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जोधपुर के NLU ने IISD के सहयोग से ब्लेंडेड 2-वर्षीय EXECUTIVE MBA शुरू किया

Jodhpur, Rajasthan:राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर ने भारतीय सतत विकास संस्थान के सहयोग से बिज़नेस एवं सस्टेनेबिलिटी में दो वर्षीय एग्जीक्यूटिव MBA कार्यक्रम शुरू किया है। यह कोर्स खासतौर पर कामकाजी पेशेवरों—मैनेजर, अधिकारी, उद्यमी और सलाहकार—को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कार्यक्रम ब्लेंडेड मोड में संचालित होगा, जिसमें ऑनलाइन स्व-अध्ययन के साथ समय-समय पर कैंपस में सत्र और वीकेंड क्लासेज होंगी, ताकि प्रतिभागी नौकरी के साथ पढ़ाई आसानी से कर सकें। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगुरु प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें IISD के महानिदेशक डॉ. श्रीकांत के. पाणिग्रही सहित कई गणमान्य मौजूद रहे। कुलगुरु ने कहा कि आज के दौर में व्यवसायों को सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जिम्मेदार व्यापारिक प्रथाओं को अपनाना जरूरी है। वहीं, डॉ. पाणिग्रही ने इस तरह के कोर्स को समय की जरूरत बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रण बंजारा के अनुसार, कोर्स में केस स्टडी, प्रोजेक्ट, वर्कशॉप और इंटरैक्टिव सेशन के जरिए प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर दिया जाएगा। इस कोर्स की वार्षिक फीस 2.75 लाख रुपये रखी गई है। प्रवेश प्रक्रिया 2 मई से शुरू हो चुकी है। आवेदन के लिए किसी भी विषय में न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातक डिग्री और कम से कम दो साल का कार्यानुभव अनिवार्य है।
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हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पाँचना बांध से पानी जल्द छोड़ा जाएगा

Jaipur, Rajasthan:पाँचना बांध से जल्द पानी छोड़ा जाएगा. हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग ने 6 इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई है. एक्सईएन प्रकाश चंद मीणा, एक्सईएन मांगीलाल मीणा, एईएन चेताराम मीणा, जेईएन विनोद गुर्जर, जेईएन सुशील कुमार, कनिष्ठ अभियंता कृष्ण गोपाल शर्मा की ड्यूटी लगाई गई है. शुक्रवार को हुई सुनवाई में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब और समय नहीं दिया जाएगा और अधिकारी “कोर्ट का पेशेंस टेस्ट” नहीं करें. कोर्ट के इस रुख के बाद प्रशासनिक और सिंचाई विभाग में हलचल तेज हो गई है. मामल की अगली सुनवाई अब 26 मई 2026 को होगी. कोर्ट ने कहा था कि नहरों में पानी छोड़ा जाए और अब किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. दरअसल, इससे पहले 23 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने 1 मई तक पानी छोड़ने के आदेश दिए थे और चेतावनी दी थी कि आदेश की पालना नहीं होने पर जल संसाधन विभाग के सचिव और मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा. सुनवाई में जल संसाधन विभाग की ओर से जॉइंट सेक्रेटरी अमृता चौधरी, चीफ इंजीनियर भुवन भास्कर, एडिशनल चीफ इंजीनियर सुरेश कुमार, एसई रमाशंकर शर्मा, एक्सईएन विवेक बंसल और जेईएन भवानी सिंह मौजूद थे. विभाग की ओर से कहा गया कि फिलहाल फसलों के लिए पानी की तत्काल आवश्यकता नहीं है. साथ ही नहरों की मरम्मत और सफाई लंबे समय से नहीं हो पाने के कारण तकनीकी समस्याएं भी सामने हैं. हालांकि कोर्ट इन तर्कों से संतुष्ट नजर नहीं आया और स्पष्ट कहा कि आदेशों की पालना हर हाल में सुनिश्चित की जाए. गौरतलब है कि पाँचना बांध से कमांड क्षेत्र में पानी छोड़ने को लेकर यह पहला आदेश नहीं है. जुलाई 2022 में भी हाईकोर्ट ने किसानों के हित में नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन उस समय कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देकर प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने आदेश लागू नहीं किए.
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झल्लारा में शेषपुर गांव से 45 तोला सोना और 5 किलो चांदी चोरी, पुलिस जांच

Udaipur, Rajasthan:सलूंबर जिले के झल्लारा थाना क्षेत्र में बदमाशों ने चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने थाना क्षेत्र के शेषपुर गांव में सूने मकान को निशाना बनाया। जहां से वे 45 तोला सोने और 5 किलो चांदी के जेवर चुरा कर फरार हो गए। मकान मालिक परिवार सहित पारिवारिक कार्यक्रम में शिरकत करने गुजरात के बड़ोदरा की गया हुआ था। तभी बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया। ग्रामीणों की सूचना पर झल्लारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौका मुआयना कर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घर में चोरी होने की जानकारी मिलने पर परिवार के सदस्य भी शेषपुर पहुंच गए। गांव में हुई चोरी की वारदात के को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है। पुलिस को जल्द ही बदमाशो को पकड़ने और रात्रि गस्त व्यवस्था को पुख्ता करने की मांग की।
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7 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष जयपुर में स्पीकर कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में 5 मई को विधानसभा स्पीकर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। कांफ्रेंस में 7 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शिरकत करेंगे। इसमें विधानसभा की समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए महामंथन किया जाएगा। लोकसभा की ओर से विधानसभा स्पीकर की कमेटी गठित की गई है। इस समिति की यह दूसरी बैठक होने जा रही है। इससे पहले समिति की पहली बैठक भोपाल में हो चुकी है। बैठक में विभिन्न समितियों राज्यों के सुधारों की दिशा को लेकर मंथन किया जाएगा। कांस्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित होने वाली इस बैठक में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष भाग लेंगे। सोलंकी अभी पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष के इस कमेटी में भाग लेने पर संदेह बना हुआ है क्योंकि 4 मई को वहां के विधानसभा के चुनाव परिणाम सामने आने हैं, इस सात विधानसभा के अध्यक्षों की कमेटी की अध्यक्ष मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर द्वारा की जाएगी, मध्यप्रदेश के स्पीकर इस बैठक के चेयरपर्सन भी हैं। असल में बैठक का मुख्य एजेंडा विधानसभाओं की समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाना है। खासतौर पर सदन की समितियों को अधिक प्रभावी बनाने, सरकार कमेटियों की रिपोर्ट पर कार्यवाही करने कमेटियों की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीक के बेहतर उपयोग पर जोर रहेगा। इसके अलावा 5 में को ही विधानसभा में नक्षत्र हर्बल वाटिका का उद्घाटन भी किया जाएगा इसके बाद विधानसभा म्यूजियम को आए हुए विधानसभा अध्यक्ष देखेंगे। उसके बाद कांस्टीट्यूशनल क्लब में यह बैठक आयोजित जाए की जाएगी, अध्यक्षों की कमेटी की रिपोर्ट ऑल इंडिया प्रासाइडिंग ऑफीसर कॉन्फ्रेंस में रखी जाएगी ताकि कमेटियों को प्रभावशाली बनाया जा सके और कमेटियों की कार्य प्रणाली की समीक्षा की जा सके। इस बैठक के लंच में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दोनों उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी आमंत्रित किया गया है। बैठक में विभिन्न राज्यों की विधानसभा समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी और सुधार के उपायों पर चर्चा होगी। बैठक का मुख्य एजेंडा सदन की समितियों को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके तहत सरकार द्वारा समितियों की रिपोर्ट पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीक के बेहतर उपयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। इसके अलावा समितियों की जवाबदेही बढ़ाने और उनकी सिफारिशों को लागू करने के तंत्र को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी.
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जयपुर में पीले पानी को लेकर सवाल, जीसीकेसी और इंजीनियर्स पर कार्रवाई की मांग

Jaipur, Rajasthan:जयपुर-पिंकसिटी में आज भी पीले पानी की सप्लाई हुई. शहर के कई इलाकों में पीला पानी आया. झालाना डूंगरी समेत कई हिस्सों में पीला पानी देखने को मिला. जलदाय विभाग अब 100 से ज्यादा सैंपल ले चुका. बीसलपुर बांध से ही पीले पानी के सप्लाई का अंदेशा है. विभाग का दावा है कि पीला पानी पीने योग्य, लैब में टेस्टेड है. केमिस्ट, इंजीनियर्स क्लोरीन डोल की जांच कर रहे है. लेकिन बडा सवाल ये है कि रखरखाव के लिए सरकार सालाना जिम्मेदार फर्म जीसीकेसी 6 करोड दे रही. फिर भी पीले पानी की शिकायत के बाद सवाल खडे हो रहे. अब सवाल ये है कि फर्म जीसीकेसी और जिम्मेदार इंजीनियर्स के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा?
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बाराबंकी मदरसे में बायोमैट्रिक हाजिरी फर्जी, प्लास्टिक कार्ड से अटेंडेंस वायरल

Barabanki, Uttar Pradesh:सहायता प्राप्त मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के एक मदरसे से सामने आए मामले में प्लास्टिक कार्ड के जरिए शिक्षकों की फर्जी हाजिरी लगाए जाने का खुलासा हुआ है। इस पूरे प्रकरण का वीडियो भी वायरल है। फिलहाल मामले का एनएचआरसी ने संज्ञान लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आपको बता दें कि हाल ही में जौनपुर में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां मदरसा प्रबंधक के परिजनों के अंगूठे के निशान से फर्जी हाजिरी लगाए जाने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच अभी जारी है। यह मामला बदोसरांय क्षेत्र के कस्बा मैलारायगंज स्थित इरम एजूकेशन सोसायटी के मदरसा इस्लामिया स्कूल से जुड़ा है, जहां के एक वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में कई शिक्षकों के नाम प्लास्टिक कार्ड पर लिखे दिखाई दे रहे हैं, जिनका इस्तेमाल अंगूठे के निशान की जगह उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जा रहा है। आरोप है कि अनुपस्थित शिक्षकों की भी हाजिरी इस तरीके से लगाई जा रही, जिससे वेतन निर्गमन में गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है। नियम अनुसार, सभी सहायता प्राप्त मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है और इसका रिकॉर्ड जिला स्तर पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संकलित किया जाता है। वहीं मदरसा प्रशासन ने वायरल वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि इसमें दिखाई गई प्रक्रिया नियमित उपस्थिति नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक सिस्टम की तकनीकी जांच का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार मशीन में पहले दिक्कतें आ रही थीं, जिन्हें लखनऊ से इंजीनियर बुलाकर ठीक कराया गया। मरम्मत के बाद सिस्टम की कार्यक्षमता जांचने के लिए एक साथ कई कार्ड स्कैन किए गए थे। हालांकe इस मामले में प्रणाली आधार आधारित ऑनलाइन सत्यापन से जुड़ी नहीं है, जिससे दुरुपयोग की पूरी गुंजाइश है। इस मदरसे में करीब दो दर्जन शिक्षक कार्यरत हैं। यहां बायोमेट्रिक मशीन तो मौजूद है, लेकिन रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग न होने के कारण फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही। जानकारों की मानें तो फेस ऑथेंटिकेशन का अभाव, सीमित निरीक्षण और ऑफलाइन रिकॉर्ड प्रणाली इस तरह की अनियमितताओं को बढ़ावा दे रही। कई स्थानों पर उपस्थिति रजिस्टर प्रिंट कर मैन्युअली जमा किए जाते हैं, जिससे सत्यापन पर सवाल उठ रहे। वहीं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्र ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है, जांच की जा रही है। मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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लोहरदगा में मेगा विधिक सशक्तिकरण समारोह से शिक्षा और पर्यावरण पर बल

Lohardaga, Jharkhand:लोहरदगा- डालसा और जिला प्रशासन लोहरदगा की ओर से लोहरदगा के किस्को प्रखंड कार्यालय परिसर में मेगा विधिक सशक्तिकरण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी, न्यायाधीश झारखंड उच्च न्यायालय सह प्रशासनिक न्यायाधीश लोहरदगा न्यायमण्डल ने किया। मौके पर माननीय न्यायमूर्ति ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन के सभी सफलताओ की कुंजी है। इसलिए जीवन मे खूब पढ़ें। पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना है। हर चीज से ध्यान हटाकर पढ़ाई और फिजिकल फिटनेस, येदोनों अगर आपने हासिल कर लिया तो सक्सेस आपके साथ है। इसमें कोई शक नहीं। यहां के बच्चों में काफी प्रतिभा छुपी हुई है। न्यायमूर्ति ने उपायुक्त को छात्र-छात्राओं के कॅरियर बनाने के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम के आयोजन से आम जनता को अपने अधिकारों की जानकारी मिलती है। साथ ही साथ यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति आम लोगों में जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां के वन झारखंड राज्य का गौरव है। इसलिए इसको बचाकर रखने की जिम्मेवारी हम सबकी है। यह प्राकृतिक संपदा हमारे विकास का आधार भी है, लेकिन साथ ही साथ यह हमारी जिम्मेवारी है कि हम इसका संतुलित तरीके से उपयोग करें। यदि इस प्राकृतिक संपदा का उपयोग उचित तरीके से नहीं किया जाएगा, तो इससे पर्यावरण को क्षति पहुंचेगी जिसका प्रतिकूल प्रभाव सभी पर पड़ेगा। जल स्तर में गिरावट आएगी, साथ ही साथ कुएं एवं बोरिंग सूख जाएंगे। लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। यह हमारे अस्तित्व को बचाने के लिए बहुत ही जरूरी है।जिला में पेड़ लगाये जाने के कार्यक्रम में सभी नागरिकों से अनुरोध है कि आप इसमें पूरी तरह सहयोग करें।हमारे सभ्यता में कहा गया है कि एक पेड़ 100 पुत्र के बराबर होता है, इसीलिए जब आप एक पेड़ लगाएं तो आप समझें कि आपने 100 पुत्रों को संरक्षण दिया है और आगे यही 100 पुत्र जो है, आपको संरक्षित करते रहेंगे।इन्होने कहा कि यह क्षेत्र एक बॉक्साइट बाहुल्य क्षेत्र है। इसलिए वन विभाग एवं खनन विभाग यह सुनिश्चित करें कि खनन का कार्य पूरा होने के पश्चात उस पर पेड़ इत्यादि लगाए जाए एवं भूमि को पुराने स्वरूप में लाए जाए, जिससे पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे एवं हमारा झारखंड राज्य हरा भरा भी रहे।
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सीमांकन टीम पर हमला: 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो हड़ताल की चेतावनी

Gumla, Jharkhand:सीमांकन करने पहुँची राजस्व टीम पर हमला, महिला ने चप्पलों से की मारपीट; 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो हड़ताल की चेतावनी गुमला - चैनपुर प्रखंड के केड़ेंग गांव भूमि सीमांकन के लिए पहुँची राजस्व विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने से इलाके में तनाव का माहौल है। राजस्व कर्मियों को मौके से जान बचाकर भागना पड़ा। आरोप है कि एक महिला ने राजस्व उपनिरीक्षक के साथ चप्पलों से मारपीट और बदसलूकी की。 ऑनलाइन आवेदन के आधार पर गठित टीम जब मापी कार्य शुरू कर रही थी, तभी 8–10 ग्रामीण उग्र हो गए और टीम पर हमला बोल दिया। घटना के बाद कर्मियों में दहशत है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं。 घटना के विरोध में झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ और राजस्व उपनिरीक्षक संघ की आपात बैठक हुई। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा—काला बिल्ला, कार्य बहिष्कार, धरना और अंततः अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल。 थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि कांड संख्या 13/26 दर्ज कर छापेमारी की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी का प्रयास जारी है。 फिलहाल पुलिस कार्रवाई में जुटी है, जबकि कर्मचारीओ एवं राजस्व कर्मियों में आक्रोश व्याप्त है।
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