Back
40 साल से सेवा, अब नियमित चतुर्थ श्रेणी: राजस्थान HC का बड़ा फैसला
RKRakesh Kumar Bhardwaj
Dec 10, 2025 18:01:19
Jodhpur, Rajasthan
जोधपुर - राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की चार दशक लंबी सेवा को महज अस्थायी बताकर उसके नियमितीकरण और रिटायरमेंट लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रेखा बोराणा की सिंगल बेंच ने भीलवाड़ा के सत्यनारायण शर्मा सहित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। फैसले का सबसे बड़ा असर यह है कि याचिकाकर्ताओं को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति से ही नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मानकर पेंशन सहित सभी रिटायरमेंट लाभ दिए जाएंगे।
40 साल सेवा, पर नियमित नहीं किया गया था
सत्यनारायण शर्मा को 5 अगस्त 1981 को पंचायत समिति लूणकरणसर में गेटकीपर के रूप में अस्थायी आधार पर नियुक्त किया गया था। बाद में 1992 में उन्हें चुंगी नाका रक्षक बनाया गया। राज्य में चुंगी व्यवस्था समाप्त होने के बाद ऐसे हजारों कर्मचारी सरप्लस हो गए। सरकार ने 6 अगस्त 1998 को आदेश जारी कर कहा था कि ऑक्ट्रॉय से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी और उन्हें सेवा में बनाए रखा जाएगा। इस आदेश के बाद सत्यनारायण शर्मा ने नियुक्ति की तारीख 14 अगस्त 1981 से लगातार ग्राम पंचायत लूणकरणसर में सेवाएं जारी रखीं। जिला परिषद बीकानेर ने 2007 में सरप्लस कर्मचारियों के समायोजन की लिस्ट भेजी थी, वहीं पंचायतीराज विभाग ने 2016 में ऐसे कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का न्यूनतम वेतनमान देने का आदेश जारी किया। लेकिन याचिकाकर्ता का नाम इसमें शामिल नहीं होने से वे नियमितीकरण और सेवा लाभों से वंचित रहे।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता और सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियमित विधि के अनुसार नहीं की गई थी। उन्हें केवल अस्थायी आधार पर रखा गया था और चुंगी समाप्त होने के बाद मानवीय आधार पर सेवा में बनाए रखा गया। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में रिटायरमेंट के बाद पेंशन या नियमितीकरण का दावा नहीं किया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस रेखा बोराणा ने कहा कि यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता ने लगातार 40 वर्ष सेवा दी है। इतनी लंबी सेवा को अस्थायी नहीं कहा जा सकता। राज्य या उसके अधिकारियों की किसी भी कार्रवाई से उस व्यक्ति को मूल सेवा अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता जिसने पूरी निष्ठा से कार्य किया है। कोर्ट ने कन्हैयालाल नाई और लालाराम सैनी मामलों के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चार दशक की सेवा अपने आप में मूल सेवा मानी जाएगी। इसलिए याचिकाकर्ता को नियुक्ति की तारीख से ही नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी माना जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि याचिकाकर्ताओं को पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ तो दिए जाएंगे, लेकिन वे वेतनमान में वेतन निर्धारण के आधार पर किसी भी प्रकार के एरियर (बकाया वेतन) का दावा नहीं कर सकेंगे।
0
Report
हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|
Advertisement
Kannauj, Uttar Pradesh:कन्नौज जिले के तिर्वा नगर में वैकल्पिक वाईपास और डी०एन० कॉलेज के सामने जल भराव की समस्या को लेकर जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन। सम्पूर्ण समाधान दिवस में अपनी समस्या को लेकर कही यह बात ।
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
1
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report
0
Report