icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
न्यूज़ क्रिएटर बनें

आपकी स्थानीय कहानियाँ, आपकी आवाज़

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back
Pinewz
835223
Ravikant SahuRavikant SahuFollow28 Sept 2024, 01:41 pm
0
0
Report

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

दतिया उपचुनाव में भाजपा- कांग्रेस भिड़ंत तेज, CM के प्रचार ने तेज किया रफ्तार

Datia, Madhya Pradesh:दतिया दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रचार अब तेज हो गया है। तीन दिवसीय चुनावी दौरे पर दतिया पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण क्षेत्र में सभा को संबोधित करते हुए विकास के लिए भाजपा को जिताने की अपील की। मुख्यमंत्री की सभा के बाद ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। दतिया उपचुनाव में फिलहाल भाजपा पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता लगातार मैदान में हैं। ऐसे में राजनीतिक तस्वीर यह संकेत दे रही है कि भाजपा संगठन के साथ सरकार भी इस चुनाव में पूरी ताकत लगा रही है। दतिया में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है और मतदान की तारीख नजदीक आते ही दोनों दलों का प्रचार लगातार तेज होता जा रहा है。
0
0
Report

हनुमानगढ़ के भुरानपुरा में स्वास्थ्य विभाग मिलावट रोकथाम के लिए 7 दूध सैंपल लिए

Hanumangarh, Rajasthan:Hanumangarh जिले में शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने एवं मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शनिवार अलसुबह गांव भुरानपुरा में विभिन्न डेयरियों एवं दुग्ध संग्रह केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। कार्रवाई का नेतृत्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने किया। सुबह-सवेरे पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव की विभिन्न डेयरियों एवं दूध विक्रय केंद्रों की जांच की एवं दूध की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए। विभाग ने कुल 7 दूध के सैंपल जांच के लिए एकत्रित किए गए, जो जांच के लिए बीकानेर स्थित जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला भिजवाए गए। डॉ. शर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान भुरानपुरा गोपालन दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का कलेक्शन सेंटर तथा घर पर संचालित बालाजी डेयरी बिना खाद्य पंजीकरण के संचालित होती पाई गई। दोनों संस्थानों को नोटिस जारी कर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। संग्रहित किए गए सभी दूध के सैंपलों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
0
0
Report
Advertisement

बांसवाड़ा के परतापुर में पैंथर मूवमेंट, वन विभाग ने पिंजरा लगाकर पकड़ने की कोशिश

Banswara, Rajasthan:जिला - बांसवाड़ा विधानसभा- बांसवाड़ा लोकेशन - बांसवाड़ा गढ़ी वन नाक क्षेत्र के परतापुर कस्बे के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पैंथर का मुवमेंट दिखने से क्षेत्र में दहशत का माहौल देखने को मिला, कॉलोनी वासियो ने इस मामले की वनविभाग की टीम को सूचना दी जिसे क्षेत्र में पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया। क्षेत्र में सुबह शाम टहलने जाने के दौरान कॉलोनी के अलग-अलग लोकेशन पर पैंथर देखने की जानकारी मिली थी, इस पर कॉलोनी वासियों की सूचना पर विभाग ने मौका मुआयना किया जिसके बाद पिंजरा लगाया गया। इस दौरान कॉलोनी के अध्यक्ष श्याम प्रताप सिंह झाला, जोधसिंह राव, नरेंद्र सिंह, नटवर सिंह राव, जयप्रकाश पाठक, मोहन सिंह चुंडावत, विभुराज सिंह चौहान, रोहित चौबीसा आदि कॉलोनीवासी मौजूद रहे।
0
0
Report

करगिल विजय दिवस की दास्तान: बाड़मेर के किशोर सिंह बाना ने 85 दिन तक दी फौज की आपूर्ति

Barmer, Rajasthan:मैगी, दूषित पानी और सड़क किनारे छुपकर बिताई रातें: करगिल के 85 दिनों की वो दास्तान जिसे बाड़मेर के योद्धा आज भी नहीं भूले करगिल विजय दिवस विशेष | सुबेदार मेजर (सेवानिवृत्त) किशोर सिंह बाना की जुबानी बाड़मेर, 26 जुलाई 2026。 युद्ध में यह सोचने का समय नहीं होता कि खाना क्या मिलेगा या पानी कितना साफ है। उस वक्त बस एक ही धुन होती है देश पहले, बाकी सब बाद में。 यह शब्द हैं बाड़मेर के करगिल योद्धा एवं भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सुबेदार मेजर किशोर सिंह बाना के, जिन्होंने 1999 के करगिल युद्ध के दौरान लगातार 85 दिनों तक बिना थके और बिना रुके भारतीय सेना के अग्रिम मोर्चों तक हथियार, गोला-बारूद और जरूरी सैन्य सामग्री पहुंचाने का दायित्व निभाया। उन्होंने दुश्मन की गोलाबारी के बीच वाहन चलाए, सड़क किनारे छुपकर रातें बिताईं, मैगी खाकर दिन निकाले और कई बार रास्ते के दूषित पानी से प्यास बुझाई। यह कहानी केवल एक सैनिक की नहीं, बल्कि उन हजारों सैनिकों की है जिनके त्याग और समर्पण ने भारत को करगिल विजय दिलाई。 करगिल युद्ध की पृष्टभूमि सन् 1998 में भारत ने पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तो बढ़ा, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शांति की पहल करते हुए फरवरी 1999 में दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की। लाहौर घोषणा के जरिए भारत ने पड़ोसी देश के साथ विश्वास कायम करने का प्रयास किया。 लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक गुप्त सैन्य योजना तैयार कर ली थी। सर्दियों के दौरान भारतीय सेना जिन ऊंची चौकियों को मौसम की कठिनाइयों के कारण अस्थायी रूप से खाली करती थी, उन पर पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया。 मई 1999 में स्थानीय चरवाहों और भारतीय सेना को इसकी जानकारी मिली। जांच में स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सीमा में घुसकर ऊंची पहाड़ियों पर बैठ चुके हैं। इन चोटियों से वे राष्ट्रीय राजमार्ग-1ए (अब एनएच-1) पर नजर रख सकते थे, जो श्रीनगर को लेह से जोड़ने वाली जीवनरेखा थी。 स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने 3 मई 1999 से अभियान शुरू किया, जिसे बाद में ऑपरेशन विजय नाम दिया गया। भारतीय वायुसेना ने भी ऑपरेशन सफेद सागर के तहत सेना का साथ दिया। करीब 85 दिनों तक चले इस कठिन युद्ध में भारतीय सेना ने टोलोलिंग, टाइगर हिल, पॉइंट 4875 सहित एक-एक चोटी पर तिरंगा फहराया। 26 जुलाई 1999 को भारत ने विजय की घोषणा की। इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि 1300 से अधिक जवान घायल हुए। तभी से हर वर्ष 26 जुलाई को पूरे देश में करगिल विजय दिवस मनाया जाता है। बाड़मेर के रणबांकुरे की भूमिका करगिल युद्ध के समय बाड़मेर निवासी किशोर सिंह बाना भारतीय सेना की 402 लाइट एयर डिफेंस रेजीमेंट (कम्पोजिट) की शेरा बैटरी में एम.टी. हवलदार के पद पर तैनात थे। उनकी तैनाती करगिल क्षेत्र के बौद्ध खर्बु ट्रांजिट कैंप में थी। उनके अधीन लगभग 250 सैन्य वाहन और उनके चालक कार्यरत थे。 युद्ध शुरू होते ही पाकिस्तान की गोलाबारी में करगिल के पास स्थित एक महत्वपूर्ण एम्यूनिशन डंप नष्ट हो गया। इसके बाद सेना ने लेह स्थित एम्यूनिशन डिपो से अग्रिम मोर्चों तक हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने की जिम्मेदारी किशोर सिंह बाना और उनकी टीम को सौंपी。 उस समय कई सैनिक छुट्टी पर थे। संसाधन सीमित थे, लेकिन जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी। ऐसे में बाना ने स्वयं भी वाहन की कमान संभाली और अपने साथियों के साथ लगातार मोर्चों पर आपूर्ति सुनिश्चित की。 300 किलोमीटर का मौत से मुकाबला लेह से मूल बेग, टोलोलिंग और गुमरी जैसे अग्रिम मोर्चों तक पहुंचना आसान नहीं था। लगभग 300 किलोमीटर लंबे पहाड़ी और खतरनाक रास्तों पर हर पल दुश्मन की नजर रहती थी। कई स्थान पाकिस्तानी गोलाबारी की सीधी जद में थे。 दिन में वाहन चलाना और रात होते ही सड़क किनारे सुरक्षित स्थान खोजकर बिना रोशनी किए छुप जाना उनकी दिनचर्या बन गई थी। रात में हेडलाइट जलाना भी मौत को बुलावा देने जैसा था। कई बार वे अपने वाहन से दूर चट्टानों की ओट में पूरी रात बिताते और सुबह होते ही फिर सफर शुरू कर देते。 जब मैगी बनी जीवन का सहारा युद्ध के दिनों की याद करते हुए किशोर सिंह बाना बताते हैं कि उन्हें यह तक याद नहीं रहता था कि आखिरी बार ठीक से खाना कब खाया था। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में पहली बार उन्होंने मैगी उन्हीं दिनों देखी थी। शुरू में उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि दो मिनट में बनने वाली यह चीज भूख मिटा सकती है, लेकिन अगले 85 दिनों तक अधिकांश समय वही उनका भोजन बनी रही。 दिन में वाहन रोककर स्टोव पर मैगी बनाते, कभी चलते वाहन में ही उसे तैयार करते और फिर तुरंत आगे बढ़ जाते। भोजन का उद्देश्य स्वाद नहीं, बल्कि शरीर को इतना सक्षम रखना था कि अगला सफर पूरा किया जा सके。 दूषित पानी भी पीना पड़ा ऊंचे पहाड़ों में हर जगह पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं होता था। कई बार उन्हें रास्ते में मिलने वाले नालों, झरनों या बहते पानी से ही प्यास बुझानी पड़ती थी。 आज के समय में दूषित पानी पीने की कल्पना भी मुश्किल लगती है, लेकिन युद्ध के मैदान में विकल्प नहीं होते। वहां जीवन और मृत्यु के बीच केवल कर्तव्य खड़ा होता है。 आंखों के सामने हुई दुर्घटना युद्ध के दौरान एक घटना आज भी उनके जेहन में ताजा है。 वे बौद्ध खर्बु से करगिल की ओर जा रहे थे। उनके वाहन से लगभग 100 मीटर आगे सेना का एक अन्य ट्रक चल रहा था। अचानक पाकिस्तानी सेना की शेलिंग शुरू हुई। एक गोला सीधे आगे चल रहे वाहन के पास गिरा और वाहन नियंत्रण खोकर लगभग तीन किलोमीटर गहरी खाई में नूब्रा नदी की ओर जा गिरा。 शाम ढल रही थी। दुश्मन की गोलाबारी जारी थी। ऐसे हालात में तत्काल बचाव अभियान चलाना संभव नहीं था। बाना ने लगभग एक किलोमीटर दूर अपना वाहन रोका और पूरी रात चुपचाप छुपकर अपने वाहन और आसपास की स्थिति पर नजर बनाए रखी。 सुबह होते ही वे करगिल स्थित सेना की बटालियन पहुंचे और घटना की जानकारी दी। इसके बाद रेस्क्यू टीम घटनास्थल पहुंची। राहत कार्य शुरू होने के बाद किशोर सिंह बाना बिना समय गंवाए फिर अपने मिशन पर निकल पड़े और निर्धारित मोर्चे तक गोला-बारूद पहुंचाया。 युद्ध केवल बंदूक से नहीं जीते जाते करगिल युद्ध ने यह साबित किया कि केवल मोर्चे पर लड़ने वाले सैनिक ही युद्ध नहीं जीतते। सेना की लॉजिस्टिक व्यवस्था, वाहन चालक, इंजीनियर, संचार विशेषज्ञ, मेडिकल टीमें और आपूर्ति व्यवस्था भी विजय के उतने ही महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं。 यदि अग्रिम मोर्चे तक समय पर हथियार, गोला-बारूद, भोजन और अन्य सामग्री नहीं पहुंचती, तो सबसे बहादुर सैनिक भी लंबे समय तक लड़ाई जारी नहीं रख सकता。 किशोर सिंह बाना जैसे सैनिकों ने दुश्मन की गोलाबारी के बीच यह सुनिश्चित किया कि मोर्चे पर लड़ रहे जवानों के हाथ कभी खाली न रहें。 करगिल ने बदल दिया भारतीय सैन्य दृष्टिकोण करगिल युद्ध के बाद भारत ने अपनी सीमा सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए। ऊंची चौकियों पर वर्षभर सैनिकों की तैनाती सुनिश्चित की गई। निगरानी तंत्र मजबूत हुआ, आधुनिक हथियार और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा मिला तथा खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाया गया。 आज भारतीय सेना की पर्वतीय युद्ध क्षमता दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य क्षमताओं में गिनी जाती है। करगिल के अनुभवों ने सेना की रणनीति, रसद व्यवस्था और प्रशिक्षण प्रणाली को नई दिशा दी。 आज भी वही जज्बा सेवानिवृत्त होने के बाद भी किशोर सिंह बाना की आवाज में वही दृढ़ता सुनाई देती है。 वे कहते हैं, "उन 85 दिनों में हमने यह नहीं सोचा कि जिंदा लौटेंगे या नहीं। बस इतना तय था कि दुश्मन को हराना है। अगर आज भी देश मुझे बुलाए, तो मैं बिना एक पल सोचे फिर वर्दी पहनने को तैयार हूं।" उनकी आंखों में आज भी करगिल की पहाड़ियां, साथियों की यादें और तिरंगे के लिए लड़ने का वही जुनून दिखाई देता है。 नई पीढ़ी के लिए संदेश करगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपने वर्तमान को देश के भविष्य के लिए समर्पित कर दिया。 बाड़मेर के किशोर सिंह बाना की कहानी हमें यह सिखाती है कि देशभक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को निभाने से सिद्ध होती है。 मैगी का एक पैकेट, दूषित पानी की कुछ घूंट, सड़क किनारे अंधेरे में गुजारी रातें और मौत के साये में तय किए गए सैकड़ों किलोमीटर , यही वे अनकहे अध्याय हैं, जिनकी बदौलत 26 जुलाई 1999 को भारत ने विजय का तिरंगा फहराया。 करगिल के रणबांकुरों का यह साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा。
0
0
Report

यूपी 2027 के चुनाव के लिए भाजपा सरकार बनाने का संकल्प—चौहान

Noida, Uttar Pradesh:एंकर - उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान अपने जन्मदिन को संकल्प दिवस के रूप में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मनाया... दारा सिंह चौहान के संकल्प दिवस के दिन 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा की तीसरी बार यूपी में सरकार बनाने का संकल्प लिया.. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य,केबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर मौजूद रहे... VO - कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा चौहान समाज को दिल की गहराई से बधाई देना चाहता हूं... जिस तरीके से मैंने जन्मदिन को संकल्प दिवस मनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है और आने वाले दिन में योगी जी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार को सत्ता से पुनः भारतीय जनता पार्टी की सरकार बना के संकल्प को पूरा करेगा... इसलिए आज जितना आप देख रहे हैं इस हाल में इसका चार गुना लोग बाहर घूम रहे हैं... आधे लोग रास्ते में आ रहे हैं क्योंकि दूर-दूर से प्रदेश के कोनेकोने से आ रहे हैं... मैं दिल से जन्मदिन के अवसर पर सारे चौहान समाज के और भी समाज के जो शुभचिंतक लोग हैं जो यहां मेरे इस जन्मदिन में आकर के बधाई दे रहे हैं...मैं सबको दिल से दुआ देता हूं। बाइट - दारा सिंह चौहान, कारागार मंत्री, यूपी बाइट - ओमप्रकाश राजभर, कैबिनेट मंत्री, यूपी
0
0
Report
Advertisement

आदिनाथ मंदिर बनाम आदिना मस्जिद: 650 साल पुरानी संरचना में शिवलिंग की पूजा

Malda, West Bengal:আদিনা মসজিদ না আদিনাথ পুরাতন শিব মন্দির এই বির্তকের মাঝে আদিনাতে আয়োজন করা হয়েছে শিব পূজার। সোমবার ৬৫০ বছরের পুরোনো এই আদিন মসজিদের ৫০মিটার মধ্যে স্থাপিত হতে চলেছে শিবলিঙ্গ। করা হবে শিবের পুজো। আদিনাথের রুদ্রাভিষেক করার ব্যবস্থা করা হয়েছে। প্রত্নতত্ত্ব বিভাগের তথ্য হিসাবে ১৩৭৩ খ্রীষ্টপূর্বে সিকেন্দর শাহ এই মসজিদ তৈরী করেন। তবে রাজ্যে সরকার পরিবর্তনের পূর্ব থেকেই এই স্থাপত্য ঘিরে শুরু হয় বির্তক। মূলতঃ স্থাপত্যের বিভিন্ন কারুকার্যে রয়েছে শিব বা আদিনাথের অস্তিত্ব। হিন্দু দেব দেবীর কারুকার্য। আর তারপর থেকেই এই স্থাপত্য ঘিরে শুরু হয় বির্তক। হিন্দু বা সনাতনীরা মূলতঃ দাবী করেন এই স্থাপত্য্য আदिनাথে পুরাতন শিব মন্দির। বিষয়টি নিয়েয় হাইকোর্টে মামলাও চলছে। এমন অবস্থায় সোমবার ২৭জুলাই এই স্থাপত্যের ৫০ মিটারের মধ্যে আদিনাথে রুদ্রাভিষেক গুরুত্বপূর্ণ হয়ে উঠেছে। স্থাপত্যে চত্তর সুসজ্জিত করা হয়েছে। এই আয়োজনের উদ্যোক্তা কাজল গোস্বামী জানান এই স্থাপত্যে আদিনাথ বা শিব মূর্তি অস্তিত্ব রয়েছে। স্থাপত্যের বিভিন্ন কারুকার্যে প্রমান রয়েছে হিন্দু দেবদেবী। অর্থাৎ এই স্থাপত্য আদিনাথ পুরোন শিব মন্দির। স্থানীয় বাসিন্দা জানান এই স্থাপত্য আদিনাথ বা শিবের মন্দির। প্রত্নতাত্ত্বিক বিভাগ খননকার্য্যে সময় শিব মূর্তি পেয়েছেন। পাওয়া গেছে দূর্গামূর্তিও। তাই এই স্থাপত্যকে মন্দির রূপে পরিবর্তন করার দাবি তুলেছেন।
0
0
Report

पूर्व विधायक राजीव रंजन की पुण्यतिथि पर इस्लामपुर में श्रद्धांजलि, बिहार बंद असफल

Pariaunna, Bihar:इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सह जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव रहे स्वर्गीय राजीव रंजन की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर इस्लामपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कई मंत्री, विधायक और सांसद पहुंचे और उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने भी स्वर्गीय राजी रंजन को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान बिहार बंद को लेकर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार बंद पूरी तरह से असफल रहा। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान की कोई गलती नहीं थी, इसके बावजूद उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की पीड़ा को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने स्वत इस्तीफा दिया है। देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर उन्हें पीड़ा थी, इसलिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया। अशोक चौधरी ने कहा कि अगर विपक्ष इसे अपनी जीत मान रहा है तो यह विपक्ष का खुद अपनी खुद मियाँ मिट्ठू बनने जैसा है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि इस्लामपुर के पूर्व विधायक स्वर्गीय राजीव रंजन उनके लिए अभिभावक तुल्य थे और उनकी पुण्यतिथि के मौके पर श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
0
0
Report

दानिश अली: इस्तीफाला मोदी सरकार की नाकाही का इकरार

Amroha, Uttar Pradesh:केन्द्रिय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमरोहा के निवर्तमान सांसद कुँवर दानिश अली ने वीडियो संदेश जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा त्याग नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार की नाकामी का इकरारनामा है। यह देश के लाखों युवाओं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा किए गए संघर्ष की जीत है। कुँवर दानिश अली ने अपने वीडियो बयान में कहा कि देशभर के युवा लंबे समय से निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के आंदोलन को राष्ट्रविरोधी बताकर छात्रों का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा की मांग करना देशभक्ति है, देशद्रोह नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज़ सुननी चाहिए और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। दानिश अली ने कहा कि यह घटनाक्रम लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत का प्रतीक है और युवाओं के अधिकारों की अनदेखी अब नहीं की जा सकती।
0
0
Report
Advertisement

कासगंज में लाखों के आभूषण चोरी का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार

Kasganj, Uttar Pradesh:मकान से लाखों के आभूषण किय थे चोरी, पुलिस की गिरफ्त में चोर , चोरों के पास से लाखों के सोने के आभूषण बरामद। यूपी के कासगंज में पुलिस ने चोरी की वारदात का पर्दाफाश करते हुए चार वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से सोने के आभूषण व 40 हजार रु नगद बरामद हुए हैं। दरअसल मामला जनपद कासगंज की कोतवाली क्षेत्र के ग्राम किलोनी रफ़ातपुर में 14 जून की रात एक घर में चोरी की वारदात हुई थी घटना के बाद 15 जून को कोतवाली कासगंज में मुकदमा दर्ज किया गया था तब से पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई थी तकनीकी साक्ष्य के आधार पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी कासगंज पुलिस ने कल्याणपुर जाने वाले बायपास मार्ग के पास से घेराबंदी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अवनीश, दीपू उर्फ पप्पू ,शेर सिंह और सत्यवीर के रूप में हुई है गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया सामान भी बरामद किया गया है बरामदगी में चार जोड़ी सोने की झुमकी, एक गले का हार,एक जोड़ी कानों की झाले, एक सोने की चेन, चार अंगूठियां ब 40 हजार रुपए नगद बरामद हुए है
0
0
Report

जबलपुर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न, समर्थक बोले लोकतंत्र की जीत

Jabalpur, Madhya Pradesh:जबलपुर जबलपुर में जैसे हर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आई उसके बाद जबलपुर के मालवीय चौक में छात्र-छात्राओं में ख़ुशी हाथ में तिरंगा और भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लेकर भीम आर्मी और सीजेपी के कार्यकर्ताओं और छात्र मालवीय चौक पहुंचे और यहां पर जमकर नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं में एक दूसरे को मिठाई खिलाई और इसे उनकी जीत बताया। यही नहीं कार्यकर्ता और छात्र-छात्राओं का कहना है कि जिस तरह से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आया है उसे पहले ही आ जाना चाहिए था उनकी कई मांगे हैं जिन्हें भी पूरा करना है लेकिन जिस तरह से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ है वह कहीं ना कहीं लोकतंत्र की जीत है
0
0
Report
Advertisement

बदलापुर में तुकाराम मुंडे की प्रतिमा पर दुग्धाभिषेक, दूध मिलावट विरोधी अभियान की सराहना

Ambernath, Maharashtra:बदलापुरात तुकाराम मुंडेंच्या प्रतिमेला दुग्धाभिषेक दूध भेसळविरोधी कारवाईचे राष्ट्रवादी कार्यकर्त्यांकडून अनोखे कौतुक. अन्न आणि औषध प्रशासन आयुक्त असताना तुकाराम मुंडे यांनी दूध भेसळ आणि बनावट दूध रॅकेटविरुद्ध राज्यभर मोठी धडक मोहीम राबवली होती. या कारवाईत राज्यभरात शेकडो छापे टाकून कोट्यवधींचे भेसळयुक्त दूध जप्त करण्यात आले आणि अनेक गुन्हे दाखल झाले. त्यांच्या या कामगिरीचे आणि प्रामाणिक कार्यपद्धतीचे कौतुक करण्यासाठी बदलापूरातील राष्ट्रवादी काँग्रेस शरद पवार पक्षाच्या कार्यकर्त्यांनी एकत्र येऊन तुकाराम मुंडे यांच्या प्रतिमेला दुग्धाभिषेक घालून आनंदोत्सव साजरा केला होता. 'तुकाराम मुंडे यांच्यासारख्या कडक अधिकाऱ्यांची प्रशासनात गरज आहे,' अशी मागणी कार्यकर्त्यांनी केली
0
0
Report

थाना समाधान दिवस पर डीआईजी ने किया भिटौली थाने का निरीक्षण

Dipu RawatDipu RawatFollow13m ago
Partawal, Uttar Pradesh:महराजगंज। गोरखपुर परिक्षेत्र के डीआईजी एस. चन्नप्पा ने शनिवार को पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के साथ थाना समाधान दिवस पर भिटौली थाने का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय, महिला हेल्प डेस्क, मालखाना, शस्त्रागार, हवालात, बैरक व सीसीटीवी व्यवस्था का जायजा लेकर आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद आयोजित थाना समाधान दिवस में डीआईजी व एसपी ने जनसुनवाई कर शिकायतों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व व पुलिस विभाग को समन्वय के साथ भूमि व पारिवारिक विवादों का त्वरित समाधान करने तथा साइबर जागरूकता, प्रभावी बीट पुलिसिंग और बेहतर कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा।
0
0
Report

धमतरी में अवैध शराब बरामद, 53 पेटी के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

Dhamtari, Chhattisgarh:धमतरी जिले में अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अर्जुनी पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है..... मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर थाना प्रभारी अर्जुनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ग्राम धौराभाठा में दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है...... पुलिस ने घेराबंदी कर खिलानंद साहू उर्फ गोलू साहू और कमलेश साहू दोनों निवासी ग्राम धौराभाठा, को मौके से हिरासत में लिया..... तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 53 पेटी अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 2 लाख 23 हजार 680 बताई जा रही है...... दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना अर्जुनी में आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है...... वही पुलिस का कहना है यह कार्रवाई केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी..... अवैध शराब की सप्लाई चेन, परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है..... पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top