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बेढम का नया कानून: गरीबों के लिए रोजगार और रामराज्य का दावा
ASArvind Singh
Jan 23, 2026 03:46:51
Sawai Madhopur, Rajasthan
गंगापुर सिटी सवाई माधोपुर
बनी सिंह मीना
कानून से गरीबों को सम्मानजनक रोजगार, कांग्रेस को विकसित भारत और रामराज्य से आपत्ति : बेढम
राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम एक दिवसीय दौरे पर गंगापुर सिटी पहुंचे। गंगापुर सिटी पहुंचने पर भाजपाइयों द्वारा गृहनंत्री का भव्य स्वागत किया गया। वहीं उन्होंने मिनी सचिवालय में 32.63 लाख रूपए की लागत से बने अभियोजन भवन का लोकार्पण किया। और अभियोजन भवन का निरीक्षण भी किया।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने VB-G RAM G कानून को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस को न विकसित भारत की सोच स्वीकार है और न ही भगवान राम से जुड़ी रामराज्य की अवधारणा। उन्होंने कहा कि यह कानून गरीबों को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन को साकार करेगा। यह विधेयक महात्मा गांधी के विचारों और रामराज्य की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है।
बेढम ने बताया कि नई योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, जनजातीय और पिछड़े वर्गों को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति (ST) के श्रमिकों को 25 दिन अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस कानून में मजदूरों को तेजी से भुगतान सुनिश्चित किया गया है। और मजदूरी हर सप्ताह सीधे खाते में दी जाएगी।
मनरेगा को लेकर बेढम ने कहा कि सबसे अधिक बजट और खर्च मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। अब तक मनरेगा पर कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के दौरान खर्च हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर योजनाओं और संस्थानों के नाम एक ही परिवार के नाम पर रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि रोजगार योजना का नाम शुरू से महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था, बल्कि समय-समय पर उसे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और जवाहरलाल नेहरू के नाम से जोड़ा गया।
ग्रामीण भारत में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए बेढम ने कहा कि 2005 की तुलना में आज ग्रामीण गरीबी में बड़ी कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण गरीबी 2011-12 में 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 4.86 प्रतिशत रह गई है। बदली परिस्थितियों के चलते अब कानून में बदलाव जरूरी था। नए कानून की चार प्रमुख प्राथमिकताओं में जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, आजीविका से जुड़े संसाधनों का विकास और मौसम के कारण काम में आने वाली बाधाओं को कम करना शामिल है।
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