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NAGESHWER NATH SINGHNAGESHWER NATH SINGHFollow28 Jan 2025, 09:27 am
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दमोह कलेक्टर के बंगले के बेडरूम ड्रॉज़ से मिला मोबाइल: बड़ा खुलासा

Damoh, Madhya Pradesh:दमोह के कलेक्टर के साथ ये क्या हो रहा? पहले आफिस के टेलीफोन से जासूसी अब घर के बेडरूम की दराज़ में मिला मोबाइल फोन.. एंकर/ एमपी के दमोह में जिले के कलेक्टर के साथ पोस्टिंग के बाद से कुछ न कुछ ऐसा घट रहा है जो चौंकाने वाला है जो अचरज में डालता है और कई सवाल तो खड़े करता ही है और कहीं न कहीं सोचने को भी मजबूर करता है कि आखिर इन कलेक्टर के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। दमोह जिले में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की पोस्टिंग के कुछ दिन बाद ही एक बड़ा खुलासा हुआ जब उनकी जासूसी की जा रही थी जासूसी उनके आफिस में हो रही थी और जासूसी का जरिया था टेलीफोन का इंटर कॉम, ये इंटर कॉम उनके स्टेनो रूम में था, कलेक्टर यादव ने फिल्मी अंदाज में खुद डिडेक्टिव बनकर इस सब का खुलासा किया। दरअसल डीएम एक दफ्तर का औचक निरीक्षण करने जाने वाले थे ये बात उन्हें ही मालूम थी लेकिन जिस दफ्तर को वो जाने वाले थे उसके अफसर तक खबर पहुंच गई और डीएम को शक हुआ और कुछ ही मिनटों में उन्होंने पकड़ लिया कि उनके चेंबर में लगे टेलीफोन के जरिए उनकी सारी बातें स्टेनो रूम में सुनी जा रही थी, उन्होंने दोनों जगहों के टेलीफोन सील कराए और जांच के लिए भेजे, उन्होंने अपने स्टाफ को भी तत्काल बदल डाला। इस मामले में चारों तरफ चर्चा का बाजार गर्म किया और अभी ये मामला शांत भी नहीं हुआ कि एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस बार कलेक्टर के बंगले में उनके बेडरूम में बनी दराज़ में एक मोबाइल फोन मिला है, इस फोन के मिलने के बाद खुद कलेक्टर और उनका परिवार आश्चर्यचकित रह गया कि आखिर उनके रूम तक ये फोन आया कैसे। खुद कलेक्टर यादव ने इस घटनाक्रम का खुलासा किया और बताया कि बंगले में शिफ्टिंग के बाद उन्होंने अपने बेडरूम में बनी एक दराज को खोला तो उसमें पुराना अखबार लगा था उस पेपर को हटाया तो उसके नीचे एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन था, कलेक्टर हैरान रह गए, बंगले के स्टाफ से पूछा गया लेकिन किसी ने उसे अपना नहीं बताया, वो उस मोबाइल को लेकर अपने ऑफिस पहुंचे और तमाम अधिकारियों कर्मचारियों से पता किया लेकिन किसी ने ये नहीं कहा कि फोन उनका है, जिसके बाद मोबाइल एक्सपर्ट को बुलाया गया और फोन चालू हुआ तो उसमें एक बच्ची की फोटो थी, इस फोटो को पहचानने के लिए स्टाफ से कहा गया तो मालूम चला कि ये फोन पांच साल पहले दमोह में कलेक्टर रहे एस कृष्ण चैतन्य का है। कलेक्टर पहले से ही यहां पदस्थ रहे कलेक्टर्स से फोन लगा लगा कर पता कर रहे थे और जब जरा मालूम चला तो उन्होंने पूर्व कलेक्टर चैतन्य से बात की और उन्होंने बताया कि फोन उनका ही है। अब सवाल यही कि जिस बंगले में नया कलेक्टर आता है वो यहां शिफ्ट होने से पहले अपने हिसाब से बंगले को साफ कराता है रंग रोगन और साफ सफाई भी कराता है और स्वाभाविक है कि बेडरूम भी साफ होता होगा और वो दराज़ भी जिसमें मोबाइल मिला है लेकिन किसी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी जबकि जिन कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य का ये मोबाइल बताया जा रहा है उनके बाद तीन कलेक्टर बदल गए। इस गंभीर मामले में कलेक्टर ने खुद सब कुछ बताया और कहा कि ये घटना सामान्य नहीं बल्कि गंभीर है और चिंता में डालती है। उन्होंने पिछली घटना यानी आफिस में जासूसी कांड का जिक्र करते हुए कहा को इस घटना ने प्रदेश और देश में अधिकारियों को सतर्क किया है कई कलेक्टर्स ने अपना स्टाफ बदल दिया है और अपने अपने टेलीफोन भी बदलवाए है , इस बार मामला पेंचीदा है लिहाजा डीएम ने बारीकी से जांच कराए जाने की बात कही है और अब इस दूसरे मामले ने उनकी जरा चिंता बड़ा दी है। अब देखना होगा कि टेलीफोन कांड के बाद मोबाइल कांड पर क्या कार्यवाही होती है。 बाइट/प्रताप नारायण यादव ( कलेक्टर दमोह)
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उमर अब्दुल्ला ने विपक्ष पर तंज कसकर बैठक दाचीगाम अभयारण्य में शिफ्ट कर दी

Chaka, उमर अब्दुल्ला ने विपक्ष पर एक मज़ाकिया तंज कसा। उन्होंने विधायकों की एक अहम बैठक को एक सैर-सपाटे में बदल दिया, और बैठक अपने घर के बजाय दाचीगाम वन्यजीव अभयारण्य में रखी। NC विधायकों की अहम रणनीति बैठक को उमर अब्दुल्ला ने विपक्ष पर एक व्यंग्यात्मक हमले में बदल दिया, जब उन्होंने अपनी विधायकों की बैठक गुपकार से दाचीगाम वन्यजीव अभयारण्य में शिफ़्ट कर दी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के साथ अपनी तय बैठक करते हुए विपक्ष पर एक व्यंग्यात्मक हमला किया, जब उन्होंने अपनी गुपकार वाली रिहाइश से बैठक को दाचीगाम वन्यजीव अभयारण्य में शिफ़्ट कर दिया। सभी को चौंकाते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक SRTC की गाड़ियों में सवार होकर दाचीगाम नेशनल पार्क की ओर निकल पड़े, ताकि पिछले 19 महीनों में NC के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज का जायज़ा ले सकें। उमर अब्दुल्ला की रिहाइश पर तब अफरा-तफरी मच गई, जब विधायक, सांसद और मंत्री—जो विधायी दल की बैठक के लिए जमा हुए थे—SRTC की गाड़ियों में ठूस-ठूसकर बैठ गए और एक साथ लोक भवन और LG के दफ़्तर की ओर निकल पड़े। नतीजतन, सभी ने यह मान लिया कि उमर शायद LG के दफ़्तर अपना इस्तीफ़ा देने जा रहे हैं। इससे मीडिया और आम जनता, दोनों में ही हड़कंप मच गया। जब सभी इस काफ़िले का पीछा करने के लिए अपनी-अपनी गाड़ियों में भाग-दौड़ करने लगे, तो उमर ने X पर एक पोस्ट करके सारी अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा, “मुझे आपको निराश करने का अफ़सोस है, लेकिन इसे ‘आखिरी पल में शिफ़्ट’ नहीं किया गया है। मेरा इरादा हमेशा से ही इस बैठक को बाहर (ऑफ-साइट) करने का था, और सभी इंतज़ाम—उस जगह पर जिसे मैंने शुरू में ही चुना था—कई दिन पहले ही कर लिए गए थे.” जगह में अचानक हुए इस बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में दिलचस्पी जगा दी, क्योंकि इस बैठक को सरकारी रणनीति, शासन की प्राथमिकताओं और विधायकों तथा सत्ताधारी गठबंधन के प्रतिनिधियों के बीच तालमेल से जुड़ी एक अहम चर्चा के तौर पर देखा जा रहा था। इससे पहले विपक्ष, खासकर विपक्ष के नेता (LoP) सुनील शर्मा ने कहा था कि यह बैठक उमर सरकार की आखिरी बैठक होगी। उन्होंने एक दिन पहले कहा था, "उमर अपने 'डूबते जहाज़' को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं, और बहुत जल्द आप सुनेंगे कि सरकार गिर गई है." शर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार और NC (नेशनल कॉन्फ्रेंस) पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। यह बैठक सरकार को बचाने की आखिरी कोशिश साबित होगी (जिसे शर्मा ने 'डूबता जहाज़' कहा था)। अपने दावे को दोहराते हुए शर्मा ने ऐलान किया, "यह सरकार अंदर से पहले ही टूट चुकी है; अब बस खबर बाहर आने में थोड़ा ही समय बाकी है, और बहुत जल्द—मीडिया चैनलों के ज़रिए—हम सुनेंगे कि इस सरकार का अब कोई वजूद नहीं रहा." हालांकि, उमर के घर जमा हुए NC विधायकों ने कहा कि यह एक आम बैठक है और यह स्थानीय BJP इकाई है जो बेवजह शोर मचा रही है। BYTE गुरेज़ के विधायक नज़ीर गुरेज़ी ने कहा, "यह एक आम बैठक है, पार्टी में कोई फूट नहीं है, सब कुछ ठीक है." जब उनसे BJP के दावों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "यह स्थानीय BJP इकाई है जो बेवजह शोर मचा रही है." इस बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े अहम प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी। ग़ौरतलब है कि इस बैठक में अलायन्स पार्टनर कांग्रेस मजीद नहीं है ना ही एनसी के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला हैं कहा जाता है कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है।
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रत्नागिरी के स्थानीय चुनाव: 12 में सभी आवेदन वैध, गुरुवार तक माघार अंतिम

Ratnagiri, Maharashtra:रत्नागिरी..कोकण स्थानिक स्वराज्य संस्था निवडणूक: सर्व १२ अर्ज वैध; गुरुवारी कोण माघार घेणार? रायगड-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग स्थानिक प्राधिकारी मतदारसंघाच्या विधान परिषद निवडणुकीत मोठी घडामोड समोर आली आहे.. मंगळवारी झालेल्या छाननीत दाखल झालेले सर्व ६ उमेदवारांचे एकूण १२ अर्ज वैध ठरले आहेत,अशी माहिती निवडणूक निर्णय अधिकारी मनुज जिंदल यांनी दिली. आता सर्वांचे लक्ष उद्या,गुरुवार ४ जून या अर्ज मागे घेण्याच्या अंतिम मुदतीकडे लागले आहे.त्यामुळे अखेरच्या दिवशी कोण माघार घेणार आणि निवडणुकीचे अंतिम चित्र काय असणार,याबाबत कोकणवासीयांची उत्सुकता शिगेला पोहोचली आहे.
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अरावली संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट की नई कमेटी जल्द देगी स्पष्ट नीति

Noida, Uttar Pradesh:अरावली की सीमा से खनन तक, हर सवाल का जवाब खोजेगी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित नई कमेटी अरावली पर्वतमाला की एक समान और स्पष्ट परिभाषा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी केंद्र सरकार की कमेटी की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी भविष्य में खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने और अरावली के संरक्षण के लिए सुझाव देगी। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। नई कमेटी में कौन कौन शामिल हैं सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित इस कमेटी की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी करेगी। कमेटी में विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया है। इनमे भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के पूर्व महानिदेशक सुभाष अशुतोष, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ( GSI) के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव बृज मोहन सिंह राठौड़ और दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अशोक के. भटनागर शामिल है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने IIHS बेंगलुरु से जुड़े पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रो. लक्ष्मीकांत शर्मा को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया है。 कमेटी की अध्यक्ष ज़रूरत पड़ने पर इन एक्सपर्ट से भी सुझाव ले सकती हैं。 नए कमेटी की ज़रूरत क्यों पड़ी! 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अमल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अरावली जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र के बारे में फैसला लेने से पहले स्वतंत्र एक्सपर्ट की ओर से दोबारा जांच जरूरी है।कोर्ट का मानना था कि केंद्र सरकार की कमेटी की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अस्पष्टताएँ हैं, जिन्हें स्पष्ट करना ज़रूरी है。 कमेटी किन मुद्दों की जांच करेगी? सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित यह हाई पावर कमेटी अरावली पर्वत की परिभाषा से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच करेगी। केंद्र सरकार की कमेटी पुरानी रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि दो या अधिक पहाड़ियाँ एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर हैं, तभी उन्हें अरावली रेंज माना जाएगा। नई कमेटी इसकी जांच कर अपने निष्कर्ष देगी कि इस परिभाषा को मानने से कहीं अरावली की कई पहाड़ियाँ संरक्षण से दायरे से बाहर तो नहीं हो जाएगी जिसके चलते वहाँ अवैध खनन और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियाँ को बढ़ावा तो नहीं मिलेगा。 खनन की इजाज़त कहाँ हो कमेटी भी तय करेगी कि यदि दो अरावली पहाड़ियाँ 500 मीटर से अधिक दूरी पर हों, लेकिन वे पारिस्थितिक रूप से एक ही प्राकृतिक प्रणाली का हिस्सा हों, तो क्या उन्हें भी अरावली माना जाना चाहिए? कमेटी को तय करना है कि क्या ऐसी पहाड़ियों के बीच के क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं。 100 मीटर की ऊँचाई वाले मापदंड को परखेगी कमेटी केंद्र सरकार की कमेटी की पुरानी रिपोर्ट में कहा गया था कि केवल वही पहाड़ियाँ अरावली मानी जाएँगी जिनकी ऊँचाई आसपास के क्षेत्र से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। माना जाता है कि राजस्थान में कुल 12,081 पहाड़ियाँ हैं।इनमें से केवल 1,048 पहाड़ियाँ ही इस 100 मीटर वाले मानदंड को पूरा करती हैं। ऐसे में कमेटी तय करना है कि क्या यह आंकड़ा वास्तव में सही है?क्या इस परिभाषा को मानने से हजारों छोटी पहाड़ियाँ संरक्षण से बाहर हो जाएँगी? कमेटी यह भी आकलन करेगी कि वर्तमान पर्यावरणीय नियम अरावली के संरक्षण के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। यदि जरूरत पड़ी तो नए नियमों और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की भी सिफारिश की जाएगी।
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हजारीबाग के शेख भिखारी अस्पताल में अंधेरा, इलाज प्रभावित; उपायुक्त सुधार का भरोसा

Hazaribagh, Jharkhand:हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल जब आप जाएंगे तो ऐसा महसूस करेंगे कि किसी सदियों पुराने अस्पताल में आप अपना इलाज करवाने आए हैं l ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यहां की व्यवस्थाएं ही कुछ ऐसी बना दी गई है जिससे हजारीबाग के 17 लाख लोग जो इस एकमात्र अस्पताल पर निर्भर हैं उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है l एक तरफ हजारीबाग में बिजली की व्यवस्था ऐसी चरमराई हुई है की हजारीबाग के लोगों को 15 घंटे भी बिजली बामुश्किल ही मिल पाती है इस पर जिला प्रशासन हजारीबाग का ध्यान नहीं है वहीं दूसरी तरफ कल की घटना आपको बताएं तो कल रात में शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बिजली एकाएक गुल हो गई जिसके बाद पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब गया l इलाज कराने आए लोग, उनके परिजन और साथ में स्वास्थ्य कर्मी भी परेशान दिखे l टोर्च की रोशनी में लोगों का इलाज करते देखा गया है जिसकी पूरी घटना कमरे में कैद है l इस पूरे जानकारी के बाद आज हजारीबाग के उपायुक्त शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने सभी चीजों का निरीक्षण किया है और मीडिया के समक्ष बताया कि अस्पताल में काफी अनियमितता हैं जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा l दो-दो सोलर प्लांट्स लगे हुए हैं जो की सही से कार्य नहीं कर रहे हैं इसके लिए भी टीम आज बुलाई गई है दो से दिन तीन दिनों में उसे भी ठीक कर दिया जाएगा उनका कहना है कि मरीज के साथ-साथ उनके परिजनों के लिए भी यहां व्यवस्थाएं नहीं है l पीने का पानी, बैठने की सुविधा एवं पंखा नहीं है जिसे भी जल्द से जल्द सुचारु करने का निर्देश दिया गया है l आज सभी विभाग के पदाधिकारी के साथ हमारी बैठक है जल्द से जल्द सभी चीजों को सुचारू रूप से सही कर लिया जाएगा l Byte हेमंत सती (उपायुक्त हजारीबाग)
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बेगूसराय तेतरी में प्रसव के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने लापरवाही का आरोप

Begusarai, Bihar:बेगूसराय तेतरी में प्रसव के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने लापरवाही का आरोप। अस्पताल परिसर में परिजनों ने इलाज में लापरवाही और पैसे की मांग का आरोप लगाते हुए डॉक्टर और नर्सों को घंटों बंधक बनाए रखा। मामला डंडारी प्रखंड के तेतरी पीएचसी अस्पताल का है। बेगूसराय के डंडारी थाना क्षेत्र स्थित तेतरी पीएचसी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान मोहनपुर वार्ड संख्या-1 निवासी नीतीश सदा की पत्नी प्रीति कुमारी के रूप में की गई है। महिला की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया गया। परिजनों का आरोप है कि प्रीति कुमारी को पेट में दर्द होने के बाद प्रसव के लिए तेतरी पीएचसी अस्पताल लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद दो नर्सों ने पहले चार हजार रुपये की मांग की। परिजनों का कहना है कि पैसे नहीं देने पर महिला के इलाज में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण प्रसव के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार महिला ने बच्चे को जन्म तो दे दिया, लेकिन उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। उनका आरोप है कि जब महिला की स्थिति गंभीर हुई तो उसे रेफर कर दिया गया, लेकिन न तो समय पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और न ही आवश्यक चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई। परिजनों का दावा है कि रेफर किए जाने से पहले ही महिला की मौत हो चुकी थी। इस घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में घुसकर जमकर हंगामा किया और डॉक्टर और नर्सों को घंटों बंधक बनाए रखा। हंगामे के कारण अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना की सूचना मिलते ही डंडारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल महिला की मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं。
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मुুখंदपुर में आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध शराब भट्ठियाँ ध्वस्त

Jaspur, Uttarakhand:काशीपुर क्षेत्र के ग्राम मुकुंदपुर में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ विशेष सघन प्रवर्तन अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान नदी किनारे संचालित अवैध शराब की भट्ठियों को चिन्हित कर जेसीबी की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। आबकारी आयुक्त उत्तराखंड एवं जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के निर्देश पर संयुक्त आबकारी आयुक्त प्रदीप कुमार के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। अभियान का नेतृत्व सहायक आबकारी आयुक्त एन.आर. जोशी ने किया। कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग ने पांच अभियोग पंजीकृत किए। मौके से लगभग 450 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई, जबकि शराब बनाने के लिए तैयार किए गए करीब 20 हजार किलोग्राम लहन को नष्ट किया गया। आबकारी विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की सहायता से सभी अवैध भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया। अभियान में काशीपुर क्षेत्रीय आबकारी टीम के अलावा कुमाऊं मंडल एवं जनपद ऊधम सिंह नगर के प्रवर्तन दल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सहयोग किया। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार सख्त अभियान जारी रहेगा।
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संभल में 48 साल बाद दंगा पीड़ित परिवार को पुनर्वास का इंतजार खत्म

Sambhal, Uttar Pradesh:लोकेशन संभल संभल । संभल में 1978 के दंगे के पीड़ित परिवार की 48 साल बाद संभल होगी वापसी । सी एम योगी की पहल पर प्रशासन 1978 के दंगा पीड़ित परिवार का 48 साल बाद कराएगा पुनर्वास । प्रशासन ने 1978 के दंगों में मारे गए राम शरण दास रस्तोगी के परिवार की संभल में पुनर्वास के लिए शेर खा सराय में 100 गज जमीन आवंटित की । दंगा पीड़ित परिवार को भूमि का आवंटन पत्र सौंपे जाने के लिए कार्यक्रम की तैयारी में जुटा प्रशासन । danga पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए प्रशासन ने अवैध कब्रिस्तान की भूमि पर बुलडोजर चलवाकर खाली करवाया । डीएम अंकित खंडेलवाल कल राम शरण दास रस्तोगी के पौत्र कपिल को सौंपेगे जमीन का आवंटन पत्र । dंगा पीड़ित परिवार ने पुर्नवास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी।
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बस्तर में फॉर्मर आईडी से किसानों को ऑनलाइन खाद; 24 दुकानों को नोटिस, 21 पर रोक

Jagdalpur, Chhattisgarh:बस्तर जिले में किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए अब फॉर्मर आईडी के जरिए ऑनलाइन माध्यम से रासायनिक खाद की बिक्री होगी, सहकारिता विभाग द्वारा संचालित लैंप्स एवं निजी दुकानों से रासायनिक खाद खरीदने के लिए किसानों को फॉर्मर आईडी बनवाना अनिवार्य होगा, कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया किसानों के रकबा की जानकारी के आधार पर फॉर्मर आईडी तैयार की जा रही है, लैंप्स एवं निजी दुकानों में जाकर पॉश मशीन के जरिए किसान रसानीय खाद की खरीदी कर सकेंगे, कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से फॉर्मर आईडी बनाने का आदेश जारी किया है अब तक जिले में 86 हजार से अधिक किसानों ने फॉर्मर आईडी बनवा ली है, वहीं जिले 61 लैंप्स और 125 निजी दुकानों में पॉश मशीन को अनिवार्य कर दिया गया है, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को खाद बीज आसानी से उपलब्ध हो यह सुनिश्चित करने का काम विभाग कर रहा है इसलिए भी खाद बीज बिक्री करने में अनियमितता बरतने वाले दुकान संचालकों पर सख्ती भी विभाग ने दिखाई है इस साल 24 दुकानों को नोटिस जारी किया गया है जबकि 21 दुकानों पर विक्रय प्रतिबंध भी लगाया गया है
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Barabanki:दशकों प्रदेश पर राज करने वाली सपा,बसपा,कांग्रेस को पसमांदा मुसलमान कभी नजर नही आया: वसीम

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Barabanki, Uttar Pradesh:बाराबंकी। दशकों प्रदेश पर राज करने वाली सपा,बसपा,कांग्रेस को पसमांदा मुसलमान कभी नजर नही आया। इसके बावजूद पसमांदा मुसलमान दिन बहुरने की आस में सपा,बसपा,कांग्रेस को सत्ता की दहलीज तक पहुँचाता रहा। पर इन दलों का दिल नही पसीजा और आज पसमांदा मुस्लिम की दलित से भी बदतर हालत के लिए सीधे तौर पर यही दल जिम्मेदार है। यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने विधानसभा जैदपुर के ग्राम पंचायत चन्दवारा में महाज के जिलाध्यक्ष हाजी नुरुल हसन अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित सामाजिक बराबरी, सत्ता में हिस्सेदारी, जाति जनगणना जागरूकता चौपाल में पसमांदा समाज के लोगों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सपा धर्मनिरपेक्ष दल होने का दावा तो करती है पर उसका असली चेहरा कुछ और ही रहा। सपा हुकूमत ने अंग्रेजों के जुल्म को भी पीछे छोड़ दिया। गौर करने वाली बात है कि 20 , 20 साल से भी अधिक समय तक देश मे राज कर चुकी सपा से 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम आबादी का भला नही हो सका, जबकि पसमांदा मुस्लिम ने सपा , बसपा, कांग्रेस को सत्ता तक पहुचाने में कोई कोताही कभी नही बरती। बिना किसी लोभ में पड़े यह समाज का साथ देता रहा बस एक ही आस रही कि अन्य समुदायों की तरह पसमांदा मुसलमान का भी ख्याल रखा जाए और सत्ता, संगठन या सदन में हिस्सेदारी देकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया जाए पर तीनों दलों ने कभी इस ओर कोशिश नही की और न कभी भाषण आदि में जिक्र ही किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि सपा चाहती तो राज्यसभा भेजकर कम से कम पसमांदा मुस्लिम समाज को नुमाइंदगी दे ही सकती थी पर यह भी नही हो सका बस वोटबैंक बना कर रख दिया। सपा की ही देन है कि आज पसमांदा मुसलमान दलितों से भी खराब हालत में है। उसे हक़ हुकूक से वंचित रखकर सपा सरकार ने कभी आर्टिकल 341 पर धार्मिक पाबंदी पर राज्यसभा या लोकसभा में कोई आवाज़ नहीं उठाई। जबकि पसमांदा समाज सपा, बसपा, कांग्रेस से सहयोग की आस लगाए बैठा था। उन्होंने कहा कि सरकार जाति जनगणना करा रही है आप लोग सही जानकारी दे अपनी जाति का नाम जरूर लिखाए जो भी हो अंसारी, राईन, कुरैशी आदि सहयोग करें ताकि सरकार के पास सही आंकड़े हो तो उसी हिसाब से योजनाओं का फायदा मिले। जिस तरह से आवास योजना, आयुष्मान कार्ड, राशन का लाभ मिल रहा है वरना सिर्फ इस्तेमाल कर अपना काम निकलेंगे हमारा संगठन का मकसद पसमांदा समाज को मुख्यधारा में लाना हैं वो बिना सरकार सहयोग के असंभव हैं हम किसी को हराने के लिए वोट नहीं करेंगे बल्कि अपने समाज को जहाँ से हिस्सेदारी मिलेंगी वहाँ वोट और सपोर्ट करेंगे! प्रोग्राम के आयोजक महाज़ के जिला सचिव क़ुतुबुद्दीन राईन का भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने शुक्रिया अदा किया अच्छा प्रोग्राम कराया। इस अवसर पर हफ़ीज़ ताजुद्दीन अंसारी, जाफ़र राईन, मोहम्मद हसीब, असगर अली, सैय्यद अली, मोनिस, मोहम्मद अबसार, मोहम्मद अफ़ज़ाल, इस्लामुद्दीन, मोहम्मद शमीम, मोहम्मद फ़हीम, छोटू, खुर्शीद अंसारी, हसनैन अंसारी, मोहम्मद आलम, रऊफ राईन, शहेअलमा, आबिद अली, मोहम्मद अनस, महमूद चौधरी, रिजवान राईन, अब्दुल्ला राईन, अनीस राईन, गुफरान राईन, अली हसन राईन, रियाज राईन आदि उपस्थित रहे।
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