icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
न्यूज़ क्रिएटर बनें

आपकी स्थानीय कहानियाँ, आपकी आवाज़

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back
Pinewz
271002
KAILASH NATH VERMAKAILASH NATH VERMAFollow14 Jan 2025, 11:50 am

GONDA-जिला अस्पताल बना गंदगी का अस्पताल,स्वास्थ्य विभाग सो रहा कुंभकर्णी नींद

Gonda, Uttar Pradesh:

गोंडा के जिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज देवीपाटन मंडल के अधीन हो गया है लेकिन जब से यह मेडिकल कॉलेज के अधीन हुआ है तब से अस्पताल में समस्याओं का अंबार लग गया है। चाहे अस्पताल में दवा की बात हो या फिर मरहम पट्टी की बात हो या किसी सामान की बात हो सब मेडिकल कॉलेज के आदेश पर ही निर्गत किया जाता है।यहां की सबसे बड़ी समस्या अस्पताल में घुसने के बाद क्षेत्रीय निदान केंद्र के पास की है जहां खून,पेशाब सहित अन्य रोगों की जांच,एक्सरे, सिटी स्कैन होता है। वही बगल में डायलिसिस केंद्र है…लेकिन चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है और लोग इसमें ही इलाज कराने को मजबूर है।

0
0
Report

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

Advertisement
Advertisement

बेगूं के राघव सोनी का पार्थिव शव कनाडा से पहुंचा, शोक लेकिन श्रद्धांजलि

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं निवासी प्रकाश सोनी के पुत्र और कंप्यूटर इंजीनियर राघव सोनी की पार्थिव देह 14 दिन बाद कनाडा से उनके गृह नगर पहुंची। राघव की 11 अप्रैल को बोटिंग के दौरान डूबने से मृत्यु हो गई थी। पार्थिव देह को भारत लाने में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ सहित जनप्रतिनिधियों के प्रयास अहम रहे। जैसे ही पार्थिव देह बेगूं पहुंची, पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान बहनों ने राघव की कलाई पर राखी बांधकर भावुक श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी。
0
0
Report
Advertisement
Advertisement

जमुई: एंबुलेंस में ईंधन नहीं, मरीज की मौत; चालक निलंबित, कार्रवाई की मांग

Jamui, Bihar:जमुई जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है,जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस में ईंधन नहीं होने के कारण एक मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है। मृतक धीरज रविदास के पुत्र अजीत कुमार रविदास ने सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह को दिए आवेदन में साफ तौर पर एंबुलेंस कर्मियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि एंबुलेंस में तेल नहीं था, तो मरीज को जमुई से रेफर ही क्यों किया गया? क्या मरीज की जान की कोई कीमत नहीं थी?परिजनों के मुताबिक,जमुई से सिकंदरा के बीच कई पेट्रोल पंप मौजूद हैं, लेकिन चालक ने कहीं भी गाड़ी में ईंधन नहीं भरवाया। करीब 25 किलोमीटर चलने के बाद एंबुलेंस बीच रास्ते में बंद हो गई। चिलचिलाती धूप में मरीज एंबुलेंस के अंदर तड़पता रहा और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सेवा बिना बुनियादी तैयारी के चलाई जा रही है? क्या मरीजों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी गई है? मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. Ashok कुमार सिंह ने जांच का भरोसा दिया है और चालक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एंबुलेंस का संचालन पटना स्तर से होता है और इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ निलंबन इस मौत का जवाब है? इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक एंबुलेंस चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होना और गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है। क्या किसी की जान जाने के बाद भी सिस्टम इसी तरह सुस्त रहेगा? इस मामले ने सामाजिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। मृतक दलित समाज से थे, ऐसे में यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। परिजनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सदर अस्पताल में आंदोलन करेंगे। अब नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top