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Rajan KushwahaRajan KushwahaFollow15 Nov 2024, 02:47 am
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किसान परेशान: तकनीक नहीं, न्याय चाहिए; टोकन-रसीद से खरीद शुरू करो

Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सोशल मीडिया पर पोस्ट खेत कट गए, मंडियां भर गईं… लेकिन किसान की झोली खाली है。 Server Down, Slot Booking बंद, नंबर नहीं आ रहा, किसान लाइन में खड़ा है, फिर भी अपना ही गेहूं नहीं बेच पा रहा。 मुख्यमंत्री जी हेलीकॉप्टर से निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर किसान का दर्द दिखाई नहीं दे रहा。 भाजपा सरकार की काग़ज़ी किसान नीति और बिचौलिया प्रेमी सिस्टम ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि मेहनत किसान करे और फायदा कोई और उठाए。 किसान को तकनीक नहीं, न्याय चाहिए, तत्काल टोकन और रसीद के आधार पर खरीदी शुरू करें。 वरना ये याद रखिए, किसान सब देख रहा है, और समय आने पर जवाब भी देगा।
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ईज़राइल-ईरान युद्ध के असर से लुधियाणा की साइकिल कीमतें 10-12% बढ़ने की संभावना

Ludhiana, Punjab:ਇਜਰਾਇਲ ਅਤੇ ਇਰਾਨ ਦੀ ਜੰਗ ਦਾ ਅਸਰ ਉਦਯੋਗ ਉੱਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਜਾਰੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਗ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸਟੀਲ ਪੇਂਟ ਅਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਏ ਵਾਧੇ ਦਾ ਅਸਰ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਵਿੱਚ 10 ਤੋਂ 12% ਵਾਧਾ ਪਹਿਲਾ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ 200 ਰੁਪਏ ਅਤੇ ਹੁਣ 100 ਰੁਪਏ ਹੋਰ ਵਾਧਾ ਕਰਨ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਗ ਤੇ ਇਸਰਾਇਲ ਅਤੇ ਇਰਾਨ ਦੀ ਜੰਗ ਦਾ ਅਸਰ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਖ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਪਤੀ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਕੁਝ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਸਟੀਲ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਅਤੇ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਪਾਰਟਸ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਰੇਟ 10 ਤੋਂ 12% ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਪਤੀ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਪਾਰਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਪਲਾਸਟਿਕ ਦਾਣੇ ਦੇ ਰੇਟ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਅਤੇ ਪੇਟ ਦੇ ਵਿੱਚ ਜੋ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਉਸਦਾ ਅਸਰ ਸਾਈਕਲ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਤੇ ਪਿਆ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਗ ਵੱਲੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਾਇਕਲ ਦੇ ਰੇਟ 200 ਰੁਪਏ ਵਧਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ। ਹੁਣ ਮੁੜ ਤੋਂ ਮੀਟਿੰਗ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਰਾਅ ਮਟੀਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਟ ਵਧ ਰਹੇ ਹਨ ਉਸ ਕਾਰਨ ਸਾਈਕਲ ਦੇ ਰੇਟ ਵਿੱਚ 100 ਵਾਧਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਾਈਕਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਮਟੀਰੀਅਲ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪਰਚੇਜ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਜਿੰਨੇ ਸਮਾਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਪੂਰਾ ਸਮਾਨ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ ਜੇਕਰ ਜਰੂਰਤ 50 ਟਨ ਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸਿਰਫ 20 ਟਨ ਹੀ ਮਿਲਦਾ ਉਦਯੋਗਪਤੀਆਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕੀ ਸਟਾਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਕਾਰਨ ਰੇਟ ਦੇ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਜਿਹੜੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ ਉਹ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਬਣਦੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਲੰਬੇ ਲੰਬੇ ਕੱਟ ਲੱਗਣ ਕਰਕੇ ਉਦਯੋਗ ਦੇ ਵਿੱਚ ਜਨਰੇਟਰ ਵਿੱਚ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਕੱਟ ਲੱਗਣ ਦਾ ਕੋਈ ਸਮਾਂ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਨਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਬੜੀ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਜੇਕਰ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਰਾਅ ਮਟੀਰੀਅਲ ਦੇ ਰੇਟ ਵੱਧਦੇ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਨਾ ਮਿਲੀ ਤਾਂ ਸਾਈਕਲ ਉਦਯੋਗ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਕਈ ਛੋਟੇ ਉਦਯੋਗ ਬੰਦ ਹੁਣ ਦੇ ਕਗਾਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਜਾਣਗੇ
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मानसा के भिखी में नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1.2 करोड़ की लागत, डॉक्टर-लैब-सहूलतें आएंगी

Bhikhi, Punjab:ਜਿਲਾ ਮਾਨਸਾ ਦੇ ਕਸਬਾ ਭੀਖੀ ਚ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਹੈਲਥ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਵਿਧਾਇਕ ਡਾ ਵਿਜੈ ਸਿੰਗਲਾ ਨੇ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਰੱਖਿਆ ਤੇ ਇਸਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਵਾਇਆ।ਇਸ ਅਰਬਨ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਹੈਲਥ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਰੱਖਣ ਮੌਕੇ ਬੋਲਦਿਆਂ ਵਿਧਾਇਕ ਡਾ ਵਿਜੈ ਸਿੰਗਲਾ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਕਰੀਬ 1 ਕਰੋੜ 20 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਇਸ ਹੈਲਥ ਸੈਂਟਰ ਚ ਡਾਕਟਰਾਂ,ਲੈਬ,ਆਈਪੀਡੀ ਤੇ ਹੋਰ ਸਹੂਲਤਾਂ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਈਆਂ ਜਾਣਗੀਆਂ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਸਿਹਤ ਸਿਸਟਮ ਤੇ ਫੋਕਸ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਮਜ਼ਬੂਤ ਵੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਸਦੇ ਇਲਾਵਾ ਭੀਖੀ ਦੇ ਹਸਪਤਾਲ ਦੀ ਮੁਰੰਮਤ ਆਦਿ ਕਰਵਾਈ ਜਾਵੇਗੀ।ਇਸ ਮੌਕੇ ਸਿਵਲ ਸਰਜਨ ਡਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਰਾਏ, ਐਕਸੀਅਨ ਪ੍ਰਤੀਕ ਆਦਿ ਸਿਹਤ ਕਰਮਚਾਰੀ ਹਾਜਰ ਸਨ ਬਾਈਟ ਡਾਕਟਰ ਵਿਜੇ ਸਿੰਗਲਾ ਐਮਐਲਏ ਮਾਨਸਾ
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बैतूल के मुलताई-आमला में फिर लगी आग, लगभग 500 एकड़ नरवाई जलकर खाक

Betul, Madhya Pradesh:बैतूल जिले में आग का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर मुलताई और आमला ब्लॉक से लगे गांवों में भीषण आग ने भारी तबाही मचा दी। मुलताई और आमला क्षेत्र के ससुंदरा और नहाइया गांव में अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 500 एकड़ खेतों में फैली नरवाई जलकर खाक हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि खेतों से लगे जंगल क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां भी बड़ा नुकसान हुआ। घटना की सूचना मिलते ही मुलताई, आमला और बैतूल से फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल कर्मियों को कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने में सफलता मिली। लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं से किसानों में दहशत का माहौल है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है,लेकिन प्रशासन सतर्कता बरतने की अपील कर रहा है।
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बेगमगंज हत्याकांड: सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

Raisen, Madhya Pradesh:रायसेन जिले मे बेगमगंज के प्रथम अपर सत्र न्यायालय न्यायाधीश श्रीमती सविता ओगले ने चर्चित बम्हौरी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए 7 आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया है। अपर लोक अभियोजक धीरेंद्र सिंह गौर ने बताया कि बेगमगंज न्यायालय ने सभी आरोपियों को धारा 302/149 भादवि के तहत आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही धारा 148 सहित अन्य धाराओं में भी अलग अलग सजा सुनाई गई है। अभियोजन के अनुसार,19 दिसंबर 2023 की रात करीब 8 बजे फरियादी संदीप केवट अपने मामा लेखराम के खेत से लौट रहा था। इसी दौरान उसने देखा कि आरोपीगण लेखराम केवट के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहे थे। आरोपियों ने लेखराम को जमीन पर गिराकर लात घूंसों और डंडों से पीटा। बीच बचाव करने पहुंचे फरियादी और उसके नाना रामचरण के साथ भी मारपीट की गई। गंभीर हालत में लेखराम को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। न्यायालय द्वारा आरोपी रघुवीर केवट,धर्मेंद्र केवट, महेंद्र केवट, प्रहलाद केवट, गोपाल केवट, धनीराम केवट एवं शोभराम केवट को दोषी पाते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई
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द्वारका गोल्फ कोर्स तालाब में तीन बच्चों की दर्दनाक डूबने से मौत

Delhi, Delhi:रिपोर्ट — द्वारका सेक्टर-24 स्थित गोल्फ कोर्स में वीरवार सुबह दर्दनाक हादसे में तीन मासूम बच्चों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। सुबह करीब 7:07 बजे पीसीआर कॉल मिलने के बाद सेक्टर-23 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृत बच्चों की उम्र करीब 8 से 11 साल बताई जा रही है। मौके पर बच्चों के कपड़े तालाब के बाहर मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि तीनों बच्चे नहाने के लिए तालाब में उतरे थे और हादसे का शिकार हो गए। मृतकों में से एक बच्चे की पहचान हर्ष के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, हर्ष दो दिन पहले अपने दोस्तों के घर जाने की बात कहकर निकला था। जिन दो दोस्तों के पास वह गया था, उनकी भी इस हादसे में मौत हो गई। तीनों बच्चे साथ में थे और एक साथ ही तालाब में डूब गए।
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EC की गलती पर TMC-BJP विरोध: स्ट्रॉन्ग रूम सील तोड़ने का मामला

Noida, Uttar Pradesh:KOLKATA (WEST BENGAL): TMC और BJP कार्यकर्ता STRONG ROOM के बाहर विरोध कर रहे थे। KUNAL GHOSH (TMC उम्मीदवार BELEGHATA विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र) S/B धरना खत्म करने के बाद, TMC लीडर कुणाल घोष ने कहा, 'आज जो हुआ वह EC की गलती है। यह तय हुआ था कि आज के बाद कोई भी स्ट्रॉन्ग रूम की सील नहीं तोड़ेगा और बिना ऑफिशियली बताए अंदर नहीं जाएगा। यह पहला फैसला था। आज जो हुआ वह गलत था। वहां और CCTV कैमरों की ज़रूरत है, वे मान गए हैं। यह स्क्रीन पर दिखना चाहिए। हमने उन्हें अपने ऑब्ज़र्वेशन के बारे में बता दिया है। धरना खत्म कर दिया गया है...हमारी टीम सब कुछ मॉनिटर करेगी। यह हमारा अधिकार है और हम सब कुछ कानूनी तौर पर करेंगे। हमारा कुछ भी गैर-कानूनी करने का इरादा नहीं है। जब वे कुछ गैर-कानूनी कर रहे थे तो हमने विरोध किया था। हमारा एक सवाल है, उन्होंने बिना बताए स्ट्रॉन्ग रूम की सील तोड़ दी और हम इसका विरोध कर रहे थे, BJP इतनी परेशान क्यों है?...इसका मतलब है कि उनके गलत इरादे थे.'
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जोधपुर हाईकोर्ट: ग्रामीण एमएस भूमि पर जलाशय कैचमेंट संरक्षित, अगली सुनवाई 21 मई 2026

Jodhpur, Rajasthan:जो़धपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में ग्रामीण एम्स परियोजना के लिए आवंटित भूमि को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जलाशय (नाड़ी) और उसके कैचमेंट एरिया के संरक्षण को लेकर गंभीरता दिखाई। न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ में याचिकाकर्ता रामचंद्र की ओर से पेश याचिका पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने कोर्ट को बताया कि जिस भूमि पर ग्रामीण एम्स स्थापित करने की योजना है, उसमें नाड़ी और उसका कैचमेंट क्षेत्र शामिल है। नियमों के अनुसार ऐसी भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को नजरअंदाज करते हुए परियोजना के लिए भूमि आवंटित की गई है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एन.एस. राजपुरोहित और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए कहा कि भूमि आवंटन से पहले पूरी जांच की गई है और संबंधित नाड़ी क्षेत्र को अलग रखा गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि आसपास अन्य सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद यह भूमि परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त पाई गई। कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद क्षेत्र का नक्शा और भूमि से जुड़ी विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए थे। साथ ही जिला कलेक्टर और जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा गया था। कोर्ट के आदेश पर जिला कलेक्टर आलोक रंजन और जेडीए आयुक्त उत्साह चौधरी कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करते हुए यह जानने का प्रयास किया कि प्रस्तावित भूमि में मौजूद जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को कैसे संरक्षित रखा जा सकता है। सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे मामले का पुनः परीक्षण करेंगे और जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र का पर्याप्त हिस्सा सुरक्षित रखते हुए उसे ग्रीन स्पेस के रूप में विकसित करने की संभावना तलाशेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जितनी भूमि कैचमेंट या हरित क्षेत्र के रूप में छोड़ी जाएगी, उतनी ही अतिरिक्त भूमि पास के खसरा क्षेत्र में ग्रामीण एम्स के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को निर्धारित की है。
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राजस्थान हाईकोर्ट: बैंच स्थापना के आदेश वापस लेने पर सरकार से स्पष्ट कारण मांगे

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान राज्य सूचना आयोग की जोधपुर में बैंच स्थापित करने के आदेश के बावजूद उसे लागू नहीं किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। वरिष्ठ न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम सुंदर लदरेचा ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 6 अप्रैल 2023 के बैंच स्थापना संबंधी आदेश को 28 अप्रैल 2025 को वापस ले लिया है। हालांकि, वे इस निर्णय के पीछे के ठोस कारण स्पष्ट नहीं कर सके। कोर्ट ने इस पर गंभीरता जताई, क्योंकि आदेश मात्र तीन पंक्तियों का है और उसमें कोई कारण दर्ज नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष व्यास ने दलील दी कि बैंच स्थापित करने का फैसला जनहित से जुड़ा है और इसे बिना कारण वापस लेना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से निर्णय के आधार स्पष्ट करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह अगली सुनवाई तक स्पष्ट जवाब पेश करे। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने RSRTC MD ट्रांसपोर्ट कमिश्नर पद पर साथ रहने पर रोक लगाई

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसपोर्ट विभाग में एक ही अधिकारी द्वारा दो महत्वपूर्ण पदों को एक साथ संभालने के मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद पर कार्य करने से फिलहाल रोक दिया है। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकलपीठ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद पर कार्य करने की रोक लगाई। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता मोहित सिंघवी द्वारा याचिका में 21 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरएसआरटीसी के एमडी पुरूषोत्तम शर्मा को अतिरिक्त रूप से ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का पद भी सौंपा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिंघवी ने तर्क दिया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 68(2) के तहत कोई भी व्यक्ति, जो किसी परिवहन उपक्रम में वित्तीय हित रखता हो, उसे राज्य या क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण का सदस्य नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में आरएसआरटीसी के एमडी का ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे पद पर रहने कानून के विपरीत है, क्योंकि निगम स्वयं एक सरकारी परिवहन उपक्रम है और उसका सीधा हित परिवहन गतिविधियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट में यह भी तर्क रखा गया कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राज्य में परिवहन व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है, जो सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों के कार्यों की निगरानी और नियंत्रण करता है। ऐसे में यदि वही व्यक्ति किसी परिवहन उपक्रम का प्रमुख भी हो, तो निष्पक्ष निर्णय लेने में हितों का टकराव होना स्वाभाविक है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य परिवहन प्राधिकरणों की निष्पक्षता बनाए रखना है, ताकि निजी और सरकारी ऑपरेटरों के बीच समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अकेले निर्णय लेने वाला प्राधिकारी नहीं है, बल्कि वह एक बोर्ड का हिस्सा होता है। हालांकि, वे इस तथ्य को नकार नहीं सके कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पास राज्य के सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों पर प्रभावी नियंत्रण होता है। मामले की गंभीरता को देखते ہوئے हाईकोर्ट ने फिलहाल संबंधित अधिकारी को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के रूप में कार्य करने से रोकते हुए 21 नवंबर 2025 के आदेश के संचालन पर अंतरिम स्थगन दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने केवल संबंधित अधिकारी पुरूषोत्तम शर्मा (प्रतिवादी संख्या 6) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 मई 2026 को सूचीबद्ध किया है।
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हाईकोर्ट ने RSRTC के MD को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर पद से रोक, अंतरिम स्थगन जारी

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसपोर्ट विभाग में एक ही अधिकारी द्वारा दो महत्वपूर्ण पदों को एक साथ संभालने के मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद पर कार्य करने से फिलहाल रोक दिया है। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकलपीठ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद पर कार्य करने की रोक लगाई। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता मोहित सिंघवी द्वारा yाचिका में 21 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरएसआरटीसी के एमडी पुरूषोत्तम शर्मा को अतिरिक्त रूप से ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का पद भी सौंपा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिंघवी ने तर्क दिया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 68(2) के तहत कोई भी व्यक्ति, जो किसी परिवहन उपक्रम में वित्तीय हित रखता हो, उसे राज्य या क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण का सदस्य नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में आरएसआरटीसी के एमडी का ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे पद पर रहना कानून के विपरीत है, क्योंकि निगम स्वयं एक सरकारी परिवहन उपक्रम है और उसका सीधा हित परिवहन गतिविधियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट में यह भी तर्क रखा गया कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राज्य में परिवहन व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है, जो सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों के कार्यों की निगरानी और नियंत्रण करता है। ऐसे में यदि वही व्यक्ति किसी परिवहन उपक्रम का प्रमुख भी हो, तो निष्पक्ष निर्णय लेने में हितों का टकराव होना स्वाभाविक है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य परिवहन प्राधिकरणों की निष्पक्षता बनाए रखना है, ताकि निजी और सरकारी ऑपरेटरों के बीच समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अकेले निर्णय लेने वाला प्राधिकारी नहीं है, बल्कि वह एक बोर्ड का हिस्सा होता है। हालांकि, वे इस तथ्य को नकार नहीं सके कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पास राज्य के सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों पर प्रभावी नियंत्रण होता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल संबंधित अधिकारी को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के रूप में कार्य करने से रोकते हुए 21 नवंबर 2025 के आदेश के संचालन पर अंतरिम स्थगन दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने केवल संबंधित अधिकारी पुरूषोत्तम शर्मा (प्रतिवादी संख्या 6) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 मई 2026 को सूचीबद्ध किया है。
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गोण्डा में 11,000 वोल्ट हाईटेंशन लाइन से दो बच्चों के झुलसने पर आक्रोश

Gonda, Uttar Pradesh:एंकर- खबर गोंडा से है। जहां गोंडा जिले में एक बार फिर से बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां आज बृहस्पतिवार रात 8:00 बजे के करीब परेटा ग्राम पंचायत के चिंता पुरवा गांव में अजीत कुमार तिवारी के घर से गई हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से उनके ही एक बेटे और एक बेटी आज गंभीर रूप से झुलस गए हैं. जिन्हें तत्काल परिजन इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसपुर लेकर पहुंचे जहां से हालत गंभीर होने पर गोंडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। गोंडा मेडिकल कॉलेज में 10 वर्षीय आदर्श और 7 वर्षीय आकांशा झुलसे हुए दोनों सगे भाई-बहन का गोंडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों द्वारा इलाज किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अजीत कुमार तिवारी के छत के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई हुई है और आज छत पर ही अजीत कुमार तिवारी के दोनों बच्चे खेल रहे थे खेलते खेलते ही हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से झुलस गए हैं।
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हापुड़ की सड़कों पर रीलबाज़ी मची मौत का खेलरो को डराने लगी: चालान के बाद भी कानून नहीं दिख रहा कड़ा

Hapur, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में रील बाजी का भूत युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है. सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज के चक्कर में ये रीलबाज़ न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि सड़कों पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं. हापुड़ जिले से सामने आईं अलग-अलग इन चार खबरों को जरा गौर से देख लीजिए, यह चारों तस्वीरें यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाती नज़र आ रही हैं. हापुड़ के दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर एक प्राइवेट बस चालक की बड़ी लापरवाही सामने आई है. साफ देखा जा सकता है कि बस के अंदर जगह न होने या अधिक कमाई के लालच में, सवारियों को बस की छत पर बैठाकर हाईवे पर दौड़ाया जा रहा है. जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हापुड़ पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एमवी एक्ट के तहत बस का 17,000 रुपये का चालान किया है. दूसरी तस्वीर भी इसी हाईवे की है, यहां एक युवक अपनी बुलेट पर खतरनाक स्टंट करते हुए रील बना रहा है. बिना हेलमेट और तेज रफ्तार में हाथ छोड़कर स्टंट करना इन युवाओं के लिए शौक बन गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसे रीलबाजों पर सिर्फ चालान नहीं, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. ऐसे ही हापुड़ के सिम्भावली क्षेत्र से एक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. यहाँ करीब आधा दर्जन कारें एक साथ स्टंट करती दिखाई दे रही हैं. कोई कार की छत पर बैठा है, तो कोई खिड़कियों से बाहर लटककर शोर मचा रहा है. यह रीलबाज़ी किसी भी वक्त बड़े हादसे में बदल सकती थी. हद तो तब हो गई जब गढ़ क्षेत्र के तहसील रोड पर एक ही बाइक पर 8 युवक सवार होकर निकलते दिखाई दिए. यातायात नियमों को ठेंगे पर रखकर इन युवाओं ने न सिर्फ बाइक की क्षमता का मजाक उड़ाया, बल्कि सड़क पर चलते हुए खतरनाक करतब भी दिखाए. इन चारों घटनाओं ने हापुड़ की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि पुलिस चालान की कार्रवाई कर रही है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर इन युवाओं में कानून का खौफ कब पैदा होगा?
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