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Jalaun285123

जालौन में आकाशीय बिजली से गई महिला की जान

Jul 13, 2024 03:11:43
Jalaun, Uttar Pradesh

जालौन के कालपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नया पुरवा में खेत में भैंसे चरा रही 56 वर्षीय महिला की आकाशीय बिजली गिरने से मौके पर ही जान चली गई। साथ ही सूचना मिलते ही तहसीलदार और लेखपाल घटनास्थल पर पहुंचे। वहीं अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।

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MPMAHESH PARIHAR1
Mar 24, 2026 07:20:37
Jhalawar, Rajasthan:झालावाड़ झालावाड़ पुलिस ने अकलेरा थाना क्षेत्र के चंदीपुर में करीब 3 माह पूर्व हुए सनसनीखेज रेणु हत्याकांड का खुलासा किया है। परिजनों द्वारा इसे सीढ़ियों से गिरने की घटना बताया गया था। लेकिन पुलिस के क्राइम सीन क्रिएशन, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विश्लेषण में यह एक प्लांड मर्डर का मामला निकला। ऐसे में पुलिस ने हत्यारे पति देवीकृपाल उर्फ डेविड को गिरफ्तार कर लिया है। ओलिस द्वारा आरोपी पर 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। झालावाड़ एसपी अमित बुडानिया ने प्रेसवार्ता में खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस को गोपनीय जानकारी मिली थी कि ग्राम चन्दीपुर में 27 वर्षीय रेणु उर्फ निमंता की उसके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। मौके पर मृतका के शरीर पर मारपीट के गंभीर निशान मिले थे। परिजनों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए सीढ़ियों से गिरने का बयान दिया था। घटनास्थल पर मृतका के शरीर पर कई चोटों के निशान, कमरे में बिखरा सामान, चूड़ियों के टुकड़े और खून के धब्बे मिले थे। इसके विपरीत, सीढ़ियों से गिरने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। ऐसे में पुलिस को घटना संदिग्ध लगी। पुलिस ने 09 नवंबर 2025 को हेड कांस्टेबल सतवीर सिंह की रिपोर्ट पर थाना अकलेरा में हत्या और साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज किया। अनुसंधान के दौरान झालावाड़ पुलिस ने इस जटिल प्रकरण में क्राइम सीन रिक्रिएशन करवाया और फोरेंसिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर हत्याकांड का राज खोल दिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी देवीकृपाल उर्फ डेविड को कोटा से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर गाड़ी से टक्कर मारकर जानलेवा हमला भी किया। जिस पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोटा के आर.के.पुरम थाने में जानलेवा हमला और राजकार्य में बाधा का एक और मामला दर्ज करवाया है। पुलिस आरोपी पति को रिमांड पर लेकर घटना के बारे में गहन अनुसंधान करेगी। इसमें घटना में शामिल अन्य संदिग्धों के बारे में भी जांच की जाएगी।
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RJRahul Joshi
Mar 24, 2026 07:20:24
Kota, Rajasthan:कोटा के नांता के नयाखेड़ा इलाके में मारपीट, तोड़फोड़ उत्पात मचाने की लाइव तस्वीर सामने आई है। दो दिन पहले हुई इस वारदात का अब सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस मामले में करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। दो दिन पहले नयाखेड़ा इलाके में ढाबे पर 5 बाइक सवार बदमाशों ने तोड़फोड़ कर जमकर उत्पात मचाया और लोगों के साथ मारपीट कर दी। इस दौरान लोगों ने भी बदमाशों की पिटाई कर दी। दोनों पक्षों से करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं। घायल विष्णु, ब्रजमोहन व निर्मल जबकि दूसरे पक्ष के ओमप्रकाश व एक अन्य को चोट आई है। अस्पताल पहुंचने पर भी दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए थे। घायल विष्णु ने लूटपाट के इरादे से दुकान में तोड़फोड़ व मारपीट का आरोप लगाया था। फिलहाल नांता थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
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KKKRISNDEV KUMAR
Mar 24, 2026 07:18:24
Noida, Uttar Pradesh:धर्म परिवर्तन कर ईसाई या मुस्लिम बने तो SC का दर्जा नहीं, SC/ST एक्ट के तहत केस नहीं कर सकते- सुप्रीम कोर्ट. सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में फिर से साफ किया है कि अगर कोई दलित व्यक्ति धर्मपरिवर्तन कर ईसाई बनता है तो धर्मांतरण के साथ ही अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है. इसके बाद वह SC/ST एक्ट (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम) के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकता. कोर्ट ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में दी गई व्यवस्था के मुताबिक केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के दलित समुदायों को अनुसूचित जाति का प्राप्त है. अगर कोई इनके अलावा कोई दूसरा धर्म (ईसाई या मुस्लिम धर्म) अपना लेता है तो उनका यह दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है. कोर्ट के सामने मामला क्या था. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले और हिंदू से ईसाई बने एक शख्स चिंतादा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है. 10 साल से ईसाई धर्म की प्रैक्टिश कर रहे चिंतादा ने कुछ लोगों पर हमला करने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगाते हुए SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. इसके खिलाफ आरोपियों ने आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने दलील दी कि चिंतादा ईसाई धर्म अपना चुके है और 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहे हैं। लिहाजा संविधान में दी गई व्यवस्था मुताबिक वो अनुसूचित जाति के नहीं माने जा सकते। हाई कोर्ट ने आरोपियों की दलील से सहमति जताते हुए इस केस को रद्द कर दिया था। इस आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यह व्यवस्था दी है. आरक्षण का मामला अलग से अभी भी पेंडिंग. वैसे सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अलग से भी पेंडिंग है कि क्या धर्म परिवर्तन कर ईसाई और मुस्लिम बने सभी दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा और उसके मुताबिक मिलने वाले आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है या नहीं. अभी सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा और उसके मुताबिक आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने वाले दलितों को ये दर्जा हासिल नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में धर्म परिवर्तन कर इस्लाम और ईसाइ धर्म अपनाने वाले दलितों को अनुसूचित जाति और उनका लाभ देने की मांग की गई है. वही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि वो इस मसले को लेकर रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं कर रही है. साल 2007 में रंगनाथ कमीशन ने सभी धर्मो के दलितों को अनुसूचित जाति को मिलने वाली शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का फायदा दिए जाने की सिफारिश की थी. सरकार का कहना था कि रंगनाथ कमीशन ने बिना ज़मीनी हकीकत का अध्ययन किये हुए ही धर्मांतरण करने वाले सभी दलितों को आरक्षण का फायदा देने की सिफारिश की थी. उसने इस मसले पर विचार के लिए पूर्व चीफ जस्टिस के जी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक नए आयोग का गठन किया है.
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