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Rampur244901

रामपुर के थाना कैमरी में तैनात महिला आरक्षी रश्मि चौहान ( बिजनौर) ने साहित्य के क्षेत्र में लेख लिखा

Jan 13, 2026 08:50:57
Rampur, Uttar Pradesh
जनपद रामपुर के थाना कैमरी में तैनात महिला आरक्षी रश्मि चौहान (गृह जनपद बिजनौर) ने साहित्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है । अपने कर्तव्यों के निर्वहन के साथ-साथ साहित्य सृजन में रुचि रखते हुए उनके द्वारा एक कविता-संग्रह का सृजन किया गया है, जो शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहा है । उक्त कविता-संग्रह में महिला आरक्षी रश्मि चौहान द्वारा रचित कुल 84 कविताएँ सम्मिलित की गई हैं । इन कविताओं के माध्यम से उन्होंने समाज के विविध विषयों, महापुरुषों के जीवन और आदर्शों, विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक त्यौहारों, नारी के अंतर्मन की संवेदनाओं, संघर्षों एवं भावनाओं के साथ-साथ प्रेम और मानवीय रिश्तों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है । “काव्य रश्मि” शीर्षक से प्रकाशित होने वाला यह कविता-संग्रह उनकी सृजनात्मक सोच, संवेदनशीलता एवं साहित्यिक अभिरुचि का सशक्त उदाहरण है । यह संग्रह न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक होगा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पुलिस बल के कार्मिक अपने दायित्वों के साथ-साथ कला, संस्कृति एवं साहित्य के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट योगदान दे सकते हैं । पुलिस अधीक्षक, रामपुर एवं अपर पुलिस अधीक्षक, रामपुर द्वारा महिला आरक्षी रश्मि चौहान के इस साहित्यिक प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उनके कविता-संग्रह के प्रकाशन की अनुमति प्रदान की गई तथा भविष्य में उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की गई । *"काव्यरश्मि" का शीर्षक”* 'कविता' भाषा का संचरित और कल्पनाशील तरीके से उपयोग करने की कला है । जिसका उद्देश्य भावनाओं को जाग्रत कर, विचारों को व्यक्त करना या अनुभवों को अभिव्यक्त करना होता है । प्रायः यह अर्थ और सौंदर्य की गहरी अनुभूति उत्पन्न करने के लिए रूपक, उपमा, तुकबन्दी, लय और प्रतीकवाद जैसे साहित्यिक उपकरणों का प्रयोग करती है । कविता कल्पनाशीलता को बढ़ावा देती है तथा हमें नवीन विचारों और भावनाओं से जोड़ती है। काव्य और कविता साहित्य की महत्वपूर्ण विधा है। जो भावनाओं, विचारों और कल्पनाओं को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करती है। 'काव्यरश्मि मेरी स्वरचित कविताओं का संकलन है। जिसमें मैंने जीवन के अनुभवों, विचारों, भावनाओं व समाज से जुड़े विषयों के बारें में कविताओं के माध्यम से "काव्यरश्मि" काव्य-संग्रह में संकलित किया है।
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HSHITESH SHARMA
Mar 04, 2026 06:01:44
Durg, Chhattisgarh:एंकर-दुर्ग से रायपुर नेशनल हाई वे 53 में खारुन नदी के पुल पर देर रात रायपुर कि तरफ़ एक टैंकर के पलट जाने से दुर्ग से रायपुर की ओर जाने वाले रास्ते पर लंबा जाम लग गया यह टैंकर पुल के बीचो बीच अनियंत्रित होकर पलट गया जिससे टैंकर में मौजूद आइल सड़क पर फैलने लगा इस घटना की सूचना मिलते ही दुर्ग और रायपुर की यातायात पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन पुल के ऊपर फैले हुए तेल और टैंकर की स्थिति को देख पुलिस ने तत्काल एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया लंबे जाम को देखते हुए पुलिस ने रूट को भी डायवर्ट किया और इधर पुल के ऊपर रेस्क्यू शुरू किया क्रेन के आने के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने टैंकर को बड़ी मशक्कत के बाद वहां से हटाया तो वही पुल पर ऑइल पूरी तरह फैल जाने की वजह से फायर ब्रिगेड की टीम ने केमिकल छिड़क कर 2 घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 2 बजे टैंकर हटला लिया गया तो वही अल सुबह तक ट्रैफिक वन वे ही चलता रहा.
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ASANIMESH SINGH
Mar 04, 2026 06:01:00
Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन。 धार्मिक नगरी उज्जैन में होली का उत्सव पूरे उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, वैसे-वैसे शहर रंगों में सराबोर होता नजर आ रहा है। सुबह से ही लोग अपने घरों से बाहर निकलकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हुए होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं。 इसी कड़ी में मालीपुरा स्थित विश्वकर्मा समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से होली उत्सव की शुरुआत की। समाजजन एकत्रित होकर पहले पारंपरिक तरीके से होली खेलते दिखाई दिए, इसके बाद वे समाज के अन्य घरों की ओर रवाना हुए。 विश्वकर्मा समाज में वर्षों पुरानी एक मान्यता का पालन आज भी किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार जिन परिवारों में बीते समय में गमी (शोक) हुई हो, उनके घर समाज के लोग स्वयं पहुंचकर रंग लगाते हैं। इसका उद्देश्य यह होता है कि शोक की छाया से बाहर निकलकर वह परिवार भी आने वाले त्योहारों को खुशियों और सामाजिक अपनत्व के साथ मना सके। समाज के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा केवल रंग खेलने की नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, संवेदना और साथ निभाने का प्रतीक है। होली जैसे पावन पर्व पर यह संदेश दिया जाता है कि दुख की घड़ी में समाज साथ खड़ा है और खुशियों में भी सबको सहभागी बनाना ही सच्ची होली है। शहर में दिन चढ़ने के साथ होली की रौनक और बढ़ने की संभावना है, वहीं विभिन्न मोहल्लों और समाजों में पारंपरिक ढंग से रंगोत्सव मनाया जा रहा है।
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AYAmit Yadav
Mar 04, 2026 06:00:38
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KBKuldeep Babele
Mar 04, 2026 06:00:11
Jabalpur, Vehicle Fac. Jabalpur, Madhya Pradesh:जबलपुर में होलिका दहन के बाद ग्रहण के चलते दूसरे दिन धुरेड़ी नहीं मनाई जा सकी थी लेकिन बुधवार सुबह से ही जबलपुर में धुरेड़ी का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह से ही हरयारों ने एक दूसरे को रंग लगाना शुरू कर दिया है रंग गुलाल और गेरू के साथ हर्बल मिट्टी का भी इस बार इस्तेमाल किया जा रहा है। होली की हुड़दंग में सभी सराबोर नजर आ रहे हैं और एक दूसरे को जमकर रंग गुलाल और हर्बल मिट्टी से रंग रहे हैं। धुरेड़ी का उत्सव देखते ही बनता है जबलपुर में पारंपरिक तरीके से एक दूसरे को जमकर रंग लगाया जा रहा है। वहीं होली खेलने वालों का कहना है कि यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का है और एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर सभी अपनी बुराई भी भुला देते हैं। बच्चे हो या बड़े सभी मिलकर जमकर होली खेल रहे हैं।
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