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ASAP ShrivastavaFollow13 Aug 2024, 02:29 pm
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जालौर में शिक्षकों के स्थायीकरण और वेतन समस्या पर धरना प्रदर्शन

Jalore, Rajasthan:जालौर राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील जिला शाखा जालौर ने बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के समक्ष शिक्षकों की विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने जोरदार नारेबाज़ी करते हुए जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को एक मांग पत्र का ज्ञापन प्रस्तुत किया। संगठन के जिला मंत्री बाबूलाल कड़वासरा ने बताया कि चार वर्षों से शिक्षकों का स्थायीकरण नहीं हो रहा है, जिससे जिले के आम शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिक्षकों की वाजिब समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो संगठन जबरदस्त आंदोलन और संघर्ष करेगा। धरना स्थल पर विशाल सभा हुई, जिसे संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष जयकरण खिलेरी ने प्रशासन से जल्द समाधान की अपील की। संगठन के संरक्षक पूनमचंद विश्नोई ने जालौर जिले के अन्य शिक्षक संगठनों से संयुक्त आंदोलन के लिए आह्वान किया। प्रदेश मुख्य महामंत्री किशनलाल सारण ने बताया कि प्रदेश संगठन के आह्वान पर राजस्थान के जिला मुख्यालयों पर समस्याओं को लेकर आंदोलन किए जा रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर को शिक्षकों के अतिशीघ्र स्थायीकरण, वेतन विसंगति के प्रकरणों का निस्तारण, ग्रीष्म अवकाश के बकाया प्रकरणों का निराकरण, जनगणना में एक प्रगणक को दो ब्लॉक आवंटित करने और मिड डे मील की राशि जारी करने सहित कई ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराया। संगठन प्रतिनिधि मंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा से भी द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें लंबित समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की गई। धरने में जालौर जिले की विभिन्न ब्लॉकों के सैकड़ों शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया。
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गोविंदगढ़ थाने पर हमला: चार आरोपी गिरफ्तार, 28 शांति भंग के आरोप

Govind Garh, Ramwas, Rajasthan:गोविंदगढ़ थाने पर हमले के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4 आरोपी गिरफ्तार, 28 शांति भंग में पकड़े गए अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाने पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 28 लोगों को शांति भंग के आरोप में हिरासत में लिया गया है। पुलिस अभी अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है । जानकारी के अनुसार, बीती रात गोविंदगढ़ थाना पुलिस ने बुलेट बाइक से स्टंट करने और पटाखों जैसी आवाज निकालने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर के मामले में दो युवकों को पकड़कर उनकी बाइक जब्त की थी। इस कार्रवाई से नाराज होकर करीब 50 से अधिक लोगों की भीड़ ने थाने पर धावा बोल दिया। भीड़ ने थाने परिसर में खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की और जमकर पत्थरबाजी की। इस घटना में थाना अधिकारी धर्म सिंह सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। फिलहाल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 28 लोगों को शांति भंग करने के आरोप में पकड़ा गया है। सभी आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए गोविंदगढ़ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
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कृषि मंत्री मीणा ने पल्लू शाखा में 162 फर्जी बीमा खातों की जांच कराई

Jaipur, Rajasthan:बैंक शाखा में पहुंच गए कृषि मंत्री, कहा, किसानों की लिस्ट दिखाओ - राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल फिर एक्शन मोड में, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पकड़ी गड़बड़ी - हनुमानगढ़ के पल्लू में SBI बैंक में मारा छापा, कथित रूप से 162 फर्जी किसानों का नेटवर्क उजागर जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कथित तौर पर करीब 9 करोड़ रुपए के फर्जी बीमा क्लेम का बड़ा मामला सामने आया है। कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने हनुमानगढ़ जिले की पल्लू स्थित SBI शाखा में औचक जांच की। इस दौरान 162 कथित फर्जी किसानों के नाम पर बीमा किए जाने का मामला उजागर हुआ। आपको बता दें कि कृषि मंत्री डॉ किरोड़ीलाल गुरुवार को हनुमानगढ़ के पल्लू में एसबीआई बैंक में अचानक पहुंच गए। गड़बड़ी मिलने पर कृषि मंत्री के हस्तक्षेप से करोड़ों रुपए की क्लेम राशि जारी होने से पहले रोक दी गई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बाहरी व्यक्तियों के बचत खाते खोलकर उन्हें “ऋणी किसान” दर्शाया गया। खरीफ 2025 में मूंगफली फसल का बीमा करवाया गया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया में फर्जी खसरा नंबर, मुरब्बा नंबर और कृषि भूमि रिकॉर्ड का उपयोग किया गया। दरअसल कृषि मंत्री द्वारा करवाई गई जांच में गजनेर तहसील प्रशासन ने रिपोर्ट दी थी कि सूची में शामिल व्यक्तियों के नाम पर संबंधित ग्रामों एवं चकों में कोई भूमि दर्ज नहीं है। प्रस्तुत खसरा और मुरब्बा नंबर पूर्णत: फर्जी पाए गए। इसके बाद कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा SBI पल्लू शाखा पहुंचे। उन्होंने यहां शाखा प्रबंधन से सीधे सवाल किए। मंत्री ने पूछा कि क्या 162 व्यक्तियों का फसल बीमा शाखा से किया गया है ? क्या वे ऋणी किसान हैं ? शाखा प्रबंधक द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद मंत्री ने संबंधित किसानों की जमाबंदी और भूमि रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन मौके पर स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य - 162 व्यक्तियों के बचत खाते खोलकर उन्हें ऋणी किसान दर्शाया गया - फर्जी खसरा एवं मुरब्बा नंबरों के आधार पर कृषि भूमि रिकॉर्ड अपलोड किए गए - खरीफ 2025 की मूंगफली का बीमा करवा करोड़ों रुपए का क्लेम तैयार किया - जबकि संबंधित व्यक्तियों के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में कोई भूमि दर्ज नहीं - कृषि मंत्री ने दावा किया कि इसी सप्ताह 9 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम जारी होने वाला था - इसे अब मंत्री के दखल से समय रहते रोक दिया गया - यदि भुगतान हो जाता तो यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा माना जाता कृषि मंत्री बोले, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित के लिए बनाई गई है। लेकिन कुछ लोग इसे लूट का माध्यम बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संबंधित शाखा प्रबंधक एवं बैंक कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने, संदिग्ध खातों को फ्रीज कराने, फर्जी भूमि रिकॉर्ड की जांच करवाने तथा बीमा कंपनी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही। उठ रहे गंभीर सवाल - बिना भूमि सत्यापन बीमा कैसे स्वीकृत हुआ? - बैंक ने ऋणी किसान की पात्रता किस आधार पर मानी? - बीमा कंपनी ने दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया? - फर्जी खसरा और मुरब्बा नंबर सिस्टम में कैसे अपलोड हुए? - क्या यह मामला केवल एक शाखा तक सीमित है? या बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? कहीं संगठित गिरोह तो नहीं ? मामला सामने आने के बाद बैंकिंग, कृषि एवं राजस्व विभागों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर पर भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की जा सकती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े सबसे बड़े संगठित वित्तीय फर्जीवाड़ों में शामिल हो सकता है।
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SC की तल्ख टिप्पणी: संसद क्यों नहीं बना पाई चुनाव आयुक्तों की स्वतंत्रता कानून?

Noida, Uttar Pradesh:*चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- सत्ता बदलती है, तरीका नहीं* सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि केंद्र में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें आती रहीं, लेकिन कोई भी चुनाव आयोग के स्वतंत्र कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए कानून नहीं बना सकी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जितनी तेजी से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति हो जाती है, काश उतनी ही तेजी से जजों की नियुक्ति भी हो जाती। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में चीफ जस्टिस की भूमिका खत्म करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। *‘संसद ने 2023 तक कानून क्यों नहीं बनाया?’* जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण से कहा कि संसद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले इस विषय पर कानून क्यों नहीं बनाया। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हर सरकार ने कानून न होने का फायदा उठाया ताकि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को अपने हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए पार्टियाँ स्वतंत्र चुनाव आयोग की मांग करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे को भूल जाती है। *'चुने हुए लोग भी कर सकते हैं मनमानी’* जस्टिस दीपांकर दत्ता ने दिवंगत नेता अरुण जेटली के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ गैर-निर्वाचित लोग ही तानाशाही नहीं करते, चुने हुए लोग भी मनमानी कर सकते हैं। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि इसमें बहुमत की तानाशाही भी शामिल है। *जस्टिस दत्ता ने अंबेडकर का किया जिक्र* जस्टिस दत्ता ने कहा कि उन्होंने बीआर अंबेडकर पर एक वीडियो देखी थी, जिसमें डॉ. अंबेडकर ने संविधान लागू होने के तीन साल बाद कहा था कि इस देश में लोकतंत्र सही तरीके से काम नहीं कर रहा। *‘विपक्ष में रहते हुए सुधार की बात, सत्ता में आते ही खामोशी’* वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राजनीतिक दल विपक्ष में रहते हुए सुधार की बातें करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। *2023 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था* मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल मामले में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए आदेश दिया था दिसंबर 2023 में सरकार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कानून लाई। इसके मुताबिक चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। कांग्रेस नेता जया ठाकुर, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स समेत कई याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है。
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ट्रैलर ने महिला को कुचला,मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर किया मुआवजे की मांग

Manoj KumarManoj KumarFollow2m ago
Bbrasi, Uttar Pradesh:सकलडीहा कस्बा के अलीनगर तिराहे पर गुरुवार को एक सड़क हादसे में 35 वर्षीय विवाहिता की मौत हो गई। महिला को एक ट्रेलर ने कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल मुआवजे और ट्रक चालक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए स्टेट हाईवे को जाम कर दिया। मृतका की पहचान सकलडीहा कोतवाली के तेंदुई गांव निवासी धर्मराज चौहान की सबसे छोटी पुत्री रवि कुमारी (35) के रूप में हुई है। उनकी शादी बर्थरा खुर्द गांव निवासी रामहरक के पुत्र विकास चौहान से हुई थी। उनके दो पुत्र, विनायक (7 वर्ष) और कार्तिक (4 वर्ष) हैं। पति विकास चौहान किसानी करते हैं। रवि कुमारी गुरुवार को अपने मायके तेंदुई गांव आई हुई थीं। वह अपने भाई साजन के साथ सकलडीहा कस्बा में खरीदारी करने गई थीं। खरीदारी के बाद, वह बाइक पर पीछे बैठकर अपने मायके लौट रही थीं। अलीनगर तिराहे पर मुगलसराय की ओर से आ रहे एक ट्रेलर ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर से बाइक अनियंत्रित हो गई और रवि कुमारी सड़क पर गिर गईं। ट्रेलर ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना उनके मायके के घर से मात्र 300 मीटर की दूरी पर हुई। हादसे के बाद भीड़ ने ट्रेलर और चालक को पकड़ लिया था, लेकिन चालक किसी तरह भाग निकलने में सफल रहा। इस संबंध में कोतवाल भूपेंद्र कुमार निषाद ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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रतलाम में नई शराब दुकानों के बाहर रात में महफिलें, प्रशासन क्या कर रहा है?

Ratlam, Madhya Pradesh:रतलाम शहर में शराब दुकानों के नए ठेकों के पास मनमानी की तस्वीरें सामने आने लगी हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित जावरा फाटक चौराहे पर हालात सबसे चिंताजनक नजर आ रहे हैं। यहां आबकारी विभाग के कंट्रोल रूम के ठीक सामने संचालित शराब दुकान के बाहर शाम होते ही खुलेआम माहौल बन जाता है। दुकान के बाहर शराब पीने वालों की भीड़ जमा हो जाती है और सार्वजनिक स्थल पर ही जाम छलकाए जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जावरा फाटक चौराहा शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में शामिल है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद खुलेआम चल रही इस गतिविधि पर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। ऐसा लगता है मानो शराब दुकान संचालकों और शराब पीने वालों में भय ही नहीं बचा है। यह तस्वीर सिर्फ एक दुकान की नहीं, बल्कि शहर की कई शराब दुकानों के बाहर शाम ढलते ही ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि जब भी नई शराब दुकानें खोलने की बात होती है, स्थानीय लोग विरोध के लिए सामने आते हैं। धरना प्रदर्शन करते हैं क्योंकि लोगों को डर रहता है कि उनके क्षेत्र का माहौल बिगड़ जाएगा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होगी।
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बस्तर डंप से करोड़ों नकद-सोना बरामद, माओवादियों की संपत्ति के स्रोत पर सवाल

Jagdalpur, Chhattisgarh:बस्तर में माओवादी संगठन एक समय करोड़ों रुपए लेवी के रूप में वसूली करता था, अब जब बस्तर से माओवादी संगठन समाप्त हो चुका है तब माओवादी संगठन द्वारा डंप में छुपाए गए लेवी के करोड़ों रुपए बरामद हो रहे हैं, बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया बीते तीन महीने के अंदर फोर्स के जवानों ने तकरीबन 6 करोड़ 75 लाख रुपए नगद और 8 किलोग्राम सोना बरामद किया है, फोर्स द्वारा जब्त किए गए सोने की अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, वहीं फोर्स का सर्चिंग ऑपरेशन अब भी जारी है, आत्म समर्पण कर चुके माओवादियों के इनपुट के आधार पर फोर्स ने कई डंप बरामद किए है, सबसे ज्यादा फोर्स को कामयाबी दक्षिण बस्तर के बिजापुर जिले में मिली है। अब तक बरामद किया गए करोड़ों रुपए नगद और सोना बरामद होने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर माओवादियों के पास इतनी अकूत संपत्ति आई कहा से, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी के अनुसार माओवादी डंप से बरामद की गई संपत्ति सिर्फ बानगी है माओवादी संगठन डेडलाइन से पूर्व कितना भी कमजोर हुआ हो लेकिन माओवादी संगठन के पास कम से कम 50 करोड़ रुपए होने चाहिए , राजेंद्र तिवारी के अनुसार माओवादी संगठन की सप्लाई चैन और लेवी वसूली के तरीके के चलते माओवादी संगठन के पास हर साल बड़ी मात्रा में पैसे पहुंचाते थे,माओवादी अपने संगठन को चलाने के लिए लेवी के रूप में तेंदुपत्ता संग्राहक , ठेकेदारों अंदरूनी इलाकों में सड़क और पुल पुलियों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों से करोड़ों रुपए हर वर्ष वसूला करते थे। डेडलाइनों से पूर्व माओवादियों की सप्लाई चैन को चोक करने के लिए सरकार ने अपने स्तर पर जरूर प्यास किए, बस्तर में तेंदुपत्ता संग्राहकों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसे देकर सरकार ने इसकी पहल भी की थी लेकिन अब तक कई जिलों में इसे पूर्णतः सरकार लागू नहीं कर पाई, बताया जा रहा है बड़ी संख्या में संग्राहकों के पास बैंक खाता ही नहीं था ऐसे में बीजापुर और सुकमा जैसे जिले में आदिवासी संग्राहकों ने नगद भुगतान की प्रक्रिया अपनाने की मांग सरकार से की थी जबकि साल 2026 में शुरू हुई तेंदुपत्ता संग्रहण में सरकार ने वन विभाग को सभी संग्राहकों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने के निर्देश दिए है। माओवादी संगठन के पास करोड़ों रुपए नगद के साथ ही भारी मात्रा में सोना कहा से आया इसकी भी जांच पुलिस कर रही है, अनुमान लगाया जा रहा है कि नोट बंदी के बाद माओवादी संगठन ने रणनीति बदली और नगदी पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए लेवी वसूली के पैसे से सोना खरीदा, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पिछले साल आत्म समर्पण करने वाले पूर्व माओवादी लीडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू ने एक इंटरव्यू के दौरान यह कबूला था कि 2016 में नोट बंदी के दौरान पुराने नोटों को बदलने के लिए दिए गए पैसे वापस नहीं मिले, वेणुगोपाल ने कबूला कि उसे तकरीबन 20 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
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UP NEWS : जगतपुर में पशुशाला से तेंदुआ ने बकरी को उठाकर मौत के घाट उतारा

Pilibhit, Uttar Pradesh:पीलीभीत में थाना बिलसंडा क्षेत्र के जगतपुर गांव में तेंदुआ ने बकरी पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया और बकरी को पशुशाला से उठाकर ले गया। शोर सरावा होने पर तेंदुआ बकरी को छोड़कर भाग गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच करने में जुटी है। पीड़ित ग्रामीण ने अधिकारियों से मुआवजे की गुहार लगाई है। वहीं सामाजिक वानिकी के रेंजर रोहित जोशी का कहना है मुआवजे के लिए अल्लाह अधिकारियों को चिट्ठी भेजी गई है। वहीं वनकर्मियों की टीम को तेंदुआ की निगरानी के लिए लगाया गया है। गौरतलब है थाना बिलसंडा क्षेत्र के जगतपुर गांव के रहने वाले अमरजीत सिंह का कहना है बीती रात सभी लोग घर पर खाना खाकर सोए थे। आज बृहस्पतिवार की सुबह तड़के लगभग 3:00 बजे उसके घर के किनारे बने पशुशाला से बाघ बकरी को उठा ले गया। बकरियों के चीखने चिल्लाने पर घर के सभी लोग जाग गए जब पशुशाला में जाकर देखा तो एक बकरी गायब थी। आरोप है उसके घर से लगभग ढाई सौ मीटर दूरीपर बकरी का शव छत बिछत हालत में पड़ा था। और बाघ जंगल की ओर भाग गया। सूचना मिलने पर बनकर्मियों की टीम गांव पहुंची और मामले की जांच में जुटी है। वहीं ग्राम प्रधान नेमचंद गंगवार ने प्रभागीय निदेशक एवं वन्य जीव प्रभाग पीलीभीत को पत्र लिखकर पीड़ित का कथन सत्य बताया और मुआवजा स्वीकृत कराने की मांग की है।
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