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हिरणपुर की आदिवासी महिला दुलारस किस्कू ने बतख पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनाईं
SPSohan Pramanik
Jan 08, 2026 09:24:01
Pakur, Jharkhand
सलग - महिला / 8 JAN एरिया – पाकुड़ रिपोटर – सोहन प्रमाणिक फॉर्मेट – PKG एंकर इंट्रो--पाकुड़-बतख पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं जिले के हिरणपुर की आदिवासी महिला दुलारस किस्कू...नववर्ष के अवसर पर 400 बतख बेचकर अर्जित की 2 लाख की आय... वीओ -1-पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत बेलडीहा गांव की आदिवासी महिला दुलारस किस्कू ने सखी मंडल से जुड़कर मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है... पारंपरिक कृषि पर निर्भर परिवार की सीमित आय को उन्होंने बतख पालन व्यवसाय के माध्यम से सशक्त आजीविका में बदल दिया... दुलारस किस्कू की सफलता उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं... उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, सखी मंडल का सहयोग और कठिन परिश्रम के बल पर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं... दुलारस किस्कू ने जेएसएलपीएस द्वारा संचालित मसीह सखी मंडल से जुड़कर आजीविका गतिविधियों का भरपूर लाभ उठाया... उन्होंने बताया कि इस सफलता में उन्हें अपने पति के साथ-साथ जेएसएलपीएस एवं प्रशासन का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ... वीओ -2-दुलारस किस्कू ने नवंबर माह में बतख के चूजों का पालन प्रारंभ किया और नववर्ष 2026 के अवसर पर 400 बतखों को 500 प्रति बतख की दर से बेचकर कुल 2,00,000 की आय अर्जित की...यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है...दुलारस किस्कू की सफलता की कहानी संघर्ष और निरंतर प्रयास की मिसाल है... उन्होंने मसीह सखी मंडल से जुड़कर ऋण के माध्यम से प्रारम्भ में 50 बतख, 50 मुर्गी एवं 2 बकरियों से व्यवसाय की शुरुआत की...शुरुआती दौर में विपणन और संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी... पहली खेप की बिक्री के बाद उन्होंने सखी मंडल से पुनः 20,000 का ऋण लेकर 500 बतखों का पालन प्रारंभ किया...शुरुआत में अस्थायी संरचना में व्यवसाय संचालित किया गया, परंतु आमदनी बढ़ने पर उन्होंने स्थायी तालाब का निर्माण कराया...इस पूरे सफर में उनके पति मनु बेसरा का भरपूर सहयोग मिला, जिससे व्यवसाय को निरंतर मजबूती मिली... वीओ -3-वर्तमान में दुलारस किस्कू 500 बतख, 400 मुर्गियों एवं देशी मुर्गियों का सफलताप्रवर्तक पालन कर रही हैं... बीते दिसंबर माह में मुर्गियों की बिक्री से उन्होंने 80,000 की अतिरिक्त आय अर्जित की...बतख पालन से प्राप्त आय का उपयोग वे अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने में कर रही हैं...उन्होंने पक्के मकान निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है तथा अपने बच्चों को अच्छे विद्यालय में शिक्षा दिला रही हैं...इसके साथ ही वे सखी मंडल के माध्यम से मछली पालन भी कर रही हैं, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो रहे हैं... बाइट -1-2-दुलारस किस्कू,लाभुक बाइट -3-कुंदन कापरी,बीपीएम,हिरनपुर, पाकुड़
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