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Mohit KashyapMohit KashyapFollow21 Jan 2025, 06:12 pm

कानपुर देहातः जमीनी बंटवारे को लेकर युवक ने पिता और सौतेले भाई पर किया हमला, पिता की मौत

Akbarpur, Uttar Pradesh:

डेरापुर थाना क्षेत्र के मवई मुक्ता में गांव में पूर्व सैनिक और उसके बेटे पर जानलेवा हमला किया गया जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने पूर्व सैनिक सिद्धनाथ को मृत घोषित कर दिया। बेटे अमित को उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। मामले में पूर्व सैनिक की पत्नी ने सौतेले बेटे सहित तीन पर डंडे से हमला करके हत्या करने के आरोप में पुलिस से शिकायत की है। मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व सैनिक सिद्धनाथ की दो शादियां हुई थी। पहली शादी रूरा के इदरूख निवासी रानी देवी के साथ हुई थी जिनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दूसरी शादी औरैया जिले के सहायल निवासी नन्ही देवी के साथ हुई थी।

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ट्विशा शर्मा मामले में CBI की जांच, समर्थ सिंह की रिमांड CBI के हवाले

Noida, Uttar Pradesh:भोपाल, मध्य प्रदेश | ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में, उनके परिवार के वकील अंकुर पांडे कहते हैं, "उन्हें (ट्विशा के पति और आरोपी समर्थ सिंह को) संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत ने 7 दिन की रिमांड दी थी, जो 29 तारीख तक मान्य थी। हालाँकि, इस बीच, चूंकि राज्य सरकार ने CBI को मामले में दखल देने की सहमति पहले ही दे दी थी, इसलिए CBI ने एक नई FIR दर्ज कर ली है। नतीजतन, अब आगे की जाँच CBI ही करेगी। इसलिए, आज संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने एक औपचारिक कार्यवाही हुई। अब से आगे की जाँच CBI करेगी, और समर्थ की कस्टडी आधिकारिक तौर पर CBI को सौंप दी गई है। यदि 29 तारीख के बाद CBI को ज़रूरी लगेगा, तो वे संबंधित CBI अदालत से और रिमांड की मांग कर सकते हैं। अब पूरी कार्यवाही CBI अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगी और CBI ही जाँच एजेंसी के तौर पर काम करेगी... वे आगे कहते हैं, "हाई कोर्ट में ज़मानत के मामलों के संबंध में, आज ज़मानत से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। पहली याचिका इस मामले की एक आरोपी गिरिबाला सिंह से जुड़ी है, जिन्हें निचली अदालत ने सिर्फ़ दो दिनों के भीतर ही अग्रिम ज़मानत का लाभ दे दिया था। आज, राज्य अभियोजन पक्ष और हम दोनों ने ही उस अग्रिम ज़मानत के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाएँ दायर की हैं। हमने ये कानूनी कार्यवाही इस आधार पर शुरू की है कि कई ऐसे ज़रूरी तथ्य थे जिन्हें निचली सत्र अदालत ने जान-बूझकर नज़रअंदाज़ कर दिया था..."
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कटमानी और वेतन कटौती के विरोध में फलता में हंगामा, नासिर শেখ हिरासत में

Jalabaria, West Bengal:কাটমানি, টাকা কাটা ও প্রাণনাশের হুমকির অভিযোগে বিক্ষোভ; শ্রমিকদের হাতে আটক জাহাঙ্গীর খানের সাগরেদ নাসির শেখ কাটমানি নেওয়া, মজুরি থেকে টাকা কেটে নেওয়া ও প্রতিবাদ করলে প্রাণনাশের হুমকির অভিযোগে উত্তাল হয়ে উঠল ফলতার এসিজেডের প্যাটন কারখানা এলাকা। জাহাঙ্গীর খানের সাগরেদ বলে পরিচিত নাসির শেখের বিরুদ্ধে একাধিক অভিযোগ তুলে বিক্ষোভে নামলেন কারখানার শ্রমিকরা। পরিস্থিতি উত্তপ্ত হয়ে উঠলে শ্রমিকদের হাতে আটকে পড়েন নাসির শেখ। পরে ঘটনাস্থলে পৌঁছে পুলিশ তাকে নিজেদের হেফাজতে নেয়। অভিযোগ, দীর্ঘদিন ধরে কারখানার শ্রমিকদের কাছ থেকে নানা অজুহাতে কাটমানি নেওয়া হত। পান থেকে চুন খসলেই মজুরি থেকে টাকা কেটে নেওয়া হত বলেও দাবি শ্রমিকদের। এমনকি গোটা মাস কাজ করার পরও ঠিকমতো পারিশ্রমিক মিলত না। এই নিয়ে প্রতিবাদ জানাতে গেলে শ্রমিকদের প্রাণনাশের হুমকি দেওয়া হত বলেও অভিযোগ। বিক্ষোভকারী শ্রমিকদের দাবি, নাসির শেখ একা নন, এই ঘটনার সঙ্গে জড়িত বাকিদেরও চিহ্নিত করে দ্রুত গ্রেফতার করতে হবে। ঘটনার জেরে ফলতার দু’নম্বর সেক্টর এলাকায় ব্যাপক উত্তেজনা ছড়িয়ে পড়ে। খবর পেয়ে পুলিশ ঘটনাস্থলে পৌঁছালে ক্ষুব্ধ শ্রমিকরা নাসির শেখকে পুলিশের হাতে তুলে দেন। ঘটনার তদন্ত শুরু করেছে পুলিশ。 বাইট: বিক্ষোভকারী শ্রমিক দেবাংশু পাণ্ডা, বিধায়ক, ফলতা
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जालौन में दलित महिला ने दबंगों और पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप, न्याय की गुहार

Jalaun, Uttar Pradesh:जालौन के कालपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम निवाड़ी की एक दलित महिला ने गांव के दबंगों तथा पुलिस चौकी इंचार्ज पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का आरोप है कि उसके घर में घुसकर मारपीट की गई, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और बाद में पुलिस ने भी आरोपियों का साथ देते हुए समझौते का दबाव बनाया। कालपी कोतवाली क्षेत्र के निवाड़ी गांव की रहने वाली रूबी पत्नी उमाशंकर ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 14 मई 2026 को सुबह लगभग 11 बजे वह अपने घर पर गेहूं धो रही थी। उसी दौरान गांव के कुछ लोग अचानक उसके घर में घुस आए और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। महिला का आरोप है कि आरोपियों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया, जिससे उसे और उसके पुत्र अमित को गंभीर चोटें आईं। पीड़िता ने बताया कि घटना के समय उसके नाबालिग बच्चे भी घर में मौजूद थे। मारपीट के दौरान उसने डायल 112 पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बीच-बचाव कर परिवार को बचाया। पुलिस कुछ आरोपियों को अपने साथ ले गई तथा महिला और उसके पुत्र को चौकी बुलाया गया। महिला ने आरोप लगाया कि अगले दिन जब वह अपने पुत्र के साथ ज्ञान भारती चौकी पहुंची, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायत में कहा गया है कि चौकी इंचार्ज विपिन यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया तथा दबाव बनाकर आरोपियों से समझौता करा दिया। इतना ही नहीं, महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके पुत्र का मोबाइल फोन भी पुलिस ने छीन लिया। शिकाय़त में महिला ने आशंका जताई है कि आरोपी और पुलिस की मिलीभगत से उसके परिवार के साथ कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। उसने पुलिस अधीक्षक से आरोपियों और संबंधित चौकी इंचार्ज के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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ट्विशा शर्मा मौत मामला: अब सुनवाई CBI कोर्ट में होगी

Noida, Uttar Pradesh:ट्विशा शर्मा मौत मामला | भोपाल, MP: सुनवाई के बाद पुलिस द्वारा ट्विशा के पति और आरोपी समर्थ सिंह को भोपाल कोर्ट से बाहर लाया जा रहा है। ट्विशा शर्मा मौत मामला | ट्विशा के परिवार के वकील, एडवोकेट अंकुर पांडे कहते हैं - आज की कार्यवाही महज़ एक औपचारिकता थी। CBI ने दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। उनकी पुलिस रिमांड 29 मई तक थी और इसी बीच FIR दर्ज की गई और इसकी सूचना दी गई। संबंधित कोर्ट CBI मामलों की सुनवाई करने के लिए अधिकृत नहीं है। इसलिए, आज एक औपचारिक कार्यवाही की गई। समर्थ की कस्टडी CBI को सौंप दी गई है। तो, अब इस मामले की सुनवाई CBI कोर्ट में होगी...
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SC-ECI फैसले पर मसूद की मांग: वोटर लिस्ट से गलत नाम हटाने चाहिए

Noida, Uttar Pradesh:सहारनपुर | सुप्रीम कोर्ट द्वारा ECI के उस फ़ैसले को सही ठहराए जाने पर, जिसमें बिहार में शुरू हुई वोटर लिस्ट की SIR (विशेष पहचान समीक्षा) प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद कहते हैं, "...SIR पहली बार नहीं हो रही है। यहाँ जो खास तरह का दुरुपयोग हो रहा है, वह यह है कि आप वोटर लिस्ट से नाम हटा देते हैं और फिर उन्हें अपील के तहत पेंडिंग छोड़ देते हैं। बाद में, जब अपील की सुनवाई होती है, तो वह व्यक्ति जीत जाता है और उसके वोट देने के अधिकार बहाल हो जाते हैं। अगर चुनाव पहले ही उनकी भागीदारी के बिना हो चुका है, तो क्या वह चुनाव वैध माना जाएगा? अब जब उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम लिस्टें प्रकाशित हो चुकी हैं, तो अब और वोट नहीं काटे जाने चाहिए, है ना? इतनी बड़ी कवायद से गुज़रने के बाद, अब आप किस आधार पर वोट काटेंगे? उन्होंने पहले ही ऐसे फ़ॉर्म तैयार कर लिए हैं जिनमें खास जानकारी होती है। अगर कोई फ़र्ज़ी फ़ॉर्म जमा करता है, तो आप उसे वोट काटने का आधार बनाएंगे, और प्रभावित लोगों से कहेंगे कि वे जाकर अपील करें, जबकि चुनाव तो चलता ही रहेगा... अगर आप सचमुच निष्पक्ष चुनाव कराना चाहते हैं, तो एक खास प्रावधान होना चाहिए: जो भी व्यक्ति फ़ॉर्म जमा करे, वह हलफ़नामे (affidavit) के साथ करे। अगर बाद में वह हलफ़नामा झूठा पाया जाता है, तो उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिए। देश में इस समय जो अफ़रा-तफ़री और गड़बड़ चल रही है, उसका अंत होना ही चाहिए। हम पूरी तरह से इस सिद्धांत के पक्ष में हैं कि, सौ फ़ीसदी, किसी भी विदेशी या घुसपैठिए का नाम वोटर लिस्ट में नहीं होना चाहिए। लेकिन, जब आप यह दावा करते हैं कि घुसपैठिए यहाँ की जनसांख्यिकीय बनावट (demographic profile) को बदलने के मक़सद से मौजूद हैं, तो हमें बताइए, कि फिर आप बारह सालों के दौरान उन्हें क्यों नहीं ढूँढ़ पाए?...
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मधुबनी के बेलौंजा स्कूल में MDM में छिपकिली मिलने के बाद हंगामा

Madhubani, Bihar:मधुबनी के बिस्फी प्रखण्ड के बेलौंजा गांव स्थित मिडिल स्कूल में MDM में कल छिपकिली मिलने के बाद आज लोगों ने स्कूल पहुँचकर जमकर बवाल काटा। लोगों ने हंगामा किया और शिक्षकों कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामा की सूचना मिलने पर प्रशासन पुलिस पहुंची और मामले में शिक्षक, छात्र और अभिभावको से पूछताछ किये। वहीं एमडीएम में छिपकिली मामले की जांच के लिए शिक्षा अधिकारी भी स्कूल पहुंचे। हालांकि मामले में अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज किया। बीीडीओ ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। अधिकारियों ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। बहरहाल एमडीएम में छिपकिली मिलने से छात्र और अभिभावकों में दहशत है。
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सुप्रीम कोर्ट ने ECI के SIR फैसले को सही ठहराया; यूपी में मतदाता रीसेट

Noida, Uttar Pradesh:लखनऊ, उत्तर प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट द्वारा ECI के उस फैसले को सही ठहराए जाने पर, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट का SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) शुरू किया गया था, MSME मंत्री राकेश सचान ने कहा, “स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) एक समय-समय पर होने वाली प्रक्रिया है। ऐसा ही एक रिवीज़न 2003 में भी किया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान, मौजूदा वोटर लिस्ट को पूरी तरह से रीसेट कर दिया जाता है, और सभी योग्य वोटरों को एक नया फ़ॉर्म भरकर अपनी पूरी निजी जानकारी फिर से जमा करनी होती है; इससे वोटर लिस्ट के सत्यापन का काम आसान हो जाता है। यह चुनाव आयोग का एक नियमित और जारी रहने वाला प्रक्रियागत कार्य है। इसी स्थापित प्रक्रिया के तहत, चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी की है। कुछ लोगों ने इसी प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। हालाँकि, क्योंकि यह एक संवैधानिक आदेश है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सका। कुछ पार्टियाँ तो बस गुमराह करने वाला दुष्प्रचार कर रही थीं—यह दावा करते हुए कि ‘उनके’ वोट हटाए जा रहे हैं, जबकि दूसरों के वोट जोड़े जा रहे हैं…
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नवादा के कौआकोल पीएचसी में छत का गिरना: दूसरा दिन, स्वास्थ्यकर्मी दहशत में

Nawada, Bihar:नवादा जिले के कौआकोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में लगातार दूसरे दिन भी छत का एक हिस्सा गिरने की घटना सामने आई है। बुधवार को पीएचसी के कार्यालय कक्ष की छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों में दहशत फैल गई। यह घटना ऐसे समय हुई है जब मंगलवार को भी छत गिरने से एक एएनएम गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. बुधवार को हुई घटना में गनीमत रही कि छत गिरने के समय कमरे में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद कमरे में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों ने तुरंत जगह खाली कर दी。 इससे पहले, मंगलवार को भी पीएचसी भवन की छत का एक हिस्सा टूटकर गिरा था। इस घटना में एएनएम सुनीता कुमारी बुरी तरह घायल हो गई थीं, जिन्हें काफी चोटें आई थीं। इस घटना के बाद से ही स्वास्थ्यकर्मियों में भय का माहौल और बढ़ गया है。 स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, पीएचसी का भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। कई कमरों की छतों में दरारें पड़ गई हैं और प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। कर्मचारियों ने बताया कि भवन की मरम्मत और नए भवन निर्माण के लिए विभागीय अधिकारियों को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है。 स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पीएचसी क्षेत्र के हजारों लोगों के इलाज का मुख्य केंद्र है। भवन की बदहाल स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जल्द से जल्द भवन की मरम्मत कराने और मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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भारत-नेपाल बॉर्डर के पंपों पर छापेमारी, तेल की जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम

Maharajganj, Uttar Pradesh:भारत नेपाल बॉर्डर के सीमावर्ती पेट्रोल पम्पों पर जिला प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है ताकि तेल की अवैध जमाखोरी, कालाबाजारी और नेपाल तस्करी रोकथाम हो। नेपाल में डीजल और पेट्रोल भारतीय सीमावर्ती पेट्रोल पंपों से 35-40 रुपए अधिक रहने के कारण तस्करी बढ़ रही है। महाराजगंज के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खपत अधिक होने के कारण जमाखोरी की शिकायत के बाद डीएम ने अभियान शुरू किया है। सीमावर्ती तहसीलों के SDMs के नेतृत्व में जांच टीमों को बनाकर पेट्रोल पंपों पर छापेमारी कराई जा रही है। गैलों में डीजल पेट्रोल लेकर जाने वालों से खतौनी देखकर तेल वितरण किया जा रहा है ताकि नेपाल न पहुंचे। अगर दोबारा संदिग्ध गतिविधि मिली तो सख्त कार्रवाई होगी। दरअसल आधार कार्ड और फार्मर रजिस्ट्री से जुड़े कागजात चेक कर शासन के निर्देशों के अनुसार तेल बेचा जा रहा है। बॉर्डर एरिया में छापेमारी की जा रही है और सत्यापन कर यह देखा जा रहा है कि पहुंचे लोग जरूरतमंद किसान हैं या नहीं। खतौनी दिखाने वालों को नियम के अनुसार तेल दिया जा रहा है, संदिग्ध पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई की जा रही है और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत करवाइयां संभव है।
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चुनाव आयोग: मतदाता सूची सुधार के लिए व्यवहारिक कदम, नागरिकता मुद्दे पर सीमित अधिकार

Noida, Uttar Pradesh:SIR की प्रक्रिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP Act के सेक्शन 21 के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र में आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है। 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए, वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं। इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है। जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे हैं, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया गया है। 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है। उसे जांचकर बदला जा सकता है। चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है। 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हें नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया है। 5 आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/जाँचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था। इसलिए उसे भी दस्तावेजों में शामिल किया गया है। दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6 चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है। नागरिकता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती है 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए हैं, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिरिटी को भेजेगा। ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगी। जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। * अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है, तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।
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