चंदेरी: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर चंदेरी से संघर्ष, धैर्य और अटूट विश्वास की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां के युवा विवेक यादव ने लगातार 20 प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने के बाद आखिरकार अपने सपने को सच कर दिखाया और IPS अधिकारी बन गए। उनकी कहानी बताती है कि सच्ची मेहनत के आगे किस्मत भी झुक जाती है।
मां की सिलाई से बना बेटे का भविष्य
विवेक की सफलता के पीछे उनकी मां का अथक संघर्ष छिपा है। आर्थिक तंगी के बीच उनकी मां ने वर्षों तक दिन-रात सिलाई और बुनाई करके बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। सिलाई मशीन पर चलने वाली हर सुई उनके बेटे के सपने को आगे बढ़ाने का जरिया बनी। थकान के बावजूद मां का हौसला कभी नहीं टूटा और वही विवेक की सबसे बड़ी ताकत बना।
20 असफलताएं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
विवेक का सफर बेहद कठिन रहा। उन्होंने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार 20 बार असफलता का सामना किया। कई लोगों ने उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए, लेकिन विवेक ने हर हार को सीख में बदला। आखिरकार UPSC की 20वीं कोशिश में उन्होंने सफलता हासिल की और सिविल सेवा में जगह बनाई।
किस्मत की आखिरी परीक्षा
UPSC पास करने के बाद भी किस्मत ने एक और चुनौती दी। फॉर्म भरते समय OBC प्रमाणपत्र में तकनीकी समस्या के कारण उन्हें अपनी श्रेणी का लाभ नहीं मिल पाया। अच्छी रैंक के बावजूद उनका सपना IPS बनने का पूरा नहीं हो सका और उन्हें IRMS (इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस) में जाना पड़ा।
आखिरकार मिला खाकी का सम्मान
ज्यादातर लोग इतनी बड़ी नौकरी मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते, लेकिन विवेक का सपना खाकी वर्दी पहनने का था। नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने फिर परीक्षा दी और आखिरकार IPS अधिकारी बनकर अपने सपने को साकार कर दिया।
विवेक यादव का संदेश
“मेरी सफलता मेरी मां के उन अनगिनत घंटों का परिणाम है जो उन्होंने सिलाई मशीन पर बिताए। 19 बार असफल होने के बाद मुझे समझ आया कि किस्मत आपके सपनों को देर से पूरा कर सकती है, लेकिन हार नहीं सकती अगर आप हार मानने से इनकार कर दें।”
विवेक यादव की यह कहानी मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है। यह साबित करती है कि अगर हिम्मत और मेहनत हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।