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पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी, झारखंड से नेता जिम्मेदार

Ranchi, Jharkhand:पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए ऑल इंडिया नेशनल कांग्रेस पूरी रणनीति के साथ चुनावी मैदान में है। बंगाल में होने वाले पहले फेज़ के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है जिसमें झारखंड के तीन नेताओं पर भी भरोसा जताया गया है। स्टार प्रचारक के रूप में मंत्री इरफान अंसारी मंत्री दीपिका पांडे और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद को जिम्मेवारी दी गई है। पश्चिम बंगाल में मिलने वाली जिम्मेदारी से नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताया है।मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि ये निर्णय न केवल उनकी वर्षों की मेहनत समर्पण और जन सेवा का सम्मान है बल्कि झारखंड की आवाज को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने का भी प्रतीक है। इधर ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे ने पार्टी आलाकमान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बंगाल के लिए उन्हें स्टार प्रचारक के तौर पर जिम्मेदारी मिलना एक गर्व की बात है और पूरी शिद्दत के साथ वह बंगाल चुनाव मे प्रचार करेंगे और पार्टी को मजबूती देने की हर कवायत को धरातल पर उतारेंगी इधर पूर्व विधायक और बंगाल की सह प्रभारी अंबा प्रसाद भी केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा बनाए गए स्टार प्रचारक को लेकर काफी उत्साहित है और उन्होंने पार्टी वाला कमान के द्वारा भरोसा जताए जाने पर आभार व्यक्त किया
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भोपाल में HPV टीकाकरण प्रदर्शन खराब, नोटिस जारी; जवाब नहीं मिला तो वेतन रोक

Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल HPV टीकाकरण में पिछड़े बड़े शहर स्वास्थ्य विभाग ने CMHO को जारी किया नोटिस पत्र में लिखा-संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो रोक दी जाएगी वेतन वृद्धि अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर स्वास्थ्य आयुक्त ने जारी किया नोटिस भोपाल सीएमएचओ को स्वास्थ्य आयुक्त ने जारी किया कारण बताओ नोटिस सीएमएचओ भोपाल को टीकाकरण में लापरवाही बरतने पर एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश भोपाल जिले के लिए 28,963 किशोरियों का लक्ष्य तय किया गया था एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी केवल 4,278 किशोरियों को ही टीका लगाया गया विभाग ने बेहद खराब प्रदर्शन मानते हुए गंभीर लापरवाही करार दिया
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वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी रेलवे स्टेशन के कुलियों ने एक मीटिंग बैटरी वन को लेकर बैठक हुई

Adil AhmadAdil AhmadFollow3m ago
Jhansi, Uttar Pradesh:वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के कुलियों ने एक मीटिंग एक बैठक की गई जिसमें बैटरी वन को लेकर के चर्चा की गई और भविष्य के लिए रणनीति बनाई गई दिन पर दिन कुलियों का रोजगार खत्म होता जा रहा है सरकार से कुली मांग कर रहे हैं कि उन्हें रेलवे में समायोजित किया जाए राष्ट्रीय कुली मोर्चा का संघर्ष सरकारी नौकरी जबतक नहीं मिलेगी जारी रहेगा संघर्ष हमारा इस मीटिंग का संचालन मनीष कुमार पांडे राष्ट्रीय कली मोर्चा अध्यक्ष ने किया इसमें मौजूद रहे राष्ट्रीय प्रवक्ता कलीम मकरानी, आनंद रैकवार जी, हाकिम सिंह ,सुनील गौतम विकास सिंह ठाकुर, रईस अहिरवार, लाल चंद अहिरवार ,प्रीतम कुमार वर्मा, रफीक खान, बृजेंद्र कुमार, रोहित कुमार, महेंद्र पाल ,बबली कुमार ,हेमंत कुमार ,अमर सिंह, प्रकाश पाल ,अमजद खान समस्त कुली साथी उपस्थित है।
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Azamgarh कोर्ट: हत्या मामले में 5 आरोपियों को आजीवन कारावास और जुर्माने

Azamgarh, Uttar Pradesh:हत्या के मुकदमे में कोर्ट ने 5 आरोपियों को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 37-37 हजार रूपये अर्थदंड की सजा। अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद पांच आरोपियों को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 37000 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादिनी किरन निवासी बागलखराव थाना सिधारी के पति पंकज को 21 मार्च 2024 को गांव का ही गुडडू भारती एक मामले में पंचायत के लिए बुला कर ले गया। लगभग ग्यारह बजे दिन में किरन को किसी ने बताया कि वे लोग पंकज को मार रहे हैं। जब किरन भाग कर वहां पहुंची तो देखा कि गुडडू व निखिल भारती पुत्रगण जंग बहादुर, वंश बहादुर व जंग बहादुर पुत्रगण अलगू, गुलाबी पत्नी जंग बहादुर तथा एक नाबालिग पंकज को लाठी डंडा तथा कुल्हाड़ी से मार रहे थे। किरन के शोर मचाने पर हमलावर भाग गये। घायल पंकज को अस्पताल में जाते समय ही मृत्यु हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। एक नाबालिग आरोपी की पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला Shasakt Adhikari ने कुल आठ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया, जहां दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी निखिल भारती, गुडडू भारती उर्फ कैलाश, वंश बहादुर, जंग बहादुर तथा गुलाबी देवी को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 37000-37000 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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5 किलोग्राम गैस सिलेंडर: राहत या महंगे विकल्प का संकट?

Jaipur, Rajasthan:Anchor:आपदा में मुनाफा… ये आरोप अक्सर कालाबाजारियों पर लगता है, लेकिन अब सवाल सरकारी तेल कंपनियों पर भी खड़े हो रहे हैं। देश में एलपीजी संकट गहराया हुआ है। घरेलू सिलेंडर के लिए इंतजार, कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत… और इसी बीच बाजार में एक नया गणित सामने आया है। 5 किलो वाला छोटा (छोटू) सिलेंडर, जिसे राहत के तौर पर पेश किया गया, वही अब सबसे महंगा सौदा बनता नजर आ रहा है। मजदूरों और प्रवासी परिवारों की मजबूरी को आसान बनाने के नाम पर नियम ढीले किए गए, लेकिन कीमत ऐसी कि हर किलो गैस जेब पर भारी पड़ रही है। सवाल ये है क्या ये राहत है या संकट के बीच कमाई का नया मॉडल। देशभर में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की किल्लत ने आम जिंदगी को प्रभावित किया है। बड़े शहरों में काम करने वाले मजदूर और प्रवासी कर्मचारी गैस की कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे बने कि कई लोगों ने शहर छोड़कर गांव लौटने का रास्ता चुन लिया। इसी बीच सरकारी तेल कंपनियों और सरकार ने एक ऐसा विकल्प आगे बढ़ाया है, जिसे पहली नजर में राहत कहा जा सकता है। 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर। कनेक्शन आसान, प्रक्रिया सरल और रिफिल पर कोई खास पाबंदी नहीं। सिर्फ एक आईडी कार्ड और सिलेंडर आपके हाथ में। लेकिन यही आसान समाधान” अब सवालों के घेरे में है। यह छोटा 5 किलो का सिलेंडर गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए सबसे महंगा विकल्प बनकर सामने आया है। लेकिन इसके लिए आपको पहले 1500 रुपये सिलेंडर के चुकाने होंगे। इसके बाद यदि सिलेंडर दोबारा रिफलिंग करवाना है तो 616 रुपये चुकाने होते है। इसमें एलपीजी करीब 123 रुपए प्रति किलो की दर से पड़ रही है। तुलना करें तो घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की एलपीजी लगभग 64.50 रुपए प्रति किलो औऱ कॉमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की एलपीजी करीब 111 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। यानी छोटा सिलेंडर, जो सबसे सुलभ बनाया गया है, वही सबसे महंगा भी है. बातचीत में मनोज गुप्ता, स्टेट कॉर्डिनेटर, तीनों तेल कंपनी गैस सिलेंडर: बाजार कीमत: प्रति किलोग्राम गैस की कीमत घरेलु (14.2KG): 916.50, 64.50 रुपये वाणिज्यिक (19KG): 2106, 111 रुपये फ्री ट्रेड सिलेंडर(5KG): 616, 123 रुपये एक तरफ घरेलू गैस की बुकिंग पर 25 दिन का अंतर लागू है और कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई भी 70 प्रतिशत तक सिमटी हुई है। दूसरी तरफ 5 किलो के सिलेंडर की उपलब्धता लगभग अनलिमिटेड कर दी गई है। पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों पर इसे कभी भी रिफिल कराया जा सकता है। यानी जहां बड़ी टंकी के लिए इंतजार है, वहीं छोटे सिलेंडर के लिए कोई रोक-टोक नहीं। यह मॉडल उन लोगों को टारगेट करता है, जिनके पास विकल्प कम हैं— मजदूर, प्रवासी और अस्थायी कर्मचारी। बहरहाल, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह कदम एक साथ दो तस्वीरें पेश करता है: एक तरफ कंपनियां राहत बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यह व्यवस्था उन्हीं जरूरतमंदों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। गैस संकट के इस दौर में छोटा सिलेंडर जरूरी बना है, लेकिन इसकी कीमत और उपलब्धता पर यह सवाल खड़ा करता है: क्या यह राहत है या मजबूरी में महंगा सौदा? दीपक गोयल जी मीडिया जयपुर
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हिमाचल के सेब किसानों पर ओलावृष्टि का भारी नुकसान, राहत पर उठे सवाल

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश की करीब पांच हज़ार करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी पर इस वक्त संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ऊंचाई वाले इलाकों में हुई तेज़ ओलावृष्टि ने सेब की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे बागवानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. ओलों की बेरहम चोट ने पेड़ों पर लगे सेबों को दागदार और क्षतिग्रस्त कर दिया है. कई जगहों पर फल समय से पहले गिर गए हैं, जबकि पेड़ों की पत्तियां और टहनियां भी टूटकर बिखर गई हैं. ऐसे में न सिर्फ मौजूदा सीजन की पैदावार प्रभावित हुई है, बल्कि आने वाले समय में भी उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार अपनी रोज़ी-रोटी के लिए बागवानी पर निर्भर हैं. ऐसे में इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी आर्थिक रीढ़ पर चोट की है. बागवानों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं. बागवान नेता हरीश चौहान के मुताबिक़, ओलावृष्टि सेब बागवानों को अत्याधिक नुकसान हुआ है. इससे पहले भी ओलावृष्टि की वजह से सेब की फ़सल ख़राब होती रही है. राज्य सरकार की ओर बागवानों को मुआवज़े के नाम पर कुछ हासिल नहीं होता. राजस्व विभाग और बाग़वानी विभाग के अधिकारी नुक़सान का जायज़ा लेने के लिए तो आते हैं,लेकिन मुआवज़ा कभी नहीं दिया जाता. उनका मानना है कि अधिकारी सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए औपचारिकता के लिए आंकलन करते हैं. इसके बाद ज़मीनी स्तर पर कोई लाभ नज़र नहीं आता. सेब बागवान मोहित शर्मा और प्रमोद शर्मा भी ओलावृष्टि से खासे परेशान हैं. बागवानों की एक बहुत बड़ी परेशानी एंटी हेल नेट पर मिलने वाली सब्सिडी का भुगतान न होना भी है. पहले तो राज्य सरकार ने सब्सिडी काम की और बाद में उसका भुगतान भी वक़्त पर नहीं किया. ऐसे में बागवान भविष्य की चुनौतियों को लेकर चिंतित नज़र आ रहे हैं. गौर हो कि ओलावृष्टि से सेब की फसल को कई स्तरों पर नुकसान होता है. पेड़ों पर लगे फलों पर सीधे ओलों की चोट लगने से सेब की बाहरी सतह पर दाग, कट और धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता गिर जाती है. ऐसे फल बाज़ार में कम कीमत पर बिकते हैं या कई बार पूरी तरह बेकार हो जाते हैं. इसके अलावा ओलों की मार से पेड़ों की पत्तियां और टहनियां भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. पत्तियों के झड़ने से बाद में फलों का आकार और मिठास कम हो सकती है. कई मामलों में छोटे फल समय से पहले ही गिर जाते हैं, जिससे उत्पादन में सीधा नुकसान होता है.
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नैनीताल में डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को बीमा व मुआवदे, विपणन सुविधाएं

Haldwani, Uttarakhand:नैनीताल जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डी.सी.एस.) के माध्यम से किसानों को सामयिक सलाह से बाजार उपलब्ध कराने में अब मदद मिलेगी और किसानों को फसल बीमा का लाभ आसानी से मिल सकेगा, आपदा की स्थिति में किसानों को फसलों के नुकसान के एवज में मुआवजे का भुगतान आसानी से होगा और साथ ही फसलों के विपणन की व्यवस्था आसानी से हो सकेगी, आयुक्त कुमाऊँ दीपक रावत ने हरिपुर रतनसिंह ग्राम में किसानों के खेत में पहुंचकर डिजिटल क्रॉप सर्वे किया। आयुक्त ने बताया कि यह मोबाइल आधारित प्रक्रिया है जिसमें जियो-फेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी के उपयोग से वास्तविक समय में खेतों में बोई गई फसलों का सटीक डेटा एकत्र किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सर्वे को बदलकर डिजिटल माध्यम से फसल का सही आंकलन करना है; डिजिटल क्रॉप सर्वे हो जाने से किसानों की जमीन के बारे में साइंटिफिक डाटा उपलब्ध हो जाएगा और जरूरतमंद किसानों को योजनाओं का उचित लाभ मिल पाएगा। वर्तमान में किस जिले में, किस फसल की, कितने क्षेत्र में खेती की गई है, इस विषय पर विभिन्न स्रोतों के अलग-अलग आंकड़े हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे योजना में फसलों के रियल टाइम में बोई गई फसलों का कवरेज एरिया का सही आकलन किया जा सकेगा, जिससे फसलों के मार्केटिंग और स्ट्रेटजी मेकिंग में सहूलियत होगी, डिजिटल क्रॉप सर्वे समय रहते करने से केन्द्र सरकार द्वारा प्रोत्साहन भी प्रदेश को मिले और कार्य समय रहते पूर्ण हो। उन्होंने बताया इसके लिए कुमायू मंडल में समीक्षा की जा रही है ताकि समय रहते डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूर्ण किया जा सके।
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