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ArdhchandradhariTripathiArdhchandradhariTripathiFollow13 Mar 2025, 04:23 am

Gorakhpur - आंगनवाड़ी केन्द्र में 94 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई

Khutbhar, Khajani, Uttar Pradesh:

खजनी गोरखपुर ब्लॉक के भेउसा उर्फ बनकटां गांव में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र में पहुंची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खजनी की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के डाॅक्टर त्रिवेणी कुमार द्विवेदी व आप्टोमेटिस्ट विकास श्रीवास्तव के द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र में उपस्थित सभी बच्चों का  वजन, कुपोषण एवं अन्य सामान्य रोगों का परीक्षण करते हुए उनकी विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान आंगनवाड़ी केन्द्र के कुल 114 बच्चों में 94 उपस्थित मिले। स्वास्थ्य जांच के दौरान 3 बच्चों को अस्वस्थ्य पाया गया, जिन्हें विस्तृत जांच,इलाज के लिए उनके माता-पिता के साथ खजनी पीएचसी में बुलाया गया, शेष 91 बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में उन्हें स्वस्थ्य पाया गया।जांच के साथ उन्हें प्रतिरोधी व स्वास्थ्यवर्धक दवाएं मुफ्त दी गईं।मौके पर गांव की आंगनवाड़ी और आशाएं मौजूद रहीं।

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मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में प्रमोद की हत्या, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

Moradabad, Uttar Pradesh:मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में आज सुबह अज्ञात बदमाशों ने धारदार हथियार से हमला कर घर में सोए व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया। थाना पुलिस और एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह भी घटना स्थल पर पहुँच गए और हत्या की हर एंगल से जांच शुरू कर दी। घटना ठाकुरद्वारा की फरीदनगर रोड स्थित गैस गोदाम के पास रहने वाले प्रमोद के घर में शव मिलने से सामने आई। प्रमोद के सिर और शरीर पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। सूचना पर थाना पुलिस के साथ साथ एसपी देहात मौके पर पहुँचे और एफएसएल टीम बुला कर बारीकी से जांच शुरू कर दी गई। मृतक प्रमोद मूलरूप से मुंडापाण्डे क्षेत्र का रहने वाला था और कुछ समय पूर्व ठाकुरद्वारा में मकान बनाकर रहने लगा था। पुलिस ने बॉडी कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी और हत्या की हर एंगल से जांच शुरू कर दी है।
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15 करोड़ के वरदहा पुल की स्वीकृति पर विधायक और पूर्व विधायक के श्रेय युद्ध

Chakala Sitapur, Madhya Pradesh:चमरौहां के वर्धाहा नदी पुल पर श्रेय की जंग, आमने-सामने आए वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी और पूर्व विधायक आनंद शुक्ला लोकप्रिय- चित्रकूट 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद तेज हुई सियासी बयानबाजी, दोनों ने अपने-अपने प्रयासों को बताया अहम; बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को होती रही है भारी परेशानी चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र के चमरौहां गांव के पास वरदहा नदी पर बनने वाले बहुप्रतीक्षित पुल की स्वीकृति के बाद अब क्षेत्र में राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस पुल को लेकर वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी और पूर्व विधायक आनंद शुक्ला के बीच बयानबाजी सामने आई है। एक ओर वर्तमान विधायक ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए पुल की स्वीकृति को अपने प्रयासों से जोड़कर पेश किया है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने उन पर श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए पुल की स्वीकृति में अपनी भूमिका का दावा किया है। ऐसे में वर्षों से पुल निर्माण की आस लगाए बैठे ग्रामीणों की समस्या अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है。 15 करोड़ के पुल को मंजूरी, दो नेताओं के बीच श्रेय की जंग चमरौहां गांव के पास वर्धाहा नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। यह इलाका उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के समीप स्थित है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। खासकर बरसात और बाढ़ के समय नदी पार करना मुश्किल हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रस्तावित पुल की स्वीकृति की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में जहां लोगों को राहत की उम्मीद जगी है, वहीं इस परियोजना को स्वीकृति दिलाने का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए पुल निर्माण की स्वीकृति को अपनी पैरवी का परिणाम बताया है। वहीं पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने वर्तमान विधायक के दावे पर सवाल उठाते हुए पुल की स्वीकृति का श्रेय खुद को दिया है। दोनों नेताओं के दावों के बीच अब यह मुद्दा केवल विकास कार्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक उपलब्धि और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है。 वर्तमान विधायक ने मुख्यमंत्री का जताया आभार मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने चमरौहां गांव के पास वर्धाहा नदी पर पुल की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है। उन्होंने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी स्वीकृति को अपनी कोशिशों से जोड़कर प्रस्तुत किया है。 विधायक की ओर से इस संबंध में सामने आए दावे के बाद पुल निर्माण को लेकर उनकी भूमिका चर्चा में है। उनका पक्ष यह है कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा कराने की दिशा में प्रयास किए गए, जिसके बाद पुल की स्वीकृति का रास्ता साफ हुआ। हालांकि, स्वीकृति की आधिकारिक प्रक्रिया, प्रस्ताव तैयार होने के समय और संबंधित विभागीय अभिलेखों की जानकारी के बिना यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि परियोजना को मंजूरी दिलाने में किसकी कितनी भूमिका रही। पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने उठाए सवाल दूसरी ओर, पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने वर्तमान विधायक पर पुल निर्माण की स्वीकृति का श्रेय लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस проекта को स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है। उनके रुख से स्पष्ट है कि वह वर्तमान विधायक के दावे से सहमत नहीं हैं। पूर्व विधायक के आरोपों के बाद चमरौहां के वरदहा नदी पुल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से मीडिया और सोशल मीडिया पर बयानबाजी किए जाने से यह मामला क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल दोनों नेताओं के दावों के बीच पुल की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज, विभागीय पत्राचार और शासन स्तर पर हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर परियोजना की प्रक्रिया और विभिन्न जनप्रतिनिधियों के योगदान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है。 बाढ़ के समय ग्रामीणों की बढ़ जाती है मुश्किल चमरौहां के पास वर्धाहा नदी पर पुल निर्माण की मांग के पीछे स्थानीय लोगों की आवागमन संबंधी परेशानी एक प्रमुख वजह रही है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने पर ग्रामीणों के लिए नदी पार करना कठिन हो जाता है। ऐसे में लोगों को अपने दैनिक कार्यों, जरूरी यात्राओं और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के समीप स्थित इस क्षेत्र में पुल का निर्माण होने से संपर्क व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इससे आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ पुल के निर्माण, संपर्क मार्गों की उपलब्धता और परियोजना पूरी होने के बाद की व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। ग्रामीणों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वर्षों से उठाई जा रही मांग अब निर्माण के स्तर तक पहुंचे। स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य कब शुरू होगा, कितने समय में पूरा किया जाएगा और बरसात के दौरान आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान कब मिलेगा, इन सवालों के जवाब का इंतजार रहेगा। श्रेय की राजनीति के बीच निर्माण शुरू होने की प्रतीक्षा करीब 15 करोड़ रुपये के प्रस्तावित पुल को स्वीकृति मिलने की खबर से चमरौहां और आसपास के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। लेकिन इस उपलब्धि को लेकर वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के बीच शुरू हुई बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल भी गर्म कर दिया है。 एक तरफ वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए पुल की स्वीकृति को अपनी कोशिशों से जोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक आनंद शुक्ला इस दावे को चुनौती देते हुए अपनी भूमिका का दावा कर रहे हैं। ऐसे में पुल निर्माण का श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। हालांकि, विकास परियोजनाओं की स्वीकृति आम तौर पर प्रस्ताव, विभागीय परीक्षण, प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी जैसी प्रक्रियाओं से गुजरती है। इसलिए किसी एक व्यक्ति के दावे के आधार पर पूरी परियोजना का श्रेय तय करने के बजाय आधिकारिक अभिलेखों और संबंधित विभाग की जानकारी को आधार बनाना अधिक उचित होगा。 ग्रामीणों को श्रेय नहीं, धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार चमरौहां के वरदहा नदी पुल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि स्वीकृत परियोजना का निर्माण जल्द शुरू हो और वर्षों पुरानी परेशानी से उन्हें स्थायी राहत मिले। बाढ़ के दौरान नदी पार करने की मुश्किलों से जूझने वाले ग्रामीणों के लिए पुल किसी राजनीतिक दावे से अधिक बुनियादी जरूरत है。 अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि करीब 15 करोड़ रुपये की इस परियोजना की निर्माण प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है और पुल कब तक तैयार हो पाता है। वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के बीच श्रेय को लेकर चल रही बहस के बीच आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर दोनों के दावों की पड़ताल भी जरूरी होगी। फिलहाल चमरौहां के वरदहा नदी पुल की स्वीकृति ने क्षेत्र में विकास की उम्मीद के साथ राजनीतिक श्रेय की बहस को भी हवा दे दी है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि वर्षों पुरानी मांग का समाधान कागजों से निकलकर धरातल पर कब दिखाई देता है।
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ढिंडसा परिवार को बड़ा राजनीतिक झटका: लगभग 100 परिवार आम आदमी पार्टी में शामिल

Lehragaga, Punjab:ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਵੱਡਾ ਸਿਆਸੀ ਝਟਕਾ! 100 ਦੇ ਕਰੀਬ ਪਰਿਵਾਰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹਲਕਾ ਲਹਿਰਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸਲੇਮਗੜ੍ਹ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਨੇ ਸਾਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਛੱਡਿਆ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਸਾਥ。 ਲਹਿਰਾਗਾਗਾ: ਹਲਕਾ ਲਹਿਰਾ ਵਿੱਚ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੇਂ ਵੱਡਾ ਸਿਆਸੀ ਝਟਕਾ ਲੱਗਿਆ, ਜਦੋਂ ਪਿੰਡ ਸਲੇਮਗੜ੍ਹ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਨੇ ਆਪਣੇ सਾਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਸਾਥ ਛੱਡ ਕੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦਾ ਪੱਲਾ ਫੜ ਲਿਆ। ਪ੍ਰਾਪਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਦੇ ਨਾਲ ਰਾਮਫਲ ਸਿੰਘ, ਮੇਲਾਂ ਸਿੰਘ, ਜੇਠੂ ਸਿੰਘ, ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ, ਗੁਲਾਬ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਬਲਕਾਰ ਸਿੰਘ ਸਮੇਤ ਕਰੀਬ 100 ਪਰਿਵਾਰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਏ。 ਇਸ ਮੌਕੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਐਡਵੋਕੇਟ ਬਰਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਗੋਇਲ ਨੇ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਏ ਆਗੂਆਂ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਸਿਰੋਪੇ ਪਾ ਕੇ ਜੀ ਆਇਆਂ ਆਖਿਆ。 ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਬਰਿੰਦਰ ਗੋਇਲ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਬਣਦਾ ਮਾਣ-ਸਨਮਾਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ。
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बिहार के सभी जिलों में आयकर नियमावली 2025 के संशोधित प्रावधान कर्मचारियों को प्रशिक्षित

Buxar, Bihar:आयकर नियमावली संशोधन 2025 लागू होने के बाद संशोधित प्रावधानों की जानकारी सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए बिहार के सभी जिलों में विभागीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। बक्सर समाहरणालय में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित कर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों को संशोधित नियमावली की जानकारी दी गई। कार्यशाला में विभिन्न विभागों में वित्तीय कार्यभार संभालने वाले कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान संशोधित नियमों, उनके प्रावधानों और विभागीय कार्यों में उनके अनुपालन को लेकर विस्तार से informacij दी गई। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के बीच नियमों को लेकर बनी भ्रांतियों को दूर करना और वित्तीय कार्यों के निष्पादन में संशोधित प्रावधानों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित करना है。
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AAP सांसद मालविंदर कंग ने झोटा हत्या पर दुख जताया; बैलेट पेपर से चुनाव मांग

Noida, Uttar Pradesh:MALWINDER SINGH KANG, MP AAP दिल्ली आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर कंग का बयान मलविंदर कंग ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर दुख जताया कहा, झोटा एक एक्टिविस्ट थे। आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। पंजाब के लॉ एंड ऑर्डर पर उठ रहे सवाल पर बोले कंग कहा, जिस तरह कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, पुलिस को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए। SIR और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर INDIA गठबंधन से अलग प्रदर्शन पर बोले कंग कहा, यह हाईकमान का फैसला होता है, लेकिन आम आदमी पार्टी शुरू से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग मालविंदर कंग ने कहा, जब अमेरिका जैसे बड़े देश बैलेट पेपर से चुनाव करा रहे हैं, तो भारत में भी बैलेट पेपर से चुनाव होने चाहिए। परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि परगट सिंह एक संजीदा नेता हैं और संजीदा राजनीति करते हैं।
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पंचायत चुनाव के लिए नामांकन आज: जिला परिषद के उम्मीदवारों की रेस तेज

Pali, Rajasthan:पंचायत राज चुनाव को लेकर जिला परिषद सदस्य एवं पंचायत समिति सदस्य के लिए नॉमिनेशन प्रस्तुत करने की आज अंतिम तिथि है जिसके आधार पर जिला मुख्यालय पर पाली जिले के 33 जिला परिषद वार्डों के दावेदारों द्वारा नॉमिनेशन प्रस्तुत किया जाता है, वहीं पहले चरण की पंचायत समिति सोजत सुमेरपुर मारवाड़ रानी और बगड़ी में 95 पंचायत समिति वार्ड के लिए आवेदन उपखंड मुख्यालय पर स्वीकार किए जा रहे हैं, वहीं राजनीतिक पार्टी भाजपा और कांग्रेस द्वारा अभी तक सिंबल सूची जारी नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि सीधे रिटर्निंग अधिकारी को ही जिला परिषद सदस्य एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए सिंबल जमा करवाए जाएंगे।
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ओवरस्पीडिंग पर दुपहिया चालान: नियमों की गड़बड़ मैपिंग पर जांच शुरू

Jaipur, Rajasthan:लोकेशन- जयपुर हैडर- - दुपहिया के चालान, अपराध कार का! - ट्रैफिक पुलिस के नियमों को लेकर सवाल - एमवी एक्ट के नियम 183(1) की गलत व्याख्या? - 183(1) में एलएमवी वाहनों का जिक्र - दुपहिया के ओवरस्पीडिंग का सही नियम क्या? - गलती परिवहन विभाग की या ट्रैफिक पुलिस की? एंकर राज्य में मोटर साइकिल और स्कूटर यानी दुपहिया वाहनों के ओवर स्पीडिंग में चालान किए जा रहे हैं। दुपहिया वाहन के तेज गति में चलने पर 1 हजार रुपए का चालान काटा जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि दुपहिया वाहन के हाई स्पीड में चालान काटने का सही तरीके से नियम ही परिभाषित नहीं है। क्याें हो रही है गफलत, यह रिपोर्ट देखिए- वीओ- 1 राज्य में बड़ी संख्या में दुपहिया वाहन चालक इन दिनों राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए गलत नियमों का शिकार हो रहे हैं। दुपहिया वाहन चालकों के ओवर स्पीडिंग में चालान काटे जा रहे हैं। जबकि मोटर वाहन अधिनियम में किसी भी दुपहिया वाहन का ओवर स्पीडिंग में चालान नहीं किया जा सकता। दरअसल ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान परिवहन विभाग द्वारा जारी नियमों के आधार पर किए जाते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने नियमों की जो मैपिंग अपने संसाधनों में की हुई है, वह गलत तरीके से करने के चलते दुपहिया के ओवरस्पीडिंग में चालान किए जा रहे हैं。 Gfx In ऐसे समझिए गलत चालान - वाहन संख्या RJ14WS9852 का 3 बार हुआ चालान - 27 मई 2026, 20 मई 2026 और 9 अप्रैल 2026 को चालान - इस मोटरसाइकिल के तीनों बार 1000-1000 रुपए के चालान हुए - मोटर वाहन अधिनियम के नियम 183(1)(1) का दिया गया हवाला - एक्सेस स्पीड बताते हुए प्रत्येक बार 1000 रुपए का चालान नियम क्या कहते हैं ? - एमवी एक्ट के नियम 183(1) (1) में दुपहिया वाहन का जिक्र नहीं - इस नियम में एलएमवी वाहनों के ओवरस्पीडिंग का है जिक्र - एलएमवी(कार, ट्रैक्टर) के ओवरस्पीड पर 1000 रुपए का चालान - 183(1)(2) में मध्यम व भारी वाहनों की ओवरस्पीडिंग का जिक्र - मध्यम व भारी वाहन के ओवर स्पीडिंग पर 2000 रुपए का चालान - सवाल यह कि क्या ट्रैफिक पुलिस ने कर रखी है नियमों की गलत मैपिंग? Gfx Out वीओ- 2 बड़ी बात यह है कि दुपहिया के चालानों में ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान के साथ एलएमवी लिखा जा रहा है, जबकि मोटर वाहन अधिनियम में दुपहिया और एलएमवी दोनों अलग-अलग श्रेणियां हैं। दुपहिया वाहन को एलएमवी श्रेणी में किसी भी स्थिति में गिना नहीं जा सकता। इस पूरे प्रकरण में बड़ी जिम्मेदारी परिवहन विभाग की भी है। दरअसल ट्रैफिक पुलिस द्वारा एमवी एक्ट से जुड़े नियमों में चालान परिवहन विभाग के गाइडेंस के आधार पर किए जाते हैं। लेकिन इस पूरे मामले में रोजाना शिकायतें मिलने के बावजूद भी परिवहन विभाग की नियम शाखा ने चुप्पी साधी हुई है। नियम शाखा के अधिकारियों के सुस्त रवैये से रोजाना दुपहिया वाहन चालक परेशान हो रहे हैं。 - काशीराम चौधरी जी मीडिया, जयपुर
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