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डिंडोरी में नर्मदा बचाव के लिए सीवर प्लांट के कुशल संचालन पर जोर

Dindori, Madhya Pradesh:डिंडोरी में नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में कलेक्टर अंजु पवन भदौरिया ने शहर के सीवर ट्रिटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना उपचारित गंदा पानी किसी भी स्थिति में नर्मदा नदी में न जाए और सीवर प्लांट का संचालन पूरी क्षमता एवं निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सीवेज के उपचार की पूरी प्रक्रिया, मशीनों की कार्यप्रणाली और प्लांट की क्षमता का जायजा लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्लांट का नियमित संचालन, समय-समय पर रखरखाव और पानी की गुणवत्ता की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी डिंडोरी की जीवनरेखा और आस्था का केंद्र है, इसलिए इसे प्रदूषण से बचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि सीवर प्लांट प्रभावी ढंग से संचालित होता है तो शहर का गंदा पानी उपचारित होकर ही निकलेगा, जिससे नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने की मुहिम को और मजबूती मिलेगी。
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दिल्ली: मौलाना राशीद के बाल विवाह पर बयान से राजनीतिक घमासान

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली: लड़कियों की शादी के बारे में अपने बयान पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी कहते हैं, "...मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं—जहाँ ऐसे कानून लाए जा सकते हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी कर सके, और जहाँ एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सके। ऐसे कानूनों वाले देश में, अगर कोई रेप या किसी बुरी घटना के जोखिम से बचने के लिए लड़की की जल्दी शादी करने का सुझाव देता है, तो यह निश्चित रूप से एक राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा। लोग इसका गलत मतलब निकालेंगे और ये लोग कौन हैं? मेरा बस यही कहना है: शरीयत या किसी अन्य धर्म में बताई गई अच्छी बात को अपनाने में क्या बुराई है?...मेरे बयान को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है—और किसके द्वारा? उन्हीं लोगों के द्वारा जो कानून बनाते हैं लेकिन उन्हें तोड़ने की क्षमता भी रखते हैं और तोड़ते भी हैं। ये लोग सामाजिक सुधार नहीं देखना चाहते। मैंने सामाजिक सुधार के हित में बात की इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए। मैं छह या सात राज्यों के नाम ले सकता हूँ—जैसे झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश और राजस्थान—जहाँ अभी भी बाल विवाह होता है। माता-पिता अक्सर कम उम्र में ही बिना पढ़ी-लिखी बेटियों की शादी कर देते हैं। समाज में यह सब हो रहा है...इस्लाम भी यही सलाह देता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए...मैंने ऐसा क्या गलत कहा जिससे इतना राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया—यह दावा किया जा रहा है कि रशीदी साहब ने अठारह साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी की वकालत की? मैंने ऐसा कभी नहीं कहा...
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अखाड़ा परिषद ने पुजारियों के लिए जेब-हीन यूनिफॉर्म की मांग पर हंगामा

Ujjain, Madhya Pradesh:जेब विहीन कुर्ते का फरमान: अखाड़ा परिषद और पुजारियों के बीच छिड़ा 'दान का दंगल' मंदिरों में दान की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर धर्मनगरी उज्जैन में एक नया विवाद गहरा गया है। हाल ही में अयोध्या और आगर-मालवा के बगलामुखी मंदिर में दान राशि में हेरफेर के प्रकरण सामने आने के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने एक ऐसा सुझाव दे दिया है, जिससे देशभर का पुजारी समाज आगबबूला हो गया है। महंत ने बड़े मंदिरों में पुजारियों के लिए जेब-हीन यूनिफॉर्म अनिवार्य करने की वकालत की है ताकि दान की राशि सीधे दानपेटी में जाए। इस अजीबोगरीब नसीहत के सामने आते ही अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने कड़ा पलटवार किया है। महेश पुजारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि पुजारियों का अपमान करना बंद किया जाए, वरना देशभर का ब्राह्मण समाज विरोध के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पुजारी पहले से ही धोती और बनियान पहनते हैं, जिनमें जेब नहीं होती, लेकिन अगर परिषद को इससे भी समस्या है, तो वे और भी सादे वस्त्र धारण करने को तैयार हैं। विवाद को तूल देते हुए महेश पुजारी ने कहा कि अयोध्या और आगर-मालवा के मंदिरों में दान की राशि में जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, उनमें किसी पुजारी का हाथ नहीं है। यह अमानत में खयानत का काम पूरी तरह से ट्रस्टी और समिति के लोगों द्वारा किया गया है। पुजारियों की भक्ति और परिश्रम की बदौलत ही देश के मंदिरों का खजाना भरा है, जो आज बड़े-बड़े लॉकरों में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ऐसे बेबुनियाद बयान देने वाले सतर्क हो जाएं, क्योंकि पुजारी समाज अब अपनी प्रतिष्ठा पर आंच बर्दाश्त नहीं करेगा।
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23 मुकदमे वाले शातिर वन अपराधी लखविंदर गिरफ्तार, वन विभाग ने जाल बिछाकर दबोचा

Noida, Uttar Pradesh:रामनगर तराई पश्चिमी वन प्रभागRamनगर रेंज ने वर्षों से वन अपराधों में वांछित चल रहे शातिर वन अपराधी लखविंदर पुत्र खेम सिंह निवासी ग्राम गोबरा, तहसील बाजपुर, जनपद ऊधमसिंहनगर को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभारी अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्य और उप प्रभागीय वन अधिकारी किरण साह के निर्देशन में गठित संयुक्त टीम ने की। लखविंदर अपने दो अन्य साथियों के साथ दो आरे लेकर आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध पातन की नीयत से प्रवेश कर रहा था, तभी वन विभाग को उसकी गतिविधियों की गोपनीय सूचना मिली। टीम ने मौके पर जाल बिछाया और उसे दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की धाराओं के तहत न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की तैयारी है। वन विभाग का दावा है कि यह कार्रवाई क्षेत्र के लकड़ी तस्करों पर बड़ा संदेश है और भविष्य में भी वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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बगहा के अनुमंडल अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा

Bagaha, Bihar:बगहा से बड़ी खबर है जहाँ अनुमंडलीय अस्पताल में शुक्रवार को प्रसव के दौरान मृत शिशु के जन्म के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने लेबर रूम में घुसकर हंगामा किया और अस्पताल की लैपटॉप, टेबल समेत अन्य सरकारी सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हंगामे के दौरान अस्पताल के कुछ अभिलेख भी अस्त-व्यस्त हो गए हैं, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मिली जानकारी के अनुसार प्रसूता की पहचान बगहा टाउन थाना क्षेत्र के चखनी गांव निवासी रितेश कुमार की 25 वर्षीय पत्नी ज्योति कुमारी के रूप में हुई है, जबकि उसका ससुराल चौतरवा बताया गया है। दरअसल मृत नवजात के जन्म की सूचना मिलते ही परिजनों ने डॉ. शिवांगी और जीएनएम पर प्रसव में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि समय पर उचित इलाज और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल नहीं करने के कारण नवजात की मौत हुई है, जबकि चिकित्सक और कर्मी मरा हुआ बच्चा जन्मे होने की पुष्टि करते हुए सभी आरोप निराधार बताकर प्रसूता के परिजनों द्वारा दुर्व्यवहार समेत तोड़फोड़ करने की बात कह रहे हैं। वहीं एक वायरल वीडियो में प्रसूता के परिजनों की अस्पताल में गुंडागर्दी सा स्पष्ट उजागर हो रही है। बताया जा रहा है कि सदर अस्पताल की SDM बगहा में बवाल और हंगामा की सूचना पर Town थानाध्यक्ष शैलेश कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल में पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच वार्ता कर मामले को शांत कराने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। इधर अनुमंडल अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि आक्रोशित परिजनों ने चिकित्सा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया है और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। SDH अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक ने बताया है कि मामले में अस्पताल प्रशासन नगर थाना को लिखित आवेदन देकर घटना की जांच कराने और कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं प्रसूता के परिजनों ने चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग किया है।नगर थाना में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग लिखित आवेदन दिये गए हैं। बगहा नगर थानाध्यक्ष ने बताया है कि मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि अनुमंडल अस्पताल प्रबंधन ने पूरे घटनाक्रम की सूचना स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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गाडरवारा में मूंग 100% खरीदी के लिए कांग्रेस का आक्रामक आंदोलन

Narsinghpur, Madhya Pradesh:नरसिंहपुर के गाडरवारा की सड़कों पर कांग्रेसियों का हल्ला बोल देखने को मिला किसान कांग्रेस के नेतृत्व ओर मध्य प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में गाडरवारा मंडी प्रांगण में मूंग की 100% खरीदी को लेकर पहले बड़ी सभा का आंदोलन किया गया जहां पर जिले के कांग्रेसियों से लेकर प्रदेश के तमाम कांग्रेसी वहां मौजूद रहे । इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में मंडी प्रांगण से एसडीएम कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और एसडीएम कार्यालय के सामने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की । आपको बता दें कि कांग्रेसियों की मांग है कि खाद की टोकन व्यवस्था को बंद किया जाए साथ ही मूंग की 100% खरीदी सरकार सुनिश्चित करें किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है सरकार अगर मांगे नहीं मानती है तो आगे कांग्रेस इस मुहिम को जारी रखेगी और गांव-गांव से किसानों को जागरुक कर विधानसभा का घेराव करने की चेतावनी दी है। बाइट - 1. धर्मेंद्र सिंह चौहान, किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष वहीं कांग्रेस के नेता जिनेश जैन का कहना है की सरकार की नीति और नियत किसान के पक्ष में नजर नहीं आती है आज सरकार को जल्द से जल्द यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों की मून को 100% खरीदा जाए । बाइट - 2. जिनेश जैन, कांग्रेस नेता नरसिंहपुर
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राजस्थान हाईकोर्ट ने गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की गौशालाओं में मवेशियों के लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं होने को गंभीर प्रशासनिक विफलता माना है। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में ट्यूबवेल स्थापना की घोषणा के बावजूद हजारों गौशालाएं आज भी बुनियादी पेयजल सुविधा से वंचित हैं। सरकार के आश्वासन पर फिलहाल अवमानना की कार्रवाई टालते हुए हाईकोर्ट ने 21 जुलाई तक वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना पेश करने और 1 अक्टूबर तक योजना का क्रियान्वयन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ गो ग्राम सेवा संघ की अवमानना याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए बताया कि प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश में 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें 1,641 गौशालाओं में ट्यूबवेल उपलब्ध हैं, जबकि 2,220 गौशालाओं में अब भी पेयजल के लिए ट्यूबवेल की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने स्वयं 740 गौशालाओं को अत्यधिक पेयजल संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है, जहां तत्काल स्थायी व्यवस्था की जरूरत बताई गई है। खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2022 से लगातार आदेश दिए जाने के बावजूद धरातल पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं देती। सरकार की ओर से अस्थायी जलापूर्ति के दावे किए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश की स्थिति को नहीं दर्शाती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि सभी जरूरतमंद गौशालाओं के लिए स्थायी पेयजल ढांचा विकसित कराना है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को तीन चरणों में कार्ययोजना की जानकारी दी। इसके तहत सरकारी भूमि पर स्थित 387, निजी भूमि पर संचालित 234 तथा दान या किराये की भूमि पर स्थित 323 गौशालाओं में क्रमवार पेयजल अवसंरचना विकसित की जाएगी। अधिकारियों ने वित्त विभाग से बजट स्वीकृति लेकर शीघ्र कार्य शुरू करने का भरोसा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चार वर्षों से काम शुरू नहीं होना चिंताजनक है और प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बनता है। हालांकि अधिकारियों के आश्वासन को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल अवमानना की कार्रवाई स्थगित रखी। न्यायालय ने निर्देश दिया कि 15 दिन के भीतर विस्तृत टाइम-बाउंड शेड्यूल प्रस्तुत किया जाए तथा उसके अनुसार कार्य शुरू किया जाए। साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि जहां भूजल उपलब्ध नहीं है वहां वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था पर विचार किया जाए और मानसून तक सभी गौशालाओं में अस्थायी पेयजल व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रखी जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को होगी.
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बिलासपुर: यातायात पुलिस की मानवीय पहल, भारी बारिश में मरीज एयरलिफ्ट

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। यातायात पुलिस की संवेदनशील और मानवीय पहल.... गंभीर रूप से बीमार मरीज को एयरलिफ्ट के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एयरपोर्ट पहुंचाया गया.... भारी बारिश के बीच जवानों ने मोर्चा संभालकर एंबुलेंस को निर्बाध रास्ता दिलाया.... रूट के सभी ट्रैफिक सिग्नल अस्थायी रूप से बंद कर यातायात पूरी तरह नियंत्रित किया गया.... 54 वर्षीय मरीज को एयर एम्बुलेंस से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल भेजा गया.... मरीज निमोनिया, H1N1 संक्रमण और श्वसन विफलता से जूझ रहा है.... मरीज के परिजनों और एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने यातायातPolice की सराहना की.... एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में हुई इस मानवीय पहल की शहरभर में प्रशंसा हो रही है।
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सीतापुर में विधानसभा स्तर पर प्रवेश उत्सव पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सवाल उठाए

Kusu, Chhattisgarh:एंकर -सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश को लेकर भाजपा में सियासत तेज हो गई है। सीतापुर विधायक ने स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों को ताक पर रखकर विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। जिसका विरोध भाजपा के वरिष्ठ नेता के द्वारा किया गया। दरअसल सरगुजा जिले के सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के द्वारा राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। जिसमें यह साथ निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा दिया गया था कि जिला स्तर ,ब्लॉक खंड स्तर सहित संकुल स्तर पर शाला प्रवेश का आयोजन किया जाना है। लेकिन भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपने क्षेत्र में एक अलग नियम बनाकर अलंकरण समारोह एवं विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके विरोध में भाजपा के वरिष्ठ नेता व शाला समिति के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने जिले के अधिकारियों से लेकर ब्लाक खंड शिक्षा अधिकारी से सवाल कर दिए और पूछा कि ऐसा कौन सा गाइडलाइन सरकार के द्वारा जारी किया गया है..? जिसमें विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा, साथ ही कहा कि पढ़ लिखकर अधिकारी बने हैं या जानबूझकर बेवकूफी गिरी कर रहे हैं। अलंकरण समारोह का आयोजन कर देश भर के लोगों का सम्मान कर सकते हैं। लेकिन इस तरह से विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश करना बिल्कुल गलत है। जिसको लेकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि जिनके द्वारा विरोध किया जा रहा है उन्हें भी कार्यक्रम में बुलाया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा को लेकर एक अलग पहचान बनाने की ओर हम काम कर रहे हैं। पूरे मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे नौकरी ज्वाइन किए हुए कुछ ही दिन हो रहे हैं, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन कार्यक्रम को लेकर कहा कि इस तरीके से विधानसभा स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम कोई आदेश या निर्देश नहीं हैं। बहरहाल सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में विधायक के द्वारा वरिष्ठ भाजपा नेताओं को दरकिनार कर दिया गया हैं। अब देखना होगा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका कितना असर देखने को मिलेगा।
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डिंडोरी: नर्मदा प्रदूषण रोकथाम के लिए सीवर प्लांट का कड़ा निरीक्षण

Dindori, Madhya Pradesh:एंकर: डिंडोरी में नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में कलेक्टर अंजु पवन भदौरिया ने शहर के सी Sewer ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना उपचारित गंदा पानी किसी भी स्थिति में नर्मदा नदी में न जाने पाए और सीवर प्लांट का संचालन पूरी क्षमता एवं निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सीवेज के उपचार की पूरी प्रक्रिया, मशीनों की कार्यप्रणाली और प्लांट की क्षमता का जायजा लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्लांट का नियमित संचालन, समय-समय पर रखरखाव और पानी की गुणवत्ता की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी डिंडोरी की जीवनरेखा और आस्था का केंद्र है, इसलिए इसे प्रदूषण से बचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि सीवर प्लांट प्रभावी ढंग से संचालित होता है तो शहर का गंदा पानी उपचारित होकर ही निकलेगा, जिससे नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने की मुहिम को और मजबूती मिलेगी।
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