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5 किलोग्राम गैस सिलेंडर: राहत या महंगे विकल्प का संकट?

Jaipur, Rajasthan:Anchor:आपदा में मुनाफा… ये आरोप अक्सर कालाबाजारियों पर लगता है, लेकिन अब सवाल सरकारी तेल कंपनियों पर भी खड़े हो रहे हैं। देश में एलपीजी संकट गहराया हुआ है। घरेलू सिलेंडर के लिए इंतजार, कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत… और इसी बीच बाजार में एक नया गणित सामने आया है। 5 किलो वाला छोटा (छोटू) सिलेंडर, जिसे राहत के तौर पर पेश किया गया, वही अब सबसे महंगा सौदा बनता नजर आ रहा है। मजदूरों और प्रवासी परिवारों की मजबूरी को आसान बनाने के नाम पर नियम ढीले किए गए, लेकिन कीमत ऐसी कि हर किलो गैस जेब पर भारी पड़ रही है। सवाल ये है क्या ये राहत है या संकट के बीच कमाई का नया मॉडल। देशभर में लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की किल्लत ने आम जिंदगी को प्रभावित किया है। बड़े शहरों में काम करने वाले मजदूर और प्रवासी कर्मचारी गैस की कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे बने कि कई लोगों ने शहर छोड़कर गांव लौटने का रास्ता चुन लिया। इसी बीच सरकारी तेल कंपनियों और सरकार ने एक ऐसा विकल्प आगे बढ़ाया है, जिसे पहली नजर में राहत कहा जा सकता है। 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर। कनेक्शन आसान, प्रक्रिया सरल और रिफिल पर कोई खास पाबंदी नहीं। सिर्फ एक आईडी कार्ड और सिलेंडर आपके हाथ में। लेकिन यही आसान समाधान” अब सवालों के घेरे में है। यह छोटा 5 किलो का सिलेंडर गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए सबसे महंगा विकल्प बनकर सामने आया है। लेकिन इसके लिए आपको पहले 1500 रुपये सिलेंडर के चुकाने होंगे। इसके बाद यदि सिलेंडर दोबारा रिफलिंग करवाना है तो 616 रुपये चुकाने होते है। इसमें एलपीजी करीब 123 रुपए प्रति किलो की दर से पड़ रही है। तुलना करें तो घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की एलपीजी लगभग 64.50 रुपए प्रति किलो औऱ कॉमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की एलपीजी करीब 111 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। यानी छोटा सिलेंडर, जो सबसे सुलभ बनाया गया है, वही सबसे महंगा भी है. बातचीत में मनोज गुप्ता, स्टेट कॉर्डिनेटर, तीनों तेल कंपनी गैस सिलेंडर: बाजार कीमत: प्रति किलोग्राम गैस की कीमत घरेलु (14.2KG): 916.50, 64.50 रुपये वाणिज्यिक (19KG): 2106, 111 रुपये फ्री ट्रेड सिलेंडर(5KG): 616, 123 रुपये एक तरफ घरेलू गैस की बुकिंग पर 25 दिन का अंतर लागू है और कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई भी 70 प्रतिशत तक सिमटी हुई है। दूसरी तरफ 5 किलो के सिलेंडर की उपलब्धता लगभग अनलिमिटेड कर दी गई है। पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों पर इसे कभी भी रिफिल कराया जा सकता है। यानी जहां बड़ी टंकी के लिए इंतजार है, वहीं छोटे सिलेंडर के लिए कोई रोक-टोक नहीं। यह मॉडल उन लोगों को टारगेट करता है, जिनके पास विकल्प कम हैं— मजदूर, प्रवासी और अस्थायी कर्मचारी। बहरहाल, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह कदम एक साथ दो तस्वीरें पेश करता है: एक तरफ कंपनियां राहत बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यह व्यवस्था उन्हीं जरूरतमंदों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। गैस संकट के इस दौर में छोटा सिलेंडर जरूरी बना है, लेकिन इसकी कीमत और उपलब्धता पर यह सवाल खड़ा करता है: क्या यह राहत है या मजबूरी में महंगा सौदा? दीपक गोयल जी मीडिया जयपुर
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हिमाचल के सेब किसानों पर ओलावृष्टि का भारी नुकसान, राहत पर उठे सवाल

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश की करीब पांच हज़ार करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी पर इस वक्त संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ऊंचाई वाले इलाकों में हुई तेज़ ओलावृष्टि ने सेब की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे बागवानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. ओलों की बेरहम चोट ने पेड़ों पर लगे सेबों को दागदार और क्षतिग्रस्त कर दिया है. कई जगहों पर फल समय से पहले गिर गए हैं, जबकि पेड़ों की पत्तियां और टहनियां भी टूटकर बिखर गई हैं. ऐसे में न सिर्फ मौजूदा सीजन की पैदावार प्रभावित हुई है, बल्कि आने वाले समय में भी उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार अपनी रोज़ी-रोटी के लिए बागवानी पर निर्भर हैं. ऐसे में इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी आर्थिक रीढ़ पर चोट की है. बागवानों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं. बागवान नेता हरीश चौहान के मुताबिक़, ओलावृष्टि सेब बागवानों को अत्याधिक नुकसान हुआ है. इससे पहले भी ओलावृष्टि की वजह से सेब की फ़सल ख़राब होती रही है. राज्य सरकार की ओर बागवानों को मुआवज़े के नाम पर कुछ हासिल नहीं होता. राजस्व विभाग और बाग़वानी विभाग के अधिकारी नुक़सान का जायज़ा लेने के लिए तो आते हैं,लेकिन मुआवज़ा कभी नहीं दिया जाता. उनका मानना है कि अधिकारी सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए औपचारिकता के लिए आंकलन करते हैं. इसके बाद ज़मीनी स्तर पर कोई लाभ नज़र नहीं आता. सेब बागवान मोहित शर्मा और प्रमोद शर्मा भी ओलावृष्टि से खासे परेशान हैं. बागवानों की एक बहुत बड़ी परेशानी एंटी हेल नेट पर मिलने वाली सब्सिडी का भुगतान न होना भी है. पहले तो राज्य सरकार ने सब्सिडी काम की और बाद में उसका भुगतान भी वक़्त पर नहीं किया. ऐसे में बागवान भविष्य की चुनौतियों को लेकर चिंतित नज़र आ रहे हैं. गौर हो कि ओलावृष्टि से सेब की फसल को कई स्तरों पर नुकसान होता है. पेड़ों पर लगे फलों पर सीधे ओलों की चोट लगने से सेब की बाहरी सतह पर दाग, कट और धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता गिर जाती है. ऐसे फल बाज़ार में कम कीमत पर बिकते हैं या कई बार पूरी तरह बेकार हो जाते हैं. इसके अलावा ओलों की मार से पेड़ों की पत्तियां और टहनियां भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. पत्तियों के झड़ने से बाद में फलों का आकार और मिठास कम हो सकती है. कई मामलों में छोटे फल समय से पहले ही गिर जाते हैं, जिससे उत्पादन में सीधा नुकसान होता है.
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नैनीताल में डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को बीमा व मुआवदे, विपणन सुविधाएं

Haldwani, Uttarakhand:नैनीताल जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डी.सी.एस.) के माध्यम से किसानों को सामयिक सलाह से बाजार उपलब्ध कराने में अब मदद मिलेगी और किसानों को फसल बीमा का लाभ आसानी से मिल सकेगा, आपदा की स्थिति में किसानों को फसलों के नुकसान के एवज में मुआवजे का भुगतान आसानी से होगा और साथ ही फसलों के विपणन की व्यवस्था आसानी से हो सकेगी, आयुक्त कुमाऊँ दीपक रावत ने हरिपुर रतनसिंह ग्राम में किसानों के खेत में पहुंचकर डिजिटल क्रॉप सर्वे किया। आयुक्त ने बताया कि यह मोबाइल आधारित प्रक्रिया है जिसमें जियो-फेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी के उपयोग से वास्तविक समय में खेतों में बोई गई फसलों का सटीक डेटा एकत्र किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सर्वे को बदलकर डिजिटल माध्यम से फसल का सही आंकलन करना है; डिजिटल क्रॉप सर्वे हो जाने से किसानों की जमीन के बारे में साइंटिफिक डाटा उपलब्ध हो जाएगा और जरूरतमंद किसानों को योजनाओं का उचित लाभ मिल पाएगा। वर्तमान में किस जिले में, किस फसल की, कितने क्षेत्र में खेती की गई है, इस विषय पर विभिन्न स्रोतों के अलग-अलग आंकड़े हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे योजना में फसलों के रियल टाइम में बोई गई फसलों का कवरेज एरिया का सही आकलन किया जा सकेगा, जिससे फसलों के मार्केटिंग और स्ट्रेटजी मेकिंग में सहूलियत होगी, डिजिटल क्रॉप सर्वे समय रहते करने से केन्द्र सरकार द्वारा प्रोत्साहन भी प्रदेश को मिले और कार्य समय रहते पूर्ण हो। उन्होंने बताया इसके लिए कुमायू मंडल में समीक्षा की जा रही है ताकि समय रहते डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूर्ण किया जा सके।
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बलरामपुर में सड़क निर्माण के क्वालिटी पर सवाल, 8 दिन में उखड़ गई गिट्टियां

Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर जनपद में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे 21 सेकंड के वीडियो में एक नव-निर्मित सड़क की पोल खुलती नजर आ रही है। वीडियो में एक युवक सड़क पर खड़े होकर अपने पैरों से ही सड़क को उखाड़ता दिख रहा है, जहाँ हल्के दबाव से ही बजरी और गिट्टियां बाहर निकलती दिखाई दे रही हैं। बतायागया है कि यह मामला तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड हरैया सतघरवा अंतर्गत लालपुर-करमैती मार्ग का है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सड़क महज एक सप्ताह पहले ही बनाई गई थी, लेकिन इतनी कम अवधि में ही इसकी हालत खराब हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क की ऊपरी परत बेहद कमजोर है और पैरों से रगड़ते ही उखड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क का यह हाल एक हफ्ते में हो गया है, तो आने वाले समय में यह पूरी तरह से जर्जर हो सकती है, जिससे आवागमन में भारी दिक्कतें होंगी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई है और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस मामले पर प्रांतीय निर्माण खंड के जेई भगत का कहना है कि वायरल वीडियो हमने भी देखा है जहां यह दिक्कत हुई है उसे सही कराया जाएगा जब निर्माण हो रहा था उसे समय मैं ठेकेदार को बोला था काम मटेरियल पढ़ने के चलते ऐसा हुआ होगा। बड़े वाहनों के जाने से ऐसा हुआ है। लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
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मराठवाडा-पुणे-ठाणे में गर्भपात रैकेट: डॉ सुनील राजपूत गिरफ्तार

Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra:मराठवाड्यासह पुणे, ठाणे येथे सहा वर्षांपासून सातत्याने गर्भपाताच्या रॅकेटचा मुख्य सूत्रधार डॉ. सुनील राजपूतचे नाव पुन्हा समोर आले. दोन दिवसांपूर्वी साताऱ्यात उघडकीस आलेल्या गर्भपाताच्या रॅकेटमधील पीडितेची तपासणी याच राजपूतने केल्याचे डॉ. विकास आहेरने जबाबात सांगितले. पीडितेचा संदर्भ देण्यासाठी त्याला राजपूतने १५ हजार रुपयांचे कमिशन ऑनलाइन दिले होते. सातारा पोलिसांनी वर्षा बाबासाहेब जाधव आणि उज्ज्वला विठ्ठल गायकवाड या दोन बहिणींच्या घरात छापा टाकत गर्भपाताचे नवे रॅकेट उद्ध्वस्त केले. दोघी बहिणींकडे महिला रुग्ण पाठविणाऱ्या सिल्लोडच्या डॉ. आहेर याच्याही मुसक्या आवळल्या. पोलिसांनी आरोपींचे आर्थिक व्यवहार तपासणे सुरू केले. वर्षा आणि ज्योती यांच्यात गेल्या काही महिन्यांत सातत्याने १०, १५, ३०, ४० हजारांचे ऑनलाइन व्यवहार आढळले. यात राजपूत, वर्षा, ज्योती आणि इतरांमध्ये ९० हजारांपर्यंत ऑनलाइन पैसे पाठवले गेले. जून २०२३ मध्ये राजपूतला अटक झाल्यानंतर त्याच्यासोबत पूजा नावाची शासकीय परिचारिकादेखील गजाआड झाली होती. राजपूत परिचारिकांना हेरून पैशांचे आमिष दाखवून गर्भपाताच्या रॅकेटमध्ये सहभागी करून घेतो. राजपूत आणि डॉ. सतीश सोनवणे यांची जुनीच टोळी पुन्हा सक्रिय झाल्याचा संशय आहे. छावणी, वाळूज, पुंडलिकनगर तसेच ठाणे, पुणे येथे गर्भपाताचे गुन्हे दाखल असलेला डॉ. सुनील राजपूत अजूनही दुष्कर्मात सक्रिय असल्याचे उघडकीस आले आहे. जून २०२३ मध्ये त्याला वाळूज पोलिसांनी अटक केली होती.
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कप्तानगंज गोलीबारी: आदित्य साहनी के बेटे को पैर में गोली लगी, पकड़ा गया

Noida, Uttar Pradesh:कुशीनगर 6 अप्रैल, 2026 को कप्तानगंज थाने के किसान चौक इलाके में दो गोलीबारी की घटनाओं के बाद, अपराधियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग इलाकों में चेकिंग करने के लिए पुलिस टीमें बनीं। कप्तानगंज थाने के हसनगंज इलाके में एक छोटी टीम और एक जॉइंट टीम द्वारा चेकिंग ऑपरेशन के दौरान, एक मोटर साइकिल देखी गई और उसे रोकने की कोशिश की गई। बाइक सवारों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में पुलिस टीम ने भी फायरिंग की, जिससे बाइक सवार, जिसकी पहचान कमलेश साहनी के बेटे आदित्य साहनी के रूप में हुई, के पैर में गोली लग गई और वह पकड़ा गया। उसके पीछे बैठा व्यक्ति अंधेरे में भाग गया। आदित्य साहनी पिछले दिन की गोलीबारी की घटना का मुख्य आरोपी है, और पुलिस भागे हुए व्यक्ति की सरगर्मी से तलाश कर रही है। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, और सभी तथ्यों की अच्छी तरह से जांच करने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। मौके पर स्थिति शांत है。
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हापुड - प्रयागराज जा रहे राकेश टिकैत का संगठन के लोगो ने किया जोरदार स्वागत।

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Hapur, Uttar Pradesh:हापुड रेलवे स्टेशन पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का किसानों ने जोरदार स्वागत किया। प्रयागराज जाते समय हापुड़ स्टेशन पर राकेश टिकैत का संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ने स्वागत किया। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए राकेश टिकैत ने उड़ीसा में हुई घटना पर कहा कि उड़ीसा में किसानों की पैदल यात्रा चल रही थी और भुवनेश्वर में एक बैठक होनी थी। पैदल यात्रा को भुवनेश्वर में रोक दिया गया और जब हम भुवनेश्वर जा रहे थे तो हमें भी रोक लिया हमें आपस में मिलने नहीं दिया गया। हमको भी गिरफ्तार कर लिया गया और पैदल यात्रा में शामिल लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया और अलग-अलग स्थान पर छोड़ दिया। वहां पर हमें न तो बैठक करने दी और न ही लोगों से मिलने दिया गया। इसके विरोध में संगठन से जुड़े लोगों ने जगह-जगह धरना प्रदर्शन किया गया। संगठन के अस्थाई कार्यालय को प्रशासन द्वारा तोड़े जाने पर बोले राकेश टिकैत की हमारा कोई कार्यालय नहीं था। वहां पर किसी ने दुकान कर रखी थी जिसकी जिला अध्यक्ष को कोई जानकारी नहीं थी। वहां संगठन का नाम जरुर लिखा था। हमारा कहना है कि कार्यालय बैनामें की जगह पर बनाया जाए। कोई आदमी ऐसा कार्य न करें जिससे संगठन बदनाम हो। कार्यालय पक्के बैनामे पर बनने चाहिए। गन्ना भुगतान पर बोले राकेश टिकैत बोले कई शुगर मिलों ने अभी तक गन्ना भुगतान नहीं किया है गन्ना भुगतान होना चाहिए वैसे भी इस बार किसानों की फसल कमजोर है बे मौसम बारिश से किसानों की फसले प्रभावित हुई है। सरकार उसको संज्ञान में लेकर तुरंत गन्ना भुगतान कराए। सरसों और गेहूं की फसल में जो नुकसान हुआ है उसक भी किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। बिजली की समस्या पर राकेश टिकैत ने कहा की बिजली महंगी कर दी गई है। राकेश टिकैत बोले कि बिजली विभाग से खतरनाक कोई विभाग नहीं है।
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गोंडा में गर्मी के बीच बादल छाए, बूंदाबांदी से तापमान गिरा; बिजली गिरने की चेतावनी जारी

Gonda, Uttar Pradesh:एंकर- खबर गोंडा से है। गोंडा जिले में जहां एक तरफ एक सप्ताह से भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है लगातार भीषण गर्मी से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तो वही गोंडा जिले में देर रात हल्की बूंदाबांदी होने से जहां एक तरफ लोगों को देर रात गर्मी से राहत मिली थी। तो वहीं दूसरी तरफ सुबह से ही गोंडा का आज मौसम का मिजाज बदला हुआ है काले घने बादल छाए हुए हैं हल्की बरसात हो रही है जिससे गोंडा के तापमान में काफी गिरावट आई है। मौसम विभाग द्वारा काले घने बादल छाने और देर रात हुई बूंदाबांदी को लेकर के लोगों को अलर्ट जारी कर सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करके लोगों को निर्देश दिया है कि अगले 24 घंटे के अंदर गोंडा जिले के कई स्थानों पर हल्की और तेज हवाओं के साथ बरसात हो सकती है इसके साथ ही साथ आकाशीय बिजली गिरने को लेकर के भी लोगों को सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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खरगोन के सेगांव में नटखट बंदर ने दुकानों पर कब्जा कर हंगामा मचाया

Khargone, Madhya Pradesh:एंकर-खरगोन जिले के सेगांव में इन दिनों एक ‘नटखट बंदर’ सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह नगर में किसी भी दुकान पर कब्जा कर सभी को दूर भगा देते है। और खूब लुफ्त लेते है दुकान में रखी सामग्री का खा खाकर। बंदर दुकान में रखी हर चीज को खाता है। सेगांव बस स्टैंड पर फल की दुकान पर केले कभी अंगूर तो कभी चने खाने का मजा लिया। डर वहां पैदा हो जाता है जब बंदर दुकान के करीब किसी को नहीं आना देता हैं आने वाले पर झपटता है। इस भय से अब लोगो ने वन विभाग से बंदर को पकड़ने की मदद मांग ली है। बंदर कभी फल की कभी होटल तो कभी किराना पर पहुंचकर भरपेट खाने का आनंद लेते है कोई आया तो उसकी खैर नहीं। बंदर एक सप्ताह से नगर में परेशान कर रहा हैं
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