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Jaunpur222002

जौनपुर में ग्रामीणों ने बच्चा चोर को पुलिस के हवाले किया, एक की गई जान

Sept 10, 2024 09:44:52
Jaunpur, Uttar Pradesh

जौनपुर में लाइन बाज़ार थाना के शिवापार बाई पास के पास बच्चा चोर समझकर एक युवक को ग्रामीणों ने दौड़ाया तो वाराणसी-लखनऊ हाईवे पर नेवादा गांव के पास बने ओवरब्रिज पर चढ़ गया और दूसरे को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। फिर पुलिस और फायरब्रिगेड भी मौके पर पहुंचकर उसे उतारने का प्रयास कर रही थी लेकिन उसने आखिकार ब्रिज से कूद कर जान दे दी। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। 

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KJKamran Jalili
Jan 29, 2026 04:46:57
Ranchi, Jharkhand:निकाय चुनाव की बढ़ी सरगर्मी,चुनावी प्रक्रिया शुरू आज से दाखिल होगा नामांकन 29 जनवरी 2026 से 04 फरवरी 2026 तक नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने की अवधि सुबह 11ः00 बजे से दोपहर तीन बजे तक दाखिल किये जा सकेंगे नाम निर्देशन पत्र 05 फरवरी को नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा, नाम वापसी की तिथि 06 फरवरी 2026 07 फरवरी 2026 को होगा प्रतीक आवंटन 23 फरवरी 2026 को मतदान, मतगणना की तिथि 27 फरवरी 2026 बीएनएसएस की धारा-163 के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू* नगरपालिका (आम) निर्वाचन की प्रक्रिया की समाप्ति तक रांची सदर अनुमंडल अंतर्गत रांची नगर निगम (वर्ग-क)-53 क्षेत्र में निषेधाज्ञा जारी अनुमण्डल पदाधिकारी सदर रांची द्वारा जारी की गयी निषेधाज्ञा बाइट....एसडीओ रांची
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TCTanya chugh
Jan 29, 2026 04:46:48
New Delhi, Delhi:*Coaching federation Of India letter to FM regarding GST ease to Coaching Centers in the upcoming budget.* Ease the GST on Coaching Services, urges Coaching Federation of India in a letter to the FM on the eve of the Union Budget. Currently, the GST burden on coaching services directly increases education cost for parents, penalising affordability in supplementary learning — especially for the middle class and aspirational families. Coaching Federation of India (CFI) proposes reducing GST on coaching services to 5 per cent or NIL and raising the GST exemption threshold from ₹20 lakh to ₹1 crore for small institutes to protect MSMEs and improve compliance. Says CFI President Saurabh Saxena : “GST relief is not a concession to coaching centres — it is relief to parents and students.” As the Government prepares to present the Union Budget 2026, the Coaching Federation of India (CFI) has strongly advocated using this opportunity to reform certain elements of India’s GST framework related to coaching and supplementary education services. In a letter to Union Finance Minister Smt. Nirmala Sitharaman, CFI has urged the Government to reduce GST on coaching services and to increase the GST exemption threshold for coaching institutes from ₹20 lakh to ₹1 crore, in order to protect small and mid-sized institutes, reduce compliance burden, and reduce the education cost for parents. The GST burden is borne directly by parents The Federation’s representation notes that coaching is no longer an optional luxury. For millions of students preparing for Class X/XII board exams and competitive examinations such as JEE, NEET, CUET, CA/CS, CLAT, SSC, Banking and UPSC, coaching has become a practical support mechanism. However, taxing coaching services at prevailing GST rates increases the final fee paid by parents and families. A policy contradiction: Education is promoted, but supplementary education is taxed CFI’s letter highlights a contradiction where one part of the ecosystem is encouraged via policy — education, skilling, employability — while supplementary learning is taxed, making learning costly. Says Vice President Media, Keshav Agarwal Coaching Federation of India: “This is not merely a taxation issue. GST on coaching ultimately becomes a tax on aspiration. Any GST relief on coaching services is actually a relief to parents and students.” CFI requests reduction of GST on coaching services The letter notes that coaching institutions have limited input tax credit capability, because their major expenses are salaries and academic delivery costs. This makes GST a direct cost addition to parents, not a neutral tax passed through a value-add chain. CFI has recommended: GST NIL / 5% on coaching services, particularly student academic support services. Raise exemption limit from ₹20 lakh to ₹1 crore The Federation further urges that the current ₹20 lakh threshold has remained unchanged for over 20 years in practical effect, while inflation and operational costs have increased several times. As a result: small institutes become taxable too early, compliance costs rise sharply, students face higher fees. A level playing field is disturbed in favour of large corporate coaching chains The Federation argues that increasing the threshold to ₹1 crore will: protect MSMEs, support affordable learning, improve formalisation, reduce tax avoidance pressures and strengthen GST compliance in long run “Current structure pushes institutions into informality and a balanced GST policy can ensure affordability, equity and compliance together — while strengthening India’s human capital.” Vice president PR Ashish Gambhir CFI’s representation states that the current policy unintentionally encourages many small coaching centres to remain informal or unregistered because GST increases fees and reduces competitiveness. Suggested policy options The Federation has suggested three workable options: GST NILor Maximum 5% on academic coaching and competitive exam preparation Targeted relief for student-level education, while keeping higher GST for premium/optional ed-tech luxury services (if required) CFI requests stakeholder consultation CFI has also requested the Finance Ministry / GST Council to convene a consultation with coaching MSMEs and student-focused education service providers. Says CFI: “GST on coaching is not a tax on institutes — it is a tax on parents’ aspirations.” President Saurabh Saxena CFI “The ₹20 lakh GST exemption limit is outdated. Inflation has changed everything. It must be raised to ₹1 crore for education MSMEs.” Vice President Media Keshav Agarwal
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DMDILEEP MISHRA
Jan 29, 2026 04:46:14
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HSHEMANT SANCHETI
Jan 29, 2026 04:45:49
Narayanpur, Chhattisgarh:नारायणपुर जिले में जिला प्रशासन का एक हैरान कर देने वाला और चर्चा में आने लायक कारनामा सामने आया है। आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फायर ब्रिगेड की गाड़ी को इस बार आग नहीं, बल्कि घोटुल मे लगी सड़क की धूल बुझाने में लगा दिया गया। वजह? — प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रस्तावित दौरा। दरअसल, 30 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गढ़बेगाल मे बने घोटुल का निरीक्षण करेंगे। इसी दौरान वे पद्मश्री सम्मानित पंडीराम मंडावी, पद्मश्री वैद्य हेमचंद मांझी और गांव के वरिष्ठ ग्रामीणों के साथ भोजन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन अचानक हरकत में आ गया। जिस सड़क की धूल से महीनों भर धूल खा रहे घोटुल पर पहले किसी का ध्यान नहीं गया — वही धूल अब फायर ब्रिगेड से पानी डालकर हटाई जा रही है। VIP दौरा आते ही जागा प्रशासन। घोटुल के निर्माण के बाद से एनएच-130D सड़क की धूल ने घोटुल के खंभों पर बनी आदिवासी कला की खूबसूरती को फीका कर दिया था। महीनों तक प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय हुआ, आनन-फानन में सफाई, पोताई और सजावट शुरू कर दी गई। इसी हड़बड़ी में फायर ब्रिगेड वाहन को घोटुल मे लगी सड़क कि धूल धोने में झोंक दिया गया, जिससे प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो गए। धरोहर है घोटुल, दिखावा बना सफाई। यह वही घोटुल है, जहां पद्मश्री पंडीराम मंडावी ने अपनी कला के जरिए आदिवासी जीवन की आत्मा को उकेरा है। घोटुल के स्वागत द्वार से लेकर खंभों तक, आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, खेती, आदिवासी द्वारा मनोरंजन के लिए किये जा रहे शिकार, पहाड़ और जंगल सब कुछ उनकी कला में जीवंत दिखाई देता है। इस घोटुल को देखने देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग आते हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि इसकी देखरेख तब तक जरूरी नहीं समझी गई, जब तक वीआईपी का दौरा तय नहीं हुआ।
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VVvirendra vasinde
Jan 29, 2026 04:45:29
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CSChandrashekhar Solanki
Jan 29, 2026 04:45:21
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DIDamodar Inaniya
Jan 29, 2026 04:34:03
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NSNAVEEN SHARMA
Jan 29, 2026 04:33:47
Bhiwani, Haryana:भिवानी -विश्वविद्यालयों के एचकेआरएनएल कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा -नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ ने प्रदर्शन कर सेवा सुरक्षा अधिनियम 2024 में शामिल करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन -विश्वविद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे कांट्रेक्ट कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के लाभ से वंचित रखना भेदभावपूर्ण : इकाई प्रधान प्रदीप -एचकेआरएनएल कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक प्रताडऩा के बीच काम करना अब संभव : प्रधान प्रदीप कुमार भिवानी।हरियाणा राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ संबंधित भारतीय मजूदर संघ ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है। इसी कड़ी में बुधवार को नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ ने चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलगुरू के माध्यम से कुलाधिपति (राज्यपाल) के नाम मांगपत्र सौंपकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के माध्यम से कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों को हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की है। प्रदर्शन का नेतृत्व नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ के सीबीएलयू इकाई प्रधान प्रदीप कुमार ने किया। मांगपत्र के माध्यम से संघ ने मांग की कि 5 साल से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों के साथ-साथ 0 से 5 साल तक का अनुभव रखने वाले सभी एचकेआरएनएल कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा अधिनियम-2024 के अंतर्गत लाया जाए, कई कर्मचारियों के अनुभव विवरण गलत दर्ज हैं ऐसे में ज्वाइनिंग तिथि के अनुसार रिकॉर्ड सही किया जाए ताकि उन्हें अनुभव के आधार पर उचित वेतन लाभ मिल सके, जिन कर्मचारियों का वेतन 21 हजार 100 से अधिक होने के कारण ईएसआई कार्ड कट गया है उन्हें चिरायु कार्ड जारी किए जाएं और विश्वविद्यालयों में नि:शुल्क मेडिकल सुविधा दी जाए, पोर्टल से हटाए गए कर्मचारियों के नाम वापस जोड़े जाएं और उनके पिछले 3 महीने का बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए आदि मुख्य मांगें है। इस मौके पर सीबीएलयू इकाई प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों के लगभग एक लाख 20 हजार कर्मचारियों को 58 वर्ष तक की नौकरी की गारंटी देकर खूब ढि़ंढृोरा पीटा था, लेकिन विश्वविद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा गया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। पिछले कई वर्षों से हम पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जब सरकार एक लाख 20 हजार अन्य कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा दे सकती है, तो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके कई साथियों का नाम पोर्टल से गायब है और कई महीनों से वेतन रुका हुआ है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अगर सरकार ने जल्द ही डब्ल्यूडब्ल्यूड डॉट सिक्योरिएंपलोई डॉट सीएसहरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के पंजीकरण के निर्देश जारी नहीं किए, तो हमें अपने हक के लिए आंदोलन को और तेज करना होगा। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे विश्वविद्यालय के विकास में समर्पित हैं, लेकिन मानसिक और आर्थिक प्रताडऩा के बीच काम करना अब संभव नहीं है। बाइट्स:नीतू, प्रियंका ,संदीप व अन्य
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SDShankar Dan
Jan 29, 2026 04:33:30
Jaisalmer, Rajasthan:जिला जैसलमेर विधानसभा -पोकरण लोकेशन - लाठी होली का त्योहार नजदीक आ रहा है लेकिन राजस्थान में कर्मचारियों को अपने ही मेहनत के पैसे के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है. यह मामला लाठी क्षेत्र के भादरिया गांव में सामने आया है, जहां कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास में कार्यरत प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों ने छात्रावास परिसर में खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया. पिछले 9 महीने से कर्मचारियों को उनके मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक समस्या से जूझ रहें कर्मचारियों ने भुगतान करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। -मानदेय न आने से बेबस हुए प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारी कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास में प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारियों ने छात्रावास परिसर में एकत्रित हुए. इस दौरान कर्मचारियों ने मानदेय की मांग को लेकर नारेबाजी के साथ जमकर प्रदर्शन किया. महिला कर्मचारी उर्मिला कंवर ने कहां कि छात्रावास में एक मुख्य रसोइयां, चार सहायक रसोइयां, एक कंप्यूटर आपरेटर, एक सहायक कर्मचारी तथा दो चोकीदार डिंगमेन पावर एंड सिक्योरिटी सर्विस लिमिटेड सिरसा हरियाणा के अधिन कार्य कर रहे है, उनके अप्रैल 2025 से दिसंबर 2026 तक कि भुगतान नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है. इसके साथ ही उनका घर-परिवार चलाना भी मुश्किल हो रहा है, वहीं इसी महीने में होली का त्योहार भी है। शीघ्र ही पैसा देने की मांग चोकीदार भीखसिंह ने कहां कि उनका मानदेय भी बढ़ाया गया है, लेकिन बढ़ा मानदेय मिलना तो दूर भुगतान नहीं होने से कई परेशानी आ रही है. कर्मचारियों ने कहा पैसा नहीं मिला तो होली कैसे मनाएंगे. ऐसे में उन्होंने समय पर भुगतान करने की मांग कि है。
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SDShankar Dan
Jan 29, 2026 04:33:11
Jaisalmer, Rajasthan:रामगढ़ (जैसलमेर) रामगढ़ कस्बे के बस स्टैंड के पास पानी की मुख्य लाइन एक बार फिर फुट गई। बीती रात लाइन फटने से पानी तेज फव्वारा चल पड़ा। तीन माह पूर्व सड़क निर्माण कार्य के दौरान यह लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन मरम्मत में बरती गई लापरवाही अब सामने आ गई। जैसे ही पानी दबाव में आया, लाइन फूट गई और बड़ी मात्रा में पेयजल व्यर्थ बहता रहा। लाइन से बहा पानी बाजार में फैल गया जिससे दुकानदारों के साथ आम जन को परेशानी उठानी पड़ी। एक ओर कस्बे में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है और कई मोहल्लों में पूरे माह में केवल एक बार पानी छोड़ा जाता है, वहीं दूसरी ओर बहुमूल्य पानी यूँ ही बहकर नष्ट हो रहा है। यहां पर लाइन के लीकेज को ठीक करने में जलदाय विभाग द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। जिसके कारण यहाँ बार बार लीकेज हो रहा है और पानी व्यर्थ बह रहा है।
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