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YogiYogiFollow14 Jan 2025, 01:48 pm

हाथरसः घर से लापता व्यक्ति सड़क पर अचेत अवस्था में मिला, डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

Hathras, Uttar Pradesh:

हाथरस के उपजिलाधिकारी न्यायालय सादाबाद के सामने सड़क पर घर से लापता एक व्यक्ति अचेत अवस्था में मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंची जहां डॉक्टरों ने व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने व्यक्ति के परिजनों को सूचना देकर व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया। मृतक व्यक्ति के परिजनों ने बताया कि व्यक्ति घर से लापता था, व्यक्ति के लापता होने की पुलिस को सूचना दी गई थी। व्यक्ति की मौत की सूचना मिलते ही परिवार के लोगों में कोहराम मच गया।

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नवादा में किशोर हत्या: शव ईट भट्टे के पास मिला, इलाके में सनसनी

Nawada, Bihar:नवादा में एक किशोर की निर्मम तरीके से हत्या कर शव को ईट भट्टे के पास फेंक दिया गया है जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी। हिसुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत धमौल बेलदारी गांव की यह घटना है जहाँ आज सुबह ईट भट्टे पर एक 14 वर्षीय किशोर का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान धमौल बेलदारी गांव निवासी सुबोध यादव के 14 वर्षीय पुत्र हिमांशु कुमार के रूप में हुई है। ईट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर ने सबसे पहले शव को देखा। भट्टे से बदबू आ रही थी। पास जाने पर जब प्लास्टिक को हटाया गया तो उसमें एक बालक का शव मिला। इसकी तत्काल सूचना मजदूरों ने अपने मालिक को दी और ईट मालिक ने इसकी सूचना स्थानीय थाने को दी। जहां पुलिस मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया। मृत बालक के घर से दो सौ मीटर की दूरी पर ही उसका शव बरामद हुआ है। वह गोविंदपुर के कुतरुचक में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था और इसी रविवार को वह घर पहुंचा था। घर आने के बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला। परिजनों ने इसकी तत्काल सूचना थाने को दी और आज उसका शव बरामद किया गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि किसी ने उसकी हत्या कर दी है। घटनास्थल पर सदर एसडीपीओ पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। वही फॉरेंसिक एवं स्थानीय पुलिस ने जरूरी जानकारियां मौके से इकट्ठा किया। फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। वहीं इस मामले में पुलिस आगे की कार्रवाई में जुड़ गई है।
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बारिश के बाद नालियों की कमी से घरों में पानी घुसा, ग्रामीण परेशान

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी उपखंड क्षेत्र के हड़मतिया जागीर गांव में अचानक मौसम बदलने के बाद आई तेज आंधी और जोरदार बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी. बारिश का पानी निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को रातभर परेशानियों का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा नई सड़क का निर्माण कर दिया गया, लेकिन सड़क के साथ जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं किया गया. इसके अलावा कई स्थानों पर पुरानी नालियां भी बंद पड़ी हैं, जिससे बारिश का पानी जमा होकर रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी नहीं होने से अनेक घरों में पानी भर गया. इससे घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा और लोगों को पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. ग्रामीणों ने पंचायत और संबंधित विभाग पर समस्या की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार जल निकासी की व्यवस्था सुधारने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र नालियों का निर्माण करवाकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है.
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CRPF के हैड कांस्टेबल दिनेश महण का हृदयघात से निधन, गांव में शोक पंहुचा

Jhunjhunu, Rajasthan:नवलगढ़, झुंझुनूं सीआरपीएफ के हैड कांस्टेबल दिनेश महण का निधन नवलगढ़ के बलवंतपुरा में सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार हाल ही में हुआ था दूसरी बटालियन में ट्रांसफर ड्यूटी जॉइन करने से पहले आए परिवार से मिलने गांव में इसी दौरान हृदयघात से हैड कांस्टेबल दिनेश महण का निधन झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ उपखंड के बलवंतपुरा गांव निवासी सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार महण का हृदयघात से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हाल ही में दिनेश कुमार का सीआरपीएफ की 96वीं बटालियन से 198वीं बटालियन में स्थानांतरण हुआ था। वह 198वीं बटालियन में ड्यूटी जॉइन करने वाले थे। सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट जयसिंह ने बताया कि जॉइनिंग टाइम में दिनेश कुमार महण कुछ दिन पहले अपने घर आए हुए थे। परिजनों के अनुसार सुबह करीब तीन बजे उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। हालत बिगड़ने पर तत्काल जिला अस्पताल नवलगढ़ ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उनके निधन होने की जानकारी दी। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ दिनों बाद वे नई ड्यूटी पर रवाना होंगे। लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। जिला अस्पताल से लेकर उनके पैतृक गांव बलवंतपुरा तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रवासी शामिल हुए। तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह जब घर पहुंची तो माहौल गमगीन हो गया। पत्नी सुमन, पुत्र हिमांशु, पुत्री काजल तथा अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जयपुर से आई सीआरपीएफ की टुकड़ी उनके निवास पर पहुंची और विभाग की ओर से शोक संदेश पढ़कर सुनाया और परिवार को एक लाख रूपए की आकस्मिक सहायता प्रदान की। सैन्य परंपराओं के अनुसार उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने “दिनेश कुमार अमर रहें” के नारे लगाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुक्तिधाम में सीआरपीएफ जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके पुत्र हिमांशु ने मुखाग्नि दी तथा सीआरपीएफ की ओर से हिमांशु को तिरंगा सौंपा गया। दिनेश कुमार का जन्म 8 अप्रैल 1980 को हुआ था। उनके चचेरे भाई प्रकाश महण ने बताया कि स्थानांतरण के बाद उनकी ड्यूटी विशाखापट्टनम में लगनी थी। इसी कारण वे करीब पांच दिन पहले घर आए थे। उनके असामयिक निधन से क्षेत्र ने देशसेवा के लिए समर्पित एक कर्मठ जवान को खो दिया। इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा आदि मौजूद रहे। आपको बता दें कि सीआरपीएफ के जवान दिनेश कुमार महण परिवार में पिता मोहनलाल काफी वृद्ध हो गए। पहले खेती करते थे। लेकिन अब काम करने में असमर्थ हैं। पिता के साथ माता सरबती देवी, पत्नी सुमन देवी, पुत्र हिमांशु व पुत्री काजल की भी जिम्मेदारी दिनेश कुमार के कंधों पर थी। पुत्र हिमांशु 11वीं व पुत्री काजल 10वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। उनके भाई सुमेर सिंह भी संयुक्त परिवार में रहते हैं। निधन से परिवार पर बच्चों की पढाई, घर चलाने सहित प्रियजन के खोने से दुखों का पहाड़ टूट गया है.
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गरीब परिवार के अमित ने UPSC में 272वीं रैंक हासिल कर इतिहास लिखा

Panipat, Haryana:पानीपत। कहते हैं कि जब किसी इंसान के मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और मंजिल पाने का जुनून हो, तो गरीबी, कठिनाइयां और हालात उसके रास्ते की दीवार नहीं बन पाते। पानीपत के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमित टूर्ण ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक तंगी, संघर्ष, असफलताओं और छह साल लंबी कानूनी लड़ाई के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के संशोधित परिणाम में ऑल इंडिया 272वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को नई उड़ान दी। उनकी सफलता से जहां पूरा परिवार खुशी से झूम उठा, वहीं मां की आंखों से वर्षों के संघर्ष के आंसू खुशी बनकर छलक पड़े।
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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हाई-वैल्यू जॉब धोखाधर्मी के आरोपी को गिरफ्तार किया

Noida, Uttar Pradesh:नडीआर, क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता ₹20,000 के इनामी घोषित अपराधी को महीनों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया गया क्राइम ब्रांच, दिल्ली ने एक हाई-वैल्यू नौकरी धोखाधड़ी मामले में वांछित घोषित अपराधी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित रूप से भारतीय सेना में भर्ती कराने का झूठा झांसा देकर एक अभ्यर्थी से ₹5 लाख की ठगी की थी। फर्जी पहचान और भेष बदलकर छिप रहा था आरोपी तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर कोलकाता से गिरफ्तार यह सफल अभियान इंस्पेक्टर योगेश एवं इंस्पेक्टर विनोद यादव के नेतृत्व में, एसीपी उमेश बर्थवाल के मार्गदर्शन तथा डीसीपी श्री हर्ष इंदौरा के समग्र पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ。
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प्रतापगढ़ में वंदे गंगा अभियान: मंत्री हेमंत मीणा ने जल संरक्षण का संदेश दिया

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बजरंगगढ़ में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने श्रमदान कर जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का संदेश दिया तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित ग्रामवासियों एवं जनप्रतिनिधियों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई। राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके संरक्षण के बिना सतत विकास की परिकल्पना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को नई दिशा मिली है, वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार जल संसाधनों के संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक जन आंदोलन है। जल बचाने, जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा वर्षा जल संचयन को अपनाने जैसे प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। मंत्री मीणा ने प्रदेशवासियों से जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने जल पूजन भी किया तथा अभियान के तहत आयोजित विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। कार्यक्रम में जल संरक्षण से संबंधित जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया और अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी गई。
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सूखे तालाब से 150 परिवार तरबूज-खरबूजे से तीन महीनों में 1–2 लाख कमाते

Baran, Rajasthan:150 परिवार सूखे तालाब में कर रहे तरबूज-खरबूजे की खेती, तीन माह में कमा रहे 1 से 2 लाख रुपए बारां के समरानियां कस्बे के निकट ढिकवानी गांव के आदिवासी किसान तालाब पेटे में करीब 50 साल से तरबूज व खरबूजे की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। इस तालाब से रबी में खेतों में नहर के जरिए सिंचाई होती है, जबकि गर्मी के मौसम में 150 किसान परिवार तीन माह की मेहनत से 1 से 2 लाख रुपए तक आय कर लेते हैं। बारिश के मौसम में ढिकवानी गांव का यह तालाब पानी से लबालब भर जाता है। जिसका भराव क्षेत्र करीब 400 बीघा है। बारिश के बाद किसान नहर से पानी खेतों तक ले जाते हैं। इसी पानी से रबी की फसलों की सिंचाई होती है। गेहूं, सरसों, चना, धनिया की पैदावार बढ़ती है। रबी की सिंचाई के बाद तालाब का पानी कम होता है। कई बार तालाब खाली भी हो जाता है। तब करीब 150 किसान परिवार तालाब की खाली जमीन पर तरबूज और खरबूजे की बुवाई करते हैं। तालाब की नमी वाली मिट्टी मैं फसल बिना अतिरिक्त पानी के अच्छी पैदावार देती है। जिससे किसान 1-2 बीपा के छोटे स्कमे में ही करीब 3 माह मेहनत कर 1 से 2 लाख रुपए तक कमा लेते हैं। किसानों के अनुसार इस तालाब की मिट्टी में उगे तरबूज और खरबूजे में खुशबू और मिठास ज्यादा होती है। इसी वजह से स्थानीय बाजार के साथ शिवपुरी और कोलारस तक मांग रहती है। लोग दूर-दूर से खरीदने आते हैं। आदिवासी महिला किसान राजक्ती सहरिया ने बताया कि 3 माह की मेहनत में तरबूज की फसल तैयार हो जाती है। जून तक फसल खत्म हो जाती है। कम समय में अच्छा मुनाफा मिल जाता है। जून के बाद बारिश शुरू होते ही तालाब फिर भर जाता है। इसके साथ अगला चक्र शुरू हो जाता है। किसान बिना आधुनिक और खचर्चीले साधनों के प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर खेती कर रहे हैं। तालाब के इस चक्र को मुनाफे में बदलना आदिवासी समाज के आर्थिक उत्थान की मिसाल बन गया है। पूरे इलाके में इसकी चर्चा है।
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