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PANKAJ YADAVPANKAJ YADAVFollow27 Jan 2025, 03:04 pm
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ध्वनि प्रदूषण रोकथाम: जिला भर में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए गए

Jaspur, Uttarakhand:ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देशों के अनुपालन के तहत udham Singh Nagar जिले में जसपुर, काशीपुर, ITI केलाखेड़ा थाना क्षेत्र सहित जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर बिना अनुमति संचालित और निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक ध्वनि पैदा करने वाले लाउडस्पीकरों की चेकिंग की गई। ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण किया गया और नियम उल्लंघन पर संबंधित स्थलों से लाउडस्पीकर हटवाए गये। यह कार्रवाई विशेष रूप से उन स्थानों पर की गई जहां निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज़ में लाउडस्पीकर चलाए जा रहे थे या रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 06:00 बजे के शांत अवधि के दौरान नियमों की अनदेखी हो रही थी। जसपुर क्षेत्र में 2 मस्जिदों सहित काशीपुर ITI और Kalakhéda थाना क्षेत्र से 5 मस्जिदों के लाउडस्पीकर हटवाए गए, कछ्‍चा, नानकमत्ता और खटीमा से 7 मस्जिदों के 10 लाउडस्पीकर हटाए गए और कई जगह 81 Police Act के तहत चालानी कार्रवाई की गई; जनपदभर में 14 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवाए गए और आगे भी ऐसी कार्यवाही जारी रहेगी।
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कटनी: Knife attack on man after warning to speeding youths near City Mall

Katni, Madhya Pradesh:कटनी के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत इन दिनों आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. चाकूबाजी और चोरी की बढ़ती वारदातों के बीच देर रात सिटी मॉल के पास एक युवक को नसीहत देना भारी पड़ गया..पीड़ित युवक ने तेज गति से बाइक चला रहे युवकों को धीरे गाड़ी चलाने की सलाह दी...कि अन्य युवकों ने चाकुओं से हमला कर के भाग गए घायल लहूलुहान हालत में युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है. घटना के पीछे का कारण आरोपियों की तेज रफ्तारी और गाली-गलौज बताया गया है. घायल कुलदीप कुमार बुधवार की देर रात सिटी मॉल के पास अपनी मोटरसाइकिल से सड़क पार कर रहा था. सामने से एक बाइक पर सवार दो युवक बेहद लापरवाही और तेज रफ्तार से निकले, जिससे दुर्घटना होते-होते बची. कुलदीप ने इसका विरोध करते हुए आरोपियों से सिर्फ इतना कहा गाड़ी जरा आराम से चलाओ. बस, यह नसीहत उन रफतार के सौदागरों को नागवार गुज़री. बाइक सवार युवकों ने आव देखा न ताव, तुरंत गाड़ी रोकी और कुलदीप से उलझ गए. गाली-गलौज करते हुए आरोपियों ने अपने पास रखा धारदार चाकू निकाला और कुलदीप पर जानलेवा हमला कर दिया. वारदात के बाद आरोपी नौ दो ग्यारह हो गए. चाकू के वार से कुलदीप लहूलुहान होकर वहीं सड़क पर गिर पड़ा. उसे तड़पता छोड़ दोनों आरोपी अपनी बाइक पर सवार होकर मौके से नौ दो ग्यारह हो गए. आस-पास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने डायल 112 वाहन की मदद से घायल कुलदीप को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है.
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श्रावणी मेला 2026: रविवार-सोमवार शीघ्रदर्शन बंद, अन्य दिनों में जलार्पण रात 8 बजे तक

Deoghar, Jharkhand:देवघर。 राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहित समाज के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष श्रावणी मेले के दौरान रविवार और सोमवार को शीघदर्शनम (त्वरित दर्शन) की सुविधा बंद रहेगी। इन दोनों दिनों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि सामान्य कांवरियों को सुगम और सुरक्षित जलार्पण का अवसर मिल सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि रविवार और सोमवार को छोड़कर सप्ताह के अन्य पांच दिनों में रात 8 बजे तक जलार्पण कराया जाएगा। मंदिर में प्रवेश और निकास मार्ग पूरी तरह अलग-अलग रहेंगे, जिससे भीड़ प्रबंधन बेहतर हो सके। वहीं, सावन और भादो माह में कूपन आधारित दर्शन शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है।जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुचारु भीड़ नियंत्रण और मंदिर व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। तीर्थ पुरोहित समाज ने भी मंदिर परिसर में अवैध प्रवेश, भीड़ प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे प्रशासन के समक्ष रखे। प्रशासन ने सभी सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि इस बार श्रद्धालुओं को बेहतर और व्यवस्थित दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी。
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भाजपा पार्षद लोकेश डेहरिया को चलते समय हार्ट अटैक से निधन; सीसीटीवी में कैद

Chhindwara, Madhya Pradesh:भाजपा पार्षद को टहलते टहलते आया हार्ट अटैक मौके घटना सीसीटीवी में हुई कैद छिदवाड़ा शहर में गुरुवार को एक दुखद घटना में नगर निगम के वार्ड क्रमांक 47 के भाजपा पार्षद एवं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष लोकेश डेहरिया (46) का अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार, उन्हें रास्ते में चलते समय हार्ट अटैक आ गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोकेश डेहरिया अपने वार्ड का भ्रमण कर रहे थे. सिद्धिविनायक रेजीडेंसी के सामने सड़क पर पैदल चलते समय वे अचानक असंतुलित होकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के प्रयास किए, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्ड हुई है, जिसमें वे चलते-चलते अचानक गिरते हुए दिखाई दे रहे हैं. लोकेश डेहरिया नगर निगम में भाजपा के सक्रिय पार्षद होने के साथ-साथ भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष के रूप में भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे.
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नारायणपुर में पाबिया से काशीटॉड सड़क किनारे शव; हत्या की आशंका, पोस्टमार्टम जारी

Jamtara, Jharkhand:नारायणपुर थाना क्षेत्र के पाबिया से काशीटॉड जाने वाली मुख्य सड़क पर पुल के समीप नदी किनारे गुरुवार सुबह करीब 6 बजे ग्रामीणों ने एक युवक का शव देखा। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। मृतक की पहचान 35 वर्षीय अशोक रवानी के रूप में हुई है। ग्रामीणों ने हत्या के बाद शव फेंके जाने की आशंका जताई है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं की है। थाना प्रभारी मुराद हसन ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा。
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बबेरा गांव में जमीन विवाद के कारण परिवार में खूनी संघर्ष, एक की मौत

Jaipur, Rajasthan:बबेरा गांव में जमीनी विवाद को लेकर एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। विवाद इस कदर बढ़ गया कि एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के लोगों पर दो ट्रैक्टर चढ़ा दिए। चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जिनमें से इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई。 जमीनी रंजिश में अपनों पर ही दौड़ाए ट्रैक्टर मिली जानकारी के अनुसार बबेरा गांव में एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आज इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई जो हिंसक झड़प में बदल गई। आवेश में आकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को जान से मारने की नीयत से उनके ऊपर दो ट्रैक्टर दौड़ा दिए। ट्रैक्टरों से रौंदे जाने के कारण दो सगे भाइयों सहित चार लोग लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़े। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही बानसूर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों—संताराम गुर्जर, राम गुर्जर, रघुवीर गुर्जर और सुभाष गुर्जर को तुरंत राजकीय बीडीएम अस्पताल, कोटपूतली भिजवाया। अस्पताल पहुँचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद संतराम गुर्जर को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अन्य तीन घायलों की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद बबेरा गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने मृतक संतराम के शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। बानसूर थाना पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी दोनों ओर से मामला दर्ज नहीं हुआ पुलिस पहले घायल हुये लोगो का इलाज करवा रही है।
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बरबीघा में ई-रिक्शा चालक पर चाकूबाजी, दिनदहाड़े हिंसा का वीडियो सामने

Sheikhpura, Bihar:शेखपुरा जिले के बरबीघा थाना के मुख्य द्वार पर चाकूबाज़ी से हड़कंप मच गया ।दिन दहाड़े दबंग युवक पुलिस को खुली चुनौती देते हुए ई रिक्शा चालक पर ताबड़तोड़ चाकूबाजी कर दिया।चाकूबाजी का पूरा वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया घटना शेखपुरा जिले के बरबीघा थाना क्षेत्र के मुख्य द्वार के पास घटित हुआ।इस संबंध में पीड़ित युवक ने स्थानीय थाना में आवेदन देकर करवाई कर न्याय की गुहार लगाया है।चाकूबाजी में घायल युवक की पहचान बरबीघा थाना क्षेत्र के नसरपुर गांव निवासी अर्जन कुमार के रूप में किया गया।पीड़ित ने बताया कि बाईक सवार ई रिक्शा टक्कर मार दिया और विरोध करने पर चौक पर ही गालीगलौच किया विरोध करने पर वही ठेला पर आम बेचने वाले दुकानदार के पास से जबरन चाकू ले बार कर दिया जिससे कई स्थान पर जख्म हो गया है।जबकि आरोपी द्वारा पीड़ित को लगातार जान मारने की धमकी दिया जा रहा है।घटना का पूरा बीडीओLocal वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है ।
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रामनगर की आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली कनेक्शन नहीं, बच्चे हाथ के पंखों से तपा रहे

Noida, Uttar Pradesh:एंकर.-सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा फर्क है, इसकी तस्वीर रामनगर विधानसभा क्षेत्र के चिलकिया सेकेंड स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में साफ दिखाई देती है, करीब 12 लाख रुपये की लागत से बना नया भवन, कमरे में सीलिंग फैन भी लगे हैं, दीवारों पर स्विच बोर्ड भी लगे हैं, बल्ब भी टंगे हैं,लेकिन बिजली का कनेक्शन आज तक नहीं लग पाया, हालत यह है कि भीषण उमस में छोटे-छोटे मासूम पसीने से बेहाल होकर बैठते हैं और आंगनबाड़ी कार्यकत्री उन्हें बिजली वाले पंखे से नहीं, बल्कि हाथ वाले पंखे से हवा करती नजर आती हैं,यह तस्वीर सिर्फ एक केंद्र की नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, देखिए हमारी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट... तस्वीर किसी_old दौर की नहीं, बल्कि साल 2026 की है, यह वही आंगनबाड़ी केंद्र है, जिसे सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर तैयार कराया, भवन नया है, पेंट नया है, छत पर पंखे लगे हैं, स्विच बोर्ड चमक रहे हैं,लेकिन इन पंखों में जान फूंकने वाली बिजली आज तक नहीं पहुंची. भीषण उमस के बीच कमरे में बैठे मासूम पसीने से बेहाल हैं और सबसे मार्मिक तस्वीर यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री गीता मनराल बिजली के पंखे नहीं, बल्कि हाथ वाले पंखे से बच्चों को हवा कर रही हैं,सोचिए जब करोड़ों की योजनाओं के दावे किए जा रहे हों, तब सरकारी केंद्र में बच्चों को हाथ से हवा करनी पड़े, तो विकास के दावों की असल तस्वीर क्या होगी. यह आंगनबाड़ी केंद्र रामनगर विधानसभा के चिल्किया सेकेंड क्षेत्र में स्थित है, सूचना पट बताता है कि वर्ष 2024-25 में करीब 12 लाख रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण कराया गया,भवन बन गया बिजली की फिटिंग हो गई. पंखे लग गए स्विच लग गए लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी बिजली का मीटर नहीं लगा और न ही कनेक्शन मिला. नतीजा छत पर लगे पंखे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं. आंगनबाड़ी कार्यकत्री गीता मनराल बताती हैं कि अक्टूबर महीने से केंद्र इस नए भवन में संचालित हो रहा है,उस समय मौसम सामान्य था, लेकिन गर्मी शुरू होते ही बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई है. उन्होंने कई बार विभाग को बताया ग्राम प्रधान से भी गुहार लगाई लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला पहले विभाग बिजली विभाग में पैसा जमा करेगा, उसके बाद कनेक्शन लगेगा. तब तक हालात यह हैं कि बिजली का पंखा छत पर टंगा है और बच्चों को हवा हाथ वाले पंखे से दी जा रही है. गर्मी और उमस का असर अब बच्चों की संख्या पर भी साफ दिखाई देने लगा है, अभिभावकों का कहना है कि जब कमरे में पंखा ही नहीं चलेगा तो आखिर ढाई-तीन साल के मासूम बच्चों को वहां कैसे भेजें. जो सरकार सरकारी आंगनबाड़ी में बच्चों को लाने के लिए अभियान चलाती है, उसी केंद्र में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है. अपने ढाई वर्षीय बेटी को आंगनबाड़ी में दाखिला दिलाने पहुंचे हिमांशु तिरूवा कहते हैं कि वे चाहते थे कि उनकी बेटी को शुरुआती शिक्षा सरकारी आंगनबाड़ी में मिले, लेकिन यहां आकर जो देखा, उससे वे निराश हो गए, उनका कहना है कि जब बिजली नहीं पानी नहीं. और पंखे नहीं चल रहे. तो छोटे बच्चे इतनी उमस में आखिर पढ़ेंगे कैसे? वे साफ कहते हैं कि अगर यही हाल रहा तो वे अपनी बच्ची को यहां नहीं भेजेंगे और मजबूरी में निजी प्ले स्कूल का सहारा लेना पड़ेगा. सवाल सिर्फ एक केंद्र का नहीं है, सवाल यह है कि आखिर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी एक बिजली का कनेक्शन क्यों नहीं लग पाया? अगर भवन निर्माण के समय बिजली की फिटिंग हो सकती है पंखे लगाए जा सकते हैं स्विच बोर्ड लगाए जा सकते हैं तो बिजली का मीटर लगवाने में आखिर एक साल क्यों लग गया? क्या अलग-अलग विभागों की फाइलों में बच्चों का भविष्य उलझकर रह गया? इस मामले में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी इसे सरकार की बड़ी लापरवाही बताते हैं, उनका कहना है कि प्रदेश सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा और बच्चों का भविष्य नहीं है और इसी का परिणाम है कि आज आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. वहीं मामले में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र शर्मा कहते हैं कि यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी तक सीमित नहीं हो सकता, संभावना है कि ऐसे कई केंद्र हों, जहां भवन तो बन गए हों लेकिन बिजली और पानी जैसी जरूरी सुविधाएं अब भी अधूरी हों. उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे विधानसभा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का सर्वे कराया जाए और जिन केंद्रों में बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं हैं, वहां तत्काल व्यवस्था की जाए. वहीं जब इस पूरे मामले को लेकर बाल विकास परियोजना अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने माना कि संबंधित केंद्र में बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव भेजे गए हैं और प्रस्ताव पारित होने के बाद बिजली का कनेक्शन लगा दिया जाएगा, तब तक आसपास के प्राथमिक विद्यालय या पंचायत भवन से समन्वय कर अस्थायी व्यवस्था करने की बात कही गई है. सरकार कहती है कि बच्चों का भविष्य संवारना उसकी प्राथमिकता है, सरकार यह भी कहती है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्ट बनाया जा रहा है। लेकिन चिल्किया सेकेंड की यह तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है. यहां छत पर पंखे हैं लेकिन हवा नहीं. स्विच हैं... लेकिन बिजली नहीं। भवन नया है लेकिन व्यवस्था पुरानी। और सबसे दर्दनाक तस्वीर एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री मासूम बच्चों को बिजली के पंखे से नहीं, बल्कि हाथ वाले पंखे से हवा करती नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि आखिर 12 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी बच्चों को बिजली जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल सकी? क्या विभागों की फाइलें मासूमों के बचपन से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं? क्या एक बिजली कनेक्शन के लिए भी बच्चों को महीनों इंतजार करना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल क्या इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे, या फिर आने वाली गर्मियां भी इन मासूमों को हाथ वाले पंखे की हवा में ही काटनी पड़ेंगी? Byte.1-गीता मनराल, आंगनबाड़ी कार्यकत्री Byte.2-हिमांशु तिरूवा, अभिभावक Byte.3-प्रभात ध्यानी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष Byte.4-नरेंद्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता Byte.5-पूनम रोतेला, प्रभारी सीडीपीओ
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