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7 डिजिट घोटाले में बैकलॉग पर चढ़े सवाल, FIR दर्ज नहीं
KCKashiram Choudhary
Jan 03, 2026 10:08:48
Jaipur, Rajasthan
काशीराम चौधरी लोकेशन- जयपुर फीड- 2सी हैडर- 7 डिजिट घोटाला, आधी-अधूरी जांच!
- परिवहन मुख्यालय की जांच को लेकर उठे सवाल
- विभाग ने कराई 11336 वाहनों के बैकलाॅग की जांच
- 7 डिजिट सीरीज में 35 हजार वाहनों का हुआ बैकलॉग
- 30 दिसंबर थी FIR दर्ज कराने की डेडलाइन
- राज्य में एक भी RTO कार्यालय में FIR नहीं
7 डिजिट सीरीज के घोटाले में परिवहन मुख्यालय की जांच रिपोर्ट को लेकर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। परिवहन विभाग ने 11336 वाहनों के बैकलॉग की जांच की है। जबकि 7 डिजिट सीरीज के 35 हजार वाहनों का बैकलॉग किया गया है। दूसरी तरफ डेडलाइन निकल जाने के बाद भी एक भी परिवहन कार्यालय में दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। यह रिपोर्ट देखिए-
वीओ- 1
परिवहन विभाग में 7 डिजिट सीरीज के घोटाले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। परिवहन मुख्यालय की ओर से आरटीओ और डीटीओ अधिकारियों को दोषी कार्मिकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के लिए 2 बार पत्र लिखा जा चुका है। पहले 20 नवंबर को और इसके बाद 9 दिसंबर को परिवहन मुख्यालय ने प्रदेशभर के आरटीओ-डीटीओ को पत्र लिखा था कि इन सभी मामलों में दोषी कार्मिकों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराए जाएं। इन मामलों में दोषी एजेंटों और वाहन मालिकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा गया है। हालांकि इस पूरे मामले में एक नया तथ्य सामने आया है। वास्तव में परिवहन विभाग ने महज 11336 वाहनों की बैकलॉग की ही जांच कराई है। जबकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि 7 डिजिट सीरीज के कुल 35 हजार वाहनों का बैकलॉग किया गया है। ऐसे में बचे हुए नम्बरों की जांच क्यों नहीं की जा रही है, इसे लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आपको बता दें कि परिवहन मुख्यालय ने जिन 11336 वाहनों की जांच की है, उसमें 315 कार्मिकों को दोषी मानते हुए करीब 500 करोड़ के घोटाले की बात कही जा रही है।
Gfx In
जांच रिपोर्ट पर इसलिए खड़े हुए सवाल
- परिवहन विभाग में अब तक 5.50 लाख से अधिक वाहनों का हुआ बैकलॉग
- 7 डिजिट सीरीज के कुल 35 हजार वाहनाें का किया गया बैकलॉग
- 9500 वीआईपी नम्बरों में प्रोसीजरल लैप्सेस पाए गए
- वहीं विभाग में उप वित्तीय सलाहकार द्वारा वित्त विभाग को भेजी एक रिपोर्ट की चर्चा
- इस रिपोर्ट में विभाग ने माना, 7 डिजिट सीरीज में नहीं हुआ राजस्व नुकसान
- इसमें लिखा, बैकलॉग एंट्रीज से राज्य सरकार को नहीं हुआ कोई राजस्व नुकसान
वीओ- 2
दूसरी तरफ परिवहन मुख्यालय ने प्रदेशभर के आरटीओ-डीटीओ को दोषी कार्मिकों के खिलाफ 30 दिसंबर तक एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा था। लेकिन अभी तक एक भी आरटीओ या डीटीओ ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। मुख्यालय ने अपने आदेश में साफ लिखा था कि आरटीओ कार्यालय में खुद आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों के डीटीओ एफआईआर दर्ज कराएंगे। वहीं कुछ आरटीओ अपने अधीनस्थ डीटीओ पर एफआईआर करवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। कुलमिलाकर इस पूरे मामले में परिवहन विभाग अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहा है। एक तरफ जहां आरटीओ-डीटीओ किसी भी वित्तीय अनियमितता से इनकार कर रहे हैं, वहीं परिवहन मुख्यालय निचले अधिकारियों पर दोषी कर्मियों के खिलाफ दबाव बनाने में लगा हुआ है。
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