारा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर प्रदेश के एसटीएफ पर आरोप लगाते हुए कहा गया प्रख्यात इस्लामिक स्कॉलर मौलाना अब्दुल्लाह सलीम चतुर्वेदी को यूपी एसटीएफ द्वारा गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया है और उनके साथ मानवीय व्यवहार किया गया है मौलाना की गिरफ्तारी 2 वर्ष पुराने सोशल मीडिया पर जारी हुए एक वीडियो के आधार पर किया गया है बिहार के पूर्णिया जिले से उनकी गिरफ्तारी यूपी एसटीएफ द्वारा की गई है और इसकी जानकारी ना पुलिस प्रशासन को थी ना ही यूपी एसटीएफ ने ट्रांजिट रिमांड भी लिया था इस घटना के खिलाफ मुसलमान में काफी नाराजगी है बिहार के सीमांचल इलाकों के मुसलमान समुदाय में इसके खिलाफ भारी नाराजगी है और इसके खिलाफ आज ए आई एम आई एम ने बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यूपी पुलिस की इस गलत कार्रवाई का विरोध करने की मांग की है
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