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Chaaitra Jatra के मौके पर मालवा के चिंतामण गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
ASANIMESH SINGH
Mar 04, 2026 18:32:36
Ujjain, Madhya Pradesh
एंकर - मालवा की परम्परा अनुसार चैत्र मास में पड़ने वाले प्रत्येक बुधवार को चिंतामण गणेश मंदिर में जत्रा लगती है। इस दौरान दूर दूर से श्रद्धालु भगवान के दर्शन पूजन के लिए मंदिर आते हैं। यहां भगवान गणेश तीन स्वरूपों में एक साथ विराजमान हैं, जो भक्तों के सभी मनोरथ पूरे करते हैं। बुधवार को पहली जत्रा पर हजारों श्र0ालु मंदिर पहुंचे और मंगलमूर्ती के दर्शनकर आशीर्वाद लिया।
वीओ - उज्जैन मालवा क्षेत्र का एक बड़ा और धार्मिक नगर है। यहां के प्रसिद्ध चिंतामण गणेश मंदिर में बुधवार को चैत्र जत्रा का आयोजन किया गया। शहर के साथ साथ आसपास के इलाकों और दूरदराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगना शुरू हो गई थी। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने गर्भगृह के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा मैट बिछाने के साथ ही छाया और पेयजल की व्यवस्था की गई थी। भक्तों का मानना है कि भगवान उनके सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं。
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास साल का प्रथम माह होता है, इसलिए इस मास की शुरूआत प्रथम पुज्य भगवान गणेश की आराधना से की जाती है। खासकर ये माह कृषि आधारित होता है, इस अवधि में किसान गेहूं की कटाई करते हैं और अपनी फसल का प्रथम अंश भगवान के श्रीचरणों में समर्पित करते हैं। ये मान्यता सालों से चली आ रही है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस वर्ष चैत्र मास में चार बुधवार पड़ रहे हैं, सभी बुधवार को मंदिर में जत्रा होगी। आज तड़के 04 बजे मंदिर में भगवान का अभिषेक पूजन किया गया। पूजन के बाद भगवान का बाल स्परूप में श्रृंगार कर आरती की गई और भक्तों के लिए दर्शन खोल दिए गए। भक्त अपने भगवान को गुड़ और गंहूं चढ़ाते हैं, जिससे भगवान उनके सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं। यहां भगवान तीन स्वरूपों में एक साथ विराजित हैं। पहले चिंतामन गणेश, दूसरे इच्छामन गणेश और तीसरे सिद्धिविनायक गणेश। इस मंदिर की प्राचीनता इसी बात से सिद्ध होती है कि त्रैता युग में वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने यहां पर भगवान का पूजन किया था। भगवान अपने भक्तों की चिंता दूर करते, इच्छा पूर्ण करते हैं और उनके सकल कार्य सिद्ध करते हैं। सुबह पट खुलने के बाद से रात्रि में शयन आरती तक भक्तों की भीड़ मंदिर में ऐसी ही रहती है।
बाइट - चिंतमण मंदिर पुजारी
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