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Sidhi486661

सीधी में भालू के हमले में 5 लोग घायल

Jul 25, 2024 03:49:55
Sidhi, Madhya Pradesh

सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के मोहन रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत खरसोती में भालू ने अचानक हमला कर दिया। शौच के लिए गए एक व्यक्ति पर भालू ने हमला किया और इसके बाद कुल पांच लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायलों में 2 पुरुष, 2 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल हैं। वन विभाग के मोहन रेंज के रेंजर और वन कर्मियों ने सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी पहुंचाया जहां से उन्हें सीधी रेफर करने की तैयारी की जा रही है।

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AJAvinash Jagnawat
Mar 20, 2026 08:16:53
Udaipur, Rajasthan:उदयपुर के सूरजपोल इलाके में बीती रात एक बड़ा हादसा होने के टल गया। दरअसल शहर में इन दोनों फ्लाईओवर के निर्माण का काम चल रहा है। निर्माण में लगी एक क्रेन से लोहे के भारी डिवाइडर को हटाया जा रहा था। लेकिन डिवाइड अचानक क्रेन से छूटकर नीचे निकल रही एक बाइक के आगे वाले हिस्से पर गिर गया। जिससे बाइक क्षतिग्रस्त हो गई और बाइक सवार दम्पत्ति चोटिल हो गए। अचानाक हुए घटना क्रम से मौके पर हड़कम्प मच गया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। लोगों ने पुरे घटना क्रम पर अपना विरोध दर्ज कराया। हालाकि मौका पाकर क्रेन ड्राइवर और वहां काम कर रहे अन्य मजदूर फरार हो गए। सूचना पर सूरजपोल थाना पुलिस मौके पर पहुँचि। लोगों ने निर्माण कार्य में सुरक्षा के मापदंडों का पूर्ण रूप से पालन करने की मांग की है।
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DGDeepak Goyal
Mar 20, 2026 08:09:53
Jaipur, Rajasthan:दीपक गोयल-जयपुर रसोई की आंच अब सिर्फ सिलेंडर पर नहीं, हालात पर भी निर्भर होने लगी है…राजस्थान में गैस का गणित बिगड़ गया है….नियमों का इंतज़ार, सप्लाई में कटौती और बढ़ता डिलीवरी टाइम…यानी अब सिलेंडर खत्म होने से पहले नहीं, बल्कि सिस्टम के हिसाब से खाना पकाना होगा…25 दिन का नियम पहले से था…अब उस पर 15 दिन की देरी और जुड़ गई है…ऐसे में हर घर के सामने वही सवाल गैस पहले खत्म होगी या सिलेंडर पहले पहुंचेगा…देखिए रिपोर्ट… राजस्थान में रसोई गैस अब सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि हर घर की टेंशन बनती जा रही है। आम उपभोक्ता पहले ही नियमों में बंधा हुआ है...एक सिलेंडर की डिलीवरी के بعد अगली बुकिंग के लिए 25 दिन का इंतज़ार अनिवार्य है। यानी जैसे ही नया सिलेंडर घर पहुंचता है, उसी दिन से अगली बुकिंग की उलटी गिनती शुरू हो जाती है। अब इस तय व्यवस्था पर नया दबाव आ गया है। तेल कंपनियों ने सप्लाई में करीब 20 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया है, जिससे पूरा गणित बिगड़ गया है। पहले जहां बुकिंग के 5 से 7 दिन के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, वहीं अब यही इंतज़ार बढ़कर 15 दिन या उससे ज्यादा हो सकता है। यानी एक उपभोक्ता के लिए पूरा चक्र अब लगभग 40 दिन का हो गया है…..25 दिन का अनिवार्य इंतज़ार और बुकिंग के बाद 10 से 15 दिन की डिलीवरी। ऐसे में अगर गैस की खपत थोड़ी भी बढ़ती है, तो सिलेंडर खत्म होने और नए सिलेंडर के आने के बीच का अंतराल परेशानी खड़ी कर सकता है। इस संकट की वजह अंतरराष्ट्रीय हालात हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी गैस जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसका असर अब राज्यों तक महसूस कर रहा है। इसी के चलते राजस्थान के 1300 से ज्यादा गैस वितरकों को सीमित सप्लाई में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जयपुर सहित प्रदेश में हालात का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। एक तरफ गैस बुकिंग कराने वालों की कतार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों के सप्लाई के कोटे में कमी के मैसेज ने साफ कर दिया है कि बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में देरी होगी। एलपीजी सिलेंडर, जो अब तक एक हफ्ते में घर पहुंच जाता था, अब पंद्रह दिन या उससे ज्यादा का समय ले सकता है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे बड़े शहरों में खपत ज्यादा होने के कारण सबसे पहले दबाव बढ़ने के संकेत हैं। वितरकों के सामने चुनौती है कि सीमित स्टॉक में सभी उपभोक्ताओं तक संतुलित सप्लाई बनाए रखें, जबकि आम आदमी की चिंता यही है कि गैस खत्म होने से पहले अगला सिलेंडर पहुंचेगा या नहीं। अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो सिर्फ देरी ही नहीं, बल्कि बाजार में गड़बड़ी और कालाबाजारी का खतरा भी बढ़ सकता है। महंगाई से जूझ रही आम जनता के लिए यह स्थिति और मुश्किलें खड़ी कर सकती है। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर भी सतर्क हो गया है, क्योंकि घरेलू गैस की कमी का असर कमर्शियल सप्लाई तक पहुंच सकता है। बहरहाल,सबसे बड़ी जरूरत है घबराहट से बचने की। समय रहते बुकिंग कराना, गैस का सोच-समझकर इस्तेमाल करना और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचना ही फिलहाल आम उपभोक्ता के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। अब नजरें सरकार और रसद विभाग पर हैं, कि वे इस चुनौती के बीच सप्लाई सिस्टम को कितना पारदर्शी और संतुलित बनाए रख पाते हैं।
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NSNeha Sharma
Mar 20, 2026 08:09:31
Jaipur, Rajasthan:जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र की 3 मनोरमा रेजीडेंसी 6a बुध विहार रामनगरिया जगतपुरा में एक अनोखा मामला सामने आया। रेजीडेंसी के सामूहिक ब्लॉक के मीटर में अचानक से जंप मारा और ढाई लाख से अधिक का बिल आया जबकि हर महीने सामूहिक बिल 1500 से 2000 तक का ही आता था। सामूहिक बिल में 4-5 लाइट जलती थी जिसका बिल अचानक से ढाई लाख से अधिक आय। शिकायत लेकर मनोरमा रेजीडेंसी के निवासियों पावर हाउस पहुंचे। बिजली विभाग को सूचित किया गया। बिजली विभाग ने मीटर कनेक्शन काटा लेकिन नया मीटर कनेक्शन नहीं दिया और ढाई लाख के नोटिस जारी कर दिया गया। मनोरमा रेजीडेंसी के निवासियों ने जी हेल्पलाइन से संपर्क किया; मौके पर टीम पहुंची; समस्या जानी; अधिकारी से बातचीत की; आश्वासन मिला कि समाधान होगा। सेटलमेंट कमेटी के बाद बिल 60-65,000 तक किया गया, जो सालों से बकाया था; नया मीटर जल्द लगाए जाने की बात। निवासियों ने हेल्पलाइन को धन्यवाद दिया। शिकायतकर्ता की शिकायत भी कि उनके यहाँ 4 साल से बिजली नहीं हैं; बिल्डिंग का मीटर जम्प मार गया, बिजली विभाग मीटर गायब कर दिया; मीटर वापस नहीं कर रहे; महीने का बिल 1500-2000, लेकिन 2 महीने का बिल 2,71,000 आया; यह बिल मनमाने तरीके से भेजा गया; तीन लाख का बिल कैसे आ गया; बिल्डिंग में रह रहे सभी लोगों को दिक्कत। जगतपुरा पावरहाउस में उपभोक्ताओं ने कम्प्लेन किया पर सुनवाई नहीं हो रही है; मीटर ले गए और वापस नहीं दे रहे।
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DGDeepak Goyal
Mar 20, 2026 08:09:12
Jaipur, Rajasthan:रसोई की आंच अब सिर्फ सिलेंडर पर नहीं, हालात पर भी निर्भर होने लगी है…राजस्थान में गैस का गणित बिगड़ गया है...नियमों का इंतज़ार, सप्लाई में कटौती और बढ़ता डिलीवरी टाइम…यानी अब सिलेंडर खत्म होने से पहले नहीं, बल्कि सिस्टम के हिसाब से खाना पकाना होगा…25 दिन का नियम पहले से था…अब उस पर 15 दिन की देरी और जुड़ गई है…ऐसे में हर घर के सामने वही सवाल गैस पहले खत्म होगी या सिलेंडर पहले पहुंचेगा…देखिए रिपोर्ट… राजस्थान में रसोई गैस अब सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि हर घर की टेंशन बनती जा रही है। आम उपभोक्ता पहले ही नियमों में बंधा हुआ है...एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग के लिए 25 दिन का इंतज़ार अनिवार्य है। यानी जैसे ही नया सिलेंडर घर पहुंचता है, उसी दिन से अगली बुकिंग की उलटी गिनती शुरू हो जाती है। अब इस तय व्यवस्था पर नया दबाव आ गया है। तेल कंपनियों ने सप्लाई में करीब 20 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया है, जिससे पूरा गणित बिगड़ गया है। पहले जहां बुकिंग के 5 से 7 दिन के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, वहीं अब यही इंतज़ार बढ़कर 15 दिन या उससे ज्यादा हो सकता है। यानी एक उपभोक्ता के लिए पूरा चक्र अब लगभग 40 दिन का हो गया है.....25 दिन का अनिवार्य इंतज़ार और बुकिंग के बाद 10 से 15 दिन की डिलीवरी। ऐसे में अगर गैस की खपत थोड़ी भी बढ़ती है, तो सिलेंडर खत्म होने और नए सिलेंडर के आने के बीच का अंतराल परेशानी खड़ी कर सकता है। इस संकट की वजह अंतरराष्ट्रीय हालात हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी गैस जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसका असर अब राज्यों तक महसूस कर रहा है। इसी के चलते राजस्थान के 1300 से ज्यादा गैस वितरकों को सीमित सप्लाई में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जयपुर सहित प्रदेश में हालात का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। एक तरफ गैस बुकिंग कराने वालों की कतार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों के सप्लाई के कोटे में कमी के मैसेज ने साफ कर दिया है कि बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में देरी होगी। एलपीजी सिलेंडर, जो अब तक एक हफ्ते में घर पहुंच जाता था, अब पंद्रह दिन या उससे अधिक का समय ले सकता है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे बड़े शहरों में खपत ज्यादा होने के कारण सबसे पहले दबाव बढ़ने के संकेत हैं। वितरकों के सामने चुनौती है कि सीमित स्टॉक में सभी उपभोक्ताओं तक संतुलित सप्लाई बनाए रखें, जबकि आम आदमी की चिंता यही है कि गैस खत्म होने से पहले अगला सिलेंडर पहुंचेगा या नहीं। अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो सिर्फ देरी ही नहीं, बल्कि बाजार में गड़बड़ी और कालाबाजारी का खतरा भी बढ़ सकता है। महंगाई से जूझ रही आम जनता के लिए यह स्थिति और मुश्किलें खड़ी कर सकती है। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर भी सतर्क हो गया है, क्योंकि घरेलू गैस की कमी का असर कमर्शियल सप्लाई तक पहुंच सकता है। बहरहाल,सबसे बड़ी जरूरत है घबराहट से बचने की। समय रहते बुकिंग कराना, गैस का सोच-समझकर इस्तेमाल करना और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचना ही फिलहाल आम उपभोक्ता के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। अब नजरें सरकार और रसद विभाग पर हैं, कि वे इस चुनौती के बीच सप्लाई सिस्टम को कितना पारदर्शी और संतुलित बनाए रख पाते हैं।
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DRDamodar Raigar
Mar 20, 2026 08:08:43
Jaipur, Rajasthan:दामोदर प्रसाद आमेर/जयपुर एंकर - जयपुर के आमेर महल स्थित शिला माता मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है,,,,, वर्षों से मावठा लेक की ओर से जाने वाला सीधा रास्ता दर्शनार्थियों के लिए बंद है, जबकि हाल ही में मावठा लेक में बोटिंग शुरू होने के बाद इसी रास्ते को केवल बोटिंग करने वालों के लिए खोल दिया गया है,,,,,,मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बस और ऑटो चालक मावठा लेक के पास उतार देते हैं, लेकिन वहां से मंदिर तक पहुंचने के लिए उन्हें लगभग एक किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर हाथी स्टैंड की ओर से खड़ी चढ़ाई वाले रास्ते से गुजरना पड़ता है,,,,,, इस रास्ते पर छोटे बच्चों والی महिलाएं और बुजुर्ग विशेष रूप से परेशान हो रहे हैं,,,,स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि मावठा लेक से मंदिर तक जाने वाले इस रास्ते को स्थायी रूप से खोला जाए,,,,, साथ ही, बाग क्षेत्र में छाया, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं को राहत मिल सके और वे आसानी से माता के दर्शन कर सकें,,,,श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को इस समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए,,,,,, बাইট -मंगल सिंह,स्थानीय निवासी बाइट लालाराम बाइट -महिला भक्त बाइट महेश जागा
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ASAshutosh Sharma1
Mar 20, 2026 08:08:26
Jaipur, Rajasthan:राजस्थान में ‘ऑपरेशन एंटी वेनम’: 15 दिन में नशे की कमर तोड़ने का मिशन, 115 हॉटस्पॉट चिन्हित\n\nराजस्थान पुलिस ने तेजी से फैलते नशे के नेटवर्क पर निर्णायक वार करने की तैयारी कर ली है. जयपुर पुलिस रेंज ने ‘ऑपरेशन एंटी वेनम’ के जरिए नशे के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है. इस ऑपरेशन का लक्ष्य साफ है—31 मार्च तक आठ जिलों में नशे की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करना और 15 दिन में बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाना.\n\nराजस्थान पुलिस ने पहली बार नशे के कारोबार को माइक्रो लेवल पर समझते हुए पूरे जयपुर पुलिस रेंज को हॉटस्पॉट के आधार पर बांटा है. 115 थाना क्षेत्रों को नशे की गतिविधियों के अनुसार चार कैटेगरी—जीरो, लो, मीडियम और हाई फ्रीक्वेंसी—में वर्गीकृत किया गया है. इनमें 14 थाने हाई फ्रीक्वेंसी, 49 मीडियम और 52 लो फ्रीक्वेंसी में शामिल हैं, जबकि 32 थानों में अब तक NDPS के तहत एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।\n\nआईजी का सख्त संदेश: “जीरो टॉलरेंस” जयपुर रेंज के अनुसार अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. अगर किसी क्षेत्र में नशे की बिक्री या तस्करी सामने आती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित थानाधिकारी की होगी. सभी एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में नशे के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और सेवन के खिलाफ ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई करें.\n\nअभियान के शुरुआती चरण में ही पुलिस ने 30 से ज्यादा केस दर्ज कर 15 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया है. बड़ी मात्रा में गांजा, डोडा पोस्त और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं. पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नशे से अर्जित संपत्ति को भी जब्त किया जाएगा. इसके लिए बीएनएस की धारा 107 के तहत कार्रवाई कर अवैध साम्राज्य को ध्वस्त करने की तैयारी है.\n\nहॉटस्पॉट पर विशेष फोकस- जयपुर ग्रामीण में शाहपुरा, मनोहरपुर, आंधी, चंदवाजी और समोड जैसे इलाके हाई फ्रीक्वेंसी जोन में हैं. दौसा, सीकर, भिवाड़ी और कोटपूतली-बहोड़ में भी कई थाना क्षेत्र नशे के बड़े अड्डों के रूप में चिन्हित किए गए हैं. इन इलाकों में अब लगातार रेड, निगरानी और इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई की जाएगी.
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ACAshish Chauhan
Mar 20, 2026 08:08:02
Jaipur, Rajasthan:आमजन को गर्मियों में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने आमजन की सुविधा और राहत को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जलदाय विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों, कर्मचारियों के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आगामी ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा जनता को शुद्ध एव समुचित पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं पेयजल आपूर्ति सम्बंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तरीय एवं प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय नियन्त्रण कक्षों की स्थापना की गई है। राज्य सरकार द्वारा ग्रीष्मकाल 2026 के लिए प्रदेश के शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी 41 जिलों के शहरी क्षेत्र के लिए 55.88 करोड़ रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए 154.83 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी कर दी गई है। जल परिवहन के लिए राशि स्वीकृत ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश के शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 41 जिलों के लिए 1 अप्रेल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक आवश्यकतानुसार जल परिवहन के लिए अनुमानित शहरी क्षेत्र के लिए 23 करोड़ रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए 82.37 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी कर दी गई है। किराये के वाहन एवं श्रमिकों के लिए भी स्वीकृति गर्मियों के सीजन में पेयजल आपूर्ति की मॉनिटरिंग के लिए सरकार ने 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2026 तक अवधि के लिए 500 श्रमिक प्रतिमाह, 100 किराये के वाहन प्रतिमाह लेने की स्वीकृति जारी की है। इसी तरह 1 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की अवधि के लिए 2000 श्रमिक प्रतिमाह, 400 किराये के वाहन प्रतिमाह, 1 मई 2026 से 31 जुलाई 2026 तक अवधि के लिए 2500 श्रमिक प्रतिमाह एवं 450 किराये के वाहन प्रतिमाह की स्वीकृति जारी कर दी गई है। आकस्मिक कार्यों के लिए जिला कलेक्टर को एक-एक करोड़ रुपए की स्वीकृति जलदाय विभाग ने गर्मियों के मौसम में प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक कार्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। इसके तहत जिला कलक्टर्स की अनुशंषा पर सम्बंधित क्षेत्र के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अपने अधीन आने वाले जिलों में 1 करोड़ रुपये तक की सीमा में पेयजल व्यवस्था से सम्बंधित आवश्यक कार्य करा सकेंगे। जेजेएम में पूर्ण पेयजल परियोजनाओं के लिए 25-25 लाख प्रदेश में संचालित जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत पूर्ण हो चुकी जल योजनाओ के संचालन के लिए विभाग गर्मियों के मौसम में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के लिए 25-25 लाख रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। वहीं जल योजनाओ के निर्बाध संचालन के लिए फील्ड अधिकारियों की मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अवकाश पर रोक लगाई गई है। अपरिहार्य परिस्थिति में आवश्यक होने पर संबंधित कर्मचारी से उच्च स्तर के अधिकारी की अभिशंषा से ही अवकाश स्वीकृति किया जायेगा।
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ACAshish Chauhan
Mar 20, 2026 08:07:40
Jaipur, Rajasthan:जयपुर- प्रदेश में आगामी भीषण गर्मी को देखते हुए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने आमजन की सुविधा और राहत को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जलदाय विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों, कर्मचारियों के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आगामी ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा जनता को शुद्ध एव समुचित पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं पेयजल आपूर्ति सम्बंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तरीय एवं प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय नियन्त्रण कक्षों की स्थापना की गई है। राज्य सरकार द्वारा ग्रीष्मकाल 2026 के लिए प्रदेश के शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी 41 जिलों के शहरी क्षेत्र के लिए 55.88 करोड़ रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए 154.83 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी कर दी गई है। जल परिवहन के लिए राशि स्वीकृत ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश के शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 41 जिलों के लिए 1 अप्रेल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक आवश्यकतानुसार जल परिवहन के लिए अनुमानित शहरी क्षेत्र के लिए 23 करोड़ रुपए एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए 82.37 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी कर दी गई है। किराये के वाहन एवं श्रमिकों के लिए भी स्वीकृति गर्मियों के सीजन में पेयजल आपूर्ति की मॉनिटरिंग के लिए सरकार ने 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2026 तक अवधि के लिए 500 श्रमिक प्रतिमाह, 100 किराये के वाहन प्रतिमाह लेने की स्वीकृति जारी की है। इसी तरह 1 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की अवधि के लिए 2000 श्रमिक प्रतिमाह, 400 किराये के वाहन प्रतिमाह, 1 मई 2026 से 31 जुलाई 2026 तक अवधि के लिए 2500 श्रमिक प्रतिमाह एवं 450 किराये के वाहन प्रतिमाह की स्वीकृति जारी कर दी गई है। आकस्मिक कार्यों के लिए जिला कलेक्टर को एक-एक करोड़ रुपए की स्वीकृति जलदाय विभाग ने गर्मियों के मौसम में प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक कार्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। इसके तहत जिला कलक्टर्स की अनुशंषा पर सम्बंधित क्षेत्र के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अपने अधीन आने वाले जिलों में 1 करोड़ रुपये तक की सीमा में पेयजल व्यवस्था से सम्बंधित आवश्यक कार्य करा सकेंगे। जे.जे.एम. में पूर्ण पेयजल परियोजनाओं के लिए 25-25 लाख प्रदेश में संचालित जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत पूर्ण हो चुकी जल योजनाओ के संचालन के लिए विभाग गर्मियों के मौसम में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के लिए 25-25 लाख रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। वहीं जल योजनाओ के निर्बाध संचालन के लिए फील्ड अधिकारियों की मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अवकाश पर रोक लगाई गई है। अपरिहार्य परिस्थिति में आवश्यक होने पर संबंधित कर्मचारी से उच्च स्तर के अधिकारी की अभिशंषा से ही अवकाश स्वीकृति किया जायेगा।
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KCKashiram Choudhary
Mar 20, 2026 08:07:16
Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी टारगेट पूरा करने को उड़नदस्तों के हथकंडे! - जयपुर RTO प्रथम के उड़नदस्ते ने एक ही बस के 2 बार किए चालान, - चालान भुगतने जब बस मालिक पहुंचे RTO, तो 10 हजार के चालान के मांगे 68 हजार रुपए जयपुर। जयपुर आरटीओ प्रथम ने 12 मार्च को आदेश निकाले थे कि प्रत्येक परिवहन उड़नदस्ते को रोजाना 2 लाख रुपए जुर्माना राशि के चालान करने जरूरी हैं। इस आदेश की पालना में अब उड़नदस्ते एक ही वाहन के बार-बार चालान कर रहे हैं। यह घटनाक्रम 19 मार्च का है। जयपुर से पुष्कर जा रही एक कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की बस को आरटीओ प्रथम के परिवहन निरीक्षक देवेन्द्र सिंह ने चालान किया था। चालान में उल्लेख किया गया कि बस की हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट सही मानकों के अनुरूप नहीं लगी हुई है। हालांकि चालान में दिख रही फोटो में नम्बर प्लेट एकदम सही स्थिति में दिख रही है। इस पर बस संचालक ने तुरंत ही मौके पर चालान की राशि जमा कर दी। बस थोड़ा ही आगे बढ़ी थी कि परिवहन निरीक्षक देवेन्द्र सिंह ने बस को फिर से रोक लिया। इस बार परमिट शर्तों का उल्लंघन बताते हुए 10 हजार रुपए का चालान फिर से कर दिया। चालान करते हुए बस को सीज कर दिया। इससे जो श्रद्धालु पुष्कर जा रहे थे, वे कई घंटे तक दूसरी बस के लिए परेशान होते रहे। वहीं बस संचालक जब आरटीओ कार्यालय में चालान की राशि 10 हजार रुपए जमा करने पहुंचा तो उसे 67938 रुपए जमा कराने के लिए कहा गया। 2 लाख के चालान का डंडा, आमजन में खौफ! - जयपुर से पुष्कर जा रही बस RJ14PF6625 के 2 बार चालान किए - गुरुवार सुबह 9:04 बजे बालमुकुंदपुरा में रामपुरावास देवलिया में रोका - यहां HSRP(नम्बर प्लेट) सही नहीं लगे होने पर 5 हजार का चालान किया - जबकि चालान की फोटो में बस में HSRP सही लगी दिख रही - पहले गलत चालान के बावजूद कुछ दूर आगे बगरू खुर्द में फिर रोकी बस - सुबह 9:38 बजे परमिट शर्तों का उल्लंघन बता किया 10 हजार का चालान - बस मालिक जब चालान छुड़वाने पहुंचा RTO ऑफिस - तो यहां DTO ने 67938 रुपए जमा कराने को कहा - जी मीडिया ने पूछा तो DTO प्रवर्तन नाथू सिंह बोले - एक ही बस के 2 बार चालान किए जा सकते हैं - ऑफिस में गणना करने पर गलती पता लगी, इसलिए जुर्माना बढ़ा
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