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PNPrem Narayan MishraFollow21 Nov 2024, 11:15 am
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सोनभद्र के विकास नगर में 72 वर्षीय बुजुर्ग की संदिग्ध मौत से इलाके में हड़कंप

Obra, Uttar Pradesh:सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के विकास नगर में 72 वर्षीय योगेंद्र सिंह भंडारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में हड़कंप मच गया. जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे घटना हुई. उनकी पत्नी गुरुद्वारा गई थीं, जबकि उनका बेटा और दो बेटियां बाहर रहते हैं. पत्नी जब वापस घर पहुँचीं तो पति को मृत देखकर उनके होश उड़ गए. शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी. मौत के पीछे क्या वजह रही, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक मौत की वजह स्पष्ट नहीं होगी; मामले की जांच-पड़ताल पुलिस कर रही है.
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फिरोजाबाद में हवा घुला जहर: AQI 530 तक पहुंचा, लोग मास्क पहनने लगे

Firozabad, Uttar Pradesh:फिरोजाबाद में हवा में घुला जहर ANC - यूपी के फिरोजाबाद में हवा में घुला जहर, तीन चौराहों पर AQI 500 के पार दिवाली से पहले फिरोजाबाद की हवा जहरीली हो गई है। स्मार्ट सिटी के सेंसरों में रैना, जैन नगर और जवाहर पुरम में एक्यूआई 500 के पार पहुंच गया, धूल-धुएं के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से शहर की हवा जहरीली हो गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के छह में से तीन स्टेशनों में इस साल का सबसे ज्यादा एक्यूआई दर्ज किया गया। जैन नगर, रैना और जवाहर नगर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। सुबह से ही शहर में स्मॉग की चादर छाई रहीक्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्टेशनों के अनुसार सबसे ज्यादा रैना की हवा खराब रही। यहां पर एक्यूआई 530 पहुंच गया। पीएम-2.5 का अधिकतम स्तर 338 तक रहा।पीएम-10 का अधिकतम स्तर 396 तक रहा। जैन नगर में एक्यूआई 529 और पीएम 2.5 की स्थिति 325 तक पहुंच गई। वहीं जवाहर पुरम में भी एक्यूआई 516 दर्ज किया गया है। हवा में पहले प्रदूषण की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोग अब मास्क का प्रयोग कर रहे हैं
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ओम प्रकाश राजभर का अयोध्या दीपोत्सव पर तीखा हमला, विपक्ष पर बोला

Noida, Uttar Pradesh:Lucknow (Uttar Pradesh): ओम प्रकाश राजभर (कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश) अयोध्या दीपोत्सव की तैयारी, सर और फॉर्म-7 को लेकर अखिलेश यादव के आरोप लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों पर कहा, "दीपोत्सव के कार्यक्रम से लोगों में जोश और उत्साह बढ़ा है। हर साल इसको लेकर लोगों में खुशी बढ़ती जा रही है..." पश्चिम बंगाल चुनावों में केंद्रीय बलों के इस्तेमाल और अन्य आरोपों को लेकर अखिलेश यादव के बयानों पर उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, "पहले वहां CPM-CPI की सरकार हुआ करती थी। वह किसके समर्थन से टिकी थी? क्या वह कांग्रेस थी? TMC 15 साल तक सत्ता में रही। उससे पहले, जब वह सत्ता में आई थी, तब कांग्रेस की सरकार थी। अखिलेश जी को यह बताना चाहिए कि क्या TMC कांग्रेस के शासनकाल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की गुंडागर्दी और लूटपाट के जरिए सत्ता में आई थी? उनके आरोप बेबुनियाद हैं..."
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बुंदेलखंड की दीपावली पर्व में चांदी की मछली की धूम,200 साल पुरानी परंपरा आज भी है कायम

RavindraRavindraFollow5m ago
Sisolar, Uttar Pradesh:बुंदेलखंड के जनपद हमीरपुर के मौदहा तहसील में 18 वीं सदी से चांदी की मछली बनाए जाने का व्यवसाय चल रहा है यह बुंदेलखंड की एक ऐतिहासिक एवं पौराणिक परंपरा के अंतर्गत माना जाता है यहां के कारीगर चांदी की मछली की नक्काशी इस तरह करते हैं जैसे की वास्तविक मछली की संरचना होती है जिससे कि कोई भी देखने वाला यह नहीं कह सकता की यह एक वास्तविक मछली नहीं है... मौदहा तहसील में चांदी की मछली की नक्काशी कोई आज की नक्काशी नहीं है ये 18 वीं सदी से होती चली आई है इस नक्काशी में पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी की मछली की नक्काशी का काम करते चले आए हैं दीपावली का पर्व आते ही यहां की बाजारों में चांदी की मछली की धूम देखी जा सकती है लोग दीपावली के पर्व में चांदी की मछली को खरीदना अत्यंत ही शुभ मानते हैं जिसको लेकर बाजारों में चांदी की मछली की डिमांड काफी बढ़ जाती है इस चांदी की मछली की धूम बुंदेलखंड की जनपद हमीरपुर में ही नहीं बल्कि विदेशों तक इसकी डिमांड होती चली आई है कोई भी इस चांदी की मछली को एक बार देखने के बाद बिना इसको खरीदे रह नहीं पता है एक समय चांदी की मछली जो कि हर साइज की बनाई जाती थी जिससे कि हर व्यक्ति के बजट में इसको समायोजित किया जा सके... इस चांदी की मछली से जुड़े कारीगरों का कहना है कि यह एक बुंदेलखंड की विरासत है जिसको हम ज्यादातर सोनी परिवार के लोग इसको संरक्षित करते चले आए लेकिन शासन प्रशासन ने कभी इसकी और ध्यान नहीं दिया जिससे आज महंगाई की दौर में इस चांदी की मछली का निर्माण करने में संकट गहराता चल रहा है, इससे जुड़े कारीगरों का कहना है कि अगर शासन प्रशासन की ओर से हमको किसी प्रकार की सुविधा मिलती है तो हम इस व्यवसाय को और अच्छे ढंग से कर सकते हैं जिसके लिए समय-समय पर हमने शासन के प्रतिनिधियों एवं प्रशासन के अधिकारियों को समय-समय पर उनके संज्ञान में भी डाला है लेकिन आज तक हम लोग के उत्थान के लिए किसी भी प्रकार के कदम नहीं उठाए ......... आज महंगाई की दौर में चांदी की मछली की हालत वो हो गई है चांदी की मछली का आकार छोटे से छोटा होता जा रहा है लोगों की जेब पर इसका अत्यधिक भर दिखाई दे रहा है,जितनी जेब भारी उतनी बड़ी मछली खरीदते है लोग अंग्रेजी शासन में जब इस परिवार के बुजुर्गो ने विक्टोरिया राजकुमारी को चाँदी की मछली भेट की थी तो राजकुमारी ने मछली की खूबसूरती को देख कर इन्हें एक मैडल भी दिया था .मछली की इसी कला के कारन इस परिवार का नाम आईने अकबरी पुस्तक में भी दर्ज है ! BYTE - राजेन्द्र सोनी (मछली बनाने वाला कारीगर )
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हांसी के यति नगर पार्क में 3100 दीपों से दीपोत्सव, जय श्रीराम की आकृति उजागर

Hansi, Haryana:हांसी हांसी में 3100 दीप जलाकर मनाया भव्य दीपोत्सव, अनूठी मिसाल कायम कर रोशनी से जगमगाया यति नगर यति नगर पार्क में पहली बार एक साथ प्रज्वलित हुए 3100 मिट्टी के दीप, दीपों से उकेरी गई जय श्रीराम की आकृति और भगवान की प्रतिमा चाइनीज लाइटों سے दूरी बनाकर सरसों के तेल और रुई की बत्तियों से रोशन किए दीप, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का दिया संदेश हांसी। दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को सहेजने का भी पर्व है। इसी भावना को साकार करते हुए हांसी के यति नगर पार्क में ऐसा भव्य दीपोत्सव आयोजित किया गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यहां एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 3100 मिट्टी के दीप प्रज्वलित कर दीपावाली का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। हांसी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर 3100 दीप जलाकर दीपोत्सव मनाने की अनूठी पहल की गई। दीपों की जगमगाहट से यति नगर पार्क का नजारा देखते ही बन रहा था। इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि दीपों को केवल रोशनी के लिए ही नहीं जलाया गया, बल्कि उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था की सुंदर तस्वीर भी प्रस्तुत की गई। पार्क में 3100 दीपों को आकर्षक ढंग से सजाकर भगवान की प्रतिमा और 'जय श्रीराम' की भव्य आकृति बनाई गई। जैसे ही सभी दीप प्रज्वलित हुए, पूरा पार्क रोशनी से नहा उठा। इस मनमोहक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भावविभोर हो गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोगों ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक रूप से दीप जलाकर दीपावली की खुशियां साझा कीं।इस भव्य दीपोत्सव को आयोजित करने के लिए काफी मेहनत और तैयारियां करनी पड़ीं। 3100 दीपों की व्यवस्था करना, उन्हें सही तरीके से सजाना और पूरे आयोजन को सफल बनाना आसान नहीं था, लेकिन जब सभी दीप एक साथ जगमगाए तो सारी मेहनत सफल हो गई। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के इस पावन पर्व को अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप इतने धूमधाम से मनाकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। यह आयोजन सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। वहीं समाजसेवी नरेश यादव ढाणा वाले ने कहा कि इस प्रकार सामूहिक रूप से दीपावली मनाने का अनुभव बेहद सुखद है। आज जिस तरह लोग एक साथ आकर अपनी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं, वह सराहनीय है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, एकजुटता और धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली के पर्व पर पारंपरिक मिट्टी के दीप जलाने की पहल भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने का अच्छा माध्यम है। दीपोत्सव में एक विशेष संदेश भी देखने को मिला। आयोजन में चाइनीज लाइटों और आधुनिक सजावटी सामान की बजाय भारतीय परंपरा के प्रतीक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी गई। सभी 3100 दीपों में सरसों का तेल डालकर रुई की बत्तियों से उन्हें प्रज्वलित किया गया। इस पहल के माध्यम से लोगों को अपनी पारंपरिक संस्कृति, स्वदेशी भावना और पुरानी रीति-रिवाजों को अपनाने का संदेश दिया गया। यति नगर पार्क में आयोजित यह दीपोत्सव केवल रोशनी का आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने सामूहिक सहभागिता, धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया। 3100 मिट्टी के दीपों से सजी जय श्रीराम की आकृति और भगवान की प्रतिमा ने आयोजन को विशेष बना दिया। क्षेत्रवासियों के सामूहिक प्रयास से आयोजित इस दीपोत्सव ने हांसी में एक अनूठी मिसाल कायम की और यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी परंपराओं और संस्कृति को सहेजकर त्योहारों की खुशियां और भी खास बनाई जा सकती हैं।
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