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Rajan KushwahaRajan KushwahaFollow28 Apr 2025, 06:41 am
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सिंगरौली में अमलोरी ड्यूटी जा रहे युवक की दर्दनाक मौत, सुरक्षा पर सवाल

ADAjay DubeyJust now
Singrauli, Madhya Pradesh:सिंगरौली में अमलोरी ड्यूटी जा रहे युवक की दर्दनाक सड़क हादसे में मौत करसुआ निवासी असरफी लाल उर्फ जमाहिर जायसवाल की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत... खुटार-बनौली मार्ग पर तेज रफ्तार भारी वाहन बना काल सडक हादसे से दहला इलाका, मौके पर मची अफरा-तफरी परिजनों ने सड़क पर मृतक का शव रखकर करीब 12 घंटे तक किया हंगामा... 12 घंटे बाद प्रशासन की समझाइए के बाद मृतक का पीएम के लिए भेजा गया ट्रामा सेंटर... करसुआ निवासी युवक की मौत के बाद परिवार में पसरा मातम कोयला परिवहन के भारी वाहनों पर फिर उठे सुरक्षा व्यवस्था के सवाल हादसे के बाद आक्रोशित लोगों ने सड़क सुरक्षा की मांग उठाई लगातार हो रहे हादसों से सिंगरौली में लोगों के बीच बढ़ी दहशत भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
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तीन तलाक मामले में 72 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय में पेश

Maihar, Madhya Pradesh:मैहर जिले के ताला थाना क्षेत्र में तीन तलाक का एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने करीब एक वर्ष से फरार चल रहे आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब पीड़िता लंबे समय से न्याय की आस में पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रही थी। जानकारी के मुताबिक ताला थाना क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम बदरखा निवासी महिला तहरून निशा ने 18 अप्रैल 2026 को थाना ताला पहुंचकर अपने आरोपी पति फतेह मोहम्मद खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने विवाद के दौरान तीन बार तलाक बोलकर वैवाहिक संबंध समाप्त करने की बात कही और उसे घर से अलग कर दिया। पीड़िता का कहना था कि इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान थी और न्याय के लिए पुलिस की शरण में पहुंची। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुस्लिम महिला अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज किया। इस कानून के तहत एक साथ तीन तलाक देना दंडनीय अपराध माना गया है। प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार फरार चल रहा था जिससे उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीओपी Amrapatan ख्याति मिश्रा के नेतृत्व में थाना ताला पुलिस ने लगातार आरोपी की तलाश जारी रखी। आखिरकार थाना ताला प्रभारी निरीक्षक महेन्द्र मिश्रा की टीम ने 18 मई को आरोपी फतेह मोहम्मद खान (72 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया।
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Barabanki: फतेहपुर NHM संविदाकर्मियों को दो माह से नहीं मिला वेतनः काली पट्टी बांधकर विरोध l

NNitinFollow8m ago
Barabanki, Uttar Pradesh:बाराबंकी के फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों ने दो माह से मानदेय न मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर शासन-प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 20 मई तक बकाया वेतन जारी नहीं किया गया, तो 21 मई से पूरे जनपद में 'नो पे-नो वर्क' नीति के तहत कार्य बहिष्कार किया जाएगा। कर्मचारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों को मार्च और अप्रैल का मानदेय अब तक नहीं मिला है। लगातार दो माह से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों ने घर का खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, फीस तथा किताबों की व्यवस्था करने में आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में विद्यालयों का नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में बच्चों की फीस जमा करने, पुस्तकें खरीदने और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाएं करने के लिए धन की अत्यधिक आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण प्रदेश भर के संविदा कर्मियों में भारी असंतोष है। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है। कर्मचारियों ने मांग की है कि सभी एनएचएम संविदा कर्मचारियों का लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सके। उ०प्र० राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (पंजीकृत) के आह्वान पर किए गए इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ, तो 21 मई से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह, महिला मंत्री रीता मिश्रा, डॉ. आशीष कुमार, शिव विशाल, आनंद वाजपेयी, अखिलेश कुमार, अमित चतुर्वेदी, ललित कुमार, कन्हैया चौधरी, भानू मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
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बुलेट का जवाब बुलेट से: श्रवण राम हत्यारे की गिरफ्तारी सुनिश्चित करेगी सरकार

Darbhanga, Bihar:दरभंगा में हसन चक में छिनतई के दौरान अपराधियों के विरोध करने के दौरान 13 मई को अपराधियों की गोली का शिकार हुए श्रवण राम के परिवार को आज सरकार की ओर से सहायता राशि प्रदान की गई। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं दरभंगा नगर विधायक संजय सरावगी ने मृतक की पत्नी को दो लाख रुपये का चेक सौंपा और परिवार को हर संभव न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस मौके पर संजय सरावगी ने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि बिहार में अब 'बुलेट का जवाब बुलेट से' दिया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि श्रवण राम के हत्यारे को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उसे 'पाताल से भी ढूंढकर' कानून के कटघरे में लाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। दोषियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। वहीं विपक्ष पर निशाना साधते हुए सरावगी ने कहा कि जो लोग पहले अपराधियों को संरक्षण देते थे, वही आज पीड़ित परिवार के घर जाकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
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हाईकोर्ट: नाता प्रथा कानून से ऊपर नहीं, पहली पत्नी रहते दूसरी शादी अवैध

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नाता प्रथा के नाम पर पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो पति स्वयं वैवाहिक संबंध तोड़ने के लिए जिम्मेदार हो, वह बाद में पत्नी पर क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाकर तलाक नहीं मांग सकता। जस्टिस अरूण मोंगा व जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने राजसमंद फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें लक्ष्मीलाल की तलाक याचिका खारिज की गई थी। मामले के अनुसार लक्ष्मीलाल और पार्वती का विवाह वर्ष 1992 में हुआ था। दोनों सरकारी शिक्षक थे और नौकरी के कारण अलग-अलग स्थानों पर पदस्थापित रहे। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी लंबे समय से उससे अलग रह रही है और उसके साथ वैवाहिक संबंध निभाने को तैयार नहीं है। इसी आधार पर उसने क्रूरता और परित्याग का हवाला देते हुए तलाक की मांग की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पति ने वर्ष 1997 में कृष्णा नाम की महिला से नाता संबंध स्थापित कर लिया था। पति ने दावा किया कि पहली पत्नी की सहमति से यह संबंध बना था, लेकिन पत्नी ने इसे गलत बताते हुए कहा कि पति ने उसे छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहना शुरू कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी पूरी तरह अवैध है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नाता जैसी प्रथा कानून से ऊपर नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने खुद अपनी वैवाहिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है, तो वह अपनी गलती का लाभ उठाकर न्यायालय से राहत नहीं मांग सकता। खंडपीठ ने यह भी कहा कि पत्नी का पति के साथ रहने से इनकार करना स्वाभाविक था, क्योंकि पति दूसरी महिला के साथ रह रहा था और उसके बच्चों का पिता भी बन चुका था। ऐसे में पत्नी का अलग रहना परित्याग नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने नाता प्रथा पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इस व्यवस्था से महिलाओं के अधिकार प्रभावित होते हैं। पहली पत्नी कानूनी रूप से विवाह में बंधी रहती है, जबकि दूसरी महिला को भी वैधानिक अधिकार नहीं मिलते। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथाएं महिलाओं की गरिमा और समानता के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। अंत में हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम एक पत्नी प्रथा, समानता और कानूनी जवाबदेही के सिद्धांत पर आधारित है और किसी भी प्रथा के नाम पर इसे कमजोर नहीं किया जा सकता।
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राजस्थान HC ने मेरिट के आधार गृह जिले में पोस्टिंग पुनर्विचार के निर्देश दिए

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश कुलदीप माथुर की बेंच ने शिक्षक भर्ती में पोस्टिंग के दौरान मेरिट की अनदेखी के मामले में राज्य सरकार को याचिकाकर्ता के प्रकरण पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। मामला शिक्षक ग्रेड-III लेवल-II (अंग्रेजी विषय) भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अमित कुमार ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि पोस्टिंग के समय उनकी मेरिट को नजरअंदाज किया गया, जबकि उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले में नियुक्ति दे दी गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पुना राम सेन ने कोर्ट में पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि नियुक्तियां सरकार की निर्धारित गाइडलाइन और मेरिट के आधार पर ही की गई हैं तथा किसी प्रकार का नियम उल्लंघन नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकार ने मेरिट के आधार पर गृह जिले में पोस्टिंग देने की नीति बनाई है तो उसका समान रूप से पालन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की मेरिट स्थिति का दोबारा परीक्षण किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को गृह जिले में समायोजित किया गया है तो तीन माह के भीतर त्रुटि में सुधार किया जाए। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले से दी गई नियुक्तियों को प्रभावित नहीं किया जाएगा।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगरेप केस में दो आरोपियों को बरी कर दिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित गैंगरेप मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया। जस्टिस विनीत कुमार माथुर व जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने आरोपी अपीलार्थी विक्रम सिंह और वीर सिंह उर्फ बंटी की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा तथा जांच और साक्ष्यों में कई गंभीर विरोधाभास पाए गए। आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने दोनों को आईपीसी की धारा 343 और 376डी के तहत दोषी ठहराया था। मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में उसे राजगढ़ से बहाने से जयपुर ले जाकर कई लोगों ने दुष्कर्म किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता के शुरुआती बयान और बाद में दर्ज एफआईआर में काफी अंतर था। कोर्ट ने कहा कि बरामदगी के तुरंत बाद दिए गए बयान में पीड़िता ने स्वयं घर छोड़कर जाने और किसी अप्रिय घटना से इनकार किया था। कोर्ट ने यह भी माना कि मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले और एफएसएल रिपोर्ट से भी आरोपियों के खिलाफ ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आए। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि एफआईआर में दर्ज कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए। खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष स्वतंत्र गवाह, सीसीटीवी फुटेज और कथित वीडियो जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। ऐसे में आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों की दोषसिद्धि रद्द करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए。
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