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RRajanFollow19 Nov 2024, 02:54 pm
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भागलपुर के नंदिकेश ने 25 लाख से 80 लाख टर्नओवर बैग फैक्ट्री बनाई

Naya Chak, Bihar:मुंबई में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी…हर महीने सिर्फ 15 हजार रुपये की कमाई…लेकिन आज वही युवा भागलपुर में 80 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाली बैग फैक्ट्री का मालिक है। यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि सरकारी योजना, हिम्मत और मेहनत से बदली जिंदगी की मिसाल है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना यानी पीएमईजीपी और बिहार सरकार के सहयोग से शुरू हुआ यह सफर आज दर्जनों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार बन चुका है। भागलपुर के नंदिकेश कुमार कभी मुंबई में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। कोरोना काल में घर लौटे तो उन्होंने तय किया कि अब दोबारा पलायन नहीं करेंगे। उन्होंने अपने ही जिले में उद्योग लगाने का सपना देखा। इस सपने को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत मिले 25 लाख रुपये के लोन ने नई उड़ान दी, जबकि बिहार सरकार ने बरारी स्थित बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराई। यहीं से शुरू हुई उनकी बैग निर्माण फैैक्ट्री की कहानी। आज इस फैैक्ट्री में स्कूल बैग, ट्रैवल बैग, ऑफिस बैग समेत कई तरह के आधुनिक बैग तैयार किए जाते हैं। इनके उत्पाद बिहार ही नहीं, देश के कई राज्यों में भेजे जा रहे हैं। मुंबई की बड़ी कंपनियां भी हजारों बैग का ऑर्डर दे रही हैं। फैक्ट्री का सालाना टर्नओवर करीब 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है और लगातार बढ़ रहा है। नंदिकेश की फैक्ट्री का सबसे बड़ा आकर्षण है डिजिटल बैग। इस बैग में मोबाइल चार्जिंग की सुविधा दी गई है। बैग के अंदर चार्जिंग पोर्ट और पावर बैंक कनेक्शन की व्यवस्था है, जिससे सफर के दौरान मोबाइल आसानी से चार्ज किया जा सकता है। बाजार में लॉन्च होने से पहले ही इस डिजिटल बैग के लिए कई ऑर्डर मिलने लगे हैं। नंदिकेश ने सिर्फ अपना कारोबार ही नहीं बढ़ाया, बल्कि पलायन रोकने की भी मिसाल पेश की है। उनकी फैक्ट्री में आज 15 से 20 लोग काम कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे लोग हैं, जो पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी या नौकरी करते थे, लेकिन अब अपने ही शहर भागलपुर में सम्मानजनक रोजगार पा रहे हैं। नंदिकेश का लक्ष्य आने वाले समय में फैक्ट्री का विस्तार कर और अधिक युवाओं को रोजगार देना है। नंदिकेश की कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो नौकरी तलाशने वाला युवा भी एक दिन रोजगार देने वाला उद्योगपति बन सकता है। भागलपुर की यह सफलता अब बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है。
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आगरा के बरपुरा गांव में जमीन विवाद के बाद कलयुगी बेटे की जहरखानी, गिरफ्तार

Agra, Uttar Pradesh:आगरा में जमीन विवाद के बाद कलयुगी बेटे की करतूत विवाद के बाद मायके गई पत्नी को लेने पहुंचे पति से सास की हैरान कर देने والی शर्त सास ने दामाद से उसकी माँ को जहर देकर मारने की शर्त पर पत्नी को भेजने की रखी शर्त कलयुगी बेटे ने घर आकर मां को खाने में मिलाकर दिया जहर खाने खाते हो बिगड़ी मा की तबियत,कलयुगी बेटा घर से फरार परिवार ने महिला को अस्पताल में कराया भर्ती परिवार की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी रविन्द्र को थोड़ी ही देर में किया गिरफ्तार,दामाद को भड़काने वाली सास फरार कलयुगी बेटे ने पुलिस की पूछताछ में कुबूली करतूत आगरा के थाना पिढौरा के गांव बरपुरा का मामला
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MP की बड़ी साइबर ठगी: चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21 करोड़ की धोखाधड़ी

Morena, Madhya Pradesh:ग्वालियर ब्रेकिंग MP की सबसे बड़ी सायबर ठगी चार्टड एकाउंटेंट से 21 करोड़ 05 लाख 96 हजार रुपये की ठगी क्रिप्टो निवेश का झांसा देकर चार्टर्ड अकाउंटेंट से कि गई ठगी 70 वर्षीय चार्टड एकाउंटेंट, चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव अधिकारी अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई ठगी व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ खेल, 218 दिन तक जाल में फंसाए रखा 01 दिसंबर 2025 से 07 जुलाई 2026 तक चला ठगी का खेल 70 वर्षीय सीए को ट्रेडिंग और क्रिप्टो में मुनाफे का लालच दिया गया शुरुआत में 01 लाख का निवेश करवाकर 88 हजार का मुनाफा देकर जल में फंसाया 106 बार में 25 बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई रकम 33.25 करोड़ का फर्जी ऑनलाइन पोर्टफोलियो दिखाकर 12 करोड़ मुनाफे से किया भ्रमित रकम निकालने की कोशिश पर टैक्स और फीस के नाम पर मांगे गए करोड़ों रुपये 15 बैंक खातों में 10.84 करोड़ और दूसरे खातों में करोड़ों की ट्रांजैक्शन पीड़ित की शिकायत पर साइबर सेल ने दर्ज की एफआईआर जाँच में जुटी सायबर पुलिस
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मथुरा में 40 लाख पौधे: एक पेड़ माँ के नाम अभियान से हरियाली लौटी

Mathura, Uttar Pradesh:मथुरा: 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर महा-वृक्षारोपण, रोपे गए पौधे मथुरा: पर्यावरण संरक्षण और ब्रज की हरियाली को वापस लौटाने के संकल्प के साथ गोवर्धन परिक्रमा मार्ग स्थित गिर्राज तलहटी में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस महा-अभियान की कमान खुद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने संभाली. गिर्राज जी के साये में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों से लेकर स्कूली बच्चों तक ने पूरी आस्था और उत्साह के साथ पौधे रोपकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया. मथुरा में 40 लाख और यूपी में 30 करोड़ का लक्ष्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गन्ना विकास एवं चीनी मिलें मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि बढ़ते तापमान और पर्यावरण असंतुलन से निपटने का एकमात्र जरिया वृक्षारोपण ही है. उन्होंने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में 30 करोड़ पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अकेले कान्हा की नगरी मथुरा में 40 लाख पौधे रोपे जा रहे हैं. नेताओं और बच्चों ने मिलकर संभाला मोर्चा गिर्राज तलहटी में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में वीआईपी से लेकर आम जनता तक की बराबर की भागीदारी देखने को मिली. - दिग्गज रहे मौजूद: राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, स्थानीय विधायक मेघश्याम सिंह, पूर्व विधायक कारिंदा सिंह और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष लंबरदार ने फावड़ा थामकर विधिवत पौधरोपण किया. - बच्चों का दिखा उत्साह: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय स्कूली बच्चे रहे. बच्चों ने न सिर्फ खुद पौधे लगाए, बल्कि 'एक पेड़ माँ के नाम' की तख्तियां लेकर समाज को अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की भावुक अपील भी की. ब्रजवासियों से अपील: वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में सभी अतिथियों ने ब्रजवासियों से आह्वान किया कि वे केवल पौधा लगाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री न कर लें, बल्कि उस पौधे के बड़ा होने तक उसकी मां की तरह ही देखभाल करने का संकल्प लें. बाइट--केबिनेट मंत्री--चौधधरी लक्ष्मीनारायण बाइट--चेयमैन प्रतिनिधि-मनीष लंबरदार
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कायलाना झील सफाई अभियान: सामाजिक आंदोलन बनकर शहर को स्वच्छ बना रहा पुरे राजस्थान

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर की जीवनरेखा कही जाने वाली कायलाना झील आज सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी है। इसके पीछे हैं पर्यावरण प्रेमी पंडित जीवराज, जिन्होंने अकेले सफाई की शुरुआत की और देखते ही देखते यह अभियान शहर का जन-आंदोलन बन गया। पिछले 40 दिनों से हर सुबह सैकड़ों लोग उनके साथ जल स्रोतों की सफाई में जुट रहे हैं। जी मीडिया की टीम ने जब इस अभियान की पड़ताल की तो सामने आई एक ऐसी प्रेरक कहानी, जो बताती है कि अगर समाज ठान ले तो बदलाव असंभव नहीं। अकेले शुरू किया सफर, आज बन गया जन-आंदोलन फुल-फिल्म गीत “साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा...” जोधपुर की कायलाना झील पर इन दिनों पूरी तरह चरितार्थ होता दिखाई दे रहा है। पर्यावरण प्रेमी पंडित जीवराज ने करीब 40 दिन पहले शहर के जल स्रोतों को साफ करने का संकल्प लिया। शुरुआत आसान नहीं थी। पहले दिन उनके साथ केवल कुछ किराए के मजदूर थे और अभियान गुरुओं का तालाब से शुरू हुआ। सफाई हुई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर वही गंदगी लौट आई। तभी उन्हें एहसास हुआ कि यह काम अकेले संभव नहीं है, इसे जन-आंदोलन बनाना होगा। सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा हथियार पंडित जीवराज ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की कि वे अपने शहर और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अभियान से जुड़ें। उनकी अपील का असर हुआ और धीरे-धीरे लोग सुबह-सुबह सफाई अभियान में शामिल होने लगे। पहले कुछ लोग आए, फिर दर्जनों और अब बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे प्रतिदिन इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं। आज स्थिति यह है कि केवल कायलाना झील ही नहीं, बल्कि गुरुओं का तालाब, गुलाब सागर और शहर के अन्य जल स्रोतों पर भी नियमित सफाई अभियान चलाया जा रहा है। सुबह 6:15 से शुरू होता है सेवा का संकल्प हर दिन सुबह ठीक 6:15 बजे अभियान की शुरुआत होती है। करीब एक घंटे तक स्वयंसेवक पानी में उतरकर प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, पूजा सामग्री, मूर्तियां, थैलियां और अन्य कचरा निकालते हैं। इसके बाद पूरे कचरे को निर्धारित डंपिंग स्थल तक पहुंचाया जाता है। जी मीडिया की टीम जब कायलाना झील पहुंची तो वहां का दृश्य किसी सरकारी अभियान से कम नहीं था। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और छोटे-छोटे बच्चे बिना किसी स्वार्थ के सफाई में जुटे हुए थे। हर किसी के चेहरे पर अपने शहर को स्वच्छ बनाने का संतोष साफ दिखाई दे रहा है। कायलाना झील सिर्फ झील नहीं, पूरे शहर की जीवनरेखा काँयलाना झील जोधपुर शहर के प्रमुख पेयजल स्रोतों में से एक है। यहीं से लाखों लोगों तक पानी पहुंचता है। ऐसे में झील में फेंका गया प्लास्टिक और अन्य कचरा केवल पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। पंडित जीवराज का मानना है कि अगर जल स्रोत स्वच्छ रहेंगे तो बीमारियां भी कम होंगी और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पानी मिलेगा। यही सोच उन्हें हर दिन सुबह उठकर सफाई करने के लिए प्रेरित करती है। रुकावटें भी आईं, लेकिन हौसले नहीं डिगे अभियान के दौरान कई बार लोगों ने उनका उत्साह कम करने की कोशिश भी की। कुछ लोगों ने ताने दिए तो कुछ ने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ेगा। लेकिन पंडित जीवराज और उनकी टीम नहीं रुकी। उनका कहना है कि जब उद्देश्य समाज और पर्यावरण की सेवा हो, तब आलोचनाएं रास्ता नहीं रोक सकतीं। धीरे-धीरे वही लोग भी इस अभियान की सराहना करने लगे जो पहले इसे व्यर्थ मानते थे। “इंसान रूपी जानवर”—एक कड़वी लेकिन सच्ची बात पंडित जीवराज अक्सर कहते हैं कि सबसे ज्यादा प्रदूषण कोई जानवर नहीं, बल्कि "इंसान रूपी जानवर" फैला रहा है। उनका आशय उन लोगों से है जो घूमने आते हैं, खाना खाते हैं और प्लास्टिक, बोतलें तथा कचरा वहीं छोड़कर चले जाते हैं। वे कहते हैं कि यदि हर व्यक्ति केवल अपना कचरा वापस ले जाए तो सफाई अभियान की जरूरत ही नहीं पड़े। शहर अपने आप स्वच्छ बना रहेगा। सबसे बड़ी चुनौती मानसिकता बदलना पंडित जीवराज मानते हैं कि इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती धन या संसाधन नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलना है। यदि नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझ लें तो सरकारी तंत्र पर बोझ भी कम होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। हालांकि प्रशासन और कुछ सामाजिक संगठनों का सहयोग भी समय-समय पर मिला है, लेकिन इस अभियान की असली ताकत आम नागरिक बने हैं। परिवार और स्वयंसेवकों का मिला पूरा साथ किसी भी सामाजिक अभियान को लंबे समय तक चलाना आसान नहीं होता। ऐसे में पंडित जीवराज बताते हैं कि उनके परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। वहीं, अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों ने इसे अपनी जिम्मेदारी मान लिया है। सफाई अभियान में शामिल कई युवाओं ने बताया कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर यह मुहिम देखी तो वे भी जुड़ गए। अब उन्हें हर सुबह यहां आकर ऐसा महसूस होता है जैसे वे अपने ही घर और आंगन की सफाई कर रहे हों। 40 दिनों में दिखने लगा बड़ा बदलाव लगातार 40 दिनों की मेहनत का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कायलाना झील के किनारे पहले की तुलना में काफी स्वच्छ नजर आते हैं। पानी में तैरने वाला प्लास्टिक कम हुआ है और आसपास का वातावरण भी बेहतर हुआ है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लोग कचरा फैलाने से पहले सोचने लगे हैं। कई परिवार अपने बच्चों के साथ सफाई अभियान में शामिल होकर उन्हें पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ा रहे हैं। युवाओं के नाम संदेश पंडित जीवराज का कहना है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। यदि युवा सप्ताह में केवल एक घंटा भी अपने शहर की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए दें तो पूरे देश की तस्वीर बदल सकती है। वे युवाओं से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर केवल पोस्ट साझा करने की बजाय जमीन पर उतरकर काम करें। प्रकृति की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। हर नागरिक का एक दैनिक कर्तव्य पंडित जीवराज मानते हैं कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक ऐसा काम जरूर करना चाहिए जिससे पर्यावरण को लाभ मिले। चाहे एक पौधा लगाना हो, प्लास्टिक का उपयोग कम करना हो, पानी बचाना हो या अपने आसपास सफाई रखना—छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव लाते हैं। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि हर नागरिक अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाए तो न केवल जोधपुर, बल्कि पूरा राजस्थान और देश स्वच्छ एवं स्वस्थ बन सकता है। जनभागीदारी ही सबसे बड़ा समाधान कायलाना झील पर चल रहा यह अभियान केवल सफाई का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की नई शुरुआत है। यह साबित करता है कि जब आम लोग किसी नेक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं तो असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। पंडित जीवराज और उनकी टीम ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों और सरकारी योजनाओं से नहीं होगा, बल्कि हर नागरिक के हाथ में झाड़ू, जिम्मेदारी और जागरूकता आने से होगा। यदि "साथी हाथ बढ़ाना" केवल गीत नहीं बल्कि जीवन का मंत्र बन जाए, तो देश के हर शहर, हर झील और हर जल स्रोत को फिर से स्वच्छ और जीवनदायी बनाया जा सकता है।
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नापासर में शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर विकास के बड़े प्रकल्पों की घोषणा

Bikaner, Rajasthan:नापासर को शिक्षा के क्षेत्र में मिली बड़ी सौगात कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने नए राजकीय विद्यालय भवन का भूमिपूजन ट्रस्ट के सहयोग से करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बननेगा आधुनिक विद्यालय, मंत्री ने विद्यालय के लिए 50 लाख रुपये की लाइब्रेरी निर्माण की घोषणा की, नापासर में 40 करोड़ रुपये के उपजिला अस्पताल के लिए भूमि आवंटित, शहर में लगेंगी 500 नई रोड लाइटें, दीपावली तक मिलेगी 80 लाख रुपये की जेट मशीन 31 जुलाई को नापासर नगर पालिका में होगी जनसुनवाई मंत्री बोले-भामाशाहों की पहल शिक्षा और विकास के लिए पूरे प्रदेश में बनेगी मिसाल
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संगम टनल पर सुरक्षा और ड्रेनेज सुधार की मांग तेज

Noida, Uttar Pradesh:स्लग : संगम टनल पर फिर उठे सुरक्षा के सवाल。 स्थान : रुद्रप्रयाग 12 जुलाई 26 एंकर : रुद्रप्रयाग संगम बाजार स्थित ऐतिहासिक टनल एक बार फिर चर्चाओं में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टनल के पुनर्निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यहां सुरक्षा और ड्रेनेज से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। बरसात के दौरान ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा और सड़क पर फिसलन लोगों की चिंता बढ़ा रही है。 स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी के अनुसार वर्ष 1955 में बनी यह टनल क्षतिग्रस्त होने के बाद दोबारा बनाई गई। पुनर्निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन टनल के बाहर ड्रेनेज व्यवस्था आज भी संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि पानी की निकासी के लिए बनाए गए कल्वर्ट तक बारिश का पानी सही ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे सड़क पर पानी भरने और फिसलन की समस्या बनी रहती है। अशोक चौधरी का कहना है कि पुरानी टनल सड़क के प्राकृतिक मोड़ के अनुरूप थी, जिससे वाहन आसानी से निकल जाते थे। लेकिन पुनर्निर्माण के बाद टनल का स्वरूप बदल गया है और अब वाहनों को बाहर निकलकर अतिरिक्त मोड़ लेना पड़ता है। ऐसे में सामने से आने वाले वाहनों के साथ दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां कई वाहन फिसल चुके हैं। उन्होंने बताया कि अतीत में इस क्षेत्र में पत्थर गिरने से लोगों की मौत भी हो चुकी है। सुरक्षा के लिए पहाड़ी पर जालियां लगाई गई हैं, लेकिन टनल के मुहाने के आसपास अब भी पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है。 स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा जालियां लगाने, ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने और टनल क्षेत्र में सुरक्षा उपाय मजबूत करने की मांग की है。 बाइट : अशोक चौधरी,स्थानीय व सामाजिक कार्यकर्ता
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डीसी गांदरबल ने मणिगाम यात्रा ट्रांज़िट कैंप की सुविधाओं और स्वच्छता का निरीक्षण किया

Aram Pora, Ganderbal, Deputy Commissioner (DC) Ganderbal, Jatin Kishore, visited the Yatra Transit Camp at Manigam to review the arrangements and facilities put in place for the smooth stay and welfare of Shri Amarnath Ji Yatris. During the visit, the DC undertook a comprehensive inspection of the camp and reviewed the functioning of various facilities, including medical services. He interacted with patients and healthcare staff to assess the quality of services and directed the medical teams to remain fully prepared to provide prompt and efficient healthcare to every pilgrim. The DC also inspected sanitation and cleanliness arrangements across the transit camp and instructed the concerned departments to maintain the highest standards of hygiene to ensure a clean, healthy and comfortable environment for the pilgrims. As part of the visit, the DC interacted with officers deployed at the camp, inspected various langars and met with the Yatris to receive firsthand feedback about the facilities and services being provided. He reiterated that the comfort, safety and well-being of every pilgrim must remain the top priority of all departments. Emphasizing a pilgrim-centric approach, the DC directed all officers and frontline staff to extend every possible assistance to the Yatris with courtesy, compassion and promptness, ensuring that no pilgrim faces any inconvenience during their stay at the transit camp. The DC also stressed close coordination among all line departments to ensure seamless delivery of essential services and immediate redressal of any issues arising at the camp. Among others, the visit was attended by Assistant Commissioner Revenue Ganderbal, who is also the Nodal Officer for Yatra Transit Camp Manigam, Police incharge Transit Camp Manigam, officers from R&B, KPDCL, Jal Shakti, Municipal Council Ganderbal, Information Department and other concerned officers.
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PMO के निर्देश: MAHAGENCO भूमि खरीद मामले की जाँच शुरू

Begun, Rajasthan:रायपुर PMO के निर्देश पर महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO) की 110 करोड़ की जमीन खरीद की होगी जांच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने महाराष्ट्र सरकार को जांच के दिए निर्देश छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के गारे पालमा सेक्टर-II कोल ब्लॉक से जुड़ा मामला प्रतिपूरक वनीकरण (CA) के लिए खरीदी गई जमीन पर अनियमितता के आरोप शिकायत में करीब 214.869 हेक्टेयर निजी जमीन खरीद में गड़बड़ी का दावा आरोप है कि जमीन खरीद में करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए शिकायतकर्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने जमीन के दस्तावेज, मूल्यांकन और स्वामित्व सत्यापन पर उठाए सवाल EOI प्रक्रिया और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए हुए सौदों पर भी सवाल महाराष्ट्र सरकार ने MAHAGENCO से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
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