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Delhi HC के समक्ष Google: हर वीडियो मॉनिटर नहीं, रिकॉर्डिंग रोकना मुश्किल

Noida, Uttar Pradesh:गूगल का दिल्ली HC में जवाब, यूट्यूब पर हर वीडियो की निगरानी मुमकिन नहीं गूगल ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि उसके लिए यह पता लगा पाना نامुमकिन है कि किसी ने ऑनलाइन अदालत की कार्यवाही का वीडियो बिना इजाजत रिकॉर्ड करने के बाद उसे यूट्यूब पर अपलोड किया है। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को यह निर्देश देना कि वे ऐसी रिकॉर्डिंग दोबारा अपलोड होने से रोकें, कानूनी और तकनीकी रूप से संभव नहीं है। गूگل ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि वीडियो की रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर नहीं होती, बल्कि बाहर की जाती है। इसलिए वह यह तय नहीं कर सकता कि किसी वीडियो में अदालत की कार्यवाही दिखाई गई है या नहीं, रिकॉर्डिंग की अनुमति ली गई थी या नहीं, या वह वीडियो किसी कानून का उल्लंघन करता है या नहीं। गूगल ने कहा है कि भारत में अलग-अलग अदालतों के नियम भी अलग-अलग हैं। ऐसी स्थिति में वह पहले से अपने प्लेटफॉर्म की निगरानी करके बिना अनुमति रिकॉर्ड किए गए वीडियो को दोबारा अपलोड होने से नहीं रोक सकता। गूगल ने कहा है कि यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां हर घंटे लाखों वीडियो अपलोड होते हैं। ऐसे में उसके लिए यह पता लगाना نامुमकिन है कि कौन-सा वीडियो अदालत की बिना अनुमति की गई रिकॉर्डिंग है और कौन-सा कानून का उल्लंघन करता है। गूगल का कहना है कि कानून के अनुसार उसकी जिम्मेदारी केवल उन वीडियो को हटाने की है, जिन्हें कोर्ट किसी खास URL (लिंक) के साथ कानून का उल्लंघन करने वाला घोषित करे। भारतीय कानून सोशल मीडिया कंपनियों से यह उम्मीद नहीं करता कि वे खुद फैसला करें कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा अपलोड किया गया कंटेंट सही है या गलत। यह फैसला केवल सक्षम अदालत ही कर सकती है。 गूगल ने यह हलफनामा वकील वैभव सिंह की याचिका के जवाब में दाखिल किया है। वैभव सिंह ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। दरअसल, अरविन्द केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा से खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। सुनवाई के तुरंत बाद अदालत की कार्यवाही के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। वैभव सिंह ने अपनी याचिका में यह भी मांग की कि कोर्ट सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दे कि वे अदालत की बिना अनुमति रिकॉर्ड की गई कार्यवाही के वीडियो दोबारा ऑनलाइन आने से रोकें।
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NHAI शिलांग डायरेक्टर सहित 3 गिरफ्तार: 13.38 करोड़ बिल के बदले 12 लाख रिश्वत

New Delhi, Delhi:13.38 करोड़ का बिल पास कराने के लिए 12 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप, NHAI के शिलांग प्रोजेक्ट डायरेक्टर गिरफ्तार...\n\nCBI ने रिश्वतखोरी के एक मामले में (NHAI) के शिलांग प्रोजेक्ट डायरेक्टर और दो निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।\n\nCBI ने इस मामले में 1 जुलाई 2026 को शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया था। आरोप है कि NHAI, शिलांग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने शिकायतकर्ता का 13.38 करोड़ रुपये का बकाया बिल प्रोसेस करने के बदले 12 लाख रुपये की रिश्वत माँगी।\n\nजाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने पहले 4 लाख रुपये एडवांस रिश्वत देने को कहा और शिकायतकर्ता को यह रकम गुवाहाटी में एक निजी व्यक्ति को सौंपने का निर्देश दिया। बाद में उस व्यक्ति ने पैसे दूसरे निजी व्यक्ति को देने के लिए कहा।\n\nCBI ने शिकायत की पुष्टि के बाद जाल बिछाया और गुवाहाटी में एक निजी व्यक्ति को शिकायतकर्ता से 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।\n\nइसके बाद CBI ने NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और दोनों निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी भी ली है।\n\nCBI ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।\n\nगिरफ्तार आरोपियों के नाम आनंद सिंह चौहान, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NHAI, शिलांग\n\nपुनीत अग्रवाल और मनीष अग्रवाल नाम के प्राइवेट लोग है।
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MP मंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र विवाद, कांग्रेस का आरोप फर्जी

Bhopal, Madhya Pradesh:एमपी में डुगडुगी बजने के पीछे मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति कैटेगरी पता लगाने का मामला सामने आया है. कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया है कि मंत्री अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र फर्जी है और विभाग ने उनके जाति कैटेगरी की पुष्टि मांगी है. यह पहली बार है जब डुगडुगी बजाकर मंत्री की जाति कैटेगरी पता लगाई गई हो. कांग्रेस नेता ने कहा कि मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है और मुख्यमंत्री से शिकायत है. प्रतिमा बागरी ने कहा कि यह सियासी हथकंडा है, वे SC वर्ग में आती हैं, सबूत फैमिली ट्री और जाति प्रमाणपत्र प्रशासन ने विभाग को सौंप दिए हैं.
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रेल नगरी फुलेरा की निक्की कुमावत ने ब्यूटी पार्लर से बदली हजारों बेटियों की किस्मत

Dudu, Rajasthan:निक्की कुमावत रेल नगरी फुलेरा में ग्रूमिंग और सौंदर्य की दुनिया में निक्की कुमावत ने अपनी एक विशिष्ट बनाई है निक्की कुमावत ने 25 साल पहले जब एक सपना देखा था, तो राह आसान नहीं थी। लेकिन अटूट विश्वास और बेहतरीन सेवाओं के दम पर 'सजी-धजी ब्यूटी पार्लर' सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भरोसे का दूसरा नाम बन गया। निक्की कुमावत ने सिर्फ चेहरों को नहीं चमकाया, बल्कि हजारों बालिकाओं और महिलाओं की तकदीर बदल दी। आज उनके सिखाए हुनर की बदौलत, क्षेत्र में सैकड़ों बेटियां अपने खुद के ब्यूटी पार्लर खोलकर आत्मनिर्भर रही हैं। ऐसे में निक्की कुमावत क्षेत्र में समाज को नई दिशा दे रही हैं।
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झुंझुनूं में बदला मौसम; बारिश और तेज हवाएं, येलो अलर्ट जारी

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं शहर सहित आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दोपहर बाद आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हुई, जिसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया। बारिश होने से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली। तेज हवा चलने से मौसम सुहावना हो गया और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। बारिश के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। मौसम विभाग ने जिले के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 9 जुलाई तक जिले में मेघगर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है。
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बारां में एक घंटे में दिव्यांग बालक को ट्रायसाइकिल मिली, प्रशासन की तेज कार्रवाई

Baran, Rajasthan:बारां में एक घंटे में दिव्यांग बालक को मिली ट्राईसाइकिल। एंकर- बारां कलेक्ट्रेट में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल देखने को मिली। ट्राईसाइकिल की मांग लेकर पहुंचे एक दिव्यांग बालक की सुनवाई महज एक घंटे में हुई और उसे ट्राईसाइकिल उपलब्ध करा दी गई। सहायता मिलने के बाद बालक के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। छीपाबड़ौद क्षेत्र के मानपुरा निवासी 15 वर्षीय दिव्यांग बालक जितेंद्र बैरवा अपने पिता के साथ पढ़ाई के लिए आने-जाने में हो रही परेशानी को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा था। जहाँ उसने ट्राईसाइकिल की मांग संबंधी आवेदन अतिरिक्त जिला कलेक्टर भंवरलाल जनागल को सौंपा। एडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज कल्याण अधिकारी शुभम नागर को तत्काल ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग द्वारा बालक जितेंद्र को अटरू में ट्राईसाइकिल सौंप दी गई, ट्राईसाइकिल मिलने के बाद जितेंद्र ने खुशी जताते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया । बाइट- भंवरलाल जनागल , एडीएम , बारां ।
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जयपुर में डीएलसी दरों में 5–40% बढ़ोतरी की सिफारिश, कुछ कॉलोनियों में 49%

Jaipur, Rajasthan:एंकर-जमीन खरीदना अब और महंगा होने जा रहा है। एक बार फिर डीएलसी दरों में इजाफा हो गया हैं। इसकी शुरुआत जयपुर से हो चुकी है, जहां जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में डीएलसी कमेटी की बैठक में अलग-अलग इलाकों की नई दरों पर मंथन हुआ। अधिकांश क्षेत्रों में 5 से 40 फीसदी तक और कुछ चुनिंदा कॉलोनियों में 49 फीसदी तक डीएलसी बढ़ाने के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गयी है। नई दरें लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री से लेकर सरकारी मुआवजे तक पर सीधा असर पड़ेगा। वीओ-1-चार माह बाद फिर से जमीनों की डीएलसी दरों में इजाफा होने जा रहा है । जयपुर कलेक्ट्रेट में जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में डीएलसी कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों की मौजूदा बाजार कीमतों की समीक्षा करते हुए विभिन्न सब रजिस्ट्रारों ने अपने-अपने क्षेत्रों के लिए संशोधित डीएलसी दरों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। बैठक में अधिकांश क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई। प्रस्तावों के मुताबिक जयपुर के अलग-अलग इलाकों में डीएलसी दरों में 5 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। वहीं कुछ चुनिंदा कॉलोनियों में 49 प्रतिशत तक डीएलसी दर बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। बैठक में शहरी क्षेत्रों की उन जमीनों पर विशेष फोकस किया गया, जहां वर्तमान बाजार मूल्य और सरकारी डीएलसी दरों में बड़ा अंतर है। ऐसे क्षेत्रों में अधिकतम 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाजार मूल्य के अनुरूप संशोधन करते हुए अधिकांश स्थानों पर 35 प्रतिशत तक डीएलसी दर बढ़ाने की सिफारिश की गई है। कलक्टर संदेश नायक ने बताया की कुछ क्षेत्र की डीएलसी दरों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव आया हैं तो ऐसे प्रस्तावों को अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया हैं....इसी तरह किसी क्षेत्र की मौजूदा डीएलसी दरों में कमी करने का प्रस्ताव के मामलों में भी जिला स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया हैं......इन प्रस्तावों को भी आवश्यक परीक्षण और स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया हैं...... वीओ-2-प्रस्तावित संशोधन डीDLसी लागू होने के बाद यहां जमीनों की सरकारी कीमतों में बढ़ोतरी होगी। डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दर वह सरकारी बाजार मूल्य होता है, जिसके आधार पर जमीन और संपत्ति की खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री की जाती है। किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री डीएलसी दर से कम मूल्य पर नहीं हो सकती। आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी के साथ-साथ सड़क की चौड़ाई के अनुसार भी डीएलसी दरें अलग-अलग निर्धारित की जाती हैं। डीएलसी दरों का महत्व केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों और भू-स्वामियों को दिए जाने वाले मुआवजे के निर्धारण में भी डीएलसी दर महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर संपत्ति की खरीद-बिक्री, स्टांप शुल्क, रजिस्ट्रेशन शुल्क और भूमि अधिग्रहण मुआवजे पर भी देखने को मिलेगा। अब डीएलसी कमेटी की सिफारिशों को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद संशोधित दरें लागू की जाएंगी, जिससे प्रदेशभर में जमीनों के सरकारी मूल्य में व्यापक बदलाव होने की संभावना है। गौरतलब हैं की 1 अप्रैल 2024 में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। दिसंबर 2024 में सरकार ने फिर 5 से 15 फीसदी तक दरें बढ़ाईं। अप्रैल 2026 में सरकार ने एक बार फिर 10 फीसदी की बढ़ोतरी की। बता दें कि अप्रैल में जयपुर के अलावा प्रदेश के सभी जिलों में भी सरकार ने 10 फीसदी डीएलसी की दरों में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद मई में फाइनेंस सेक्रेटरी ने सभी कलेक्टर्स को जून के तीसरे सप्ताह तक डीएलसी की बैठक करने के निर्देश दिए थे। बहरहाल, सरकार का तर्क है कि डीएलसी दरों को बाजार भाव के करीब लाना जरूरी है... लेकिन सवाल ये भी है कि जब डीएलसी बढ़ेगी तो जमीन खरीदना महंगा होगा, रजिस्ट्री पर ज्यादा स्टांप ड्यूटी देनी पड़ेगी और कई मामलों में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा भी बढ़ सकता है। यानी एक फैसला... जो सरकारी खजाने की आय बढ़ाएगा, लेकिन आम खरीदार की जेब पर भी सीधा असर डालेगा। अब निगाहें राज्य स्तरीय डीएलसी कमेटी की अंतिम मंजूरी पर हैं।
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नीट पेपर लीक के विरोध में SFI ने NTA दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया

New Delhi, Delhi:जब से देश में नीट का पेपर लीक हुआ है तब से सभी छात्र संगठन एक-एक करके NTA के दफ्तर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में आज दिल्ली के ओखला फेस 3 में स्थित NTA के दफ्तर पर SFI छात्र संगठन के द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया जिसमें उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा की मांग की और NTA को बैन करने की भी मांग की है। देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ लगातार छात्र संगठन देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं जब से नीट की परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं तब से। आज भी सोमवार शाम 4:00 बजे NTA दफ्तर पर SFI टीम पहुंची और उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान और RAF के जवान दफ्तर के बाहर तैनात दिखाई दिए जहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों को रोका गया। वही प्रदर्शन करने पहुंचे छात्र सोहन यादव बताते हैं कि नीट का पेपर लीक होने की वजह से देश में कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी इसका जिम्मेदार कौन है इसका जिम्मेदार NTA और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान है अभी तक शिक्षा मंत्री के द्वारा एक बार भी छात्रों से माफी नहीं मांगी गई है आज हम लोग NTA के डीजी से मिलने के लिए आए हैं ताकि उन तक हमारी बात पहुंच सके लेकिन हम लोगों को मिलने नहीं दिया गया है पुलिस के द्वारा हमें बाहर ही रोक दिया गया है। बाइट : सोहन राहुल और आरिफ प्रदर्शन करने वाले छात्र की
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दिल्ली के सभी स्कूलों में बाल सुरक्षा समितियों का गठन, जागरूकता अभियान तेज

New Delhi, Delhi:जुलाई के अंत तक दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में बाल संरक्षण समितियों का गठन, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जुलाई को 'बाल संरक्षण माह' के रूप में मनाया जा रहा है, जुलाई के अंत तक दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में बाल संरक्षण समितियों का गठन किया जाएगा आंगनवाड़ी, पालना केंद्रों और बाल देखभाल संस्थानों (CCI) में पॉक्सो जागरूकता अभियान चलाया जाएगा स्कूलों में पॉक्सो कानून, साइबर सुरक्षा, बुलिंग और नशे से बचाव पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे सभी स्कूलों में सुरक्षा चेकलिस्ट लागू की जा रही है। शिक्षकों, स्कूल स्टाफ और मुख्य प्रशिक्षकों को पॉक्सो कानून का प्रशिक्षण दिया जाएगा बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, लैंगिक संवेदनशीलता और व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा छात्रों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। प्रत्येक जिले में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त डीसीपी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा स्कूलों के निरीक्षण के लिए शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और अभिभावकों के प्रतिनिधियों के संयुक्त दल बनाए जाएंगे सभी स्कूलों में पॉक्सो मामलों के लिए मानक कार्यप्रणाली (SOP) लागू की जाएगी पीटीएम, वीडियो, मोबाइल वैन और प्रचार सामग्री के जरिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रयास केवल जुलाई तक नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाए जाएंगे उपराज्यपाल ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और संवेदनशील माहौल देने में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी
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टाइगर रिजर्व में वनकर्मी पर बाघ हमला, हालत गंभीर नहीं पर इलाज जारी

Sagar, Madhya Pradesh:टाइगर रिजर्व में पेट्रोलिंग के दौरान वनकर्मी पर बाघ के हमले से हड़कंप मच गया। घटना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मुहली पश्चिम वन क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां ड्यूटी के दौरान वनकर्मी बाबूलाल रैकवार पर अचानक बाघ ने हमला कर दिया। हमले के बाद बाबूलाल ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए अपनी जान बचाई और मौके से निकलने में सफल रहे। घटना की जानकारी मिलते ही रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अधिकारी और अन्य वन अमला तत्काल मौके पर पहुंचा। घायल वनकर्मी को सरकारी वाहन से रहली के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। गंभीर चोटों को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम नियमित गश्त पर निकली थी। इसी दौरान घने जंगल में अचानक बाघ का सामना हो गया और उसने वनकर्मी बाबूलाल रैकवार पर हमला कर दिया। हालांकि उनकी सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया और उनकी जान बच गई। घटना के बाद पूरे टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। वन विभाग के अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं तथा यह पता लगाया जा रहा है कि बाघ ने किन परिस्थितियों में हमला किया। वहीं घायल वनकर्मी का बीएमसी में उपचार जारी है। जंगल में गश्त करने वाले वन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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दिल्ली स्पेशल सेल ने शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ा आतंक मॉड्यूल पकड़ा, छह गिरफ्तार

Noida, Uttar Pradesh:DELHI: POLICE SPECIAL CELL BUSTED A TERROR MODULE LINKED TO THE SHAHZAD BHATTI NETWORK, ARRESTED SIX ACCUSED FROM DELHI AND PUNJAB/ VISUALS/PRAVEEN TRIPATHI (DCP SPECIAL CELL) S/B दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के DCP प्रवीण त्रिपाठी कहते हैं, "शहज़ाद भट्टी का नेटवर्क पिछले छह से नौ महीनों से हमारी नज़र में था और हम लगातार ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल डेटा के ज़रिये उस पर नज़र रखे हुए थे। हाल ही में पकड़े गए मॉड्यूल में से पहले मॉड्यूल में दो लोग शामिल थे—दानिश और उसका दोस्त सलमान। दोनों मुज़फ़्फ़रनगर के खतौली के रहने वाले थे। वे शहज़ाद भट्टी के साथी हुनैन राणा के संपर्क में थे। उन्हें दिल्ली में किसी अहम जगह या पुलिस स्टेशन को निशाना बनाने का काम सौंपा गया था। उनके हैंडलर ने उन्हें पेट्रोल बम दिए थे और फ़ोन पर उन्हें गाइड कर रहा था। हमें उनके फ़ोन से उनकी रेकी (जासूसी) गतिविधियों से जुड़े वीडियो और फ़ोटो भी मिले। दूसरा मॉड्यूल असल में हथियारों की तस्करी का था। वे शहज़ाद भट्टी के एक और साथी हसन गुज़ार के संपर्क में थे, जो लंबे समय से हथियारों की तस्करी, खासकर बॉर्डर पार से हथियार लाने के काम में शामिल रहा है। अमृतसर में रहने वाले मलकीयत को हथियार मिलते थे, जो पाकिस्तान से ड्रोन के ज़रिए भेजे जाते थे। फिर वह तैयब, अली फ़ज़ल और ज़ुबैर जैसे खरीदारों से जुड़ता था, जो हथियार खरीदते थे और उन्हें दिल्ली लाते थे। वे दिल्ली, NCR और उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में और खरीदार ढूंढ रहे थे। तो, यह मुख्य रूप से हथियारों की तस्करी का मॉड्यूल था; हालाँकि, इस गैर-कानूनी काम से होने वाली कमाई पाकिस्तान भेजी जा रही थी और हो सकता है कि इसका इस्तेमाल दिल्ली, NCR या देश में कहीं भी आतंकवादी या आपराधिक गतिविधियों को फ़ंड देने के लिए किया जाता…
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दिल्ली हाई कोर्ट के सामने Google का दावा: बिना अनुमति रिकॉर्डिंग से वीडियो रोकना मुश्किल

Noida, Uttar Pradesh:गूगल ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि उसके लिए यह पता लगा पाना नामुमकिन है कि किसी ने ऑनलाइन अदालत की कार्यवाही का वीडियो बिना इजाजत रिकॉर्ड करने के बाद उसे यूट्यूब पर अपलोड किया है। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को यह निर्देश देना कि वे ऐसी रिकॉर्डिंग दोबारा अपलोड होने से रोकें, कानूनी और तकनीकी रूप से संभव नहीं है। गूगल ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि वीडियो की रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर नहीं होती, बल्कि बाहर की जाती है। इसलिए वह यह तय नहीं कर सकता कि किसी वीडियो में अदालत की कार्यवाही दिखाई गई है या नहीं, रिकॉर्डिंग की अनुमति ली गई थी या नहीं, या वह वीडियो किसी कानून का उल्लंघन करता है या नहीं。 गूगल ने कहा है कि भारत में अलग-अलग अदालतों के नियम भी अलग-अलग हैं। ऐसी स्थिति में वह पहले से अपने प्लेटफॉर्म की निगरानी करके बिना अनुमति रिकॉर्ड किए गए वीडियो को दोबारा अपलोड होने से नहीं रोक सकता。 गूगल ने कहा है कि यूट्यूब एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां हर घंटे लाखों वीडियो अपलोड होते हैं। ऐसे में उसके लिए यह पता लगाना नामुमकिन है कि कौन-सा वीडियो अदालत की बिना अनुमति की गई रिकॉर्डिंग है और कौन-सा कानून का उल्लंघन करता है。 गूगल का कहना है कि कानून के अनुसार उसकी जिम्मेदारी केवल उन वीडियो को हटाने की है, जिन्हें कोर्ट किसी खास URL (लिंक) के साथ कानून का उल्लंघन करने वाला घोषित करे। भारतीय कानून सोशल मीडिया कंपनियों से यह उम्मीद नहीं करता कि वे खुद फैसला करें कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा अपलोड किया गया कंटेंट सही है या गलत। यह फैसला केवल सक्षम अदालत ही कर सकती है। गूगल ने यह हलफनामा वकील वैभव सिंह की याचिका के जवाब में दाखिल किया है। वैभव सिंह ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा से खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। सुनवाई के तुरंत बाद अदालत की कार्यवाही के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। वैभव सिंह ने अपनी याचिका में यह भी मांग की कि कोर्ट सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दे कि वे अदालत की बिना अनुमति रिकॉर्ड की गई कार्यवाही के वीडियो दोबारा ऑनलाइन आने से रोकें.
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